अर्पित हूँ अर्पिता को

अर्पित हूँ अर्पिता को,

अर्चित हूँ अर्चिता का।

मंद हूँ मंदिता से,

नंद हूँ नंदिता का।।

स्‍नेह है स्‍नेहा से,

नेह हूँ नेहा का।

पूजा का पुजारी हूँ,

हुस्न का भिखरी हूँ।।

गर्व हूँ गर्विता का,

हर्ष हूँ हर्षिता का।

ऋतु का दीवाना हूँ,

नरगिस से बेगाना हूँ।।

राजा हूँ रानी का,

शिव हूँ शिवानी का।

अनुपम हूँ अनुपमा का।।

राम मै हूँ रमा का,

विद्वान हूँ विद्या से।

नित्‍य ही नित्या से,

प्रेम करता हूँ ख्‍वाब में।

गले लगा कर सबकी यादें,

जहर मिला लूँ शराब में।।


3 Comments

  1. advocate rashmi saurana said,

    June 18, 2008 at 3:18 pm

    aachi rachana hai.likhate rhe.

  2. mahashakti said,

    June 19, 2008 at 1:38 pm

    काफी अच्‍छा लिखा है, काफी लडकियों के दीवाने हो 🙂

  3. गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said,

    June 21, 2008 at 3:54 am

    प्रेम करता हूँ ख्‍वाब में।

    गले लगा कर सबकी यादें,

    जहर मिला लूँ शराब में।।

    idhar thoda asahmat hoon
    kyonki mere soch ishq sareaam karo
    pooj kabhi chhip ke nahee kee jati

    BADHAIYAA SWEEKAARIE JI


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