>कजरारी मतवारी मदभरी दो अखियां- राजकुमारी की आवाज में

>कुछ दिनों पहले मैने एक पोस्ट में जिक्र किया था खान मस्ताना का।  जो एक बहुत ही उम्दा  गायक और संगीतकार होते हुए भी अपने  अंतिम दिन   भीख मांगते हुए गुजारे। ऐसी ही एक और गायिका थी राजकुमारी। राजकुमारी जी  के भी अपने जीवन के अंतिम दिन बहुत ही बुरे गुजरे।
राजकुमारी  उन कलाकारों में से एक थी जिन पर किसी दूसरी गायिका  की आवाज का प्रभाव दिखाई- सुनाई नहीं पड़ता। उनकी अपनी एक सुन्दर शैली थी। जिस शैली में राजकुमारी जीने बहुत ही सुन्दर गीत गाये।
महल फिल्म के  गीतों ने लताजी  को तो प्रसिद्धी के शिखर पर बिठा दिया पर राजकुमारी जी को वो  मुकाम कभी हासिल नहीं हुआ।  महल फिल्म में राजकुमारी ने जो गीत गाये उनमें  से खास हैं , एक तीर चला और  घबरा के जो हम सर को   टकरायें तो  अच्छा हो.., चुन चुन घुंघरवा  (जौहरा बाई के  साथ)
परन्तु आज मैं आपको एक दूसरी फिल्म का गीत सुनवाने जा रहा हूँ यह फिल्म है “नव बहार” यह फिल्म 1952  में इस फिल्म का संगीत दिया है स्व. रोशन ने।
ग्रेटा मेमसाब ने अपने ब्लॉग में इस फिल्म की पूरी सचित्र जानकारी दी है । फिल्म का ज्यादा वर्णन मैने यहां  नहीं किया है सो आप   इस लिंक पर जाकर फिल्म की कहानी पढ़ सकते हैं और चित्र भी देख सकते हैं।
मेमसाब Nau Bahar (1952)
आईये गाना सुनते और गुनगुनाते हैं।

http://sagarnahar.googlepages.com/player.swf
Download Link
कजरारी  मतवारी मदभरी दो अखियां
पिया तोरी दो अंखिया
कजरारी  मतवारी मदभरी दो अखियां
पिया तोरी इन अखिंयन में 
बैठ मैने के देखी सब दुनियाँ
पिया तोरी दो अखियां
कजरारी…पिया तोरी दो अखियां
जैसे नीलकमल की कलियाँ
जैसे भँवर मतवाले
प्रीत की अन्जानी नगरी से
दो अन्जाने तारे
रंगरस की गलियाँ
पिया तोरी मतवारी  मतवारी मदभरी
कजरारी

आलाप  (कुलदीप कौर)
चपल नैन चप लागिन चमके
चंद्रपोर सी लच लच चच
अधर धरत पग धरन धरत यूं नाचत है ब्रज नारी
ततत थितता थितता थई -३

तेरी अखियंन में चंचल सागर
डूब के तर गया जियरा -२
तोरे नैनन के नीलगगन में
खो गया मेरा हियरा -२
मैं खोजूं  दिन रतियां
पिया तोरी
मतवारी मदभरी दो अखियां
कजरारी  मतवारी मदभरी दो अखियां
पिया तोरी इन अखियंन में बैठ के
देखी मैने सब दुनियाँ
पिया तोरी…..कजरारी..
मदभरी दो अखियां
पिया  तोरी कजरारी मतवारी
मदभरी दो अखियां-२

राजकुमारी के कुछ और गीत यहां सुनिये

6 Comments

  1. Parul said,

    October 23, 2008 at 1:17 pm

    >bahut sundar prastuti sagar ji..aabhaar…

  2. October 23, 2008 at 6:50 pm

    >बहुत ही सुन्दर, मेने कई गीत सुने है इन के.धन्यवाद सुन्दर गीत सुनाने के लिये

  3. मीत said,

    October 24, 2008 at 5:10 am

    >क्या बात है सागर भाई. मुद्दत के बाद सुनने को मिला. ये कमाल सिर्फ़ आप ही के बस का है, जारी रहे… हम मुन्तज़िर हैं.

  4. मीत said,

    October 24, 2008 at 5:10 am

    >क्या बात है सागर भाई. मुद्दत के बाद सुनने को मिला. ये कमाल सिर्फ़ आप ही के बस का है, जारी रहे… हम मुन्तज़िर हैं.

  5. Yashu.K said,

    October 30, 2008 at 8:26 am

    >:d i dont know to read hindi.. so sorry i can comment on thes 😦 but thanks for visiting my blog! 🙂

  6. MUFLIS said,

    November 14, 2008 at 12:34 pm

    >saagar bhai..vaaq`aee Rajkumari ke geet sun kr dili sukoon haasil hua, aapko dheroN mubaarakbaad. Film `mehal` ka geet “ghabra ke jo hm sr ko..” ek thumri.numa bahut hi umda geet hai. Ek guzaarish hai aapse, kya film PANNA ka geet “kaali ghataa chhai o raja kaali ghataa chhaai…” sunvaane ki zehmat gwara farmaaeiNge..baRhi meharbaani hogi. —MUFLIS—


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