>ओ वर्षा के पहले बादल: जगमोहन

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पिछले दिनों मीत ने अपनी पोस्ट में  महान गायक जगमोहन का गाया हुआ एक बहुत ही मधुर गीत  मेरी आँखे बनी दीवानी सुनवाया। आज मैं आपके लिये लेकर आया हूँ जगमोहनजी का गाया हुआ एक और गीत। यह गाना दुर्लभ तो नहीं है पर कईयों ने इसे नहीं सुना होगा।

यह गाना  फिल्म मेघदूत (1945)  का है या गैर फिल्मी इसकी पक्की जानकारी नहीं है। यह गीत फैयाज हाशमी ने लिखा था और इसका संगीत दिया है कमल दासगुप्ता ने।

महान कवि कालीदास रचित मेघदूत से यह गीत लिया  गया है। प्रस्तुत गीत में नायक अपनी नायिका के लिये संदेश भेज रहा है कि है बादल.. तुम जाओ और  मेरी प्रियतमा को मेरा संदेश सुनाओ। कवि नायक से यह कहलवाना नहीं चूके कि उसे किस पथ से हो कर जाना है कहां विश्राम लेना है  और कहां क्या क्या करना है। कालीदास रचित मेघदूत का  हिन्दी अनुवाद सबको पढ़ना चाहिये, लिंक नीचे दिया गया है। आईये गीत सुनें।

http://lifelogger.com/common/flash/flvplayer/flvplayer_basic.swf?file=http://mahaphil.lifelogger.com/media/audio0/678006_dluyzgychy_conv.flv&autoStart=false

 

ओ वर्षा के पहले बादल, मेरा संदेसा ले जाना
ओ वर्षा के पहले बादल, मेरा संदेसा ले जाना
असुवन की बूंदन बरसाकर,-२
अल्का नगरी में तुम जाकर, खबर मेरी पहुँचाना
ओ वर्षा के पहले बादल………

मालभूमी और अम्रकूट से विन्ध्याचल नर……
विदिशा नगरी और बेतवा तक होकर आगे पांव बढ़ाना
आग विरह की जहाँ भी पाना-२
बरस बरस कर उसे बुझाना
ओ वर्षा के पहले बादल………

देख अंधेरा, देख अंधेरा पिया मिलन को
चलेगी छुप कर कोई गोरी,बस तुम बिजली चमकाकर
खोल न देना,खोल न देना, खोल न देना उसकी चोरी
विरहन को तुम जहाँ भी पाना, उसे कभी ना सताना
ओ वर्षा के पहले बादल………

उज्जैनी में महाकाल का मंदिर जब तुम पाओ
पुजारिनों का नाच देखकर, पुजारिनों का नाच देख कर
अपना मन बहलाओ
पर तुम उनके अंग ढंग को देख अटक न जाओ-2
सिमला में न चम्बल में न कुरुक्षेत्र में रुकना
कनखल में न गंगा की लहरों को….झुकना
अटल हिमालय पे चढ़ के फिर यूँ मुड़ना कैलाश की ओर
ज्यूँ चंदा को देख प्यारे, गगन को झूमे जाये चकोर
अल्का में फिर ढूँढ उसे तुम, मेरा संदेसा सुनाना
ओ वर्षा के पहले बादल, मेरा संदेसा ले जाना

 

कालीदास के बादलों के माध्यम से संदेश  भेजने पर मैने पहले एक कार्टून बनाया था  देखिये

http://nahar.wordpress.com/2007/07/21/meghdoot/

 

Meghdoot

गीत सुनने के साथ इन्हें जरूर देखें:

कालीदास कृत मेघदूत और उसकी लोकप्रियता  और हिन्दी अनुवाद

होली की हार्दिक शुभकामनायें

 

 

 

 

8 Comments

  1. March 21, 2008 at 7:26 am

    >सही है।कालीदास आज होते तो उनका भी एक ब्लाग होता।

  2. Dipak said,

    March 21, 2008 at 7:27 am

    >mahaan kalakritiya, aise hi hote hai. aur geeto ka khajana adbhut hai. Holi ki shubhkamnaye!!!!!!!!

  3. March 21, 2008 at 7:54 am

    >सागर जी बहुत ही सुन्दर गीत,आपको भी होली की शुभकामनाएं !!ओर बहुत बहुत धन्यवाद गीत के लिये

  4. March 21, 2008 at 8:37 am

    >आजकल तो बादल सिर्फ़ पंजाब में दिखाई दे रहे है.

  5. March 21, 2008 at 9:30 am

    >अच्छा गीत सुनवा्या॥ धन्यवाद।

  6. मीत said,

    March 25, 2008 at 4:21 pm

    >वाह वाह …. सागर साहब. कह नहीं सकता जो महसूस कर रहा हूँ. आप शायद समझ रहे हों.

  7. शोभा said,

    March 30, 2008 at 3:11 am

    >सागर भाईबहुत प्यारा गीत है। सुनकर आनन्द आ गया। इसी तरह गीतों मी मिठास बाँटते रहो। सस्नेह

  8. August 3, 2008 at 2:48 am

    >बारिश के इस मौसम में इस गीत को सुन रहा हूँ. मुझे लगता है कि होली के समय से ज्यादा मजा आ रहा है.शब्द देखिये कितने अच्छे हैं कि तुम सभी जगह जाना पर रुकना कभी नहीं, पर विरह की हर आग को तुम बुझा देना, मेरे प्रियतम को संदेशा भी जरूर देना.


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