>अगले 6 माह हिन्दुओं के लिये अपमानजनक और हिन्दू संगठनों के लिये परीक्षा के होंगे…

>Hindu Organizations and Hindu Bashing for General Elections in India
मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी ने जब “राष्ट्रीय अनेकता परिषद” में सांप्रदायिकता का राग अलापा था उससे भी पहले से कांग्रेस में आत्ममंथन का दौर शुरु हो चुका था। आतंकवाद काबू में नहीं आ रहा, महंगाई आसमान छू रही है, शेयर मार्केट तलछटी में बैठ गया है, नौकरियाँ छिन रही हैं, केन्द्र की कांग्रेस सरकार जैसे-तैसे अमरसिंह जैसों के सहारे पर अपने दिन काट रही है। ऐसे में कांग्रेस और “सेकुलरों” को चिंता खाये जा रही है अगले आम चुनावों की। उन्हें भाजपा के सत्ता में लौटने का खतरा महसूस हो रहा है, इसलिये यह तय किया गया है कि पहले चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा को पटखनी दी जाये और फ़िर लोकसभा के चुनावों में उतरा जाये।

“अनेकता परिषद” में जानबूझकर आतंकवाद का मुद्दा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, लेकिन “सांप्रदायिकता” पर जमकर हल्ला मचाया गया, उसी समय आभास हो गया था कि अब चुनाव सिर पर आ गये हैं और कांग्रेस, “सेकुलर” तथा उनकी कठपुतली मीडिया सभी एक सुर में हिन्दुओं, हिन्दुत्व और हिन्दू संघटनों पर हमला करने वाले हैं। हवा में अचानक एक शब्द सुनाई देने लगा है, “हिन्दू आतंकवाद”, साध्वी प्रज्ञा सिंह और उनके साथी गिरफ़्तार किये गये, फ़िर खबरें छापी जाने लगी हैं कि “हिन्दू कट्टरपंथियों को भी विदेशों से बड़ी मात्रा में धन मिलता रहा है…”, विश्व हिन्दू परिषद पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग भी जोर-शोर से उठने लगी है, कहने का तात्पर्य यह है कि बीते एक महीने में ही केन्द्र की कांग्रेस सरकार अचानक सक्रिय हो गई है, कानून-व्यवस्था चाक-चौबन्द करने के लिये कमर कसने लगी है, हिन्दुओं को बदनाम करने की साजिश शुरु हो चुकी है। यह सब आने वाले आम चुनावों का भय है और कुछ नहीं… इसलिये आने वाले अगले छह माह हिन्दुओं के लिये बेहद अपमानजनक और हिन्दूवादी संगठनों के लिये परीक्षा की घड़ी साबित होने वाले हैं।

सभी को याद होगा कैसे गत गुजरात चुनावों के ऐन पहले सारा का सारा बिका हुआ मीडिया नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ जहर उगलने लगा था, लगभग 3-4 माह तक लगातार नरेन्द्र मोदी को, उनकी नीतियों को, अहमदाबाद के दंगों को, भाजपा को, प्रवीण तोगड़िया को, संघ को सोच-समझकर निशाना बनाया गया था। NDTV जैसे “सेकुलर”(?) चैनल लगातार अपने-अपने महान पत्रकारों को गुजरात भेजकर नकली रिपोर्टिंग करवाते रहे, जब नतीजा सामने आया और मोदी भारी बहुमत से फ़िर मुख्यमंत्री बन गये तो सभी लोग वापस अपने-अपने बिलों में घुस गये। लगभग यही रणनीति इन चार विधानसभा चुनावों के पहले से ही शुरु कर दी गई है, और “हिन्दू आतंकवाद” नाम का शब्द इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है। बटला हाऊस पर मंडराते गिद्धों से आतंकित कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों को गोलबन्द करने के लिये “गुजरात पैटर्न” पर काम करने का फ़ैसला लिया है। कौन कहता है कि “सिमी” और “अल-कायदा” का नेटवर्क बहुत मजबूत है? उस नेटवर्क से ज्यादा मजबूत है कांग्रेस-सेकुलर-मानवाधिकारवादी-मीडिया का मिलाजुला नेटवर्क… यकीन नहीं आता हो अगले कुछ ही दिनों में आपको इस नेटवर्क का असर महसूस होने लगेगा, शुरुआत की जा चुकी है, इलेक्ट्रानिक मीडिया, अखबार, ब्लॉग आदि के सहारे हिन्दुओं और हिन्दुत्ववादियों जमकर गरियाया जायेगा, उन्हें “जंगली बहुसंख्यक”, “आततायी”, “कट्टर”, “भेड़िये” आदि के खिताब दिये जायेंगे। मीडिया में चारों ओर “अल्पसंख्यकों पर अत्याचार” के किस्से आम हो जायेंगे, किसी बड़े हिन्दू संत या महात्मा के चरित्र पर कीचड़ या उनके बारे में कोई दुष्प्रचार किया जायेगा, आडवाणी, मोदी, विहिप, संघ आदि के बारे में अनाप-शनाप खबरें अखबारों में “प्लांट” की जाने लगेंगी… गरज कि सारे के सारे हथकण्डे अपनाये जायेंगे। NDTV, CNN-IBN, Times समूह जैसे “सेकुलर” मीडिया से कांग्रेस का मजबूत गठबंधन होने का जमकर फ़ायदा उठाया जायेगा। अफ़ज़ल गुरु को गोद में लेकर बैठने वाली कांग्रेस, भाजपा को पाठ पढ़ायेगी, सिंगूर-नन्दीग्राम में बेकसूरों को भूनने वाले वामपंथी नरेन्द्र मोदी को विकास पर लेक्चर देने लग जायेंगे, राज ठाकरे जैसे क्षुद्र स्वार्थी छुटभैये नेता कांग्रेस की छत्रछाया में मिलाजुला गेम खेलेंगे, और यदि किसी को यह सब कपोल-कल्पना मात्र लग रही हो तो वह जल्दी ही इसे वास्तविकता में बदलता हुआ देख लेगा। कांग्रेस के लिये यह आने वाले 6 महीने बहुत-बहुत महत्वपूर्ण हैं, उसके अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह लगने का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में वह “हर जरूरी” घटिया राजनैतिक कदम अवश्य उठायेगी, वरना आज कांग्रेस अकेले के दम पर सिर्फ़ आंध्रप्रदेश, हरियाणा और असम में है, हो सकता है कि कल ये भी ना रहे।

लेकिन आखिर में सभी को जनता के पास ही आना है, कोई कितने ही प्रयास कर ले आखिरी फ़ैसला तो जनता को ही करना है, हिन्दुओं के सामने विकल्प बहुत ही सीमित हैं। हालांकि जब 60 साल में कांग्रेस को पूरे देश से धकियाकर सिर्फ़ तीन-चार राज्यों में सीमित कर दिया गया है तो हो सकता है कि अगले 40 साल में कांग्रेस का कोई नामलेवा ही न रहे। 2 अक्टूबर को गाँधी जयन्ती के अवसर पर निकलने वाली प्रभात फ़ेरी में इस बार कुल 13 कांग्रेसी थे, जबकि 15-20 दिन बाद दशहरे पर निकलने वाले संघ के पथसंचलन में 130 बाल-सेवक और 1300 स्वयंसेवक ही थे। हिन्दुओं को विचारधारा का यह विशाल अन्तर लगातार और निरन्तर बनाये रखना होगा, जमीनी स्तर पर अपना काम करते रहना होगा, जिस तरह वक्त आने पर “मीडिया प्रायोजित दुष्प्रचार” को गुजरात की जनता ने जवाब दिया, वैसा ही जवाब आने वाले लोकसभा चुनाव में जनता दे तभी कोई बात बनेगी। देश को जितना बड़ा खतरा आतंकवादियों या जेहादियों से नहीं है, उतना अपने ही बीच में सेकुलर के भेष में बैठे हुए “घर के भेदियों” से है। अंग्रेजी का एक शब्द है “Enough is Enough”, तो अब भारत का स्वाभिमान जगाने तथा उसे “इंडिया” से “भारत” बनाने का समय आ रहा है… लेकिन उसके लिये सबसे पहले हिन्दुओं का एकजुट होना जरूरी है, और कुछ ताकतें इसके लिये काम करने वाले संगठनों को तोड़ना-मरोड़ना चाहती हैं…

एक बार पहले भी दीवाली के दिन ही शंकराचार्य को गिरफ़्तार करके एक खेल खेला गया था, अब भी दीवाली से ही “अनर्गल प्रचार” नाम का खेल शुरु किया गया है… सो अगले 6 माह के लिये इन “जयचन्दों” की गालियों, शब्दबाणों, उपमाओं आदि को झेलने के लिये तैयार हो जाईये… अधिकतर मुसलमान तो अपने ही भाई हैं, लेकिन यदि आप अपने देश से प्रेम करते हैं तो “कांग्रेसी और सेकुलर” नाम के दो लोगों से सावधान हो जायें…

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