ताज : दूध का दूध पानी का पानी करें !

(१) प्रोफ़ेसर पी.एन.ओक की मूल मराठी पुस्तक (जो कि इन्दिरा गाँधी द्वारा प्रतिबन्धित कर दी गई थी) की PDF फ़ाईल यहाँ क्लिक करके प्राप्त की जा सकती है (साईज 25 MB है) ।
(२) प्रोफ़ेसर पीएन ओक के सवालों का हिन्दी अनुवाद यहाँ पर उपलब्ध है ।
(३) लाल किले और ताजमहल सम्बन्धी तस्वीरों वाले प्रमाण स्टीफ़न नैप की साईट पर (यहाँ क्लिक करें) उपलब्ध हैं ।
ताजमहल पर जो देश भर में नौटंकी चल रही है वह एक अलग विषय है । ताजमहल सच में ताजमहल है या “तेजोमहालय” नामक एक शिव मन्दिर, इस बात पर भी काफ़ी बहस हो चुकी है । इस मुद्दे को लेकर सरकार, वामपंथियों और धर्मनिरपेक्षतावादियों (?) से कुछ प्रश्न हैं –
(अ) ताजमहल के पुरातात्विक निर्माणों का C-14 (कार्बन-१४) टेस्ट करने में क्या आपत्ति है ? क्यों नहीं केन्द्र सरकार या ASI किसी विशेषज्ञ लेबोरेटरी (देशी और विदेशी दोनों) से ताज के कुछ हिस्सों का कार्बन-१४ टेस्ट करवाती ?
(ब) ताजमहल में जो कमरे वर्षों से बन्द हैं, उन्हें किसी निष्पक्ष संस्था के साये में खोलकर देखने में क्या आपत्ति है ? कुछ कमरों को तो दीवार में चुनवा दिया गया है, उन्हें खोलने में क्या आपत्ति है ?
पीएन ओक एवं एक निष्पक्ष व्यक्ति स्टीफ़न नैप के शोधों को मात्र बकवास कहकर खारिज नहीं किया जा सकता । ताजमहल की कुछ मंजिलें सन १९६० तक खुली थीं लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद उसे बन्द कर दिया गया, उसे पुनः खोलने के लिये हमारे धर्मनिरपेक्ष बन्धु क्यों प्रयत्न नहीं करते ? दरअसल इन लोगों के मन में यह आशंका है कि कहीं उन बन्द कमरों से कोई हिन्दू मूर्तियाँ निकल आईं या कोई शिलालेख निकल आया जो यह साबित करता हो कि ताजमहल का निर्माण उसके बताये हुए वर्ष से कहीं पहले हुआ था, तो सरकार के लिये एक नया सिरदर्द पैदा हो जायेगा और संघ परिवार को बैठे-बिठाये एक मुद्दा मिल जायेगा, लेकिन सिर्फ़ इस आशंका के चलते इतिहास के एक महत्वपूर्ण पन्ने को जनता से दूर नहीं रखा जा सकता । जब डायनासोर के अंडे की उम्र पता की जा सकती है तो फ़िर ताज क्या चीज है ? और हमारे महान इतिहासकारों के पास उस जमाने के कई कागजात और दस्तावेज मौजूद हैं, फ़िर जरा सा शोध करके ताजमहल को बनवाने के लिये शाहजहाँ के दरबार का हुक्मनामा, उसकी रसीदें इत्यादि, सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत करें, इससे दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा और “तेजोमहालय” के समर्थकों का मुँह हमेशा के लिये बन्द हो जायेगा । ऊपर उल्लेखित मात्र दोनों कृत्यों से ही असलियत का पता चल सकता है फ़िर केन्द्र सरकार ये दोनो काम क्यों नहीं करवाती ?

22 Comments

  1. Anonymous said,

    June 14, 2007 at 7:38 am

    भाइ कुतुब मीनार की सीढीया ही एक आधी तुडवा कर देख लो,कितनी मूर्तिया निकलती है

  2. Anonymous said,

    June 14, 2007 at 7:38 am

    भाइ कुतुब मीनार की सीढीया ही एक आधी तुडवा कर देख लो,कितनी मूर्तिया निकलती है

  3. Anonymous said,

    June 14, 2007 at 7:38 am

    भाइ कुतुब मीनार की सीढीया ही एक आधी तुडवा कर देख लो,कितनी मूर्तिया निकलती है

  4. अरुण said,

    June 14, 2007 at 7:42 am

    भाइ काहे फ़िर से सच की खोज करना चाहते हो
    इन्हे सच भाता नही

  5. अरुण said,

    June 14, 2007 at 7:42 am

    भाइ काहे फ़िर से सच की खोज करना चाहते हो
    इन्हे सच भाता नही

  6. अरुण said,

    June 14, 2007 at 7:42 am

    भाइ काहे फ़िर से सच की खोज करना चाहते होइन्हे सच भाता नही

  7. अतुल शर्मा said,

    June 14, 2007 at 9:19 am

    मैंने बचपन से सुना है कि सच बहुत कड़वा होता है।

  8. अतुल शर्मा said,

    June 14, 2007 at 9:19 am

    मैंने बचपन से सुना है कि सच बहुत कड़वा होता है।

  9. June 14, 2007 at 9:19 am

    मैंने बचपन से सुना है कि सच बहुत कड़वा होता है।

  10. संजय बेंगाणी said,

    June 14, 2007 at 11:01 am

    गड़े मुर्दे उखाड़ोगे तो सत्य बाहर निकलेगा. किसमें है इतनी ताकत जो सत्य से रूबरू हो सके?

  11. संजय बेंगाणी said,

    June 14, 2007 at 11:01 am

    गड़े मुर्दे उखाड़ोगे तो सत्य बाहर निकलेगा. किसमें है इतनी ताकत जो सत्य से रूबरू हो सके?

  12. June 14, 2007 at 11:01 am

    गड़े मुर्दे उखाड़ोगे तो सत्य बाहर निकलेगा. किसमें है इतनी ताकत जो सत्य से रूबरू हो सके?

  13. दीपक भारतदीप said,

    June 14, 2007 at 12:27 pm

    सुरेशजी, भ्रम की जगह सत्य स्थापित करने का में समर्थक हूँ-दीपक भारतदीप

  14. दीपक भारतदीप said,

    June 14, 2007 at 12:27 pm

    सुरेशजी, भ्रम की जगह सत्य स्थापित करने का में समर्थक हूँ-दीपक भारतदीप

  15. June 14, 2007 at 12:27 pm

    सुरेशजी, भ्रम की जगह सत्य स्थापित करने का में समर्थक हूँ-दीपक भारतदीप

  16. Pratik said,

    June 14, 2007 at 2:49 pm

    इस विषय पर मैं भी एक पोस्ट लिख चुका हूँ – ताजमहल है एक शिव मन्दिर

  17. Pratik said,

    June 14, 2007 at 2:49 pm

    इस विषय पर मैं भी एक पोस्ट लिख चुका हूँ – ताजमहल है एक शिव मन्दिर

  18. Pratik said,

    June 14, 2007 at 2:49 pm

    इस विषय पर मैं भी एक पोस्ट लिख चुका हूँ – ताजमहल है एक शिव मन्दिर।

  19. Sudeep Sakalle said,

    June 18, 2007 at 10:00 am

    सर्व प्रथम तो सुरेश चिपलूनकर जी को यह लेख लिखने के लिये मै कोटिशह्: धन्यवाद देता हुं

    वैसे समझ बिलकुल आपनी ही होना चाहिये , पर आंख बंद कर के तत्थ्यो से दूर नही हुआ जाता मित्र काकेश (आपने ऊपर टिप्पणी करी है इस् लिये आप को सम्भोधित करा है )

    सही और प्रमाणिक जानकारी होना मानवता के विकास मे ही योगदान देगी. यही सोच के हम लोगो ने अपने ब्लोग (www.kanhiaya.com/infovinity ) पर ताज्-महल या (तेजोमहालय)के बारे मे श्री ओक के लेख प्रकाशित करे है, हमे ताज पर अभी भी उतना ही गर्व है जितना ताज के तेजोमहालय होने पर होता ,

    ताज को 7-wonders मे शामिल करवाने के लिये एकरसता से वोट करे , बाद मे देखा जायेगा कि ये शाहजंहा ने बनवाया या किसी हिन्दु शासक ने , वैसे भी अगर ताज जगत प्रस्सिध हो जाता है तो सत्य से आवरण हटने मै ज्यादा समय नही लगेगा. हमारे यहां की परंपरा रही है कि हम लोग चीख चीख के कुछ भी बोल ले पर किसी के कान मे जुं भी नही रेन्गन्गी , वही अगर यही बात कोई विदेशी बोलेगा तो वोह हडकंप मचा देगी, इस लिये मेरा सभी से नम्र निवेदन है कि आप लोग भी आपने ताज आपने तेजोमहालय के लिये पुरज़ोर समर्थन दे और लोगो को भी प्रेरित करे .

    धन्यावाद
    सुदीप साकल्ले. (Sudeep Sakalle)
    ब्लोग : http://www.kanhaiya.com/infovinity
    लंदन (१८/०६/२००७)(London-18/06/2007)

  20. Sudeep Sakalle said,

    June 18, 2007 at 10:00 am

    सर्व प्रथम तो सुरेश चिपलूनकर जी को यह लेख लिखने के लिये मै कोटिशह्: धन्यवाद देता हुं

    वैसे समझ बिलकुल आपनी ही होना चाहिये , पर आंख बंद कर के तत्थ्यो से दूर नही हुआ जाता मित्र काकेश (आपने ऊपर टिप्पणी करी है इस् लिये आप को सम्भोधित करा है )

    सही और प्रमाणिक जानकारी होना मानवता के विकास मे ही योगदान देगी. यही सोच के हम लोगो ने अपने ब्लोग (www.kanhiaya.com/infovinity ) पर ताज्-महल या (तेजोमहालय)के बारे मे श्री ओक के लेख प्रकाशित करे है, हमे ताज पर अभी भी उतना ही गर्व है जितना ताज के तेजोमहालय होने पर होता ,

    ताज को 7-wonders मे शामिल करवाने के लिये एकरसता से वोट करे , बाद मे देखा जायेगा कि ये शाहजंहा ने बनवाया या किसी हिन्दु शासक ने , वैसे भी अगर ताज जगत प्रस्सिध हो जाता है तो सत्य से आवरण हटने मै ज्यादा समय नही लगेगा. हमारे यहां की परंपरा रही है कि हम लोग चीख चीख के कुछ भी बोल ले पर किसी के कान मे जुं भी नही रेन्गन्गी , वही अगर यही बात कोई विदेशी बोलेगा तो वोह हडकंप मचा देगी, इस लिये मेरा सभी से नम्र निवेदन है कि आप लोग भी आपने ताज आपने तेजोमहालय के लिये पुरज़ोर समर्थन दे और लोगो को भी प्रेरित करे .

    धन्यावाद
    सुदीप साकल्ले. (Sudeep Sakalle)
    ब्लोग : http://www.kanhaiya.com/infovinity
    लंदन (१८/०६/२००७)(London-18/06/2007)

  21. June 18, 2007 at 10:00 am

    सर्व प्रथम तो सुरेश चिपलूनकर जी को यह लेख लिखने के लिये मै कोटिशह्: धन्यवाद देता हुंवैसे समझ बिलकुल आपनी ही होना चाहिये , पर आंख बंद कर के तत्थ्यो से दूर नही हुआ जाता मित्र काकेश (आपने ऊपर टिप्पणी करी है इस् लिये आप को सम्भोधित करा है )सही और प्रमाणिक जानकारी होना मानवता के विकास मे ही योगदान देगी. यही सोच के हम लोगो ने अपने ब्लोग (www.kanhiaya.com/infovinity ) पर ताज्-महल या (तेजोमहालय)के बारे मे श्री ओक के लेख प्रकाशित करे है, हमे ताज पर अभी भी उतना ही गर्व है जितना ताज के तेजोमहालय होने पर होता , ताज को 7-wonders मे शामिल करवाने के लिये एकरसता से वोट करे , बाद मे देखा जायेगा कि ये शाहजंहा ने बनवाया या किसी हिन्दु शासक ने , वैसे भी अगर ताज जगत प्रस्सिध हो जाता है तो सत्य से आवरण हटने मै ज्यादा समय नही लगेगा. हमारे यहां की परंपरा रही है कि हम लोग चीख चीख के कुछ भी बोल ले पर किसी के कान मे जुं भी नही रेन्गन्गी , वही अगर यही बात कोई विदेशी बोलेगा तो वोह हडकंप मचा देगी, इस लिये मेरा सभी से नम्र निवेदन है कि आप लोग भी आपने ताज आपने तेजोमहालय के लिये पुरज़ोर समर्थन दे और लोगो को भी प्रेरित करे . धन्यावाद सुदीप साकल्ले. (Sudeep Sakalle)ब्लोग : http://www.kanhaiya.com/infovinityलंदन (१८/०६/२००७)(London-18/06/2007)

  22. "Ishika Gupta" said,

    August 3, 2010 at 6:32 am

    ye baat to such hai ki such ka parda faash hona hi chahiye,such sabke saamne aana hi chaiye to mai yahi kahugi ki sarkaar ko es baat par kadam utana hi chahiye usko karwaye karwani chahiye or taz mai jo band kamre hai unko khulwaker jaach karwani chahiye.tabhi such sabke saamne aayega.

    Regards,
    “Ishika Gupta”


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: