"क्रेन बेदी" हार गईं ?

एक बार फ़िर से हमारी “व्यवस्था” एक होनहार और काबिल व्यक्ति के गले की फ़ाँस बन गई, टीवी पर किरण बेदी की आँखों में आँसू देखकर किसी भी देशभक्त व्यक्ति का खून खौलना स्वाभाविक है । (जिन लोगों को जानकारी नहीं है उनके लिये – किरण बेदी से दो साल जूनियर व्यक्ति को दिल्ली का पुलिस कमिश्नर बना दिया गया है, जबकि उस पर गंभीर किस्म के आरोप हैं) हमारी भ्रष्ट व्यवस्था के आगे “क्रेन बेदी” के नाम से मशहूर एक फ़ौलादी महिला को जिस कदर दरकिनार कर दिया गया, उससे एक बार फ़िर स्पष्ट हो गया है कि इटली की महिला का “महिला सशक्तिकरण” का दावा कितना खोखला है । “त्याग”, “बलिदान” और “संस्कृति” की दुहाई देने वाली एक औरत दिल्ली में सत्ता की केन्द्र है, एक और औरत उसकी रबर स्टाम्प है, एक गैर-लोकसभाई (गैर-जनाधारी)उसका “बबुआ” बना हुआ है तथा एक और महिला (शीला दीक्षित) की नाक के नीचे ये सारा खेल खेला जा रहा है, इससे बडी़ शर्म की बात इस देश के लिये नहीं हो सकती । शायद किरण बेदी का अपराध यह रहा कि वे सिर्फ़ “ईमानदारी” से काम करने में यकीन रखती हैं, उन्हें अपने अफ़सरों और मातहतों को दारू-पार्टियाँ देकर “खुश” करना नहीं आता । वे पुस्तकें लिखती हैं, कैदियों को सुधारती हैं, अनुशासन बनाती हैं, लेकिन वे यह साफ़-साफ़ भूल जाती हैं कि हमारे “कीचड़ से सने” नेताओं के लिये यह बात मायने नहीं रखती, उन्हें तो चाहिये “जी-हुजूर” करने वाले “नपुंसक और बिना रीढ़ वाले” अधिकारी, जो “खाओ और खाने दो” में यकीन रखते हैं । एक तरफ़ कलाम साहब कल ही 2020 तक देश को महाशक्ति बनाने के लिये सपने देखने की बात फ़रमा कर, सिर्फ़ दो सूटकेस लेकर राष्ट्रपति भवन से निकल गये, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट को दिल्ली के बंगलों पर काबिज नेताओं और उनके लगुए-भगुओं को निकाल बाहर करने में पसीना आ रहा है, और ये भी मत भूलिये कि “महिला सशक्तिकरण” तो हुआ है, क्योंकि मोनिका बेदी छूट गई ना ! किरण बेदी की नाक भले ही रगड़ दी गई हो । क्या देश है और क्या घटिया व्यवस्था है ?
आईये हम सब मिलकर जोर से कहें – “इस व्यवस्था की तो %&^$*&&%**$% (इन स्टार युक्त चिन्हों के स्थान पर अपने-अपने गुस्से, अपनी-अपनी बेबसी और अपने-अपने संस्कारों के मुताबिक शब्द भर लें) और स्वतंत्रता दिवस नजदीक आ रहा है… झूठा ही सही “मेरा भारत महान” कहने में किसी का क्या जाता है ?

16 Comments

  1. जोगलिखी संजय पटेल की said,

    July 27, 2007 at 4:30 am

    सुरेश भाई ..बरसों पहले किरन जी को इंटरव्यू करने का सौभाग्य मिला था तब उन्होंने कहा था कि इंसाफ़ सड़क के किनारे पड़ा आंसू बहाता रहता है हमारे देश में ..बस यही पंक्ति आज इस बेबाक महिला को समर्पित की जा सकती है. व्यवस्था के नाम पर जो दोगलापन देखने में आ रहा है उससे नुकसान तो देश का ही हो रहा है न ? मैं तो सोनियाजी से अपेक्षा कर रहा था कि वे किरन बेदी का नाम तो राष्ट्रपति पद के सुझातीं लेकिन सत्ताधीशों की आसपास ऐसी चौकड़ियाँ मौजूद है जिनके अपने स्वार्थ,लालसाएँ और महत्वाकाक्षाएँ हैं.और हम ब्लाँगर हों या मीडियाकर्मी इन कुचक्रों की थाह में जा ही नहीं पाते…दुर्भाग्य देखिये आज आप हम किरन बेदी जैसी प्रतिभासम्पन्न और क़ाबिल आँफ़िसर के साथ नाइंसाफ़ी होने के बाद क़लमघिस्सी कर पा रहे हैं ..किरनजी से भी उम्मीद करना चाहिये कि मैडम अन्याय को सूंघना सीखिये…और सोचिये एक पुलिस आँफ़िसर के साथ ये व्यवहार हो रहा है तो आम आदमी की क्या औक़ात के वह न्याय की गुहार लगाए..कहाँ लगाए…किसे लगाए..मुझे नहीं लगता कि किरनजी के मामले में कोई जनयाचिका भी स्वीकार्य होगी.

  2. जोगलिखी संजय पटेल की said,

    July 27, 2007 at 4:30 am

    सुरेश भाई ..बरसों पहले किरन जी को इंटरव्यू करने का सौभाग्य मिला था तब उन्होंने कहा था कि इंसाफ़ सड़क के किनारे पड़ा आंसू बहाता रहता है हमारे देश में ..बस यही पंक्ति आज इस बेबाक महिला को समर्पित की जा सकती है. व्यवस्था के नाम पर जो दोगलापन देखने में आ रहा है उससे नुकसान तो देश का ही हो रहा है न ? मैं तो सोनियाजी से अपेक्षा कर रहा था कि वे किरन बेदी का नाम तो राष्ट्रपति पद के सुझातीं लेकिन सत्ताधीशों की आसपास ऐसी चौकड़ियाँ मौजूद है जिनके अपने स्वार्थ,लालसाएँ और महत्वाकाक्षाएँ हैं.और हम ब्लाँगर हों या मीडियाकर्मी इन कुचक्रों की थाह में जा ही नहीं पाते…दुर्भाग्य देखिये आज आप हम किरन बेदी जैसी प्रतिभासम्पन्न और क़ाबिल आँफ़िसर के साथ नाइंसाफ़ी होने के बाद क़लमघिस्सी कर पा रहे हैं ..किरनजी से भी उम्मीद करना चाहिये कि मैडम अन्याय को सूंघना सीखिये…और सोचिये एक पुलिस आँफ़िसर के साथ ये व्यवहार हो रहा है तो आम आदमी की क्या औक़ात के वह न्याय की गुहार लगाए..कहाँ लगाए…किसे लगाए..मुझे नहीं लगता कि किरनजी के मामले में कोई जनयाचिका भी स्वीकार्य होगी.

  3. July 27, 2007 at 4:30 am

    सुरेश भाई ..बरसों पहले किरन जी को इंटरव्यू करने का सौभाग्य मिला था तब उन्होंने कहा था कि इंसाफ़ सड़क के किनारे पड़ा आंसू बहाता रहता है हमारे देश में ..बस यही पंक्ति आज इस बेबाक महिला को समर्पित की जा सकती है. व्यवस्था के नाम पर जो दोगलापन देखने में आ रहा है उससे नुकसान तो देश का ही हो रहा है न ? मैं तो सोनियाजी से अपेक्षा कर रहा था कि वे किरन बेदी का नाम तो राष्ट्रपति पद के सुझातीं लेकिन सत्ताधीशों की आसपास ऐसी चौकड़ियाँ मौजूद है जिनके अपने स्वार्थ,लालसाएँ और महत्वाकाक्षाएँ हैं.और हम ब्लाँगर हों या मीडियाकर्मी इन कुचक्रों की थाह में जा ही नहीं पाते…दुर्भाग्य देखिये आज आप हम किरन बेदी जैसी प्रतिभासम्पन्न और क़ाबिल आँफ़िसर के साथ नाइंसाफ़ी होने के बाद क़लमघिस्सी कर पा रहे हैं ..किरनजी से भी उम्मीद करना चाहिये कि मैडम अन्याय को सूंघना सीखिये…और सोचिये एक पुलिस आँफ़िसर के साथ ये व्यवहार हो रहा है तो आम आदमी की क्या औक़ात के वह न्याय की गुहार लगाए..कहाँ लगाए…किसे लगाए..मुझे नहीं लगता कि किरनजी के मामले में कोई जनयाचिका भी स्वीकार्य होगी.

  4. Gyandutt Pandey said,

    July 27, 2007 at 5:56 am

    किरण बेदी तो विज्ञापित व्यक्ति हैं. अन्यथा अनेक काबिल लोगों के साथ होता है. जय पराजय जीवन का हिस्सा है!

  5. Gyandutt Pandey said,

    July 27, 2007 at 5:56 am

    किरण बेदी तो विज्ञापित व्यक्ति हैं. अन्यथा अनेक काबिल लोगों के साथ होता है. जय पराजय जीवन का हिस्सा है!

  6. July 27, 2007 at 5:56 am

    किरण बेदी तो विज्ञापित व्यक्ति हैं. अन्यथा अनेक काबिल लोगों के साथ होता है. जय पराजय जीवन का हिस्सा है!

  7. shanoo said,

    July 27, 2007 at 6:01 am

    बात बिल्कुल पते की है किरन बेदी के साथ जो हुआ न जाने कितने लोगो के साथ एसा होता आया है जब योग्य उम्मीदवार की कुर्सी पर अयोग्य को चुन लिया जाता है,मगर इस सब को हम कब तक बर्दश्त करेंगे…किरन बेदी वो हस्ती है जो आम जनता की भलाई के लिये हर कदम उठाया करती थी…उसने कभी नेताओ की चमचागीरी नही की इसी का नतीजा है कि आज वो योग्य होते हुए भी कमिश्नर की पोस्ट के लिये नही चुनी गई…हमे जल्द ही कोई भरसक प्रयास करना चाहिये…

  8. shanoo said,

    July 27, 2007 at 6:01 am

    बात बिल्कुल पते की है किरन बेदी के साथ जो हुआ न जाने कितने लोगो के साथ एसा होता आया है जब योग्य उम्मीदवार की कुर्सी पर अयोग्य को चुन लिया जाता है,मगर इस सब को हम कब तक बर्दश्त करेंगे…किरन बेदी वो हस्ती है जो आम जनता की भलाई के लिये हर कदम उठाया करती थी…उसने कभी नेताओ की चमचागीरी नही की इसी का नतीजा है कि आज वो योग्य होते हुए भी कमिश्नर की पोस्ट के लिये नही चुनी गई…हमे जल्द ही कोई भरसक प्रयास करना चाहिये…

  9. shanoo said,

    July 27, 2007 at 6:01 am

    बात बिल्कुल पते की है किरन बेदी के साथ जो हुआ न जाने कितने लोगो के साथ एसा होता आया है जब योग्य उम्मीदवार की कुर्सी पर अयोग्य को चुन लिया जाता है,मगर इस सब को हम कब तक बर्दश्त करेंगे…किरन बेदी वो हस्ती है जो आम जनता की भलाई के लिये हर कदम उठाया करती थी…उसने कभी नेताओ की चमचागीरी नही की इसी का नतीजा है कि आज वो योग्य होते हुए भी कमिश्नर की पोस्ट के लिये नही चुनी गई…हमे जल्द ही कोई भरसक प्रयास करना चाहिये…

  10. Shrish said,

    July 28, 2007 at 1:59 am

    इस भ्रष्ट व्यवस‌्था स‌े और क्या उम्मीद की जा स‌कती है। कहा भी है कि जब हर शाख पर बैठा हो उल्लू तो…

  11. Shrish said,

    July 28, 2007 at 1:59 am

    इस भ्रष्ट व्यवस‌्था स‌े और क्या उम्मीद की जा स‌कती है। कहा भी है कि जब हर शाख पर बैठा हो उल्लू तो…

  12. Shrish said,

    July 28, 2007 at 1:59 am

    इस भ्रष्ट व्यवस‌्था स‌े और क्या उम्मीद की जा स‌कती है। कहा भी है कि जब हर शाख पर बैठा हो उल्लू तो…

  13. Prakash Ghatpande said,

    July 29, 2007 at 6:40 pm

    Refer ” Carnage by Angels” by IPS officer shri Y.P.Sinh. Now VRS from dept
    who was investigation officer for UTI Ghotalaa

  14. Prakash Ghatpande said,

    July 29, 2007 at 6:40 pm

    Refer ” Carnage by Angels” by IPS officer shri Y.P.Sinh. Now VRS from dept
    who was investigation officer for UTI Ghotalaa

  15. July 29, 2007 at 6:40 pm

    Refer ” Carnage by Angels” by IPS officer shri Y.P.Sinh. Now VRS from deptwho was investigation officer for UTI Ghotalaa

  16. August 9, 2009 at 11:09 am

    बंधू, इन लोगों का सुशासन से कोई वास्ता नहीं है…कोंग्रेस के सदा यह रीत रही है कि अपनी राजनीति की दूकान चालू रखने के लिए किरन बेदी जैसे काबिल लोगों को हटा देते हैं. इनका एक ही नारा है: Peform & Perish. ओ एन जी सी के साहा साहेब के साथ भी कांग्रेस ने यही किया. टी.एन. शेषण भूला दी गए. ..तो गोपालस्वामी को परेशान करके सोनियाभाक्त चावला को बिठा दिया. के. पी. एस. गिल को भी हाशिये पर ला दिया. भ्रष्टाचार के खिलाफ हिम्मतवाले अफसर की किसे जरूरत है? न सरकार को न ही जनता को. रही बात वोट की तो वोट बैंक किस काम है…ईमानदारी के चहेते वोट देने जाते नहीं, और वोट बैंक को ईमानदारी, विकास जैसे मुद्दों से कोई सारोकार नहीं.


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