प्रीत में है जीवन: सहगल साहब का एक और यादगार गीत !!!

मैने पिछ्ली बार महफ़िल में सहगल साहब का गीत "राजा का बेटा" प्रस्तुत था जिसकी आप सभी ने काफ़ी सराहना की । आपकी टिप्पणियाँ हमारे सर माथे पर ।
आज भी मैं सहगल साहब का ही एक गीत आपको सुनवा रहा हूँ । गीत १९३९ की फ़िल्म दुश्मन का है, इस फ़िल्म के संगीतकार श्री पंकज मलिक जी हैं ।

आज सुनने वालों से एक छोटी से पहेली भी पूछता हूँ । आपको बताना है कि ये गीत शास्त्रीय संगीत के किस राग पर आधारित है ।

प्रीत में है जीवन झोकों
कि जैसे कोल्हू में सरसों
प्रीत में है जीवन जोखों

भोर सुहानी चंचल बालक,
लरकाई (लडकाई) दिखलाये,
हाथ से बैठा गढे खिलौने,
पैर से तोडत जाये ।

वो तो है, वो तो है
एक मूरख बालक,
तू तो नहीं नादान,

आप बनाये आप बिगाडे
ये नहीं तेरी शान, ये नहीं तेरी शान

ऐसा क्यों, फ़िर ऐसा क्यों…

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4 Comments

  1. Harish Rajpal said,

    May 27, 2008 at 1:20 am

    Yeh Gana Shayad Film Chandidas Ka Hai Please Check Kariyega

  2. Udan Tashtari said,

    May 27, 2008 at 2:49 am

    सुन रहा हूँ इत्मिनान से.

  3. सागर नाहर said,

    May 27, 2008 at 12:58 pm

    सहगल साहब का एक और खूबसूरत गीत .. पर इसमें संगीत (वाद्ययंत्र) बिल्कुल नहीं है। शायद इसलिये यह गीत उतना प्रसिद्ध नहीं हो पाया।

  4. Harshad Jangla said,

    May 27, 2008 at 5:33 pm

    यह गीत फिल्म दुश्मन का ही है , मैने चेक कर लिया है |

    -हर्षद जांगला
    ऐट्लांटा युएसए


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