बदस्‍तूर एक छोटी सी

बदस्‍तूर एक छोटी सी,

चिन्‍गारी को हवा दिया।

जो आग लगी सारे शहर में,

पानी से बुझा दिया।।

वो चिल्‍लाते रहे हमारी गली,

पर हमारी आवाज को।

सबने गुस्‍से में दबा दिया।।

बदस्‍तूर ……………

घुट-घुट कर जीना हमें भी आता है,

गर्मियों में पसीना हमें भी आता है।

पर क्‍या करें जब जब दी सलाह हमने,

अपने ही लोगों ने हर मर्तबा ठुकरा दिया।।

बदस्‍तूर ……………

हम शराब को पानी समझे,

हकीकत को कहानी समझे।

जो कोई परिन्‍दा लाया पैगाम,

उसको मुन्‍डेर से हमने ही उड़ा दिया।।

दिन भर जगाया महताब,

रात में सुला दिया।

बदस्‍तूर ……………

चिल्‍लाने से तकदीर नही बदलती,

हाथ कटने से तहरीर नही बदलती।

हमें याद थे सारे किस्से अतीत के,

एक एक करके सबको भुला दिया।।

हमने हर हक़ीकत के जाम में,

ज़हर मिला दिया।।

बदस्‍तूर ……………

Dated – 1 अप्रेल 2005 by प्रलयनाथ जालिम

2 Comments

  1. advocate rashmi saurana said,

    June 20, 2008 at 12:50 pm

    vha bhut khub.likhate rhe.

  2. गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said,

    June 21, 2008 at 3:51 am

    चिल्‍लाने से तकदीर नही बदलती,

    हाथ कटने से तहरीर नही बदलती।
    wah…..wah


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: