जब-जब तू मेरे सामने आये…

विविध भारती पर गीतकार “अंजान” के जीवन-वृत्त पर एक कार्यक्रम आ रहा है जिसमे उनके पुत्र गीतकार “समीर” अपनी कुछ यादें श्रोताओं के सामने रख रहे हैं…अंजान ने वैसे तो कई बढिया-बढिया गीत लिखे हैं, जैसे “छूकर मेरे मन को.. (याराना)”, “ओ साथी से तेरे बिना भी क्या जीना (मुकद्दर का सिकन्दर)”, “मंजिलें अपनी जगह हैं रास्ते अपनी जगह. (शराबी)” आदि बहुत से… लेकिन उनका एक गीत जिसने मुझे हमेशा से बहुत प्रभावित किया है वह गीत बहुत कम सुनने में आता है..वह है फ़िल्म “श्याम तेरे कितने नाम” से.. गीत गाया है जसपाल सिंह ने और संगीत है रवीन्द्र जैन का और शायद इसे फ़िल्माया गया है सचिन-सारिका पर… इस गीत की खासियत है इसमें हिन्दी के शब्दों का अधिकतम उपयोग और पवित्रता लिये हुए मादकता.. जी हाँ चौंक गये ना.. मादकता भी पवित्र हो सकती है और अश्लील हुए बिना भी अपने मन की बात बेहद उत्तेजक शब्दों में कही जा सकती है, इस गीत में अन्जान जी ने यह साबित किया है…

जब-जब तू मेरे सामने आये
मन का संयम टूटा जाये (२)…
बिखरी अलकें, झुकी-झुकी पलकें
आँचल में ये रूप छुपाये
ऐसे आये छुई-मुई सी (२)
नजर से छू लूँ तो मुरझाये…
मन का संयम टूटा जाये
जब-जब तू मेरे सामने आये…

कंचन सा तन, कलियों सा मन
अंग-अंग अमृत छलकाये
जाता बचपन, आता यौवन
जाने कैसी प्यास जगाये..
मन का संयम टूटा जाये..
जब-जब तू मेरे सामने आये..

देखी आपने शब्दों की जादूगरी, वयःसन्धि के एक विशेष मोड पर खडे “युवक बनने की ओर अग्रसर” लड़के के मन में उठते तूफ़ान को कैसे अन्जान ने व्यक्त किया है और वे कहीं भी अश्लील नहीं लगे । “अलकें” शब्द का उपयोग हिन्दी फ़िल्मी गीतों में काफ़ी कम हुआ है, इसी प्रकार जो बात “आता यौवन” में है, वह “कमसिन” शब्द में नहीं, और मुझे लगता है कि आजकल के कई लोगों ने “छुई-मुई” का पौधा सिर्फ़ सुना ही होगा (मैने देखा और छुआ भी है), मतलब यह कि हिन्दी के कुछ “अलग हट के” शब्दों का उपयोग इस गीत में किया गया है, हो सकता है कि यह रवीन्द्र जैन या राजश्री वालों का आग्रह हो । मेरे विचार में इस गीत को “मादक” कहना ही उचित है, दिक्कत तब पैदा होती है, जब कथित आधुनिक शब्दावली उपयोगकर्ता “सेक्सी” शब्द का उपयोग करते हैं, मुझे “सेक्सी” शब्द से हमेशा असहजता महसूस होती है, क्योंकि आजकल शर्ट, जूते और यहाँ तक कि थप्पड भी “सेक्सी” होने लगे हैं, जबकि जूता या शर्ट कभी मादक नहीं हो सकते । एक बात गायक जसपाल सिंह के बारे में भी, उन्हें रवीन्द्र जैन ने ही “गीत गाता चल” में भी गवाया था, आजकल शैलेन्द्र सिंह की तरह वे भी गुमनामी में खो गये लगते हैं । इस गीत की लिंक (ऑडियो) मैने महाजाल पर ढूँढने की कोशिश की परन्तु नहीं मिली, यदि किसी भाई को मिले तो मुझे भेजें, ताकि सभी लोग इस मधुर गीत का आनन्द ले सकें ।

21 Comments

  1. sajeev sarathie said,

    May 11, 2007 at 10:21 am

    सुरेश जी , जानकारी के लिए धन्येवाद , यह गीत श्याद मैंने कभी सुना है, पर बहुत ज्यादा नही। अनजान और इन्दीवर साहेब जाने जाते रहे हैं शैलेश जी , और नीरज जी के बाद शुद्ध हिंदी शब्दों का इस्तेमाल कर गीत लिखने के लिए ….. ऐसी अनमोल जानकारियों का आगे भी इंतज़ार रहेगा …

  2. sajeev sarathie said,

    May 11, 2007 at 10:21 am

    सुरेश जी , जानकारी के लिए धन्येवाद , यह गीत श्याद मैंने कभी सुना है, पर बहुत ज्यादा नही। अनजान और इन्दीवर साहेब जाने जाते रहे हैं शैलेश जी , और नीरज जी के बाद शुद्ध हिंदी शब्दों का इस्तेमाल कर गीत लिखने के लिए ….. ऐसी अनमोल जानकारियों का आगे भी इंतज़ार रहेगा …

  3. May 11, 2007 at 10:21 am

    सुरेश जी , जानकारी के लिए धन्येवाद , यह गीत श्याद मैंने कभी सुना है, पर बहुत ज्यादा नही। अनजान और इन्दीवर साहेब जाने जाते रहे हैं शैलेश जी , और नीरज जी के बाद शुद्ध हिंदी शब्दों का इस्तेमाल कर गीत लिखने के लिए ….. ऐसी अनमोल जानकारियों का आगे भी इंतज़ार रहेगा …

  4. mamta said,

    May 11, 2007 at 10:38 am

    हिंदी फिल्म के गीतकार लोग भी अब ऐसी रचना कहां करते है? बहुत से लोग तो छुई-मुई का शायद मतलब भी ना जानते होंगे। (नाजुक, कोमल )

  5. mamta said,

    May 11, 2007 at 10:38 am

    हिंदी फिल्म के गीतकार लोग भी अब ऐसी रचना कहां करते है? बहुत से लोग तो छुई-मुई का शायद मतलब भी ना जानते होंगे। (नाजुक, कोमल )

  6. mamta said,

    May 11, 2007 at 10:38 am

    हिंदी फिल्म के गीतकार लोग भी अब ऐसी रचना कहां करते है? बहुत से लोग तो छुई-मुई का शायद मतलब भी ना जानते होंगे। (नाजुक, कोमल )

  7. Mired Mirage said,

    May 11, 2007 at 11:32 am

    मैंने भी यह गीत नहीं सुना था । पढ़कर अच्छा लगा ।
    घुघूती बासूती

  8. Mired Mirage said,

    May 11, 2007 at 11:32 am

    मैंने भी यह गीत नहीं सुना था । पढ़कर अच्छा लगा ।
    घुघूती बासूती

  9. Mired Mirage said,

    May 11, 2007 at 11:32 am

    मैंने भी यह गीत नहीं सुना था । पढ़कर अच्छा लगा ।घुघूती बासूती

  10. Udan Tashtari said,

    May 11, 2007 at 1:30 pm

    अच्छा लगा पढ़कर. बड़ी खुबसूरत पेशकश.

  11. Udan Tashtari said,

    May 11, 2007 at 1:30 pm

    अच्छा लगा पढ़कर. बड़ी खुबसूरत पेशकश.

  12. May 11, 2007 at 1:30 pm

    अच्छा लगा पढ़कर. बड़ी खुबसूरत पेशकश.

  13. yunus said,

    May 11, 2007 at 2:04 pm

    सुरेश भाई, गीतकार अनजान का वाकई अदभुत गीत उठाया है आपने ।
    समीर विविध भारती में पहले भी आए थे और उसी समय मैंने उनसे वादा ले लिया था कि अगली बार आप अपने पिता की गीत यात्रा की बात करने आयेंगे ।
    उन्‍होंने इस वादे को निभाया भी । मई के पूरे महीने विविध भारती के सरगम के सितारे कार्यक्रम में शनिवार शाम चार बजे ये इंटरव्यू प्रसारित किया जा रहा है ।
    यक़ीन मानिए, लगभग साढ़े तीन चार घंटे की इस नॉन‍स्‍टॉप रिकॉर्डिंग में ना तो समीर रूके, ना थके और न ही ऊबे । और ना ही मेरे किसी सवाल पर चकराये या आपत्ति व्‍यक्‍त की । आपको इसे सुनने में जितना आनंद आयेगा उससे हजार गुना आनंद मुझे आया है इस इंटरव्यू में । अनजान मेरे प्रिय गीतकार हैं । उनके कुछ गैर फिल्‍मी गीतों पर मैं जल्‍दी ही प्रकाश डालूंगा, जो शायद आपने सुने होंगे पर याद नहीं होंगे आप लोगों को ।
    एक से एक बातें बताईं उन्‍होंने । ज्‍यादातर प्रोग्राम में हैं । और कुछ जो नहीं आयेंगी वो मैं अपने किसी चिट्ठे में लिख दूंगा ।
    बहरहाल एक अच्‍छे गीत की चर्चा करने के लिये साधुवाद । ये गाना मैंने भी महाजाल पर काफी ढूंढा नहीं मिला । बहुत सारा इंतजार कीजिए मै ये गीत उपलब्‍ध करवाता हूं ।
    मंजूर है ।

  14. yunus said,

    May 11, 2007 at 2:04 pm

    सुरेश भाई, गीतकार अनजान का वाकई अदभुत गीत उठाया है आपने ।
    समीर विविध भारती में पहले भी आए थे और उसी समय मैंने उनसे वादा ले लिया था कि अगली बार आप अपने पिता की गीत यात्रा की बात करने आयेंगे ।
    उन्‍होंने इस वादे को निभाया भी । मई के पूरे महीने विविध भारती के सरगम के सितारे कार्यक्रम में शनिवार शाम चार बजे ये इंटरव्यू प्रसारित किया जा रहा है ।
    यक़ीन मानिए, लगभग साढ़े तीन चार घंटे की इस नॉन‍स्‍टॉप रिकॉर्डिंग में ना तो समीर रूके, ना थके और न ही ऊबे । और ना ही मेरे किसी सवाल पर चकराये या आपत्ति व्‍यक्‍त की । आपको इसे सुनने में जितना आनंद आयेगा उससे हजार गुना आनंद मुझे आया है इस इंटरव्यू में । अनजान मेरे प्रिय गीतकार हैं । उनके कुछ गैर फिल्‍मी गीतों पर मैं जल्‍दी ही प्रकाश डालूंगा, जो शायद आपने सुने होंगे पर याद नहीं होंगे आप लोगों को ।
    एक से एक बातें बताईं उन्‍होंने । ज्‍यादातर प्रोग्राम में हैं । और कुछ जो नहीं आयेंगी वो मैं अपने किसी चिट्ठे में लिख दूंगा ।
    बहरहाल एक अच्‍छे गीत की चर्चा करने के लिये साधुवाद । ये गाना मैंने भी महाजाल पर काफी ढूंढा नहीं मिला । बहुत सारा इंतजार कीजिए मै ये गीत उपलब्‍ध करवाता हूं ।
    मंजूर है ।

  15. yunus said,

    May 11, 2007 at 2:04 pm

    सुरेश भाई, गीतकार अनजान का वाकई अदभुत गीत उठाया है आपने । समीर विविध भारती में पहले भी आए थे और उसी समय मैंने उनसे वादा ले लिया था कि अगली बार आप अपने पिता की गीत यात्रा की बात करने आयेंगे । उन्‍होंने इस वादे को निभाया भी । मई के पूरे महीने विविध भारती के सरगम के सितारे कार्यक्रम में शनिवार शाम चार बजे ये इंटरव्यू प्रसारित किया जा रहा है । यक़ीन मानिए, लगभग साढ़े तीन चार घंटे की इस नॉन‍स्‍टॉप रिकॉर्डिंग में ना तो समीर रूके, ना थके और न ही ऊबे । और ना ही मेरे किसी सवाल पर चकराये या आपत्ति व्‍यक्‍त की । आपको इसे सुनने में जितना आनंद आयेगा उससे हजार गुना आनंद मुझे आया है इस इंटरव्यू में । अनजान मेरे प्रिय गीतकार हैं । उनके कुछ गैर फिल्‍मी गीतों पर मैं जल्‍दी ही प्रकाश डालूंगा, जो शायद आपने सुने होंगे पर याद नहीं होंगे आप लोगों को । एक से एक बातें बताईं उन्‍होंने । ज्‍यादातर प्रोग्राम में हैं । और कुछ जो नहीं आयेंगी वो मैं अपने किसी चिट्ठे में लिख दूंगा । बहरहाल एक अच्‍छे गीत की चर्चा करने के लिये साधुवाद । ये गाना मैंने भी महाजाल पर काफी ढूंढा नहीं मिला । बहुत सारा इंतजार कीजिए मै ये गीत उपलब्‍ध करवाता हूं । मंजूर है ।

  16. अरुण said,

    May 11, 2007 at 2:31 pm

    भाई ये मेरा प्रिय गीत है थी कॊइ अब नाम तो नही ले सकता न पर उसे देख कर गाता जरूर था सचिन पर फ़िल्माया ये गीत दिल को छु जाता है भगवान से यही दुआ कर रहा हू आप को ये बिमारी लगी रहे और आप हमे इसी तरह रेशम से छू छू कर (भाई अपनी बात कहने के लिये शब्द नही मिल रहे समझ लो ना)भावनाओ के सागर मे गोते लगवाते रहे

  17. अरुण said,

    May 11, 2007 at 2:31 pm

    भाई ये मेरा प्रिय गीत है थी कॊइ अब नाम तो नही ले सकता न पर उसे देख कर गाता जरूर था सचिन पर फ़िल्माया ये गीत दिल को छु जाता है भगवान से यही दुआ कर रहा हू आप को ये बिमारी लगी रहे और आप हमे इसी तरह रेशम से छू छू कर (भाई अपनी बात कहने के लिये शब्द नही मिल रहे समझ लो ना)भावनाओ के सागर मे गोते लगवाते रहे

  18. अरुण said,

    May 11, 2007 at 2:31 pm

    भाई ये मेरा प्रिय गीत है थी कॊइ अब नाम तो नही ले सकता न पर उसे देख कर गाता जरूर था सचिन पर फ़िल्माया ये गीत दिल को छु जाता है भगवान से यही दुआ कर रहा हू आप को ये बिमारी लगी रहे और आप हमे इसी तरह रेशम से छू छू कर (भाई अपनी बात कहने के लिये शब्द नही मिल रहे समझ लो ना)भावनाओ के सागर मे गोते लगवाते रहे

  19. अतुल शर्मा said,

    May 12, 2007 at 9:28 am

    ये गीत मेरे बचपन में मैंने बहुत सुना है परंतु आज आपने जो प्रस्तुति दी है तो इस गीत का रस ही अनूठा हो गया है।

  20. अतुल शर्मा said,

    May 12, 2007 at 9:28 am

    ये गीत मेरे बचपन में मैंने बहुत सुना है परंतु आज आपने जो प्रस्तुति दी है तो इस गीत का रस ही अनूठा हो गया है।

  21. May 12, 2007 at 9:28 am

    ये गीत मेरे बचपन में मैंने बहुत सुना है परंतु आज आपने जो प्रस्तुति दी है तो इस गीत का रस ही अनूठा हो गया है।


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