सोनिया गाँधी को आप कितना जानते हैं? (भाग-४)

Know Sonia Gandhi (Part-4)

गतांक (सोनिया…भाग-३) से आगे जारी…

राजीव से विवाह के बाद सोनिया और उनके इटालियन मित्रों को स्नैम प्रोगैती की ओट्टावियो क्वात्रोची से भारी-भरकम राशियाँ मिलीं, वह भारतीय कानूनों से बेखौफ़ होकर दलाली में रुपये कूटने लगा। कुछ ही वर्षों में माइनो परिवार जो गरीबी के भंवर में फ़ँसा था अचानक करोड़पति हो गया । लोकसभा के नयेनवेले सदस्य के रूप में मैंने 19 नवम्बर 1974 को संसद में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी से पूछा था कि “क्या आपकी बहू सोनिया गाँधी, जो कि अपने-आप को एक इंश्योरेंस एजेंट बताती हैं (वे खुद को ओरियंटल फ़ायर एंड इंश्योरेंस कम्पनी की एजेंट बताती थीं), प्रधानमंत्री आवास का पता उपयोग कर रही हैं?” जबकि यह अपराध है क्योंकि वे एक इटालियन नागरिक हैं (और यह विदेशी मुद्रा उल्लंघन) का मामला भी बनता है”, तब संसद में बहुत शोरगुल मचा, श्रीमती इन्दिरा गाँधी गुस्सा तो बहुत हुईं, लेकिन उनके सामने और कोई विकल्प नहीं था, इसलिये उन्होंने लिखित में यह बयान दिया कि “यह गलती से हो गया था और सोनिया ने इंश्योरेंस कम्पनी से इस्तीफ़ा दे दिया है” (मेरे प्रश्न पूछने के बाद), लेकिन सोनिया का भारतीय कानूनों को लतियाने और तोड़ने का यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। 1977 में जनता पार्टी सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय के जस्टिस ए.सी.गुप्ता के नेतृत्व में गठित आयोग ने जो रिपोर्ट सौंपी थी, उसके अनुसार “मारुति” कम्पनी (जो उस वक्त गाँधी परिवार की मिल्कियत था) ने “फ़ेरा कानूनों, कम्पनी कानूनों और विदेशी पंजीकरण कानून के कई गंभीर उल्लंघन किये”, लेकिन ना तो संजय गाँधी और ना ही सोनिया गाँधी के खिलाफ़ कभी भी कोई केस दर्ज हुआ, ना मुकदमा चला। हालांकि यह अभी भी किया जा सकता है, क्योंकि भारतीय कानूनों के मुताबिक “आर्थिक घपलों” पर कार्रवाई हेतु कोई समय-सीमा तय नहीं है।

जनवरी 1980 में श्रीमती इन्दिरा गाँधी पुनः सत्तासीन हुईं। सोनिया ने सबसे पहला काम यह किया कि उन्होंने अपना नाम “वोटर लिस्ट” में दर्ज करवाया, यह साफ़-साफ़ कानून का मखौल उड़ाने जैसा था और उनका वीसा रद्द किया जाना चाहिये था (क्योंकि उस वक्त भी वे इटली की नागरिक थीं)। प्रेस द्वारा हल्ला मचाने के बाद दिल्ली के चुनाव अधिकारी ने 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से हटाया। लेकिन फ़िर जनवरी 1983 में उन्होंने अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा लिया, जबकि उस समय भी वे विदेशी ही थीं (आधिकारिक रूप से उन्होंने भारतीय नागरिकता के लिये अप्रैल 1983 में आवेद दिया था)। हाल ही में ख्यात कानूनविद, ए.जी.नूरानी ने अपनी पुस्तक “सिटीजन्स राईट्स, जजेस एंड अकाऊण्टेबिलिटी रेकॉर्ड्स” (पृष्ठ 318) पर यह दर्ज किया है कि “सोनिया गाँधी ने जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्रित्व काल के कुछ खास कागजात एक विदेशी को दिखाये, जो कागजात उनके पास नहीं होने चाहिये थे और उन्हें अपने पास रखने का सोनिया को कोई अधिकार नहीं था।“ इससे साफ़ जाहिर होता है उनके मन में भारतीय कानूनों के प्रति कितना सम्मान है और वे अभी भी राजतंत्र की मानसिकता से ग्रस्त हैं। सार यह कि सोनिया गाँधी के मन में भारतीय कानून के सम्बन्ध में कोई इज्जत नहीं है, वे एक महारानी की तरह व्यवहार करती हैं। यदि भविष्य में उनके खिलाफ़ कोई मुकदमा चलता है और जेल जाने की नौबत आ जाती है तो वे इटली भी भाग सकती हैं। पेरू के राष्ट्रपति फ़ूजीमोरी जीवन भर यह जपते रहे कि वे जन्म से ही पेरूवासी हैं, लेकिन जब भ्रष्टाचार के मुकदमे में उन्हें दोषी पाया गया तो वे अपने गृह देश जापान भाग गये और वहाँ की नागरिकता ले ली।

भारत से घृणा करने वाले मुहम्मद गोरी, नादिर शाह और अंग्रेज रॉबर्ट क्लाइव ने भारत की धन-सम्पदा को जमकर लूटा, लेकिन सोनिया तो “भारतीय” हैं, फ़िर जब राजीव और इन्दिरा प्रधानमंत्री थे, तब बक्से के बक्से भरकर रोज-ब-रोज प्रधानमंत्री निवास से सुरक्षा गार्ड चेन्नई के हवाई अड्डे पर इटली जाने वाले हवाई जहाजों में क्या ले जाते थे? एक तो हमेशा उन बक्सों को रोम के लिये बुक किया जाता था, एयर इंडिया और अलिटालिया एयरलाईन्स को ही जिम्मा सौंपा जाता था और दूसरी बात यह कि कस्टम्स पर उन बक्सों की कोई जाँच नहीं होती थी। अर्जुन सिंह जो कि मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और संस्कृति मंत्री भी, इस मामले में विशेष रुचि लेते थे। कुछ भारतीय कलाकृतियाँ, पुरातन वस्तुयें, पिछवाई पेंटिंग्स, शहतूश शॉलें, सिक्के आदि इटली की दो दुकानों, (जिनकी मालिक सोनिया की बहन अनुस्का हैं) में आम तौर पर देखी जाती हैं। ये दुकानें इटली के आलीशान इलाकों रिवोल्टा (दुकान का नाम – एटनिका) और ओर्बेस्सानो (दुकान का नाम – गनपति) में स्थित हैं जहाँ इनका धंधा नहीं के बराबर चलता है, लेकिन दरअसल यह एक “आड़” है, इन दुकानों के नाम पर फ़र्जी बिल तैयार करवाये जाते हैं फ़िर वे बेशकीमती वस्तुयें लन्दन ले जाकर “सौथरबी और क्रिस्टीज” द्वारा नीलामी में चढ़ा दी जाती हैं, इन सबका क्या मतलब निकलता है? यह पैसा आखिर जाता कहाँ है? एक बात तो तय है कि राहुल गाँधी की हार्वर्ड की एक वर्ष की फ़ीस और अन्य खर्चों के लिये भुगतान एक बार केमैन द्वीप की किसी बैंक के खाते से हुआ था। इस सबकी शिकायत जब मैंने वाजपेयी सरकार में की तो उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया, इस पर मैंने दिल्ली हाइकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट की बेंच ने सरकार को नोटिस जारी किया, लेकिन तब तक सरकार गिर गई, फ़िर कोर्ट नें सीबीआई को निर्देश दिये कि वह इंटरपोल की मदद से इन बहुमूल्य वस्तुओं के सम्बन्ध में इटली सरकार से सहायता ले। इटालियन सरकार ने प्रक्रिया के तहत भारत सरकार से अधिकार-पत्र माँगा जिसके आधार पर इटली पुलिस एफ़आईआर दर्ज करे। अन्ततः इंटरपोल ने दो बड़ी रिपोर्टें कोर्ट और सीबीआई को सौंपी और न्यायाधीश ने मुझे उसकी एक प्रति देने को कहा, लेकिन आज तक सीबीआई ने मुझे वह नहीं दी, और यह सवाल अगली सुनवाई के दौरान फ़िर से पूछा जायेगा। सीबीआई का झूठ एक बार और तब पकड़ा गया, जब उसने कहा कि “अलेस्सान्द्रा माइनो” किसी पुरुष का नाम है, और “विया बेल्लिनी, 14, ओरबेस्सानो”, किसी गाँव का नाम है, ना कि “माईनो” परिवार का पता। बाद में सीबीआई के वकील ने कोर्ट से माफ़ी माँगी और कहा कि यह गलती से हो गया, उस वकील का “प्रमोशन” बाद में “ऎडिशनल सॉलिसिटर जनरल” के रूप में हो गया, ऐसा क्यों हुआ, इसका खुलासा तो वाजपेयी-सोनिया की आपसी “समझबूझ” और “गठजोड़” ही बता सकता है।

इन दिनों सोनिया गाँधी अपने पति हत्यारों के समर्थकों MDMK, PMK और DMK से सत्ता के लिये मधुर सम्बन्ध बनाये हुए हैं, कोई भारतीय विधवा कभी ऐसा नहीं कर सकती। उनका पूर्व आचरण भी ऐसे मामलों में संदिग्ध रहा है, जैसे कि – जब संजय गाँधी का हवाई जहाज नाक के बल गिरा तो उसमें विस्फ़ोट नहीं हुआ, क्योंकि पाया गया कि उसमें ईंधन नहीं था, जबकि फ़्लाईट रजिस्टर के अनुसार निकलते वक्त टैंक फ़ुल किया गया था, जैसे माधवराव सिंधिया की विमान दुर्घटना के ऐन पहले मणिशंकर अय्यर और शीला दीक्षित को उनके साथ जाने से मना कर दिया गया। इन्दिरा गाँधी की मौत की वजह बना था उनका अत्यधिक रक्तस्राव, न कि सिर में गोली लगने से, फ़िर सोनिया गाँधी ने उस वक्त खून बहते हुए हालत में इन्दिरा गाँधी को लोहिया अस्पताल ले जाने की जिद की जो कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AAIMS) से बिलकुल विपरीत दिशा में है? और जबकि “ऐम्स” में तमाम सुविधायें भी उपलब्ध हैं, फ़िर लोहिया अस्पताल पहुँच कर वापस सभी लोग AAIMS पहुँचे, और इस बीच लगभग पच्चीस कीमती मिनट बरबाद हो गये? ऐसा क्यों हुआ, क्या आज तक किसी ने इसकी जाँच की? सोनिया गाँधी के विकल्प बन सकने वाले लगभग सभी युवा नेता जैसे राजेश पायलट, माधवराव सिन्धिया, जितेन्द्र प्रसाद विभिन्न हादसों में ही क्यों मारे गये? अब सोनिया की सत्ता निर्बाध रूप से चल रही है, लेकिन ऐसे कई अनसुलझे और रहस्यमयी प्रश्न चारों ओर मौजूद हैं, उनका कोई जवाब नहीं है, और कोई पूछने वाला भी नहीं है, यही इटली की स्टाइल है।

[आशा है कि मेरे कई “मित्रों” (?) को कई जवाब मिल गये होंगे, जो मैंने पिछली दोनो पोस्टों में जानबूझकर नहीं उठाये थे, यह भी आभास हुआ होगा कि कांग्रेस सांसद “सुब्बा” कैसे भारतीय नागरिक ना होते हुए भी सांसद बन गया (क्योंकि उसकी महारानी खुद कानून का सम्मान नहीं करती), क्यों बार-बार क्वात्रोच्ची सीबीआई के फ़ौलादी (!) हाथों से फ़िसल जाता है, क्यों कांग्रेस और भाजपा एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं? क्यों हमारी सीबीआई इतनी लुंज-पुंज है? आदि-आदि… मेरा सिर्फ़ यही आग्रह है कि किसी को भी तड़ से “सांप्रदायिक या फ़ासिस्ट” घोषित करने से पहले जरा ठंडे दिमाग से सोच लें, तथ्यों पर गौर करें, कई बार हमें जो दिखाई देता है सत्य उससे कहीं अधिक भयानक होता है, और सत्ता के शीर्ष शिखरों पर तो इतनी सड़ांध और षडयंत्र हैं कि हम जैसे आम आदमी कल्पना भी नहीं कर सकते, बल्कि यह कहना गैरवाजिब नहीं होगा कि सत्ता और धन की चोटी पर बैठे व्यक्ति के नीचे न जाने कितनी आहें होती हैं, कितने नरमुंड होते हैं, कितनी चालबाजियाँ होती हैं…. राजनीति शायद इसी का नाम है…]

28 Comments

  1. Raj said,

    August 27, 2007 at 6:49 pm

    सुरेश जी आप को शत शत प्रणाम,आप ने बहुत अच्छा काम किया हे,जो लोग त्याग की … को पुजते हे शाय्द उन की आखे खुले,

  2. Raj said,

    August 27, 2007 at 6:49 pm

    सुरेश जी आप को शत शत प्रणाम,आप ने बहुत अच्छा काम किया हे,जो लोग त्याग की … को पुजते हे शाय्द उन की आखे खुले,

  3. Raj said,

    August 27, 2007 at 6:49 pm

    सुरेश जी आप को शत शत प्रणाम,आप ने बहुत अच्छा काम किया हे,जो लोग त्याग की … को पुजते हे शाय्द उन की आखे खुले,

  4. दिनेश शुक्ल said,

    August 27, 2007 at 11:31 pm

    एक जबर्दस्त पोस्ट और उस पर सबसे जबर्दस्त आपकी टिप्पणी
    धन्यवाद सुरेश जी

  5. दिनेश शुक्ल said,

    August 27, 2007 at 11:31 pm

    एक जबर्दस्त पोस्ट और उस पर सबसे जबर्दस्त आपकी टिप्पणी
    धन्यवाद सुरेश जी

  6. August 27, 2007 at 11:31 pm

    एक जबर्दस्त पोस्ट और उस पर सबसे जबर्दस्त आपकी टिप्पणीधन्यवाद सुरेश जी

  7. Udan Tashtari said,

    August 28, 2007 at 1:57 am

    तीन दिन के अवकाश (विवाह की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में) एवं कम्प्यूटर पर वायरस के अटैक के कारण टिप्पणी नहीं कर पाने का क्षमापार्थी हूँ. मगर आपको पढ़ रहा हूँ. अच्छा लग रहा है.

  8. Udan Tashtari said,

    August 28, 2007 at 1:57 am

    तीन दिन के अवकाश (विवाह की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में) एवं कम्प्यूटर पर वायरस के अटैक के कारण टिप्पणी नहीं कर पाने का क्षमापार्थी हूँ. मगर आपको पढ़ रहा हूँ. अच्छा लग रहा है.

  9. August 28, 2007 at 1:57 am

    तीन दिन के अवकाश (विवाह की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में) एवं कम्प्यूटर पर वायरस के अटैक के कारण टिप्पणी नहीं कर पाने का क्षमापार्थी हूँ. मगर आपको पढ़ रहा हूँ. अच्छा लग रहा है.

  10. परमजीत बाली said,

    August 28, 2007 at 7:56 am

    सुरेश जी,आप के द्वारा जुटाई जानकारीयों भरे लेख सच मे आँखे खोल देते हैं। सच्चाई को सामने आना ही चाहिए…वर्ना देश कभी भी रसातल मे समा जाएगा..आज आप के लेख ने एक नयी बात भी उजागर कर दी कि सभी राजनैतिक पार्टीयां एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। जो अपने काले कारनामों को छुपाने के लिए..किसी भी हद तक गिर सकते हैं…लेकिन आज देश में उन लोगों की बहुल्यता है जो तथा कथित नेताओं के चरणों मे पड़े रहना अपना सौभाग्य मान कर बैठे हुए हैं।…या हो सकता है कि अपने निहित स्वार्थो के कारण उन के स्वर से स्वर मिला रहे हो।…पता नही आने वाले समय में देश का भविष्य क्या होगा?…

  11. परमजीत बाली said,

    August 28, 2007 at 7:56 am

    सुरेश जी,आप के द्वारा जुटाई जानकारीयों भरे लेख सच मे आँखे खोल देते हैं। सच्चाई को सामने आना ही चाहिए…वर्ना देश कभी भी रसातल मे समा जाएगा..आज आप के लेख ने एक नयी बात भी उजागर कर दी कि सभी राजनैतिक पार्टीयां एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। जो अपने काले कारनामों को छुपाने के लिए..किसी भी हद तक गिर सकते हैं…लेकिन आज देश में उन लोगों की बहुल्यता है जो तथा कथित नेताओं के चरणों मे पड़े रहना अपना सौभाग्य मान कर बैठे हुए हैं।…या हो सकता है कि अपने निहित स्वार्थो के कारण उन के स्वर से स्वर मिला रहे हो।…पता नही आने वाले समय में देश का भविष्य क्या होगा?…

  12. August 28, 2007 at 7:56 am

    सुरेश जी,आप के द्वारा जुटाई जानकारीयों भरे लेख सच मे आँखे खोल देते हैं। सच्चाई को सामने आना ही चाहिए…वर्ना देश कभी भी रसातल मे समा जाएगा..आज आप के लेख ने एक नयी बात भी उजागर कर दी कि सभी राजनैतिक पार्टीयां एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। जो अपने काले कारनामों को छुपाने के लिए..किसी भी हद तक गिर सकते हैं…लेकिन आज देश में उन लोगों की बहुल्यता है जो तथा कथित नेताओं के चरणों मे पड़े रहना अपना सौभाग्य मान कर बैठे हुए हैं।…या हो सकता है कि अपने निहित स्वार्थो के कारण उन के स्वर से स्वर मिला रहे हो।…पता नही आने वाले समय में देश का भविष्य क्या होगा?…

  13. harshvardhan said,

    August 28, 2007 at 8:18 am

    गोविंद जी ने जब सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर चो रामास्वामी के घर से प्रेस कांफ्रेंस करके बिगुल बजाया था। तो, मैं भी उस समय वहीं पर था। सारे लोग यहां तक कि प्रेस कांफ्रेंस में आए पत्रकार भी इसे राजनीतिक हथकंडा भर ही मान रहे थे। उस पर सोनिया ने त्याग का नाटक करके गोविंद जी के आंदोलन की हवा निकाल दी। लेकिन, ये लेख पढ़ने के बाद मुझे इतना तो लगता ही है कि सोनिया के आचरणों की जांच की बात तो उठनी ही चाहिए और इस लेख में लिखी बातों में से यदि एक भी सच है तो, सोनिया को देश की सत्ता चलाने का (अप्रत्यक्ष तौर पर) कोई हक नहीं मिलना चाहिए।

  14. harshvardhan said,

    August 28, 2007 at 8:18 am

    गोविंद जी ने जब सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर चो रामास्वामी के घर से प्रेस कांफ्रेंस करके बिगुल बजाया था। तो, मैं भी उस समय वहीं पर था। सारे लोग यहां तक कि प्रेस कांफ्रेंस में आए पत्रकार भी इसे राजनीतिक हथकंडा भर ही मान रहे थे। उस पर सोनिया ने त्याग का नाटक करके गोविंद जी के आंदोलन की हवा निकाल दी। लेकिन, ये लेख पढ़ने के बाद मुझे इतना तो लगता ही है कि सोनिया के आचरणों की जांच की बात तो उठनी ही चाहिए और इस लेख में लिखी बातों में से यदि एक भी सच है तो, सोनिया को देश की सत्ता चलाने का (अप्रत्यक्ष तौर पर) कोई हक नहीं मिलना चाहिए।

  15. harshvardhan said,

    August 28, 2007 at 8:18 am

    गोविंद जी ने जब सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर चो रामास्वामी के घर से प्रेस कांफ्रेंस करके बिगुल बजाया था। तो, मैं भी उस समय वहीं पर था। सारे लोग यहां तक कि प्रेस कांफ्रेंस में आए पत्रकार भी इसे राजनीतिक हथकंडा भर ही मान रहे थे। उस पर सोनिया ने त्याग का नाटक करके गोविंद जी के आंदोलन की हवा निकाल दी। लेकिन, ये लेख पढ़ने के बाद मुझे इतना तो लगता ही है कि सोनिया के आचरणों की जांच की बात तो उठनी ही चाहिए और इस लेख में लिखी बातों में से यदि एक भी सच है तो, सोनिया को देश की सत्ता चलाने का (अप्रत्यक्ष तौर पर) कोई हक नहीं मिलना चाहिए।

  16. अरुण said,

    August 29, 2007 at 5:19 am

    का कहे..? हर उचाईयो के नीचे कही सिसकते हुए नर मुंड पडे होते है..हर किसी महान के बनने बनानेका रास्ता खून से लत्पथ लाशो के ढेर पर ही होकर गुजरता है..कुछ वो खुद ढकता है कुछ उसके अंधभक्त..

  17. अरुण said,

    August 29, 2007 at 5:19 am

    का कहे..? हर उचाईयो के नीचे कही सिसकते हुए नर मुंड पडे होते है..हर किसी महान के बनने बनानेका रास्ता खून से लत्पथ लाशो के ढेर पर ही होकर गुजरता है..कुछ वो खुद ढकता है कुछ उसके अंधभक्त..

  18. अरुण said,

    August 29, 2007 at 5:19 am

    का कहे..? हर उचाईयो के नीचे कही सिसकते हुए नर मुंड पडे होते है..हर किसी महान के बनने बनानेका रास्ता खून से लत्पथ लाशो के ढेर पर ही होकर गुजरता है..कुछ वो खुद ढकता है कुछ उसके अंधभक्त..

  19. Raghavdas said,

    October 14, 2007 at 11:19 am

    आपका लेख मुझे अच्छा लगा,अस्लीयत देश के सामने लाने के लीये धन्यवाद!
    आप क्रुपया http://in.answers.yahoo.com
    पर राजकीय सवाल पर उत्तर देने आयेंगे तो बहोत ही अच्छा रहेगा
    हमारे बहोत से दोस्तोंको knowledge मील जायेगा.
    धन्यवाद!

  20. Raghavdas said,

    October 14, 2007 at 11:19 am

    आपका लेख मुझे अच्छा लगा,अस्लीयत देश के सामने लाने के लीये धन्यवाद!
    आप क्रुपया http://in.answers.yahoo.com
    पर राजकीय सवाल पर उत्तर देने आयेंगे तो बहोत ही अच्छा रहेगा
    हमारे बहोत से दोस्तोंको knowledge मील जायेगा.
    धन्यवाद!

  21. Raghavdas said,

    October 14, 2007 at 11:19 am

    आपका लेख मुझे अच्छा लगा,अस्लीयत देश के सामने लाने के लीये धन्यवाद!आप क्रुपया http://in.answers.yahoo.com पर राजकीय सवाल पर उत्तर देने आयेंगे तो बहोत ही अच्छा रहेगाहमारे बहोत से दोस्तोंको knowledge मील जायेगा.धन्यवाद!

  22. hemant said,

    September 7, 2008 at 5:39 pm

    meri sabhi aise log jo mere bharat ko chahate hai, ve iski copy ko school ke bachcho ko avashya vitrit kare, kyoki ve hi hamare desh ki nayi fasal hai,hemant jain

  23. hemant said,

    September 7, 2008 at 5:39 pm

    meri sabhi aise log jo mere bharat ko chahate hai, ve iski copy ko school ke bachcho ko avashya vitrit kare, kyoki ve hi hamare desh ki nayi fasal hai,hemant jain

  24. hemant said,

    September 7, 2008 at 5:39 pm

    meri sabhi aise log jo mere bharat ko chahate hai, ve iski copy ko school ke bachcho ko avashya vitrit kare, kyoki ve hi hamare desh ki nayi fasal hai,hemant jain

  25. Virender Rawal said,

    February 2, 2009 at 4:55 pm

    ye sab hamari aankhe khol dene ke liye kafi ho jo is jhoothi dharmnirpekshta ke aage hath jode khade hai
    lekhak vakai dhanyawad ke patr hai

  26. February 2, 2009 at 4:55 pm

    ye sab hamari aankhe khol dene ke liye kafi ho jo is jhoothi dharmnirpekshta ke aage hath jode khade hailekhak vakai dhanyawad ke patr hai

  27. July 20, 2009 at 8:54 pm

    सुरेश जी आपने अच्छा अनुवाद किया है | jyadatar lokon ने comment किया है की ये लेख आंख kholne waali है , kintu आंख तो usi की khulegi जो इसे kholnaa chahtaa हो | उन andhbhakt congresiyon का क्या ?लेख के लिए धन्यवाद |

  28. dabbu said,

    September 22, 2009 at 2:13 pm

    suresh ji ek bat me bhi kahna chata hoo. kafi normal filmi type dialog he." jo apni janambhumi ki nahi hui wo yaha ki kaise ho sakti he. yah koi shara na hone ke bad bhi yaha rukna unke kisi na kisi nihit swarth ko dikhata he.me aapka link apne friends ko bhi post karta hoon. aap kafi accha kam kar rahe he kya kabhi kisi congressi ne aapko pareshan nahi kiya unki annpurna par lanchan lagne par


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