है "चीट" जहाँ की रीत सदा…

गीतों पर लिखते-लिखते अचानक मन में पैरोडी का ख्याल आया और यह ब्लॉग लिखने की सूझी… आदरणीय मनोजकुमार और गीतकार (शायद इन्दीवर) से माफ़ी के साथ यह कुछ पंक्तियाँ पेश हैं… यह गीत लगभग तीस वर्ष पहले लिखा गया था, लेकिन यह पैरोडी आज के हालात बयाँ करती है….

है “चीट” जहाँ की रीत सदा
मैं गीत वहाँ के गाता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ “इंडिया” की बात सुनाता हूँ…

काले-गोरे का भेद नहीं हर जेब से हमारा नाता है
कुछ और ना आता हो हमको हमें रिश्वत लेना आता है…
जिसे मान चुकी सारी दुनिया, मैं बात वही दोहराता हूँ…
भारत का रहने वाला हूँ “इंडिया” की बात सुनाता हूँ…

जीते हों किसी ने देश तो क्या, “कंधार-मसूद” तो भ्राता हैं
यहाँ हर्षद अब तो है नर में, नारी मे अब तो “एकता” है..
इतने “रावण” हैं लोग यहाँ… मैं नित-नित धोखे खाता हूँ..
भारत का रहने वाला हूँ “इंडिया” की बात सुनाता हूँ…

इतनी ममता, नदियों को भी जहाँ नाला मिलकर बनाते हैं
इतना आदर ढोर तो क्या नेता भी पूजे जाते हैं..
इस धरती पे मैने जनम लिया… ये सोच के मैं घबराता हूँ..
भारत का रहने वाला हूँ “इंडिया” की बात सुनाता हूँ…
—————————

अब कुछ तुकबन्दियाँ –

बुश (ब्लेयर से) – ऐ..क्या बोलती तू
ब्लेयर – ऐ.. क्या मैं बोलूँ..
बुश – सुन
ब्लेयर – सुना
बुश – आती क्या बगदाद को
ब्लेयर – क्या करूँ आ के मैं बगदाद को
बुश – बम गिरायेंगे, मिसाइल फ़ोडेंगे, हत्या करेंगे और क्या…
—————-
मोहम्मद अत्ता –
ओ मै निकला जहाज ले के
रस्ते में न्यूयॉर्क आया मैं उत्थे टावर तोड आया..
रब जाने कब गुजरा वाशिंगटन, कब जाने पेंटागन आया
मैं उत्थे जहाज फ़ोड़ आया.. ओ मै निकला जहाज ले के…
—————-

24 Comments

  1. संजय बेंगाणी said,

    May 16, 2007 at 1:19 pm

    🙂 🙂

  2. संजय बेंगाणी said,

    May 16, 2007 at 1:19 pm

    🙂 🙂

  3. May 16, 2007 at 1:19 pm

    🙂 🙂

  4. अरुण said,

    May 16, 2007 at 1:46 pm

    वाह भाई बहुत बढिया

  5. अरुण said,

    May 16, 2007 at 1:46 pm

    वाह भाई बहुत बढिया

  6. अरुण said,

    May 16, 2007 at 1:46 pm

    वाह भाई बहुत बढिया

  7. परमजीत बाली said,

    May 16, 2007 at 2:18 pm

    भाई जी, आपने ये पेरोडी नही एक सत्य गीत को पैदा कर दिया है।बातों-बातों मे सच का दर्शन करा दिया। बधाई।

  8. sajeev sarathie said,

    May 16, 2007 at 2:18 pm

    आज के मौहौल मे यह गीत अधिक सटीक जान पड़ता है …. अच्छा है …

  9. परमजीत बाली said,

    May 16, 2007 at 2:18 pm

    भाई जी, आपने ये पेरोडी नही एक सत्य गीत को पैदा कर दिया है।बातों-बातों मे सच का दर्शन करा दिया। बधाई।

  10. sajeev sarathie said,

    May 16, 2007 at 2:18 pm

    आज के मौहौल मे यह गीत अधिक सटीक जान पड़ता है …. अच्छा है …

  11. May 16, 2007 at 2:18 pm

    भाई जी, आपने ये पेरोडी नही एक सत्य गीत को पैदा कर दिया है।बातों-बातों मे सच का दर्शन करा दिया। बधाई।

  12. May 16, 2007 at 2:18 pm

    आज के मौहौल मे यह गीत अधिक सटीक जान पड़ता है …. अच्छा है …

  13. धुरविरोधी said,

    May 16, 2007 at 2:25 pm

    सुरेश जी; आप जो गीतों की मधुरता सुना रहे थे, उसे क्यों लुप्त कर रहे हैं?
    ये तुकबंदिया मंच मसान या लाफ्टर धसान वाले लोगों के लिये ही रहने दें.

    आप खुद ही तू चंदा में चांदनी या हर तरफ बस यही अफसाने से इस की तुलना कीजिये?

  14. धुरविरोधी said,

    May 16, 2007 at 2:25 pm

    सुरेश जी; आप जो गीतों की मधुरता सुना रहे थे, उसे क्यों लुप्त कर रहे हैं?
    ये तुकबंदिया मंच मसान या लाफ्टर धसान वाले लोगों के लिये ही रहने दें.

    आप खुद ही तू चंदा में चांदनी या हर तरफ बस यही अफसाने से इस की तुलना कीजिये?

  15. धुरविरोधी said,

    May 16, 2007 at 2:25 pm

    सुरेश जी; आप जो गीतों की मधुरता सुना रहे थे, उसे क्यों लुप्त कर रहे हैं?ये तुकबंदिया मंच मसान या लाफ्टर धसान वाले लोगों के लिये ही रहने दें.आप खुद ही तू चंदा में चांदनी या हर तरफ बस यही अफसाने से इस की तुलना कीजिये?

  16. Udan Tashtari said,

    May 16, 2007 at 2:52 pm

    सही है… 🙂 🙂

  17. Udan Tashtari said,

    May 16, 2007 at 2:52 pm

    सही है… 🙂 🙂

  18. May 16, 2007 at 2:52 pm

    सही है… 🙂 🙂

  19. Divine India said,

    May 16, 2007 at 3:33 pm

    लगे रहे भाई… 🙂 🙂

  20. Divine India said,

    May 16, 2007 at 3:33 pm

    लगे रहे भाई… 🙂 🙂

  21. Divine India said,

    May 16, 2007 at 3:33 pm

    लगे रहे भाई… 🙂 🙂

  22. ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said,

    May 18, 2007 at 11:02 am

    सुरेश जी आपका ब्लॉग देख लगा कि आपके व्यक्तित्व में कई रंग हैं. बड़ा अच्छा लगा.

  23. ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said,

    May 18, 2007 at 11:02 am

    सुरेश जी आपका ब्लॉग देख लगा कि आपके व्यक्तित्व में कई रंग हैं. बड़ा अच्छा लगा.

  24. May 18, 2007 at 11:02 am

    सुरेश जी आपका ब्लॉग देख लगा कि आपके व्यक्तित्व में कई रंग हैं. बड़ा अच्छा लगा.


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