अविवाहित प्रधानमंत्री के बारे में क्या विचार है?

Unmarried Prime Minister of India
किसी भी व्यक्ति का अविवाहित रहना या न रहना उसका व्यक्तिगत मामला होता है। लेकिन जब यह परिस्थिति राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्रों में काम करने वालों की होती है तब इसे मीडिया व्यक्तिगत नहीं रहने देता। फ़िलहाल देश में कुछ ऐसे राजनैतिक व्यक्तित्व उभर रहे हैं जो कि एक लक्ष्य को लेकर अविवाहित रहे हैं। कुछ उस वक्त की परिस्थितियाँ और कुछ उसकी विचारधारा का प्रवाह, लेकिन कई व्यक्तियों ने आजीवन अविवाहित रहने का फ़ैसला किया है।

देश के राजनैतिक परिदृश्य पर इस वक्त सबसे आगे और सबसे तेज तीन नाम चमक रहे हैं, और संयोग देखिये कि तीनों ही अविवाहित हैं। पहला नाम है राहुल गाँधी का जो कि 39 वर्ष के होने के बावजूद “फ़िलहाल” अविवाहित हैं, दूसरा नाम है बसपा नेत्री मायावती (53 वर्ष) का और तीसरा नाम है नरेन्द्र मोदी (59 वर्ष) का। यदि इन तीनों व्यक्तित्वों की पार्टियाँ सही समय पर सही गतिविधियाँ और राजनैतिक पैंतरेबाजी करें तो निश्चित जानिये कि भारत का अगला प्रधानमंत्री कोई “अविवाहित” होगा (जो कि न सिर्फ़ भारत बल्कि विश्व में भी काफ़ी कम ही देखने में आया है)। इन तीनों नामों में राहुल गाँधी को इस क्लब में जोड़ने का एकमात्र कारण उनका “फ़िलहाल” अविवाहित होना ही है, लेकिन उनकी उम्र काफ़ी कम है इसलिये भविष्य के बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन बाकी के दोनो व्यक्तित्वों के बारे में कहा जा सकता है कि उनके अविवाहित ही रहने की सम्भावना काफ़ी है। सवाल है कि क्या अविवाहित रहने वाले सामाजिक और राजनैतिक व्यक्तित्व अपने लक्ष्यों के प्रति अधिक समर्पित होते हैं? क्या उनका अविवाहित रहना उनकी विचारधारा और पार्टी तथा देश के लिये फ़ायदेमन्द होता है? लगता तो ऐसा ही है…

सबसे पहले बात करते हैं मायावती के बारे में। उल्लेखनीय है कि कांशीराम भी आजीवन अविवाहित रहे, उन्होंने अपना सारा जीवन समाज के दबे-कुचले वर्गों को संगठित करने में लगा दिया। सरकारी नौकरी में रहे, “बामसेफ़” नाम का संगठन तैयार किया, जिसका विस्तारित राजनैतिक रूप “बहुजन समाज पार्टी” के रूप में देश के सामने आया। कांशीराम ने सरकारी नौकरी से इस्तीफ़ा देकर अपने-आप को पार्टी के काम के लिये झोंक दिया। वे अपनी “पेन” वाली थ्योरी के इतने कायल थे कि हर जगह, हर सभा में, हर इंटरव्यू में वह “खड़े पेन” का उदाहरण अवश्य देते थे। बात थी विचारधारा की, सो उन्होंने पार्टी को बनाने में दिन-रात एक कर दिया, न अपनी परवाह की न अपने विवाह के बारे में सोचा। उन्होंने देश और उत्तरप्रदेश के सघन दौरे करके पार्टी को इतना मजबूत बना दिया कि अब उत्तरप्रदेश में कोई भी सरकार बसपा के बगैर बन नहीं सकती। इन्हीं कांशीराम ने जब मायावती में प्रतिभा देखी तभी उन्हें कह दिया था कि तुम IAS बनने के चक्कर में मत पड़ो, एक दिन तुम्हें मुख्यमंत्री बनना है…सैकड़ों IAS तुम्हारे आगे-पीछे हाथ बाँधे घूमते नज़र आयेंगे… कांशीराम ने जो कहा सच कर दिखाया। आज मायावती सिर्फ़ मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री पद की भी दावेदार हैं। बसपा नेत्री मायावती ने जब अपने उत्तराधिकारी के बारे में सार्वजनिक बयान दिया था, तो लोगों ने उस नाम के बारे में कयास लगाने शुरु कर दिये थे, खोजी पत्रकारों की बात मानें तो वह शख्स हैं राजाराम, जो कि फ़िलहाल मध्यप्रदेश के बसपा प्रभारी हैं। वे भी अविवाहित हैं और सारा जीवन बसपा को समर्पित करने का मन बना चुके हैं।

सवाल उठता है कि क्या यदि कांशीराम विवाह कर लेते तो पत्नी और बच्चों की जिम्मेदारी के चलते इतना बड़ा आंदोलन वे खड़ा कर पाते? मेरे खयाल से तो नहीं… हर कोई इस बात को स्वीकार करेगा कि शादी के बाद व्यक्ति की प्राथमिकतायें बदल जाती हैं। उस व्यक्ति पर अपने परिवार की देखभाल, भरण-पोषण की जिम्मेदारी आयद होती है, रिश्तेदारियाँ निभाने का दबाव होता है जो उसे समाजसेवा या राजनीति में झोंक देने में बाधक होता है। ज़ाहिर सी बात है कि उसके अपने परिवार के प्रति कुछ कर्तव्य होते हैं जिन्हें पूरा करने के लिये उसे परिवार को समय देना ही पड़ेगा।

महात्मा गाँधी के पुत्र की आत्मकथा (जिस पर फ़िल्म “गाँधी माय फ़ादर” भी बनी) में उन्होंने कहा है कि गाँधीजी सामाजिक और राजनैतिक आंदोलनों में व्यस्त रहने के कारण परिवार को अधिक समय नहीं दे पाते थे और उनके बच्चे अकेलापन (पिता की कमी) महसूस करते थे। बहुत से पुरुषों और महिलाओं को जीवन में कभी न कभी ऐसा महसूस होता है कि यदि मेरे पीछे परिवार की जिम्मेदारियाँ न होतीं तो शायद मैं और बेहतर तरीके से और खुलकर काम कर सकता था, ये और बात है कि कर्तव्य और जिम्मेदारी के अहसास के कारण यह विचार कुछ ही समय के लिये आते हैं। ऐसे में सहज ही लगता है कि यदि राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्रों में काम करने वाले लोग अविवाहित रहते हैं तो वे अपने लक्ष्यों के प्रति अधिक सजग, सक्रिय और समर्पित हो सकते हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में तो यह बहुत पुरानी परम्परा है कि पूर्णकालिक स्वयंसेवक अविवाहित ही रहेंगे, और यह उचित भी है क्योंकि स्वयंसेवकों को सुदूर क्षेत्रों में अभावों में कई-कई दिनों तक प्रचार के लिये जाना पड़ता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं भाजपा के पितृपुरुष कुशाभाऊ ठाकरे। आज भाजपा जो भी है, जितनी भी है उसके पीछे कुशाभाऊ ठाकरे का अमिट योगदान है। उत्तर-पूर्व के राज्यों और दक्षिण में आज संघ का जो भी प्रसार है वह सिर्फ़ और सिर्फ़ कुशाभाऊ ठाकरे की अनथक मेहनत का नतीजा है। कुल एक सूटकेस ही जीवन भर उनकी गृहस्थी और सम्पत्ति रहा। दो-तीन जोड़ कपड़े, संघ का साहित्य और सादी चप्पलें पहन कर ताउम्र उन्होंने यात्राओं में बिता दी, रहना-खाना संघ कार्यालयों में और पूरा जीवन संघ को समर्पित। RSS में ऐसे कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है। अब तक हुए तमाम सरसंघचालक, जेपी माथुर, अटलबिहारी वाजपेयी, नानाजी देशमुख, नरेन्द्र मोदी जैसे सैकड़ों लोग हैं जो कि शायद विवाह कर लेते तो पता नहीं संघ और भाजपा आज कहाँ होते।

कम्युनिस्ट पार्टियों में भी लगभग यही ट्रेण्ड रहा है उनके भी कई नेता अविवाहित रहे और पार्टी की विचारधारा के प्रचार-प्रसार में उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। नक्सलवादी आन्दोलन के प्रवर्तक कहे जाने वाले कानू सान्याल भी अविवाहित हैं। चर्च और ईसाईयत के प्रचार में लगे हुए पादरी और नन भी आजीवन अविवाहित रहने का व्रत लेते हैं ताकि वे अपना काम पूर्ण निष्ठा से कर सकें, क्योंकि विवाह करने से व्यक्ति कई प्रकार के बन्धनों में बँध जाता है। गाहे-बगाहे इन कार्यकर्ताओं के बारे में मीडिया और अन्य माध्यमों में यौन कदाचरण के मामले सामने आते रहते हैं। देश-विदेश में चर्च में बिशपों, पादरियों और ननों द्वारा घटित ऐसी कई घटनायें सामने आती रहती हैं (ये और बात है कि संघ का व्यक्ति यदि इसमें पाया जाये तो हल्ला ज्यादा होता है) कुछ समय पहले संघ के एक प्रचारक संजय जोशी के बारे में भी इस तरह की एक सीडी मीडिया में आई थी, उसमें कितनी सच्चाई है यह तो सम्बन्धित पक्ष ही जानें, लेकिन इतना कहा जा सकता है कि इस प्रकार का व्यवहार पूर्णरूपेण एक मानव स्वभाव और मानवीय गलती है। इस दुनिया में शायद ही कोई ऐसा पुरुष या स्त्री होगी जिसमें कभी भी यौनेच्छा जागृत नहीं हुई हो, चाहे वह कितना भी बड़ा संत-महात्मा-पीर क्यों न हो। ऐसे में इन अविवाहित व्यक्तियों द्वारा जाने-अनजाने कभी-कभार इस प्रकार की गलती होना कोई भूचाल लाने वाली घटना नहीं है, यदि अपराध के दोषी हैं तो सजा अवश्य मिलना चाहिये। दिक्कत तब होती है जब “सेकुलर”(?) लोग अटलबिहारी वाजपेयी के जवानी के किस्से चटखारे ले-लेकर सुनाते हैं लेकिन नेहरू नामक “रंगीले रतन” को भूल जाते हैं। खैर यह विषय अलग ही है…

राहुल गाँधी के बारे में सुना गया है कि वे किसी कोलम्बियन कन्या से शादी करना चाहते हैं, लेकिन शायद बात कहीं अटक रही है। यदि वे विवाह कर लेते हैं तो फ़िर “अविवाहित क्लब” के नेताओं में सबसे कद्दावर दो ही लोग बचेंगे, मायावती और नरेन्द्र मोदी। दोनों ही अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित कर चुके हैं, दोनों का खासा जनाधार है, दोनों ही अपनी-अपनी पार्टी में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, दोनों “चुनाव-जिताऊ” भाषणों के लिये मशहूर हैं। मायावती तो “भेंट” पर सबसे अधिक टैक्स देने वाली राजनेता बन चुकी हैं, मोदी पर भी फ़िलहाल तो कोई बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने नहीं आया है। ऐसे में हो सकता है कि भारत को अगले कुछ ही समय में एक अविवाहित प्रधानमंत्री मिल जाये। अविवाहित प्रधानमंत्री होने के तीन फ़ायदे तो तत्काल दिखाई दे रहे हैं, पहला वह अपना पूरा समय काम में बितायेगा, परिवार के लिये नहीं। दूसरा यह कि उसके किसी बेटे-बेटी-बहू आदि को आतंकवादी किडनैप नहीं कर सकते (क्योंकि हैं ही नहीं), तीसरा उस व्यक्ति पर वंशवाद और भाई-भतीजावाद का आरोप भी नहीं लग सकता। मायावती ने तो पहले ही कह दिया कि उनका उत्तराधिकारी उनके परिवार का कोई व्यक्ति नहीं होगा, जो कि तारीफ़ की बात तो है। संघ के सरसंघचालकों ने कभी भी अपने परिवार के किसी व्यक्ति को उत्तराधिकारी नामज़द नहीं किया, जबकि वे चाहते तो कर सकते थे और उसे संघ के लाखों कार्यकर्ता स्वीकार भी कर लेते, लेकिन फ़िर कांग्रेस और बाकियों में क्या अन्तर रह जाता?

तो प्रिय पाठकों, देश के प्रधानमंत्री के तौर पर एक अविवाहित व्यक्ति के कुछ फ़ायदे मैंने गिना दिये हैं, कुछ आप गिना दीजिये। साथ ही राहुल गाँधी, मायावती और नरेन्द्र मोदी में से आपका वोट किसे मिलेगा यह भी बताईये…

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48 Comments

  1. SHASHI SINGH said,

    September 24, 2008 at 8:20 am

    इस दिशा में आपकी सोच का कायल हो गया!!! अदभूत!!!

  2. SHASHI SINGH said,

    September 24, 2008 at 8:20 am

    इस दिशा में आपकी सोच का कायल हो गया!!! अदभूत!!!

  3. SHASHI SINGH said,

    September 24, 2008 at 8:20 am

    इस दिशा में आपकी सोच का कायल हो गया!!! अदभूत!!!

  4. Shiv Kumar Mishra said,

    September 24, 2008 at 9:03 am

    कायल तो मैं भी हो गया हूँ.
    पछतावा एक ही है. आपने ये पोस्ट तेरह साल पहले क्यों नहीं लिखी?…..:-)

  5. Shiv Kumar Mishra said,

    September 24, 2008 at 9:03 am

    कायल तो मैं भी हो गया हूँ.
    पछतावा एक ही है. आपने ये पोस्ट तेरह साल पहले क्यों नहीं लिखी?…..:-)

  6. September 24, 2008 at 9:03 am

    कायल तो मैं भी हो गया हूँ.पछतावा एक ही है. आपने ये पोस्ट तेरह साल पहले क्यों नहीं लिखी?…..:-)

  7. JAI SINGH said,

    September 24, 2008 at 9:13 am

    सुरेश जी यह बात ठीक है कि अविवाहित होने से बहुत सारी जिम्‍मेदारियों की तरफ आपको ध्‍यान नहीं देना पड़ता और अपने लक्ष्‍य पर ध्‍यान केन्द्रित करने में आपको सहूलयित होती है। लेकिन सिर्फ इतना कहना एकांगी और अधुरी बात होगी। यदि आप अपने लक्ष्‍य के प्रति वास्‍तव में समर्पित हैं तो विवाह या प्रेम इसमें बाधा नहीं पहुंचाते बल्कि आपकी मदद करते हैं। चाहे पुराणों की बात करें या मार्क्‍स और लेनिन की या गॉंधी या भगवतीचरण वोहरा या नेल्‍सन मंडेला की विवाह ने उनके लक्ष्‍य से उन्‍हें नहीं डिगाया। और जो इस कारण से डिग जाते हैं उनका अपने लक्ष्‍य के प्रति समर्पण ही कम होता है। इस मामले में आपकी सोच भाववादी है और किसी भी दृष्टि से प्रगतिशील नहीं है।

  8. JAI SINGH said,

    September 24, 2008 at 9:13 am

    सुरेश जी यह बात ठीक है कि अविवाहित होने से बहुत सारी जिम्‍मेदारियों की तरफ आपको ध्‍यान नहीं देना पड़ता और अपने लक्ष्‍य पर ध्‍यान केन्द्रित करने में आपको सहूलयित होती है। लेकिन सिर्फ इतना कहना एकांगी और अधुरी बात होगी। यदि आप अपने लक्ष्‍य के प्रति वास्‍तव में समर्पित हैं तो विवाह या प्रेम इसमें बाधा नहीं पहुंचाते बल्कि आपकी मदद करते हैं। चाहे पुराणों की बात करें या मार्क्‍स और लेनिन की या गॉंधी या भगवतीचरण वोहरा या नेल्‍सन मंडेला की विवाह ने उनके लक्ष्‍य से उन्‍हें नहीं डिगाया। और जो इस कारण से डिग जाते हैं उनका अपने लक्ष्‍य के प्रति समर्पण ही कम होता है। इस मामले में आपकी सोच भाववादी है और किसी भी दृष्टि से प्रगतिशील नहीं है।

  9. JAI SINGH said,

    September 24, 2008 at 9:13 am

    सुरेश जी यह बात ठीक है कि अविवाहित होने से बहुत सारी जिम्‍मेदारियों की तरफ आपको ध्‍यान नहीं देना पड़ता और अपने लक्ष्‍य पर ध्‍यान केन्द्रित करने में आपको सहूलयित होती है। लेकिन सिर्फ इतना कहना एकांगी और अधुरी बात होगी। यदि आप अपने लक्ष्‍य के प्रति वास्‍तव में समर्पित हैं तो विवाह या प्रेम इसमें बाधा नहीं पहुंचाते बल्कि आपकी मदद करते हैं। चाहे पुराणों की बात करें या मार्क्‍स और लेनिन की या गॉंधी या भगवतीचरण वोहरा या नेल्‍सन मंडेला की विवाह ने उनके लक्ष्‍य से उन्‍हें नहीं डिगाया। और जो इस कारण से डिग जाते हैं उनका अपने लक्ष्‍य के प्रति समर्पण ही कम होता है। इस मामले में आपकी सोच भाववादी है और किसी भी दृष्टि से प्रगतिशील नहीं है।

  10. COMMON MAN said,

    September 24, 2008 at 9:27 am

    maanyavar, nishchit roop se namo

  11. COMMON MAN said,

    September 24, 2008 at 9:27 am

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  12. COMMON MAN said,

    September 24, 2008 at 9:27 am

    maanyavar, nishchit roop se namo

  13. संजय बेंगाणी said,

    September 24, 2008 at 9:37 am

    फिलहाल तो नमो को गृहमंत्री के रूप में देखने की है, आगे प्रभू इच्छा.

    अविवाहितो के फायदे है.

    विवाहितों पर प्रश्नचिन्ह न लगाएं, दिल टूट जाता है 🙂

  14. संजय बेंगाणी said,

    September 24, 2008 at 9:37 am

    फिलहाल तो नमो को गृहमंत्री के रूप में देखने की है, आगे प्रभू इच्छा.

    अविवाहितो के फायदे है.

    विवाहितों पर प्रश्नचिन्ह न लगाएं, दिल टूट जाता है 🙂

  15. September 24, 2008 at 9:37 am

    फिलहाल तो नमो को गृहमंत्री के रूप में देखने की है, आगे प्रभू इच्छा. अविवाहितो के फायदे है. विवाहितों पर प्रश्नचिन्ह न लगाएं, दिल टूट जाता है 🙂

  16. Manisha said,

    September 24, 2008 at 12:51 pm

    आपकी बात में दम तो है, लेकिन आप अगर देखें तो दुनिया भर में और भारत में भी महान नेता, शादीशुदा रहे हैं। महान और अच्छा नेतृत्व देने के लिये गुण चाहिये, विवाह से इसका कोई संबंध नहीं है।

    अधिकांश अच्छे नेता विवाहित रहे हैं हां ये देखा गया है कि अधिकांश नेताओं या विचारों के पीछे चलने वाले कुंवारे रहते हैं।

    इंदिरा गांधी जैसी नेता महिला भी थी और विवाहित भी, फिर भी फौलादी थीं।

    मनीषा

  17. Manisha said,

    September 24, 2008 at 12:51 pm

    आपकी बात में दम तो है, लेकिन आप अगर देखें तो दुनिया भर में और भारत में भी महान नेता, शादीशुदा रहे हैं। महान और अच्छा नेतृत्व देने के लिये गुण चाहिये, विवाह से इसका कोई संबंध नहीं है।

    अधिकांश अच्छे नेता विवाहित रहे हैं हां ये देखा गया है कि अधिकांश नेताओं या विचारों के पीछे चलने वाले कुंवारे रहते हैं।

    इंदिरा गांधी जैसी नेता महिला भी थी और विवाहित भी, फिर भी फौलादी थीं।

    मनीषा

  18. Manisha said,

    September 24, 2008 at 12:51 pm

    आपकी बात में दम तो है, लेकिन आप अगर देखें तो दुनिया भर में और भारत में भी महान नेता, शादीशुदा रहे हैं। महान और अच्छा नेतृत्व देने के लिये गुण चाहिये, विवाह से इसका कोई संबंध नहीं है। अधिकांश अच्छे नेता विवाहित रहे हैं हां ये देखा गया है कि अधिकांश नेताओं या विचारों के पीछे चलने वाले कुंवारे रहते हैं।इंदिरा गांधी जैसी नेता महिला भी थी और विवाहित भी, फिर भी फौलादी थीं।मनीषा

  19. makrand said,

    September 24, 2008 at 2:00 pm

    topic is good
    thiking is powerful
    if u r not married u r bachelor
    technically true
    regards

  20. makrand said,

    September 24, 2008 at 2:00 pm

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  21. makrand said,

    September 24, 2008 at 2:00 pm

    topic is goodthiking is powerfulif u r not married u r bachelortechnically trueregards

  22. भुवनेश शर्मा said,

    September 24, 2008 at 2:40 pm

    आपकी बात में दम है जी….अटलजी इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं और अटलजी ही क्‍यों..नेहरू और इंदिरा भी तो बगैर जीवनसाथी के अपने राजनीतिक जीवन में व्‍यस्‍त थे…नरेंद्र मोदी का रास्‍ता इन तीनों में सबसे कठिन है…और यदि वे प्रधानमंत्री बन जाएं तो भारतीय इतिहास एक नया ही मोड़ ले लेगा

    और जहां तक बात है अटलजी की तो उनकी जवानी के किस्‍से तो हैं पर चटखारे ले-लेकर सुनाने लायक नहीं…प्रेम करने का सबको अधिकार है उन्‍होंने भी एक समय किया…चूंकि इस क्षेत्र के लोग इसके गवाह रहे हैं पर फिर भी यहां उनके बारे में कभी कोई चटखारे लेने वाली बात नहीं करता…हालांकि वे प्रेम में असफल रहे पर उन्‍होंन सफल राजनीतिक पारी खेली और अपने दामन पर कोई दाग नहीं लगने दिया ये बड़ी बात है….सच्‍चे अर्थों में उनके बाद बीजेपी में कोई नेता रह ही नहीं गया है अब या तो मैनेजर बचे हैं या दलाल या कोरे भाषणबाज और मोदी की बात करें तो वे गुजरात के नेता हो सकते हैं पर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर वे स्‍वीकृति पा सकेंगे इसमें मुझे शक है

  23. भुवनेश शर्मा said,

    September 24, 2008 at 2:40 pm

    आपकी बात में दम है जी….अटलजी इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं और अटलजी ही क्‍यों..नेहरू और इंदिरा भी तो बगैर जीवनसाथी के अपने राजनीतिक जीवन में व्‍यस्‍त थे…नरेंद्र मोदी का रास्‍ता इन तीनों में सबसे कठिन है…और यदि वे प्रधानमंत्री बन जाएं तो भारतीय इतिहास एक नया ही मोड़ ले लेगा

    और जहां तक बात है अटलजी की तो उनकी जवानी के किस्‍से तो हैं पर चटखारे ले-लेकर सुनाने लायक नहीं…प्रेम करने का सबको अधिकार है उन्‍होंने भी एक समय किया…चूंकि इस क्षेत्र के लोग इसके गवाह रहे हैं पर फिर भी यहां उनके बारे में कभी कोई चटखारे लेने वाली बात नहीं करता…हालांकि वे प्रेम में असफल रहे पर उन्‍होंन सफल राजनीतिक पारी खेली और अपने दामन पर कोई दाग नहीं लगने दिया ये बड़ी बात है….सच्‍चे अर्थों में उनके बाद बीजेपी में कोई नेता रह ही नहीं गया है अब या तो मैनेजर बचे हैं या दलाल या कोरे भाषणबाज और मोदी की बात करें तो वे गुजरात के नेता हो सकते हैं पर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर वे स्‍वीकृति पा सकेंगे इसमें मुझे शक है

  24. September 24, 2008 at 2:40 pm

    आपकी बात में दम है जी….अटलजी इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं और अटलजी ही क्‍यों..नेहरू और इंदिरा भी तो बगैर जीवनसाथी के अपने राजनीतिक जीवन में व्‍यस्‍त थे…नरेंद्र मोदी का रास्‍ता इन तीनों में सबसे कठिन है…और यदि वे प्रधानमंत्री बन जाएं तो भारतीय इतिहास एक नया ही मोड़ ले लेगाऔर जहां तक बात है अटलजी की तो उनकी जवानी के किस्‍से तो हैं पर चटखारे ले-लेकर सुनाने लायक नहीं…प्रेम करने का सबको अधिकार है उन्‍होंने भी एक समय किया…चूंकि इस क्षेत्र के लोग इसके गवाह रहे हैं पर फिर भी यहां उनके बारे में कभी कोई चटखारे लेने वाली बात नहीं करता…हालांकि वे प्रेम में असफल रहे पर उन्‍होंन सफल राजनीतिक पारी खेली और अपने दामन पर कोई दाग नहीं लगने दिया ये बड़ी बात है….सच्‍चे अर्थों में उनके बाद बीजेपी में कोई नेता रह ही नहीं गया है अब या तो मैनेजर बचे हैं या दलाल या कोरे भाषणबाज और मोदी की बात करें तो वे गुजरात के नेता हो सकते हैं पर राष्‍ट्रीय स्‍तर पर वे स्‍वीकृति पा सकेंगे इसमें मुझे शक है

  25. Ghost Buster said,

    September 24, 2008 at 4:18 pm

    नरेन्द्र मोदी ही सबसे बेहतर विकल्प दिखते हैं इन तीनों में तो. बाकी राजनीति तो बस राजनीति ही है.

  26. Ghost Buster said,

    September 24, 2008 at 4:18 pm

    नरेन्द्र मोदी ही सबसे बेहतर विकल्प दिखते हैं इन तीनों में तो. बाकी राजनीति तो बस राजनीति ही है.

  27. Ghost Buster said,

    September 24, 2008 at 4:18 pm

    नरेन्द्र मोदी ही सबसे बेहतर विकल्प दिखते हैं इन तीनों में तो. बाकी राजनीति तो बस राजनीति ही है.

  28. Udan Tashtari said,

    September 24, 2008 at 4:33 pm

    मान्यवर

    मेरा विवाह कैनेडियन पद्धति से हुआ है. क्या भारत के लिए अविवाहित मानते हुए मेरा नाम इस लिस्ट में जुड़ सकता है? कृप्या सलाह दें.

    जनाधार मनमोहन सिंग जैसा ही समझ कर चलिये.

    सादर… 🙂

  29. Udan Tashtari said,

    September 24, 2008 at 4:33 pm

    मान्यवर

    मेरा विवाह कैनेडियन पद्धति से हुआ है. क्या भारत के लिए अविवाहित मानते हुए मेरा नाम इस लिस्ट में जुड़ सकता है? कृप्या सलाह दें.

    जनाधार मनमोहन सिंग जैसा ही समझ कर चलिये.

    सादर… 🙂

  30. September 24, 2008 at 4:33 pm

    मान्यवरमेरा विवाह कैनेडियन पद्धति से हुआ है. क्या भारत के लिए अविवाहित मानते हुए मेरा नाम इस लिस्ट में जुड़ सकता है? कृप्या सलाह दें.जनाधार मनमोहन सिंग जैसा ही समझ कर चलिये.सादर… 🙂

  31. सतीश पंचम said,

    September 24, 2008 at 4:44 pm

    अरे भाई जयललिता, ममता को तो आप लोग भूले जा रहे हैं उपर से समीरजी लाईन लगा रहे हैं कि मैं भी हूँ…..पता नहीं किस ऐंगल से समीरजी को लगा कि मैं अविवाहितो की कतार में लग सकता हूँ 🙂

  32. सतीश पंचम said,

    September 24, 2008 at 4:44 pm

    अरे भाई जयललिता, ममता को तो आप लोग भूले जा रहे हैं उपर से समीरजी लाईन लगा रहे हैं कि मैं भी हूँ…..पता नहीं किस ऐंगल से समीरजी को लगा कि मैं अविवाहितो की कतार में लग सकता हूँ 🙂

  33. September 24, 2008 at 4:44 pm

    अरे भाई जयललिता, ममता को तो आप लोग भूले जा रहे हैं उपर से समीरजी लाईन लगा रहे हैं कि मैं भी हूँ…..पता नहीं किस ऐंगल से समीरजी को लगा कि मैं अविवाहितो की कतार में लग सकता हूँ 🙂

  34. Sanjeet Tripathi said,

    September 24, 2008 at 7:05 pm

    प्रभु 😉

  35. Sanjeet Tripathi said,

    September 24, 2008 at 7:05 pm

    प्रभु 😉

  36. September 24, 2008 at 7:05 pm

    प्रभु 😉

  37. Anil Pusadkar said,

    September 24, 2008 at 8:03 pm

    महाजाल के महापुरुष को प्रणाम,थोडा मेरा भी खयाल रख्नना हम भी संगठन मंत्री की ही तरह हैं,आज अविवाहित होने का एक और फ़ायदा पता चला,बधाई आपको ये महत्वपुर्ण जानकारी देने के लिये

  38. Anil Pusadkar said,

    September 24, 2008 at 8:03 pm

    महाजाल के महापुरुष को प्रणाम,थोडा मेरा भी खयाल रख्नना हम भी संगठन मंत्री की ही तरह हैं,आज अविवाहित होने का एक और फ़ायदा पता चला,बधाई आपको ये महत्वपुर्ण जानकारी देने के लिये

  39. September 24, 2008 at 8:03 pm

    महाजाल के महापुरुष को प्रणाम,थोडा मेरा भी खयाल रख्नना हम भी संगठन मंत्री की ही तरह हैं,आज अविवाहित होने का एक और फ़ायदा पता चला,बधाई आपको ये महत्वपुर्ण जानकारी देने के लिये

  40. Suresh Chandra Gupta said,

    September 25, 2008 at 5:20 am

    भाई मेरा वोट तो नरेंद्र मोदी के लिए है.

  41. Suresh Chandra Gupta said,

    September 25, 2008 at 5:20 am

    भाई मेरा वोट तो नरेंद्र मोदी के लिए है.

  42. September 25, 2008 at 5:20 am

    भाई मेरा वोट तो नरेंद्र मोदी के लिए है.

  43. anitakumar said,

    September 25, 2008 at 4:02 pm

    हम तो सुने है कि नरेंद्र मोदी शादी शुदा है पर पत्नी को छोड़ दिये है।

  44. anitakumar said,

    September 25, 2008 at 4:02 pm

    हम तो सुने है कि नरेंद्र मोदी शादी शुदा है पर पत्नी को छोड़ दिये है।

  45. anitakumar said,

    September 25, 2008 at 4:02 pm

    हम तो सुने है कि नरेंद्र मोदी शादी शुदा है पर पत्नी को छोड़ दिये है।

  46. विचार said,

    September 25, 2008 at 9:40 pm

    अनीताकुमार जी,
    आप सफल होंगे तो अफवाहें और मौकापरस्त लोग पीछे लग ही जायेंगे. वरना उनकी ‘परित्यक्ता पत्नी’ 2007 तक सामने क्यों नहीं आई? एन विधानसभा चुनाव के वक्त ही उसने मुंह क्यों खोला? कोई कुछ भी कहेगा तो क्या ज़रूरी है की उसे सच मान ही लिया जाए?

  47. विचार said,

    September 25, 2008 at 9:40 pm

    अनीताकुमार जी,
    आप सफल होंगे तो अफवाहें और मौकापरस्त लोग पीछे लग ही जायेंगे. वरना उनकी ‘परित्यक्ता पत्नी’ 2007 तक सामने क्यों नहीं आई? एन विधानसभा चुनाव के वक्त ही उसने मुंह क्यों खोला? कोई कुछ भी कहेगा तो क्या ज़रूरी है की उसे सच मान ही लिया जाए?

  48. September 25, 2008 at 9:40 pm

    अनीताकुमार जी, आप सफल होंगे तो अफवाहें और मौकापरस्त लोग पीछे लग ही जायेंगे. वरना उनकी ‘परित्यक्ता पत्नी’ 2007 तक सामने क्यों नहीं आई? एन विधानसभा चुनाव के वक्त ही उसने मुंह क्यों खोला? कोई कुछ भी कहेगा तो क्या ज़रूरी है की उसे सच मान ही लिया जाए?


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