>मम्मा, मेरी माँ प्यारी माँ, मम्मा

>

क्या सचमुच अच्छे गीत बनने बंद हो गये हैं?

राधिका बुधकर जी ने अपने ब्लॉग पर एक पोस्ट कहाँ खो गया संगीत? में पहले किसी पोस्ट में पूछे गये एक प्रश्न के जवाब में लिखा था

अब जवाब यह हैं कि मुझे सिर्फ़ इतना ही नही लगता कि शास्त्रीय रागों पर आधारित गाने बनना बंद हो गए हैं ,बल्कि मुझे लगता हैं गीत बनना ही बंद हो गए हैं । संगीत किसे कहेंगे हम ,वह जो जिसमें मधुर स्वर ,उपयुक्त लय ,सुंदर बोल हो और उसे जिसे उसी सुन्दरता से गाया गया हो

माँ, मेरी माँ
प्यारी माँ..मम्मा
ओ माँ
हाथों की लकीरे बदल जायेंगी
गम की ये जंजीरे पिघल जायेंगी
हो खुदा पे भी असर
तू दुवाओं का है घर
मेरी माँ..मम्मा
बिगड़ी किस्मत भी संवर जायेगी
जिन्दगी तराने खुशी के गायेगी
तेरे होते किसका डर
तू दुवाओं का है घर
मेरी माँ , प्यारी माँ.. मम्मा
यूं तो मैं सबसे न्यारा हूँ
तेरा माँ मैं दुलारा हूँ
यूं तो मैं सबसे न्यारा हूँ
पर तेरा माँ मैं दुलारा हूँ
दुनियाँ में जीने से ज्यादा
उलझन है माँ
तू है अमर का जहाँ
तू गुस्सा करती है
बड़ा अच्छा लगता है
तू कान पकड़ती है
बड़ी जोर से लगता है, मेरी माँ
मेरी माँ..प्यारी माँ
मम्मा, ओ माँ.. प्यारी माँ .. मम्मा
हाथों की लकीरे बदल जायेंगी
गम की ये जंजीरे पिघल जायेंगी
हो खुदा पे भी असर
तू दुवाऒं का है घर
मेरी माँ..मम्मा

मैने इसी पोस्ट पर अपनी टिप्पणी की थी कि ऐसा नहीं है कि अच्छे गीत नहीं बनते, कई बार अच्छे गीत आते हैं जो भले ही शास्त्रीय संगीत पर आधारित ना होतें हो पर कर्णप्रिय तो होते ही हैं।

ऐसा ही एक गीत मैं आपको सुनाना चाहता हूँ, जो शायद अभी तक रिलीज भी नहीं हुई है, फिल्म दसविदानिया का है, फिल्म के संगीतकार और गायक कैलाश खैर है। यह एक गीत सुनिये… माँ, मेरी माँ.. मम्मा।

इस गीत को आप आंखे बंद कर ध्यान से और शास्त्रीय संगीत के पैमाने में फिट किये बिना सुनें। सुनिये और बताइये क्या वाकई अच्छे गीत बनना बंद हो गये हैं? क्या इस गीत की लय उपयुक्त नहीं है? क्या बोल सुंदर नहीं है? मैं आपको इस गीत को यहाँ सुनवाने की बजाय एक दूसरे लिंक कर क्लिक करवा रहा हूँ।

मेरी माँ….मम्मा

इस लिंक पर क्लिक कर गाना सुनिये और साथ में गुनगुनाने ले लिये यहाँ आईये..

मम्मा, मेरी माँ प्यारी माँ, मम्मा

क्या सचमुच अच्छे गीत बनने बंद हो गये हैं?

राधिका बुधकर जी ने अपने ब्लॉग पर एक पोस्ट कहाँ खो गया संगीत? में पहले किसी पोस्ट में पूछे गये एक प्रश्न के जवाब में लिखा था

अब जवाब यह हैं कि मुझे सिर्फ़ इतना ही नही लगता कि शास्त्रीय रागों पर आधारित गाने बनना बंद हो गए हैं ,बल्कि मुझे लगता हैं गीत बनना ही बंद हो गए हैं । संगीत किसे कहेंगे हम ,वह जो जिसमें मधुर स्वर ,उपयुक्त लय ,सुंदर बोल हो और उसे जिसे उसी सुन्दरता से गाया गया हो

माँ, मेरी माँ
प्यारी माँ..मम्मा
ओ माँ
हाथों की लकीरे बदल जायेंगी
गम की ये जंजीरे पिघल जायेंगी
हो खुदा पे भी असर
तू दुवाओं का है घर
मेरी माँ..मम्मा
बिगड़ी किस्मत भी संवर जायेगी
जिन्दगी तराने खुशी के गायेगी
तेरे होते किसका डर
तू दुवाओं का है घर
मेरी माँ , प्यारी माँ.. मम्मा
यूं तो मैं सबसे न्यारा हूँ
तेरा माँ मैं दुलारा हूँ
यूं तो मैं सबसे न्यारा हूँ
पर तेरा माँ मैं दुलारा हूँ
दुनियाँ में जीने से ज्यादा
उलझन है माँ
तू है अमर का जहाँ
तू गुस्सा करती है
बड़ा अच्छा लगता है
तू कान पकड़ती है
बड़ी जोर से लगता है, मेरी माँ
मेरी माँ..प्यारी माँ
मम्मा, ओ माँ.. प्यारी माँ .. मम्मा
हाथों की लकीरे बदल जायेंगी
गम की ये जंजीरे पिघल जायेंगी
हो खुदा पे भी असर
तू दुवाऒं का है घर
मेरी माँ..मम्मा

मैने इसी पोस्ट पर अपनी टिप्पणी की थी कि ऐसा नहीं है कि अच्छे गीत नहीं बनते, कई बार अच्छे गीत आते हैं जो भले ही शास्त्रीय संगीत पर आधारित ना होतें हो पर कर्णप्रिय तो होते ही हैं।

ऐसा ही एक गीत मैं आपको सुनाना चाहता हूँ, जो शायद अभी तक रिलीज भी नहीं हुई है, फिल्म दसविदानिया का है, फिल्म के संगीतकार और गायक कैलाश खैर है। यह एक गीत सुनिये… माँ, मेरी माँ.. मम्मा।

इस गीत को आप आंखे बंद कर ध्यान से और शास्त्रीय संगीत के पैमाने में फिट किये बिना सुनें। सुनिये और बताइये क्या वाकई अच्छे गीत बनना बंद हो गये हैं? क्या इस गीत की लय उपयुक्त नहीं है? क्या बोल सुंदर नहीं है? मैं आपको इस गीत को यहाँ सुनवाने की बजाय एक दूसरे लिंक कर क्लिक करवा रहा हूँ।

मेरी माँ….मम्मा

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हिन्दु आतंकवादी एक और कंलक का कोशिश

14 नवम्बर 2004 दिपावली के ठीक पहले शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र स्वामी को ठीक पुजा करते समय गिरफ्तार किया गया सेकुलर के द्वारा यह किसी विश्व विजय से कम नही था जम कर खुशीयाँ मनायी गया। इस खुशी के माहौल को दुगना करने में मिडीया का भरपुर सहयोग मिला मिडीया पुलिस और खूफिया ऎजेन्सी से ज्यादा तेज निकला और डेली एक नया सबूत लाकर टी.वी समाचार के माध्यम से दिखाया जाने लगा हिन्दु साधु-संत को जम कर गालिया दिया जाने लगा सभी को हत्यारा कहा जाने लगा। लेकिन सेकुलर और मिडीया का झुठ ज्यादा दिन तक नही टिका और शकराचार्य स्वामी जयेन्द्र स्वामी के खिलाफ सेकुलर और मिडीया कुछ भी नहीं साबित कर रहा था, सभी आरोप को बकवास करार दिया गया, उच्चतम न्यायालय का फैसला शकराचार्य स्वामी जयेन्द्र स्वामी के पक्ष में आया उन्हे हत्या के आरोप से जमानत के द्वारा रिहा कर दिया गया।

इस दीवाली हिन्दुओ के उपर एक और कंलक लगाने का कोशिश किया जा रहा हिन्दु आतंकवादी का बैगर किसी सबूत के एक हिंदू साध्वी को मालेगांव विस्फोटों में उसकी कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के पास सबूत नही है। जिस मोटर बाइक का उपयोग विस्फोट में करने के बारे में बताया जा रहा है उस बाइक को कुछ साल पहले बेच दिया गया था। स्पेशल पुलिस रविवार को साध्वी प्रज्ञा सिंह के किराए के मकान पर छापा मारा, लेकिन वहाँ से कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला। मुंबई एटीएस प्रदेश में साध्वी प्रज्ञा से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जानकारी एकत्रित कर रही है। लेकिन अभी तक पुलिस को कोई खास सफलता मिला लगता नही है। लेकिन इस मुद्दे पर काग्रेसी और उसके सहयोगी के द्वारा झुठा प्रचार सुरु कर दिया गया है । चुनाव से पहले खुफिया ऎजेन्सी और पुलिस को अपने चुनाव ऎजेन्ट के रुप में काम करवाया जा करवा दिया है। काग्रेस के नेता और उनके सहयोगी दल इसी कोशीश में लगे हैं कि किस हिन्दु संघठन को चुनाव तक हिन्दु आतंकवादी का तगमा लगा कर रखा जाये जिससे चुनाव में फायदा उठाया जा सके।

कांग्रेस सरकार इस पांच साल में इस देश को क्या दिया है। इस सरकार के दौरान सबसे ज्यादा मुस्लिम आतंकी का भयावह चेहरा हिन्दुस्तान देखा है। आंतकी को सरक्षण देने के लिये पोटा हटा दिया गया। परमाणु करार के द्वारा सरकार अपना परमाणु और रक्षा निती अमेरिका के हाथ में गिरवी रख दिया है। आखिर कौन सा चेहरा मुंह कांग्रेस उन किसानो के पास वोट मागने जायेगा जिसके परिजन आत्महत्या कर चुके हैं। हिन्दुस्तान का अर्थव्यवस्था आज जिस गति से निचे गिर रहा है उतना तेजी से शायद सचिन और धोनी ने रन भी नही बनाता है। हमारे अमेरिकन स्कालर प्रधानमंत्री और उनके सहयोगी वित्त मंत्री के द्वारा लाख भरोसा और आश्वासन के बाबजुद भी अर्थव्यवस्था का गिरना बन्द नही हो रहा है अगर हालत यही रहा तो 1-2 महीना के अन्दर हिन्दुस्तान में भुखमरी सुरु हो जायेगा।

सोचने योग्य बाते हैं आखिर हिन्दु अपने देश हिन्दुस्तान में क्यों बम विस्फोट करेंगे। उन्हें ना तो किसी देवता के द्वारा जिहाद करने को कहा गया है। नही हिन्दु इस देश को दारुल हिन्दुस्तान बनाना चाहता है। हिन्दु के किसी धर्म ग्रन्थ में कही भी यैसा भी नही लिखा है कि दुसरे धर्म वालो को तलवार से सर कलम कर दो। उसके बच्चों को उसी के सामने पटक कर मार दो उसकी बहन और बेटी का बलात्कार करो। किसी हिन्दु धर्मगुरु ने मंदिर के उपर चढकर अपने भक्तों को कभी नही कहा होगा की तुम्हे अपने घर में हथियार रखना जरुरी है और हिन्दु जिहाद के नाम पर चन्दाँ इकट्ठा कर के आतंकवादीयों को सुरक्षा मुहैया करना है आतंकवादीयों को अपने घर में पनाह देना है। और उसे न तो किसी आतंकवादी देश के द्वारा छ्दम युद्ध लड़ने के लिये पैसा मिलता है। आखिर क्या कारण है कि हिन्दु अपने घर को तवाह करना चाहते हैं। कोई कारण समझ में नही आता है सिर्फ इतना ही समझ में आरहा है कि हिन्दु आतंकवाद का डर दिखा कर कुछ मुस्लिम तुस्टिकरण में लिप्त, आतंकवादियों के सहयोगी राजनिती पार्टी को चुनाव में फायदा होगा। और कोई कारण नही है इस हिन्दु आतंकवादी का।

सत्यमेव जयते के सिद्धान्त का पालन करते हुये हिन्दु इसी आशा में बैढे हैं कि जिस तरह से शकराचार्य स्वामी जयेन्द्र स्वामी को न्यायालय के द्वारा बाइज्जत बरी किया गया उसी तरह इस साध्वी प्रज्ञा सिंह भी एक दिन इज्जत के साथ जेल से रिहा होगी और तथाकथित सेकुलरिज्म का नकाव पहने, समाचार के नाम पर दलाली करने बाले मिडीया के गाल में तमाचा मारते हुये। फिर से इस देश में अपने ओजस्वी भाषण, देशभक्ती कार्य के द्वारा इस देश को परम वैभव में पहुचाने के कार्य में लग जायेगी।

http://ckshindu.blogspot.com

>अगले 6 माह हिन्दुओं के लिये अपमानजनक और हिन्दू संगठनों के लिये परीक्षा के होंगे…

>Hindu Organizations and Hindu Bashing for General Elections in India
मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी ने जब “राष्ट्रीय अनेकता परिषद” में सांप्रदायिकता का राग अलापा था उससे भी पहले से कांग्रेस में आत्ममंथन का दौर शुरु हो चुका था। आतंकवाद काबू में नहीं आ रहा, महंगाई आसमान छू रही है, शेयर मार्केट तलछटी में बैठ गया है, नौकरियाँ छिन रही हैं, केन्द्र की कांग्रेस सरकार जैसे-तैसे अमरसिंह जैसों के सहारे पर अपने दिन काट रही है। ऐसे में कांग्रेस और “सेकुलरों” को चिंता खाये जा रही है अगले आम चुनावों की। उन्हें भाजपा के सत्ता में लौटने का खतरा महसूस हो रहा है, इसलिये यह तय किया गया है कि पहले चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को पटखनी दी जाये और फ़िर लोकसभा के चुनावों में उतरा जाये।

“अनेकता परिषद” में जानबूझकर आतंकवाद का मुद्दा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, लेकिन “सांप्रदायिकता” पर जमकर हल्ला मचाया गया, उसी समय आभास हो गया था कि अब चुनाव सिर पर आ गये हैं और कांग्रेस, “सेकुलर” तथा उनकी कठपुतली मीडिया सभी एक सुर में हिन्दुओं, हिन्दुत्व और हिन्दू संघटनों पर हमला करने वाले हैं। हवा में अचानक एक शब्द सुनाई देने लगा है, “हिन्दू आतंकवाद”, साध्वी प्रज्ञा सिंह और उनके साथी गिरफ़्तार किये गये, फ़िर खबरें छापी जाने लगी हैं कि “हिन्दू कट्टरपंथियों को भी विदेशों से बड़ी मात्रा में धन मिलता रहा है…”, विश्व हिन्दू परिषद पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग भी जोर-शोर से उठने लगी है, कहने का तात्पर्य यह है कि बीते एक महीने में ही केन्द्र की कांग्रेस सरकार अचानक सक्रिय हो गई है, कानून-व्यवस्था चाक-चौबन्द करने के लिये कमर कसने लगी है, हिन्दुओं को बदनाम करने की साजिश शुरु हो चुकी है। यह सब आने वाले आम चुनावों का भय है और कुछ नहीं… इसलिये आने वाले अगले छह माह हिन्दुओं के लिये बेहद अपमानजनक और हिन्दूवादी संगठनों के लिये परीक्षा की घड़ी साबित होने वाले हैं।

सभी को याद होगा कैसे गत गुजरात चुनावों के ऐन पहले सारा का सारा बिका हुआ मीडिया नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ जहर उगलने लगा था, लगभग 3-4 माह तक लगातार नरेन्द्र मोदी को, उनकी नीतियों को, अहमदाबाद के दंगों को, भाजपा को, प्रवीण तोगड़िया को, संघ को सोच-समझकर निशाना बनाया गया था। NDTV जैसे “सेकुलर”(?) चैनल लगातार अपने-अपने महान पत्रकारों को गुजरात भेजकर नकली रिपोर्टिंग करवाते रहे, जब नतीजा सामने आया और मोदी भारी बहुमत से फ़िर मुख्यमंत्री बन गये तो सभी लोग वापस अपने-अपने बिलों में घुस गये। लगभग यही रणनीति इन चार विधानसभा चुनावों के पहले से ही शुरु कर दी गई है, और “हिन्दू आतंकवाद” नाम का शब्द इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है। बटला हाऊस पर मंडराते गिद्धों से आतंकित कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों को गोलबन्द करने के लिये “गुजरात पैटर्न” पर काम करने का फ़ैसला लिया है। कौन कहता है कि “सिमी” और “अल-कायदा” का नेटवर्क बहुत मजबूत है? उस नेटवर्क से ज्यादा मजबूत है कांग्रेस-सेकुलर-मानवाधिकारवादी-मीडिया का मिलाजुला नेटवर्क… यकीन नहीं आता हो अगले कुछ ही दिनों में आपको इस नेटवर्क का असर महसूस होने लगेगा, शुरुआत की जा चुकी है, इलेक्ट्रानिक मीडिया, अखबार, ब्लॉग आदि के सहारे हिन्दुओं और हिन्दुत्ववादियों जमकर गरियाया जायेगा, उन्हें “जंगली बहुसंख्यक”, “आततायी”, “कट्टर”, “भेड़िये” आदि के खिताब दिये जायेंगे। मीडिया में चारों ओर “अल्पसंख्यकों पर अत्याचार” के किस्से आम हो जायेंगे, किसी बड़े हिन्दू संत या महात्मा के चरित्र पर कीचड़ या उनके बारे में कोई दुष्प्रचार किया जायेगा, आडवाणी, मोदी, विहिप, संघ आदि के बारे में अनाप-शनाप खबरें अखबारों में “प्लांट” की जाने लगेंगी… गरज कि सारे के सारे हथकण्डे अपनाये जायेंगे। NDTV, CNN-IBN, Times समूह जैसे “सेकुलर” मीडिया से कांग्रेस का मजबूत गठबंधन होने का जमकर फ़ायदा उठाया जायेगा। अफ़ज़ल गुरु को गोद में लेकर बैठने वाली कांग्रेस, भाजपा को पाठ पढ़ायेगी, सिंगूर-नन्दीग्राम में बेकसूरों को भूनने वाले वामपंथी नरेन्द्र मोदी को विकास पर लेक्चर देने लग जायेंगे, राज ठाकरे जैसे क्षुद्र स्वार्थी छुटभैये नेता कांग्रेस की छत्रछाया में मिलाजुला गेम खेलेंगे, और यदि किसी को यह सब कपोल-कल्पना मात्र लग रही हो तो वह जल्दी ही इसे वास्तविकता में बदलता हुआ देख लेगा। कांग्रेस के लिये यह आने वाले 6 महीने बहुत-बहुत महत्वपूर्ण हैं, उसके अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह लगने का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में वह “हर जरूरी” घटिया राजनैतिक कदम अवश्य उठायेगी, वरना आज कांग्रेस अकेले के दम पर सिर्फ़ आंध्रप्रदेश, हरियाणा और असम में है, हो सकता है कि कल ये भी ना रहे।

लेकिन आखिर में सभी को जनता के पास ही आना है, कोई कितने ही प्रयास कर ले आखिरी फ़ैसला तो जनता को ही करना है, हिन्दुओं के सामने विकल्प बहुत ही सीमित हैं। हालांकि जब 60 साल में कांग्रेस को पूरे देश से धकियाकर सिर्फ़ तीन-चार राज्यों में सीमित कर दिया गया है तो हो सकता है कि अगले 40 साल में कांग्रेस का कोई नामलेवा ही न रहे। 2 अक्टूबर को गाँधी जयन्ती के अवसर पर निकलने वाली प्रभात फ़ेरी में इस बार कुल 13 कांग्रेसी थे, जबकि 15-20 दिन बाद दशहरे पर निकलने वाले संघ के पथसंचलन में 130 बाल-सेवक और 1300 स्वयंसेवक ही थे। हिन्दुओं को विचारधारा का यह विशाल अन्तर लगातार और निरन्तर बनाये रखना होगा, जमीनी स्तर पर अपना काम करते रहना होगा, जिस तरह वक्त आने पर “मीडिया प्रायोजित दुष्प्रचार” को गुजरात की जनता ने जवाब दिया, वैसा ही जवाब आने वाले लोकसभा चुनाव में जनता दे तभी कोई बात बनेगी। देश को जितना बड़ा खतरा आतंकवादियों या जेहादियों से नहीं है, उतना अपने ही बीच में सेकुलर के भेष में बैठे हुए “घर के भेदियों” से है। अंग्रेजी का एक शब्द है “Enough is Enough”, तो अब भारत का स्वाभिमान जगाने तथा उसे “इंडिया” से “भारत” बनाने का समय आ रहा है… लेकिन उसके लिये सबसे पहले हिन्दुओं का एकजुट होना जरूरी है, और कुछ ताकतें इसके लिये काम करने वाले संगठनों को तोड़ना-मरोड़ना चाहती हैं…

एक बार पहले भी दीवाली के दिन ही शंकराचार्य को गिरफ़्तार करके एक खेल खेला गया था, अब भी दीवाली से ही “अनर्गल प्रचार” नाम का खेल शुरु किया गया है… सो अगले 6 माह के लिये इन “जयचन्दों” की गालियों, शब्दबाणों, उपमाओं आदि को झेलने के लिये तैयार हो जाईये… अधिकतर मुसलमान तो अपने ही भाई हैं, लेकिन यदि आप अपने देश से प्रेम करते हैं तो “कांग्रेसी और सेकुलर” नाम के दो लोगों से सावधान हो जायें…

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अगले 6 माह हिन्दुओं के लिये अपमानजनक और हिन्दू संगठनों के लिये परीक्षा के होंगे…

Hindu Organizations and Hindu Bashing for General Elections in India
मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी ने जब “राष्ट्रीय अनेकता परिषद” में सांप्रदायिकता का राग अलापा था उससे भी पहले से कांग्रेस में आत्ममंथन का दौर शुरु हो चुका था। आतंकवाद काबू में नहीं आ रहा, महंगाई आसमान छू रही है, शेयर मार्केट तलछटी में बैठ गया है, नौकरियाँ छिन रही हैं, केन्द्र की कांग्रेस सरकार जैसे-तैसे अमरसिंह जैसों के सहारे पर अपने दिन काट रही है। ऐसे में कांग्रेस और “सेकुलरों” को चिंता खाये जा रही है अगले आम चुनावों की। उन्हें भाजपा के सत्ता में लौटने का खतरा महसूस हो रहा है, इसलिये यह तय किया गया है कि पहले चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को पटखनी दी जाये और फ़िर लोकसभा के चुनावों में उतरा जाये।

“अनेकता परिषद” में जानबूझकर आतंकवाद का मुद्दा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, लेकिन “सांप्रदायिकता” पर जमकर हल्ला मचाया गया, उसी समय आभास हो गया था कि अब चुनाव सिर पर आ गये हैं और कांग्रेस, “सेकुलर” तथा उनकी कठपुतली मीडिया सभी एक सुर में हिन्दुओं, हिन्दुत्व और हिन्दू संघटनों पर हमला करने वाले हैं। हवा में अचानक एक शब्द सुनाई देने लगा है, “हिन्दू आतंकवाद”, साध्वी प्रज्ञा सिंह और उनके साथी गिरफ़्तार किये गये, फ़िर खबरें छापी जाने लगी हैं कि “हिन्दू कट्टरपंथियों को भी विदेशों से बड़ी मात्रा में धन मिलता रहा है…”, विश्व हिन्दू परिषद पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग भी जोर-शोर से उठने लगी है, कहने का तात्पर्य यह है कि बीते एक महीने में ही केन्द्र की कांग्रेस सरकार अचानक सक्रिय हो गई है, कानून-व्यवस्था चाक-चौबन्द करने के लिये कमर कसने लगी है, हिन्दुओं को बदनाम करने की साजिश शुरु हो चुकी है। यह सब आने वाले आम चुनावों का भय है और कुछ नहीं… इसलिये आने वाले अगले छह माह हिन्दुओं के लिये बेहद अपमानजनक और हिन्दूवादी संगठनों के लिये परीक्षा की घड़ी साबित होने वाले हैं।

सभी को याद होगा कैसे गत गुजरात चुनावों के ऐन पहले सारा का सारा बिका हुआ मीडिया नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ जहर उगलने लगा था, लगभग 3-4 माह तक लगातार नरेन्द्र मोदी को, उनकी नीतियों को, अहमदाबाद के दंगों को, भाजपा को, प्रवीण तोगड़िया को, संघ को सोच-समझकर निशाना बनाया गया था। NDTV जैसे “सेकुलर”(?) चैनल लगातार अपने-अपने महान पत्रकारों को गुजरात भेजकर नकली रिपोर्टिंग करवाते रहे, जब नतीजा सामने आया और मोदी भारी बहुमत से फ़िर मुख्यमंत्री बन गये तो सभी लोग वापस अपने-अपने बिलों में घुस गये। लगभग यही रणनीति इन चार विधानसभा चुनावों के पहले से ही शुरु कर दी गई है, और “हिन्दू आतंकवाद” नाम का शब्द इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है। बटला हाऊस पर मंडराते गिद्धों से आतंकित कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों को गोलबन्द करने के लिये “गुजरात पैटर्न” पर काम करने का फ़ैसला लिया है। कौन कहता है कि “सिमी” और “अल-कायदा” का नेटवर्क बहुत मजबूत है? उस नेटवर्क से ज्यादा मजबूत है कांग्रेस-सेकुलर-मानवाधिकारवादी-मीडिया का मिलाजुला नेटवर्क… यकीन नहीं आता हो अगले कुछ ही दिनों में आपको इस नेटवर्क का असर महसूस होने लगेगा, शुरुआत की जा चुकी है, इलेक्ट्रानिक मीडिया, अखबार, ब्लॉग आदि के सहारे हिन्दुओं और हिन्दुत्ववादियों जमकर गरियाया जायेगा, उन्हें “जंगली बहुसंख्यक”, “आततायी”, “कट्टर”, “भेड़िये” आदि के खिताब दिये जायेंगे। मीडिया में चारों ओर “अल्पसंख्यकों पर अत्याचार” के किस्से आम हो जायेंगे, किसी बड़े हिन्दू संत या महात्मा के चरित्र पर कीचड़ या उनके बारे में कोई दुष्प्रचार किया जायेगा, आडवाणी, मोदी, विहिप, संघ आदि के बारे में अनाप-शनाप खबरें अखबारों में “प्लांट” की जाने लगेंगी… गरज कि सारे के सारे हथकण्डे अपनाये जायेंगे। NDTV, CNN-IBN, Times समूह जैसे “सेकुलर” मीडिया से कांग्रेस का मजबूत गठबंधन होने का जमकर फ़ायदा उठाया जायेगा। अफ़ज़ल गुरु को गोद में लेकर बैठने वाली कांग्रेस, भाजपा को पाठ पढ़ायेगी, सिंगूर-नन्दीग्राम में बेकसूरों को भूनने वाले वामपंथी नरेन्द्र मोदी को विकास पर लेक्चर देने लग जायेंगे, राज ठाकरे जैसे क्षुद्र स्वार्थी छुटभैये नेता कांग्रेस की छत्रछाया में मिलाजुला गेम खेलेंगे, और यदि किसी को यह सब कपोल-कल्पना मात्र लग रही हो तो वह जल्दी ही इसे वास्तविकता में बदलता हुआ देख लेगा। कांग्रेस के लिये यह आने वाले 6 महीने बहुत-बहुत महत्वपूर्ण हैं, उसके अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह लगने का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में वह “हर जरूरी” घटिया राजनैतिक कदम अवश्य उठायेगी, वरना आज कांग्रेस अकेले के दम पर सिर्फ़ आंध्रप्रदेश, हरियाणा और असम में है, हो सकता है कि कल ये भी ना रहे।

लेकिन आखिर में सभी को जनता के पास ही आना है, कोई कितने ही प्रयास कर ले आखिरी फ़ैसला तो जनता को ही करना है, हिन्दुओं के सामने विकल्प बहुत ही सीमित हैं। हालांकि जब 60 साल में कांग्रेस को पूरे देश से धकियाकर सिर्फ़ तीन-चार राज्यों में सीमित कर दिया गया है तो हो सकता है कि अगले 40 साल में कांग्रेस का कोई नामलेवा ही न रहे। 2 अक्टूबर को गाँधी जयन्ती के अवसर पर निकलने वाली प्रभात फ़ेरी में इस बार कुल 13 कांग्रेसी थे, जबकि 15-20 दिन बाद दशहरे पर निकलने वाले संघ के पथसंचलन में 130 बाल-सेवक और 1300 स्वयंसेवक ही थे। हिन्दुओं को विचारधारा का यह विशाल अन्तर लगातार और निरन्तर बनाये रखना होगा, जमीनी स्तर पर अपना काम करते रहना होगा, जिस तरह वक्त आने पर “मीडिया प्रायोजित दुष्प्रचार” को गुजरात की जनता ने जवाब दिया, वैसा ही जवाब आने वाले लोकसभा चुनाव में जनता दे तभी कोई बात बनेगी। देश को जितना बड़ा खतरा आतंकवादियों या जेहादियों से नहीं है, उतना अपने ही बीच में सेकुलर के भेष में बैठे हुए “घर के भेदियों” से है। अंग्रेजी का एक शब्द है “Enough is Enough”, तो अब भारत का स्वाभिमान जगाने तथा उसे “इंडिया” से “भारत” बनाने का समय आ रहा है… लेकिन उसके लिये सबसे पहले हिन्दुओं का एकजुट होना जरूरी है, और कुछ ताकतें इसके लिये काम करने वाले संगठनों को तोड़ना-मरोड़ना चाहती हैं…

एक बार पहले भी दीवाली के दिन ही शंकराचार्य को गिरफ़्तार करके एक खेल खेला गया था, अब भी दीवाली से ही “अनर्गल प्रचार” नाम का खेल शुरु किया गया है… सो अगले 6 माह के लिये इन “जयचन्दों” की गालियों, शब्दबाणों, उपमाओं आदि को झेलने के लिये तैयार हो जाईये… अधिकतर मुसलमान तो अपने ही भाई हैं, लेकिन यदि आप अपने देश से प्रेम करते हैं तो “कांग्रेसी और सेकुलर” नाम के दो लोगों से सावधान हो जायें…

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अगले 6 माह हिन्दुओं के लिये अपमानजनक और हिन्दू संगठनों के लिये परीक्षा के होंगे…

Hindu Organizations and Hindu Bashing for General Elections in India
मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी ने जब “राष्ट्रीय अनेकता परिषद” में सांप्रदायिकता का राग अलापा था उससे भी पहले से कांग्रेस में आत्ममंथन का दौर शुरु हो चुका था। आतंकवाद काबू में नहीं आ रहा, महंगाई आसमान छू रही है, शेयर मार्केट तलछटी में बैठ गया है, नौकरियाँ छिन रही हैं, केन्द्र की कांग्रेस सरकार जैसे-तैसे अमरसिंह जैसों के सहारे पर अपने दिन काट रही है। ऐसे में कांग्रेस और “सेकुलरों” को चिंता खाये जा रही है अगले आम चुनावों की। उन्हें भाजपा के सत्ता में लौटने का खतरा महसूस हो रहा है, इसलिये यह तय किया गया है कि पहले चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को पटखनी दी जाये और फ़िर लोकसभा के चुनावों में उतरा जाये।

“अनेकता परिषद” में जानबूझकर आतंकवाद का मुद्दा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, लेकिन “सांप्रदायिकता” पर जमकर हल्ला मचाया गया, उसी समय आभास हो गया था कि अब चुनाव सिर पर आ गये हैं और कांग्रेस, “सेकुलर” तथा उनकी कठपुतली मीडिया सभी एक सुर में हिन्दुओं, हिन्दुत्व और हिन्दू संघटनों पर हमला करने वाले हैं। हवा में अचानक एक शब्द सुनाई देने लगा है, “हिन्दू आतंकवाद”, साध्वी प्रज्ञा सिंह और उनके साथी गिरफ़्तार किये गये, फ़िर खबरें छापी जाने लगी हैं कि “हिन्दू कट्टरपंथियों को भी विदेशों से बड़ी मात्रा में धन मिलता रहा है…”, विश्व हिन्दू परिषद पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग भी जोर-शोर से उठने लगी है, कहने का तात्पर्य यह है कि बीते एक महीने में ही केन्द्र की कांग्रेस सरकार अचानक सक्रिय हो गई है, कानून-व्यवस्था चाक-चौबन्द करने के लिये कमर कसने लगी है, हिन्दुओं को बदनाम करने की साजिश शुरु हो चुकी है। यह सब आने वाले आम चुनावों का भय है और कुछ नहीं… इसलिये आने वाले अगले छह माह हिन्दुओं के लिये बेहद अपमानजनक और हिन्दूवादी संगठनों के लिये परीक्षा की घड़ी साबित होने वाले हैं।

सभी को याद होगा कैसे गत गुजरात चुनावों के ऐन पहले सारा का सारा बिका हुआ मीडिया नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ जहर उगलने लगा था, लगभग 3-4 माह तक लगातार नरेन्द्र मोदी को, उनकी नीतियों को, अहमदाबाद के दंगों को, भाजपा को, प्रवीण तोगड़िया को, संघ को सोच-समझकर निशाना बनाया गया था। NDTV जैसे “सेकुलर”(?) चैनल लगातार अपने-अपने महान पत्रकारों को गुजरात भेजकर नकली रिपोर्टिंग करवाते रहे, जब नतीजा सामने आया और मोदी भारी बहुमत से फ़िर मुख्यमंत्री बन गये तो सभी लोग वापस अपने-अपने बिलों में घुस गये। लगभग यही रणनीति इन चार विधानसभा चुनावों के पहले से ही शुरु कर दी गई है, और “हिन्दू आतंकवाद” नाम का शब्द इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है। बटला हाऊस पर मंडराते गिद्धों से आतंकित कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों को गोलबन्द करने के लिये “गुजरात पैटर्न” पर काम करने का फ़ैसला लिया है। कौन कहता है कि “सिमी” और “अल-कायदा” का नेटवर्क बहुत मजबूत है? उस नेटवर्क से ज्यादा मजबूत है कांग्रेस-सेकुलर-मानवाधिकारवादी-मीडिया का मिलाजुला नेटवर्क… यकीन नहीं आता हो अगले कुछ ही दिनों में आपको इस नेटवर्क का असर महसूस होने लगेगा, शुरुआत की जा चुकी है, इलेक्ट्रानिक मीडिया, अखबार, ब्लॉग आदि के सहारे हिन्दुओं और हिन्दुत्ववादियों जमकर गरियाया जायेगा, उन्हें “जंगली बहुसंख्यक”, “आततायी”, “कट्टर”, “भेड़िये” आदि के खिताब दिये जायेंगे। मीडिया में चारों ओर “अल्पसंख्यकों पर अत्याचार” के किस्से आम हो जायेंगे, किसी बड़े हिन्दू संत या महात्मा के चरित्र पर कीचड़ या उनके बारे में कोई दुष्प्रचार किया जायेगा, आडवाणी, मोदी, विहिप, संघ आदि के बारे में अनाप-शनाप खबरें अखबारों में “प्लांट” की जाने लगेंगी… गरज कि सारे के सारे हथकण्डे अपनाये जायेंगे। NDTV, CNN-IBN, Times समूह जैसे “सेकुलर” मीडिया से कांग्रेस का मजबूत गठबंधन होने का जमकर फ़ायदा उठाया जायेगा। अफ़ज़ल गुरु को गोद में लेकर बैठने वाली कांग्रेस, भाजपा को पाठ पढ़ायेगी, सिंगूर-नन्दीग्राम में बेकसूरों को भूनने वाले वामपंथी नरेन्द्र मोदी को विकास पर लेक्चर देने लग जायेंगे, राज ठाकरे जैसे क्षुद्र स्वार्थी छुटभैये नेता कांग्रेस की छत्रछाया में मिलाजुला गेम खेलेंगे, और यदि किसी को यह सब कपोल-कल्पना मात्र लग रही हो तो वह जल्दी ही इसे वास्तविकता में बदलता हुआ देख लेगा। कांग्रेस के लिये यह आने वाले 6 महीने बहुत-बहुत महत्वपूर्ण हैं, उसके अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह लगने का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में वह “हर जरूरी” घटिया राजनैतिक कदम अवश्य उठायेगी, वरना आज कांग्रेस अकेले के दम पर सिर्फ़ आंध्रप्रदेश, हरियाणा और असम में है, हो सकता है कि कल ये भी ना रहे।

लेकिन आखिर में सभी को जनता के पास ही आना है, कोई कितने ही प्रयास कर ले आखिरी फ़ैसला तो जनता को ही करना है, हिन्दुओं के सामने विकल्प बहुत ही सीमित हैं। हालांकि जब 60 साल में कांग्रेस को पूरे देश से धकियाकर सिर्फ़ तीन-चार राज्यों में सीमित कर दिया गया है तो हो सकता है कि अगले 40 साल में कांग्रेस का कोई नामलेवा ही न रहे। 2 अक्टूबर को गाँधी जयन्ती के अवसर पर निकलने वाली प्रभात फ़ेरी में इस बार कुल 13 कांग्रेसी थे, जबकि 15-20 दिन बाद दशहरे पर निकलने वाले संघ के पथसंचलन में 130 बाल-सेवक और 1300 स्वयंसेवक ही थे। हिन्दुओं को विचारधारा का यह विशाल अन्तर लगातार और निरन्तर बनाये रखना होगा, जमीनी स्तर पर अपना काम करते रहना होगा, जिस तरह वक्त आने पर “मीडिया प्रायोजित दुष्प्रचार” को गुजरात की जनता ने जवाब दिया, वैसा ही जवाब आने वाले लोकसभा चुनाव में जनता दे तभी कोई बात बनेगी। देश को जितना बड़ा खतरा आतंकवादियों या जेहादियों से नहीं है, उतना अपने ही बीच में सेकुलर के भेष में बैठे हुए “घर के भेदियों” से है। अंग्रेजी का एक शब्द है “Enough is Enough”, तो अब भारत का स्वाभिमान जगाने तथा उसे “इंडिया” से “भारत” बनाने का समय आ रहा है… लेकिन उसके लिये सबसे पहले हिन्दुओं का एकजुट होना जरूरी है, और कुछ ताकतें इसके लिये काम करने वाले संगठनों को तोड़ना-मरोड़ना चाहती हैं…

एक बार पहले भी दीवाली के दिन ही शंकराचार्य को गिरफ़्तार करके एक खेल खेला गया था, अब भी दीवाली से ही “अनर्गल प्रचार” नाम का खेल शुरु किया गया है… सो अगले 6 माह के लिये इन “जयचन्दों” की गालियों, शब्दबाणों, उपमाओं आदि को झेलने के लिये तैयार हो जाईये… अधिकतर मुसलमान तो अपने ही भाई हैं, लेकिन यदि आप अपने देश से प्रेम करते हैं तो “कांग्रेसी और सेकुलर” नाम के दो लोगों से सावधान हो जायें…

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दीपावली की शुभकामनाएं :एक चिंतन


दीपावली की धूमधाम भरी तैयारीयों में इस बार श्रीमती गुप्ता ने डेरों पकवान बनाए सोचा मोहल्ले में गज़ब इम्प्रेशन डाल देंगी अबके बरस बात ही बात में गुप्ता जी को ऐसा पटाया की यंत्र वत श्री गुप्ता ने हर वो सुविधा मुहैय्या कराई जो एक वैभव शाली दंपत्ति को को आत्म प्रदर्शन के लिए ज़रूरी था । इस “माडल” जैसी दिखने के लिए श्रीमती गुप्ता ने साड़ी ख़रीदी गुप्ता जी को कोई तकलीफ न हुई । घर को सजाया सवारा गया , बच्चों के लिए नए कपडे यानी दीपावली की रात पूरी सोसायटी में गुप्ता परिवार की रात होनी तय थी । चमकेंगी तो गुप्ता मैडम,घर सजेगा तो हमारी गुप्ता जी का सलोने लगेंगे तो गुप्ता जी के बच्चे , यानी ये दीवाली केवल गुप्ता जी की होगी ये तय था । समय घड़ी के काँटों पे सवार दिवाली की रात तक पहुंचा , सभी ने तय शुदा मुहूर्त पे पूजा पाठ की । उधर सारे घरों में गुप्ता जी के बच्चे प्रसाद [ आत्मप्रदर्शन] पैकेट बांटने निकल पड़े । जहाँ भी वे गए सब जगह वाह वाह के सुर सुन कर बच्चे अभिभूत थे किंतु भोले बच्चे इन परिवारों के अंतर्मन में धधकती ज्वाला को न देख सके ।
ईर्ष्या वश सुनीति ने सोचा बहुत उड़ रही है प्रोतिमा गुप्ता ……. क्यों न मैं उसके भेजे प्रसाद-बॉक्स दूसरे बॉक्स में पैक कर उसे वापस भेज दूँ ………. यही सोचा बाकी महिलाओं ने और नई पैकिंग में पकवान वापस रवाना कर दिए श्रीमती गुप्ता के घर ये कोई संगठित कोशिश यानी किसी व्हिप के तहत न होकर एक आंतरिक प्रतिक्रया थी । जो सार्व-भौमिक सी होती है। आज़कल आम है …………. कोई माने या न माने सच यही है जितनी नैगेटीविटी /कुंठा इस युग में है उतनी किसी युग में न तो थी और न ही होगी । इस युग का यही सत्य है।
{इस युग में क्रान्ति के नाम पर प्रतिक्रया वाद को क्रान्ति माना जा रहा है जो हर और हिंसा को जन्म दे रहा है }
दूसरे दिन श्रीमती गुप्ता ने जब डब्बे खोले तो उनके आँसू निकल पड़े जी में आया कि सभी से जाकर झगड़ आऐं किंतु पति से कहने लगीं :-“अजी सुनो चलो ग्वारीघाट गरीबों के साथ दिवाली मना आऐं

दीपों का त्यौहार

आया देखो आया देखो दीपों का त्यौहार,
लेकर आया है ये मस्त पटाखों का संसार.

मिलकर घरवालों के संग मनालो ये त्यौहार,
पर पटाखों से ना हो पर्यावरण पर प्रहार.

मिलने का मौसम आया, महफिलें जमालो,
और अपनी खुशियों का संसार बसालो.

बच्चे जलाएंगे फुलझाडियाँ,बड़े बाटेंगे मिठाइयाँ.
मौसम लायेगा मस्त बहार, फिजाएं में जैसे शहनाइयां.

झूमेगा सारा संसार, गाएगा हर परिवार,
अब तो होगा हर जगह, खुशियों का अम्बार…

देखो यारों देखो आया दीपों का त्यौहार,
इसके आने से देखो झूम उठा संसार.

हिन्दु आतंकवादि गंदी राजनीति का गंदा खेल

मालेगांव में हुये विस्फोट के मामले में पुलिस के द्वारा हिन्दु संगठन पर लगाये गये आरोप में कितनी सच्चाई है यह तो समय आने पर मालूम होगा लेकिन कुछ प्रशन है जो दिमाग में चुभ रहा है – आतंकवादी घटना में हिन्दू की गिरफ्तारी उतनी चौंकाने वाले नहीं है जितनी उसकी टाइमिंग। आखिर अभी तक साध्वी और उनके साथ गिरफ्तार लोगों के ऊपर मकोका के तहत मामला क्यों दर्ज नहीं किया गया है और यह मामला भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत ही क्यों बनाया गया है जबकि आतंकवादियों के विरुद्ध मकोका के अंतर्गत मामला बनता है। इससे स्पष्ट है कि संगठित अपराध की श्रेणी में यह मामला नहीं आता। आज एक और तथ्य सामने आया है जो प्रमाणित करता है कि मालेगाँव विस्फोट में आरडीएक्स के प्रयोग को लेकर महाराष्ट्र पुलिस और केन्द्रीय एजेंसियों के बयान विरोधाभासी हैं। महाराष्ट्र पुलिस का दावा है कि वह घटनास्थल पर पहले पहुँची इस कारण उसने जो नमूने एकत्र किये उसमें आरडीएक्स था तो वहीं महाराष्ट्र पुलिस यह भी कहती है कि विस्फोट के बाद नमूनों के साथ छेड्छाड हुई तो वहीं केन्द्रीय एजेंसियाँ यह मानने को कतई तैयार नहीं हैं कि इस विस्फोट में आरडीएक्स का प्रयोग हुआ उनके अनुसार इसमें उच्चस्तर का विस्फोटक प्रयोग हुआ था न कि आरडीएक्स। इसी के साथ केन्द्रीय एजेंसियों ने स्पष्ट कर दिया है कि मालेग़ाँव और नान्देड तथा कानपुर में हुए विस्फोटों में कोई समानता नहीं है। अर्थात केन्द्रीय एजेंसियाँ इस बात की जाँच करने के बाद कि देश में हिन्दू आतंकवाद का नेटवर्क है इस सम्बन्ध में कोई प्रमाण नहीं जुटा सकी हैं।
जामिया नगर इनकाउंटर में कथित सेक्युलर लोग पुलिस के सबूतों को मानने से इनकार कर रहे है जहाँ कई राउन्ड गोली चला खतरनाक हथियार मिला लेकिन मालेगांव में पुलिस के सूत्रों के हवाले से मिली खबर पर हो-हल्ला क्यों क्या हिन्दु संघटन के पकरे गये कार्यकर्ता के साथ किसी तरह का मुठभेड़ हुआ था क्या किसी तरह का खतरनाक हथियार मिला था नही सिर्फ पुलिस के द्वारा आरोप लगायें गयें है। यह अभी तक सिद्ध नही है कि बम धमाकों में इन्ही लोगों का हाथ है। अगर ये विस्फोट करते तो क्या इतने नासमझ हैं ये कि अपना मोटर बाइक का इस्तेमाल करते। 2000 का कही से साइकल भी तो खरीद सकते थे या फिर यैसा भी नही है कि मोटर पर विस्फोट करने से असर कुछ ज्यादा होता है। कुछ दिन पहले तक मालेगाव विस्फोट का सक सिमी पर था एकाएक चुनाव नजदिक आते ही हिन्दुओं के संस्था का नाम कैसे जुड गया यह बात कुछ हजम नही हो रहा है। पुलिस इस विस्फोट में R.D.X का प्रयोग का बात कह रही थी लेकिन अभी तक किसी पुलिस बाले ने बताया नही कि इनके पास R.D.X आया कहा से किसने बेचा कहा से लाया इन्होंने। मालेगांव के अगर छोड दे तो सैकडों आतंकी बम विस्फोट हुये जिसका स्पेशल पुलिस पता नही लगा पाया लेकिन चुनाव के ठिक पहले पुलिस के ये कैसे पता चल गया कि मालेगांव में विस्फोट एक महिला साध्वि का हाथ है। सरकार जिस तरह से कुछ दिन पहले से बजरंग दल, विश्व हिन्दु परिषद पर बैन लगाना चाहता था लेकिन किसी तरह के सबूत ना मिलने पर इन संस्थाओ को काग्रेस सरकार बैन नही लगा पाया कही ये निराशा में उठाया गया यह कदम तो नही है।
अगर देखा जाये तो चुनाव में उतरने के लिये सरकार में बैठे राजनितीक दल के पास जनता के सामने मुह दिखाने लायक कुछ भी नही है। महगाई आसमान कब का छु चुका है वित्त मंत्री के बार – बार आश्वासन के बावजुद महगाई उतरने का नाम नही ले रहा है। किसानों को उपजे फसल का दाम मिल नही रहा है किसान कर्ज में दबे जा रहे हैं जिसके फलस्वरुप किसान अत्महत्या कर रहें हैं। आतंकवाद के समर्थन में सत्ताधारी नेताओं के उतरने से इन दलों पर से आम जनता का भरोसा पहले डिग चुका है। एक अदना सा आतंकवादि को फांसी तक ये सरकार नही दे पाया। पोटा जैसा कानून जो आतंक का कमर लगभग हिन्दुस्तान में तोड दिया था उस पोटा को हटा कर सरकार ने इस देश में आतंकवाद को दुबारा से फलने फुलने का मैका दिया । इस देश में अवैध रुप से रहे 5 करोड से ज्यादा बाग्लादेश जो कि आतंकवाद, चोरी, अपहरण, पाकेटमारी, डकैती जैसी घटना में संलिप्तता पाया गया है वैसे अपराधी तत्व को सिर्फ वोट राजनीति के कारण इस देश में बिठा कर रखा गया है और इनका राशन कार्ड, वोटिग कार्ड बना कर सरकार अघोषित रुप से इन्हें नागरिकता प्रदान कर रही है।
आज हिन्दुस्तान का हर एक कोना जल रहा है काग्रेस प्रायोजित उत्तर भारतीयों का पिटाई जिसमें अभी तक कितनों का जान जा चुका है और सरकार ताली बजा कर मजा ले रहा है। नार्थ इस्ट में बिहार के मजदुरों का हत्या। अमरनाथ जमीन विबाद में सरकार का चेहरा बेनकाब हो गया। राम सेतु जिस से देश को एक पैसे भी फायदा नही होने बाला है उस राम सेतु को तोड़ने के लिये सरकार जिस तरह से ललायित दिख रही है उस से पता चलता है दाल में जरुर कुछ काला है। राम का अस्तित्व नही है राम मनगंठत है लेकिन मुस्लामानों को हज के लिये हजार तरह का सुविधा और सव्सिडी दे कर काग्रेस पहले से ही हिन्दु के वोट से हाथ धो चुका है।
अब क्या करें चुनाव में जाना है और जनता को मुह भी दिखाना है दोबारा सत्ता में आने का सपना भी देखना है। अब बस एक तरीका है हिन्दु आतंकवादि । हिन्दुओ को निचा दिखा कर जनता को भ्रम में डालकर हिन्दू विरोधी माहौल तैयार करके मुस्लमानों को भय दिखा कर मुस्लिम तुष्टिकरण के द्वारा समाज को अगरे और पिछडे़ में बाँट कर दोबारा सत्ता मिल सकता है।
http://ckshindu.blogspot.com

>कजरारी मतवारी मदभरी दो अखियां- राजकुमारी की आवाज में

>कुछ दिनों पहले मैने एक पोस्ट में जिक्र किया था खान मस्ताना का।  जो एक बहुत ही उम्दा  गायक और संगीतकार होते हुए भी अपने  अंतिम दिन   भीख मांगते हुए गुजारे। ऐसी ही एक और गायिका थी राजकुमारी। राजकुमारी जी  के भी अपने जीवन के अंतिम दिन बहुत ही बुरे गुजरे।
राजकुमारी  उन कलाकारों में से एक थी जिन पर किसी दूसरी गायिका  की आवाज का प्रभाव दिखाई- सुनाई नहीं पड़ता। उनकी अपनी एक सुन्दर शैली थी। जिस शैली में राजकुमारी जीने बहुत ही सुन्दर गीत गाये।
महल फिल्म के  गीतों ने लताजी  को तो प्रसिद्धी के शिखर पर बिठा दिया पर राजकुमारी जी को वो  मुकाम कभी हासिल नहीं हुआ।  महल फिल्म में राजकुमारी ने जो गीत गाये उनमें  से खास हैं , एक तीर चला और  घबरा के जो हम सर को   टकरायें तो  अच्छा हो.., चुन चुन घुंघरवा  (जौहरा बाई के  साथ)
परन्तु आज मैं आपको एक दूसरी फिल्म का गीत सुनवाने जा रहा हूँ यह फिल्म है “नव बहार” यह फिल्म 1952  में इस फिल्म का संगीत दिया है स्व. रोशन ने।
ग्रेटा मेमसाब ने अपने ब्लॉग में इस फिल्म की पूरी सचित्र जानकारी दी है । फिल्म का ज्यादा वर्णन मैने यहां  नहीं किया है सो आप   इस लिंक पर जाकर फिल्म की कहानी पढ़ सकते हैं और चित्र भी देख सकते हैं।
मेमसाब Nau Bahar (1952)
आईये गाना सुनते और गुनगुनाते हैं।

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कजरारी  मतवारी मदभरी दो अखियां
पिया तोरी दो अंखिया
कजरारी  मतवारी मदभरी दो अखियां
पिया तोरी इन अखिंयन में 
बैठ मैने के देखी सब दुनियाँ
पिया तोरी दो अखियां
कजरारी…पिया तोरी दो अखियां
जैसे नीलकमल की कलियाँ
जैसे भँवर मतवाले
प्रीत की अन्जानी नगरी से
दो अन्जाने तारे
रंगरस की गलियाँ
पिया तोरी मतवारी  मतवारी मदभरी
कजरारी

आलाप  (कुलदीप कौर)
चपल नैन चप लागिन चमके
चंद्रपोर सी लच लच चच
अधर धरत पग धरन धरत यूं नाचत है ब्रज नारी
ततत थितता थितता थई -३

तेरी अखियंन में चंचल सागर
डूब के तर गया जियरा -२
तोरे नैनन के नीलगगन में
खो गया मेरा हियरा -२
मैं खोजूं  दिन रतियां
पिया तोरी
मतवारी मदभरी दो अखियां
कजरारी  मतवारी मदभरी दो अखियां
पिया तोरी इन अखियंन में बैठ के
देखी मैने सब दुनियाँ
पिया तोरी…..कजरारी..
मदभरी दो अखियां
पिया  तोरी कजरारी मतवारी
मदभरी दो अखियां-२

राजकुमारी के कुछ और गीत यहां सुनिये

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