हे भगवान! तेरा सत्‍यानाश हो

एक सिपाही छुट्टी लेकर अपने घर जा रहा था। रास्‍ते में ही पानी बरसने से उसने घर जाने से पहले जितने भी सामान खरीदें थे वो खराब हो गये। सिपाही ने ईश्‍वर को काफी भला बुरा कहा कि अभी ही बरसना था ? तेरा सत्‍यानाश हो। कुछ आगे जाने पर कुछ डाकू आड़ में बैठे थे। उन डाकूओं ने एक जोर दार निशाना लगाया किन्‍तु पानी बरसने के कारण कारतूस गीली हो जाने के कारण वह न चली और सिपाही ने भाग कर आपनी जान बचाई। जब वह घर पहुँचा और अपनी सारी सामान खराब होने की बात बताई कि और भगवान को दोष देने लगा, किन्‍तु फिर डाकू की गोली न चलने की बात बताई तो उसकी पत्नी ने भगवान का शुक्रिया अदा किया। पति को यह समझाते हुऐ कहा कि अगर पानी न बरसता तो डाकूँओं से तम तो लुटते ही साथ ही साथ जान भी जाती।

इस प्रंसग से यह शिक्षा मिलती है कि हमें भगवान जो भी दे उसे सहर्ष स्‍वीकार करना चाहिए।

4 Comments

  1. संजय बेंगाणी said,

    December 7, 2007 at 4:43 am

    टिप्पणी स्वीकारे और इसके लिए भगवान को धन्यवाद दें. 🙂

  2. mahashakti said,

    December 7, 2007 at 4:57 am

    प्रेरक प्रंसग के लिये धन्‍यवाद, सच में प्रेरणा स्‍त्रोत है।

  3. मनोज ज़ालिम "प्रलयनाथ" said,

    December 7, 2007 at 9:30 am

    dont talk about

    TAQUDEER

    BE ‘KARMAYOGI’

    so THANKS FOR A SHORT STORY

  4. आशुतॊष मासूम said,

    December 7, 2007 at 11:02 pm

    बस एक सवाल- भगवान कौन है और क्या है ??? सहर्ष स्वीकार करना बुजदिलों का काम है… माफी चाहता हुं, पर मेरी भगवान शब्द से पुरानी दुश्मनी है और जब पढा की “हमें भगवान जो भी दे उसे सहर्ष स्‍वीकार करना चाहिए” बस प्रतिक्रिया देने की इच्छा हो गई, क्यों की हमे कोई कुछ नहीं देता, हम अपने कर्मों से अपनी योग्यता के अनुसार पाते है…कृप्या इसे अन्यथा ना लें, ये मेरी व्यक्तिगत राय है….आपके जवाब और सवालों का इन्तजार रहेगा.


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