>जो हैं तकदीरवाले वही कुर्बान होते हैं.. लताजी की एक गज़ल

>कोठे पर गाये जाने वाले गीत हमने पहले भी सुने हैं। लीजिये आज एक मधुर गीत सुनिये फिल्म जीवन मृत्यु से। गाया है लताजी ने , लिखा है आनन्द बक्षी ने और संगीतकार हैं लक्ष्मीकांत प्यारे लाल।

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ज़माने में अजी ऐसे कई नादान होते हैं
वहाँ ले जाते हैं कश्ती जहाँ तूफ़ान होते हैं
शमा की बज़्म में आ कर के परवाने समझते हैं
यहीं पर उम्र गुज़रेगी यह दीवाने समझते हैं
मगर इक रात के
हाँ हाँ.. मगर एक रात के ये तो फ़क़त मेहमान होते हैं
ज़माने में

मोहब्बत सबकी महफ़िल में शमा बन कर नहीं जलती
हसीनों की नज़र सब पे छुरी बन कर नहीं चलती
जो हैं तक़दीर वाले बस वही क़ुर्बान होते हैं
ज़माने में

डुबो कर दूर साहिल से नज़ारा देखनेवाले
लगा कर आग चुप के से तमाशा देखनेवाले
तमाशा आप बनते हैं तो क्यों हैरान होते हैं
ज़माने में


7 Comments

  1. Anonymous said,

    October 18, 2008 at 8:28 am

    >geet jindgi ke dukhon ko kam karten hain ,aaj ise sun kar khusgawaar mahsoos hoon badhai

  2. Manoshi said,

    October 18, 2008 at 3:12 pm

    >क्या बात है।

  3. October 18, 2008 at 4:27 pm

    >बहुत सुन्दर शायरी है इस गीत मै, बहुत ही गहरीधन्यवाद इस सुन्दर गीत को सुनाने के लिये

  4. Adnan said,

    October 22, 2008 at 9:52 am

    >Umda ghazal hai Doctor sahab.

  5. November 11, 2008 at 4:35 pm

    >Geet Sunkar Pagal Ho gaya

  6. MUFLIS said,

    November 15, 2008 at 3:35 am

    >lataji ka ye geet apne aap mei anootha hai..film mei isse “zeb.rehmaan” pr filmaya gaya tha, unhone barhi nfaasat se bina gair.zroori thumke lgaaye sirf haav.bhaav aur aankho ki zbaaN se pesh karne ki kaamyaab koshish ki thi. Khair ! aapko dheroN mubaarakbaad !!! —MUFLIS—

  7. A S MURTY said,

    August 11, 2009 at 6:39 pm

    >सागरजी कोटि कोटि प्रणाम इस गाने को सुनवाने के लिए. आनंद बक्षी जी का कलाम और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल को जोड़ी के साथ लता जी की सुरीली आवाज़ ने इस लाजवाब ग़ज़ल में चार चाँद लगा दिए हैं. यह मेरा पसंदीदा गाना रहा है और जितना भी इसे सुने, फिर भी प्यास नहीं बुझती. पार्शव में हो रहे शोर शराबे को फिल्म की नज़र से देखें तो जायज़ दीखता है, परन्तु सिर्फ गाने के हद तक बगैर इस शोर गुल के इसमें ज्यादा निखार आ सकती थी. बोहत बोहत शुक्रिया.ऐ एस मूर्ती


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