जीवित व्यक्तियों पर डाक टिकट? क्या बकवास है…

Indian Postal Stamps on Celebrities
केन्द्र सरकार के एक बयान के अनुसार सरकार जीवित व्यक्तियों पर भी डाक टिकट निकालने का विचार कर रही है। संचार मंत्री के अनुसार देश की विशिष्ट हस्तियों पर डाक टिकट छापने के लिये एक समिति इस बात का विचार कर रही है। सरकार ने जो दो-चार नाम गिनाये हैं उसके अनुसार शाहरुख खान, सचिन तेंडुलकर, सानिया मिर्जा आदि के चित्रों वाले डाक टिकट जारी किये जाने की योजना है।

हमारे देश में कुछ न कुछ नया अजूबा करने-दिखाने की हमेशा होड़ लगी रहती है। यह कथित नायाब विचार भी इसी “खुजली” का एक नमूना है। सबसे पहली बात तो यह है कि पहले से ही कई मरे हुए व्यक्तियों, प्रकृति, पशु-पक्षी, स्मारक आदि पर डाक टिकट जारी हो चुके हैं, फ़िर ये नया शिगूफ़ा कि “जीवित व्यक्तियों पर भी डाक टिकट” जारी किये जायेंगे, की कोई तुक नहीं है। जिस देश में इतनी मतभिन्नता हो, जहाँ “महान” माने जाने के इतने अलग-अलग पैमाने हों, जहाँ हरेक मरे हुए नेताओं तक की इज्जत नहीं होती हो, कई मरे हुए नेताओं को लोग आज भी खुलेआम गालियाँ देते हों, ऐसे में जीवित व्यक्तियों पर डाक टिकट जारी करना नितांत मूर्खता है, और जरूरत भी क्या है? क्या पहले से मरे हुए व्यक्ति कम पड़ रहे हैं, क्या विभिन्न जीव-जन्तु, पेड़-पौधे, फ़ूल-पत्तियाँ आदि कम हैं जो नये-नये विवाद पैदा करने का रास्ता बना रहे हो? सरकार खुद ही सोचे, क्या शाहरुख सर्वमान्य हैं? क्या समूचा भारत उन्हें पसन्द करता है? और सबसे बड़ी बात तो यह कि डाक टिकट जारी करने का पैमाना क्या होगा? किस आधार पर यह तय किया जायेगा कि फ़लाँ व्यक्तित्व पर डाक टिकट जारी करना चाहिये? क्या डाक टिकट पर शाहरुख को सिगरेट पीते दिखाया जायेगा? या सचिन कोका-कोला की बोतल के साथ डाक टिकट पर दिखेंगे? सौ बात की एक बात तो यही है कि ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी है? क्या मरे हुए और पुराने “सिम्बॉल” कम पड़ रहे हैं, जो जीवितों के पीछे पड़े हो? या कहीं सरकार भी हमारे “न्यूड” (न्यूज) चैनलों की तरह सोचने लगी है कि धोनी, राखी सावन्त आदि पर डाक टिकट जारी करके वह डाक विभाग को घाटे से उबार लेगी? या उसे कोरियर के मुकाबले अधिक लोकप्रिय बना देगी? कोई तो लॉजिक बताना पड़ेगा…

जब एक बार सरकार कोई नीतिगत निर्णय कर लेगी तो सबसे पहले हमारे नेता उसमें कूद पड़ेंगे। इस बात की क्या गारंटी है कि कांग्रेसी चमचे सोनिया गाँधी पर डाक टिकट जारी नहीं करेंगे, फ़िर राहुल गाँधी, फ़िर प्रियंका गाँधी, फ़िर “वर्ल्ड चिल्ड्रन्स डे” के अवसर पर प्रियंका के दोनो बच्चे एक डाक टिकट पर… यानी एक अन्तहीन सिलसिला चल निकलेगा। एक बात और नजर-अन्दाज की जा रही है कि डाक टिकट पर छपे महापुरुषों के वर्तमान में क्या हाल होते हैं। सबसे अधिक खपत महात्मा गाँधी के डाक टिकटों की होती है। गाँधी की तस्वीर वाले उस डाक टिकट को न जाने कहाँ-कहाँ, और न जाने कैसे-कैसे रखा जाता है, थूक लगाई जाती है, रगड़ा जाता है, पोस्ट मास्टर अपनी बीवी का सारा गुस्सा उस पर जोर से ठप्पा लगाकर निकालता है। नोटों पर छपे गाँधी न जाने कैसे-कैसे लोगों के हाथों से गुजरते हैं, महिलाओं द्वारा जाने कहाँ-कहाँ रखे जाते हैं, क्या ये सब अपमानजनक नहीं है? क्या यह जरूरी है कि महापुरुषों का सम्मान नोटों और डाक टिकट पर ही हो? रही प्रेरणा की बात, तो भाई मल्लिका शेरावत पर डाक टिकट छापने से किसको प्रेरणा मिलने वाली है?

जिस देश में नल से पानी लेने की बात पर हत्या हो जाती हो, घूरकर देखने की बात पर अपहरण हो जाते हों, वहाँ जीवित व्यक्तियों पर डाक टिकट जारी करने से विवाद पैदा नहीं होंगे क्या? सोनिया पर डाक टिकट जारी होगा तो नरेन्द्र मोदी पर भी होगा और ज्योति बसु पर भी होगा। सचिन तेंडुलकर पर जारी होगा तो बंगाली कैसे पीछे रहेंगे… सौरव दादा पर भी एक डाक टिकट लो। सानिया मिर्जा पर डाक टिकट निकाला तो बुर्के में फ़ोटो क्यों नहीं छापा? शाहरुख के डाक टिकट की धूम्रपान विरोधियों द्वारा होली जलाई जायेगी। और फ़िर उद्योगपति पीछे रहेंगे क्या? मुकेश अम्बानी की जेब में 150 सांसद हैं तो उनका डाक टिकट जरूर-जरूर जारी होगा, तो विजय माल्या भी अपनी कैलेण्डर गर्ल्स के साथ एक डाक टिकट पर दिखाई देंगे… मतलब एक न खत्म होने वाली श्रृंखला चालू हो जायेगी। हाँ एक बात जरूर है कि सरकार की डाक टिकटों की बिक्री जरूर बढ़ जायेगी, कैसे? भई जब भी कांग्रेसी किसी राज्य से पोस्टकार्ड अभियान चलायेंगे तो सोनिया के टिकटों की माँग एकदम बढ़ जायेगी। बुद्धदेव भट्टाचार्य के मुखड़े वाले डाक टिकट सिंगूर और नंदीग्राम में खूब बिकेंगे। सबसे ज्यादा मजा लेगी आम जनता, जो अपनी-अपनी पसन्द के मुताबिक डाक टिकट के सामने वाले हिस्से में थूक लगायेगी।

यदि मजाक को एक तरफ़ रख दिया जाये, तो कुल मिलाकर सरकार का यह निर्णय बेहद बेतुका, समय खराब करने वाला और नये बखेड़े खड़ा करने वाला है। इसकी बजाय सरकार को ऐसे वीरों पर डाक टिकट जारी करना चाहिये जो निर्विवाद हों (और ऐसा शायद ही कोई मिले)।

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26 Comments

  1. सागर नाहर said,

    March 29, 2008 at 4:50 pm

    सुरेशजी
    बहुत सही कहा आपने.. परन्तु क्या आपको एक बात पता है कि भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जिसने आज तक राम पर एक भी डाक टिकट नहीं छापा जबकि मॉरीशस जैसे कई देशों ने ना केवल राम बल्कि कई देवी देवताओं पर डाक टिकट जारी किये हैं!
    जबकि राम भक्त होने वाली भाजपा सरकार भी भारत में शाषन कर चुकी है।

  2. सागर नाहर said,

    March 29, 2008 at 4:50 pm

    सुरेशजी
    बहुत सही कहा आपने.. परन्तु क्या आपको एक बात पता है कि भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जिसने आज तक राम पर एक भी डाक टिकट नहीं छापा जबकि मॉरीशस जैसे कई देशों ने ना केवल राम बल्कि कई देवी देवताओं पर डाक टिकट जारी किये हैं!
    जबकि राम भक्त होने वाली भाजपा सरकार भी भारत में शाषन कर चुकी है।

  3. March 29, 2008 at 4:50 pm

    सुरेशजी बहुत सही कहा आपने.. परन्तु क्या आपको एक बात पता है कि भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जिसने आज तक राम पर एक भी डाक टिकट नहीं छापा जबकि मॉरीशस जैसे कई देशों ने ना केवल राम बल्कि कई देवी देवताओं पर डाक टिकट जारी किये हैं!जबकि राम भक्त होने वाली भाजपा सरकार भी भारत में शाषन कर चुकी है।

  4. राज भाटिय़ा said,

    March 29, 2008 at 10:38 pm

    सुरेश जी, अब कया बाताये,बस इन की वेब्कुफ़िया देखते रहो, यह जाये गे तो दुसरे इन्ही के भाई बधु आ जाये गे हमारा खुन पीने ओर दिमाग खाने,

  5. राज भाटिय़ा said,

    March 29, 2008 at 10:38 pm

    सुरेश जी, अब कया बाताये,बस इन की वेब्कुफ़िया देखते रहो, यह जाये गे तो दुसरे इन्ही के भाई बधु आ जाये गे हमारा खुन पीने ओर दिमाग खाने,

  6. March 29, 2008 at 10:38 pm

    सुरेश जी, अब कया बाताये,बस इन की वेब्कुफ़िया देखते रहो, यह जाये गे तो दुसरे इन्ही के भाई बधु आ जाये गे हमारा खुन पीने ओर दिमाग खाने,

  7. mahashakti said,

    March 29, 2008 at 11:29 pm

    आपने बहुत सार्थक लेख प्रस्‍तुत किया है, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम होगी। चिन्‍ता न करें यह सरकार हर वर्ग को रिझाने के लिये सभी के टिकट छापेगी। जिसमें शालीन और अश्लील सभी श्रेणी के टिकट होगें क्योंकि कांग्रेस की नजर में बस समान है, क्‍योकि सब वोटर है।

    सागर भाई की बात भी उचित है।

  8. mahashakti said,

    March 29, 2008 at 11:29 pm

    आपने बहुत सार्थक लेख प्रस्‍तुत किया है, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम होगी। चिन्‍ता न करें यह सरकार हर वर्ग को रिझाने के लिये सभी के टिकट छापेगी। जिसमें शालीन और अश्लील सभी श्रेणी के टिकट होगें क्योंकि कांग्रेस की नजर में बस समान है, क्‍योकि सब वोटर है।

    सागर भाई की बात भी उचित है।

  9. mahashakti said,

    March 29, 2008 at 11:29 pm

    आपने बहुत सार्थक लेख प्रस्‍तुत किया है, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम होगी। चिन्‍ता न करें यह सरकार हर वर्ग को रिझाने के लिये सभी के टिकट छापेगी। जिसमें शालीन और अश्लील सभी श्रेणी के टिकट होगें क्योंकि कांग्रेस की नजर में बस समान है, क्‍योकि सब वोटर है।सागर भाई की बात भी उचित है।

  10. Udan Tashtari said,

    March 30, 2008 at 5:04 am

    सार्थक आलेख. विचारणीय.

  11. Udan Tashtari said,

    March 30, 2008 at 5:04 am

    सार्थक आलेख. विचारणीय.

  12. March 30, 2008 at 5:04 am

    सार्थक आलेख. विचारणीय.

  13. अरुण said,

    March 30, 2008 at 5:38 am

    ये गलत बात है जब इसी काग्रेस ने आपके उपर टिकट छापा था तो आपने कुछ नही कहा,अब ये बेचारे राहुल प्रियंका और उनके बच्चो को छापना चाहते है तो आप परेशान हो रहे है,हमने भी आपके उपर छापा टिकट खोज निकाला जी..:) यहा देखिये

  14. अरुण said,

    March 30, 2008 at 5:38 am

    ये गलत बात है जब इसी काग्रेस ने आपके उपर टिकट छापा था तो आपने कुछ नही कहा,अब ये बेचारे राहुल प्रियंका और उनके बच्चो को छापना चाहते है तो आप परेशान हो रहे है,हमने भी आपके उपर छापा टिकट खोज निकाला जी..:) यहा देखिये

  15. अरुण said,

    March 30, 2008 at 5:38 am

    ये गलत बात है जब इसी काग्रेस ने आपके उपर टिकट छापा था तो आपने कुछ नही कहा,अब ये बेचारे राहुल प्रियंका और उनके बच्चो को छापना चाहते है तो आप परेशान हो रहे है,हमने भी आपके उपर छापा टिकट खोज निकाला जी..:) यहा देखिये

  16. Gyandutt Pandey said,

    March 30, 2008 at 7:50 am

    डाकटिकट क्या है? विज्ञापन का स्पेस है। डाक-तार विभाग विज्ञापन दर तय करे और उसके आधार पर छापे। चाहे कोलगेट का पेस्ट हो या बन्दर छाप लाल दन्त मन्जन।

  17. Gyandutt Pandey said,

    March 30, 2008 at 7:50 am

    डाकटिकट क्या है? विज्ञापन का स्पेस है। डाक-तार विभाग विज्ञापन दर तय करे और उसके आधार पर छापे। चाहे कोलगेट का पेस्ट हो या बन्दर छाप लाल दन्त मन्जन।

  18. March 30, 2008 at 7:50 am

    डाकटिकट क्या है? विज्ञापन का स्पेस है। डाक-तार विभाग विज्ञापन दर तय करे और उसके आधार पर छापे। चाहे कोलगेट का पेस्ट हो या बन्दर छाप लाल दन्त मन्जन।

  19. संजय बेंगाणी said,

    March 31, 2008 at 10:56 am

    मरे व्यक्ति पर भी पैसे लेकर डाकटिकट छपती है…

  20. संजय बेंगाणी said,

    March 31, 2008 at 10:56 am

    मरे व्यक्ति पर भी पैसे लेकर डाकटिकट छपती है…

  21. March 31, 2008 at 10:56 am

    मरे व्यक्ति पर भी पैसे लेकर डाकटिकट छपती है…

  22. SUNIL DOGRA जालि‍म said,

    April 1, 2008 at 2:10 pm

    वही ढाक के तीन पात

  23. SUNIL DOGRA जालि‍म said,

    April 1, 2008 at 2:10 pm

    वही ढाक के तीन पात

  24. SUNIL DOGRA जालि‍म said,

    April 1, 2008 at 2:10 pm

    वही ढाक के तीन पात

  25. April 1, 2008 at 2:10 pm

    वही ढाक के तीन पात

  26. April 1, 2008 at 2:10 pm

    वही ढाक के तीन पात


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