>एक नया अनमोल जीवन मिल गया: तलत महमूद

>तलत महमूद का गाया हुआ एक दुर्लभ और मधुर गैर फिल्मी गीत

मखमली आवाज के मालिक तलत महमूद साहब के लिये कुछ कहने की जरूरत है? मुझे लगता है शायद उनकी लिये यहाँ कुछ शब्दों में लिखना बड़ा मुश्किल होगा। फिलहाल आप उनकी मधुर आवाज में एक दुर्लभ गीत सुनिये। यह गैर फिल्मी गीत है और इसका संगीत दिया है दुर्गा सेन ने और इसे लिखा है फ़ैयाज़ हाशमी ने.. लीजिये सुनिये।

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एक नया अनमोल जीवन मिल गया, मिल गया
हार की बांहे गले में पड़ गई
क्या हुआ गर चार आँखे लड़ गई
क्या गया गर दिल के बदले दिल गया
एक नया अनमोल जीवन

प्रेम अब छाया है मन के गाँव में
एक सुनहरा है कमल इस छाँव में
खुल के वो मुझसे मिली ये खिल गया
एक नया अनमोल जीवन

मेरे दिन में रात में आई बहार
वो जो आई साथ में लाई बहार-२
दिल जो गया तो दर्द भी शामिल गया-२
एक नया अनमोल जीवन

11 Comments

  1. September 2, 2008 at 7:31 am

    >संगीत के प्रचार प्रसार में किए गए आपके योगदान की जितनी भी सराहना की जाय कम है

  2. Nitish Raj said,

    September 2, 2008 at 8:23 am

    >ऐसे बहुत ही कम सुनी हैं। लाजवाब।

  3. महेन said,

    September 2, 2008 at 2:10 pm

    >मुझे लगता था तलत साहब की सारी ग़ैर-फ़िल्मी ग़ज़लें-गीत मैनें सुने थे मगर ये नहीं सुना। लगता है ये उनका रेडियो कलकत्ता के दिनों का रिकार्ड है।बहुत ही खूब गाया है।

  4. September 2, 2008 at 3:28 pm

    >bahut khoob ….is rare geet ke liye shukriya….

  5. Kedar said,

    September 2, 2008 at 3:53 pm

    >वाह सागरजी, बहोत ही खूबसूरत गाना, यह गाना ज्ञपताल मे है (इस ताल मे पांच मात्राये होती है – 5 beats),बहोत कम गाने ज्ञपताल मे बने है क्योकि इस ताल पर गाना बनाना बदा ही मुश्कील काम है,आजकल तो एक भी गाना ज्ञपताल मे नहिं बनता.शुक्रिया सागरजी, ईस सुन्दर गाने के लिये….

  6. anitakumar said,

    September 2, 2008 at 3:57 pm

    >वाह पहले कभी नही सुना ये गाना, बहुत बड़िया

  7. September 2, 2008 at 11:33 pm

    >तलत साहब के कई गीत सुने.. पर ये पहली बार. शायद गैर फिल्मीं है इसलिए. धन्यवाद !

  8. September 3, 2008 at 1:08 am

    >SagarbhaiUnheard song.Thanx a lot.-Harshad JanglaAtlanta, USA

  9. September 3, 2008 at 3:53 am

    >आभार ! बिल्कुल अलग सा ही गीत , न सुना हुआ ।

  10. Manish Kumar said,

    September 3, 2008 at 6:10 pm

    >pehli baar suna..aabhar ise yahan prastut karne ka

  11. VINTAGE ERA said,

    September 13, 2008 at 12:47 pm

    >Shubh Sandhya Sagar ji,Abhi abhi Talat Saab ka gaaya hua yeh Gair Filmy Geet sun raha thha….. Talat Saab ke kuch gair filmi nagmo ko isse pehle suna thha, lekin yeh nazm abhi tak nahi suni…. Bahut badhiya hai….. Pls do share some more gems like this in the future…. Thanks!!


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