ये “वीरबहादुर” पाटिल साहब किसके सामने घिघिया रहे हैं???

सोचा कि मैं भी एक माइक्रो पोस्ट लिखूँ, यह तस्वीर देखिये और बताईये कि हमारे देश के “वीरबहादुर” गृहमंत्री किस महान(?) हस्ती के आगे नतमस्तक होते हुए लगभग घिघियाने की मुद्रा में झुके हैं? मुझे तो इतना ज्ञान नहीं है, इसीलिये फ़ोटो में उपस्थित सज्जनों की वेशभूषा और दाढ़ी देखकर समझ में नहीं आ रहा कि ये ईसाई धर्मगुरु हैं या कोई मुस्लिम मौलवी? किसी को नाम-पता मालूम हो तो अवश्य बतायें…

सबसे मजेदार मुद्रा है पास बैठे “स्वघोषित” महान धर्मनिरपेक्ष वामपंथी नेताओं (केरल के मुख्यमंत्री और एक अन्य मंत्री) की, जो ऐसे मुस्करा रहे हैं मानो ये तथाकथित धर्मगुरु उनके मुँह में ही कुछ डालने वाले हों… कैसी लगी ये माइक्रो-पोस्ट?

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14 Comments

  1. November 2, 2008 at 8:14 am

    करारा तमाचा है कथित धर्मनिरपेक्ष ताक़तों के मुह पर्।बधाई आपको पाटिल की बेबसी बताने के लिये।

  2. raj said,

    November 2, 2008 at 8:21 am

    क्या करें बेचारे बहुत मजबूर हैं। रीढ़ की हड्डी कमजोर पड़ गई है साहब।

  3. November 2, 2008 at 8:23 am

    धर्मगुरूओं के आगे नतमस्तक होना राजनेताओं के लिए अनोखी बात नहीं, मगर वहाँ वामपंथियों का होना हैरत जगाता है. शायद हिन्दु धर्म ही अफिम होता है.

  4. November 2, 2008 at 8:34 am

    यही सच्ची शुद्ध धर्मनिरपेक्षता है. अब अगर आप न समझें तो इस में लचीली रीढ़ की हड्डी वाले, जनता द्वारा पराजित, एक विदेशी ईसाई महिला द्वारा देश पर थोपे गए पाटिल बेचारे का क्या दोष.

  5. PD said,

    November 2, 2008 at 8:53 am

    मुझे तो बहुत बढ़िया लगी यह माइक्रो पोस्ट.. 🙂

  6. November 2, 2008 at 10:48 am

    “धर्मगुरूओं के आगे नतमस्तक होना राजनेताओं के लिए अनोखी बात नहीं, मगर वहाँ वामपंथियों का होना हैरत जगाता है. शायद हिन्दु धर्म ही अफीम होता है.”@संजय बेंगाणी “तगडी डोज”(माइक्रो कमेन्ट)

  7. Alag sa said,

    November 2, 2008 at 10:50 am

    हमें पता हो ना हो, झुकने वाले को जरूर पता है कि सामने वाले की जेब में कितने वोट हैं।

  8. mahashakti said,

    November 2, 2008 at 10:53 am

    पोस्ट तो माईक्रो है किन्तु मैक्रो की स्थिति में है। 🙂 बहुत कुछ कह गई है।

  9. November 2, 2008 at 11:00 am

    Patriarch HH Moran Mor Ignatius Zakka I IwasPatriarch of Antioch and All the EastSupreme Head of the Universal Syriac Orthodox Church-भईये, इनकी १७ अक्टूबर से २९ अक्टूबर, २००८ की भारत यात्रा में मनमोहन सिंह से लेकर लालकृष्ण अडवानी तक सब आगे पीछे घूमे तो पाटिल साहब जरा झुक कर अपने नये सूट की तारीफ करवा लिए तो क्या हुआ? इतना सा तो कह रहे हैं बेचारे कि महाराज!! आपने हमारे सूट की तारीफ की, इसके लिए आभार और साधुवाद.

  10. Vivek Gupta said,

    November 2, 2008 at 2:09 pm

    बहुत बढ़िया माइक्रो पोस्ट

  11. parth pratim said,

    November 2, 2008 at 4:27 pm

    अच्छा पोस्ट ….. संजय बेंगाणी जी की सटीक प्रतिक्रिया ……

  12. November 2, 2008 at 4:34 pm

    आप में से किसी ने नही समझा वीरबहादुर पाटील क्यों झुके है मैं समझ गया ये कह रहें है सामने दाढी बाले से कि आप अपने आदमी से कहो हिन्दुस्तान में बम विस्फोट का अन्तराल थोडा बढा़ दे इतनी जल्दी जल्दी ना किया करे।

  13. November 2, 2008 at 5:39 pm

    सटीक और पैनी निगाह पायी है आपने। साधुवाद…।

  14. November 2, 2008 at 7:42 pm

    भाई नौकरी तो बख्श दो। अब राजमाता के मायके वालों के स्वागत में इतना तो करना ही पड़्ता है!


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