मुश्किल है तो बस शरूआत करना

किसी कार्य की शुरूआत करना बहुत ही कठिन होता है । मन में तरह के सवाल उठते हैं , नयापन से कुछ घबराहट भी होती है । हम अपने नये कार्य को लेकर चिंतित भी रहते है । जहन में ये भी बात रहती है कि जो मैं कर रहा हूँ वह कैसा ? सफलता मिलेगी या नहीं याफिर मैं इसे पूरा भी कर पाऊंगा कि नहीं। इसी जद्दोजहद के बीच इंसान का आत्मविश्वास और कार्य के प्रति लगन की भावना उसे नये कार्य को करने के लिए प्रेरित करती है । बदलाव इंसान की जरूरत है पर बदलाव का क्रमिक रूप से होना बहुत ही जरूरी है एकाएक परिवर्तन को हम सही से अपना नहीं पाते है याफिर मुश्किल से सहेज पाते है ।

इस लिये जरूरत है तो बस एक कदम आगे बढ़ाने की । रास्ते खुद ब खुद बनते जायेगें ।

3 Comments

  1. श्रीकांत पाराशर said,

    October 12, 2008 at 4:36 am

    Bilkul satya likha hai aapne.poorn yatharth. meri rachna par aapki tippani ke liye dhanywad. vaise main chhandbaddh kavita nahin likhta hun, bas kabhi kabhi thoda prayas karta hun. mooltah main lekh likhta hun.aapne nishpaksh roop se tippani di to achha hi laga. dhanywad.

  2. प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said,

    October 12, 2008 at 7:39 am

    “जरूरत है तो बस एक कदम आगे बढ़ाने की । रास्ते खुद ब खुद बनते जायेगें “

    सहमत हूँ/

  3. विनय said,

    October 13, 2008 at 8:48 am

    shubhkaamanayein hamaari aapake saath hain…


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