“मुगलिस्तान” और “लाल गलियारा” मिलकर तोड़ेंगे भारत को… (भाग-2)

Mugalistan and Red Corridor – Threat to Indian Security-2

(भाग-1 से जारी…) कश्मीर में नागरिकों (यानी 99% मुसलमानों को) को धारा 370 के अन्तर्गत विशेषाधिकार प्राप्त हैं, इस राज्य से आयकर का न्यूनतम संग्रहण होता है। केन्द्र से प्राप्त कुल राशि का 90% सहायता और 10% का लोन माना जाता है, फ़िर भी यहाँ के लोग “भारत सरकार” को गालियाँ देते हैं और तिरंगा जलाते रहते हैं। बौद्ध बहुल इलाकों (जैसे लेह) के युवाओं को कश्मीर की सिविल सेवा से महरूम रखा जाता है। बौद्ध संगठनो ने कई बार केन्द्र को ज्ञापन देकर उनके प्रति अपनाये जा रहे भेदभाव को लेकर शिकायत की, लेकिन जैसा कि कांग्रेस की “वोट-बैंक” नीति है उसके अनुसार कोई सुनवाई नहीं होती। हालात यहाँ तक बिगड़ चुके हैं कि बौद्धों को मृत्यु के पश्चात मुस्लिम बहुल इलाके कारगिल में दफ़नाने की जगह मिलना मुश्किल हो जाता है।

अपनी आँखों के सामने भारत का नक्शा लाईये, आईये देखते हैं कि कैसे और किन-किन जिलों और इलाकों में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है, उत्तर से चलें तो कश्मीर में लगभग 98% आबादी मुस्लिम हो चुकी है, पुंछ, डोडा, बनिहाल, किश्तवार और भद्रवाह जैसे इलाके पूर्ण मुस्लिम हो चुके हैं। लद्दाख इलाके में कारगिल में मुस्लिम 70-30 के अनुपात में बहुसंख्यक हो चुके हैं। थोड़ा नीचे खिसकें तो हरियाणा-राजस्थान के मेवात इलाके में मुस्लिम आबादी 2005 में 66% हो चुकी थी। मेवात इलाके में गौ-हत्या तो एक मामूली बात बन चुकी है, लेकिन हिन्दुओं का सामाजिक बहिष्कार और उनके साथ दुर्व्यवहार भी अब आम हो चला है। हरियाणा की कांग्रेस सरकार ने चुपचाप गुड़गाँव इलाके को काट कर एक नया जिला मेवात भी बना दिया। इस इलाके में मुस्लिम परिवारों में औसत जन्म दर प्रति परिवार 12 है, और मोहम्मद ईशाक जैसे भी लोग हैं जिनके 23 बच्चे हैं और उसे इस पर गर्व(?) है। थोड़ा आगे जायें तो पुरानी दिल्ली और मलेरकोटला (पंजाब) भी धीरे-धीरे मुस्लिम बहुल बनते जा रहे हैं, इसी पट्टी में नीचे उतरते जायें तो उत्तरप्रदेश के आगरा, अलीगढ़, आजमगढ़, मेरठ, बिजनौर, मुज़फ़्फ़रनगर, कानपुर, वाराणसी, बरेली, सहारनपुर, और मुरादाबाद में भी मुस्लिम आबादी न सिर्फ़ तेजी से बढ़ रही है बल्कि गणेश विसर्जन, दुर्गा पूजा आदि उत्सवों पर जुलूसों पर होने वाले पथराव और हमलों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।

अगला दरवाजा है हमारे मीडिया दुलारे लालू का प्रदेश बिहार… जहाँ मुस्लिम आबादी 17% तक पहुँच चुकी है। भारत-नेपाल की सीमा के किनारे-किनारे लगभग 1900 मदरसे खोले जा चुके हैं। सशस्त्र सीमा पुलिस के महानिदेशक तिलक काक बताते हैं कि न सिर्फ़ बिहार में बल्कि साथ लगी नेपाल की सीमा के भीतर भी मदरसों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी आई है, यदि इन मदरसों की संख्या की तुलना मुस्लिम जनसंख्या से की जाये तो ऐसा लगेगा कि मानो न सिर्फ़ पूरी मुस्लिम बिरादरी बल्कि हिन्दू बच्चे भी इन मदरसों में पढ़ने जाने लगे हैं। काक के अनुसार यह बेहद खतरनाक संकेत है और कोई भी सामान्य बुद्धि वाला व्यक्ति कह सकता है कि मदरसों की यह संख्या गैर-आनुपातिक और अचरज में डालने वाली है। लेकिन कांग्रेस-लालू और “सेकुलरों” के कान पर जूँ भी नहीं रेंगने वाली।

सीमा प्रबन्धन की टास्क फ़ोर्स के अनुसार अक्टूबर 2000 से भारत-नेपाल सीमा पर मदरसों और मस्जिदों की बाढ़ आ गई है और ये दिन-दूनी-रात-चौगुनी तरक्की कर रहे हैं। भारत की तरफ़ वाली सीमा में दस वर्ग किलोमीटर के दायरे में 343 मस्जिदें, 300 मदरसे बने हैं जबकि नेपाल की तरफ़ 282 मस्जिदें और 181 मदरसों का निर्माण हुआ है। ये मदरसे और मस्जिदें सऊदी अरब, ईरान, कुवैत, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारी मात्रा में धन प्राप्त करती हैं। इनके मुख्य प्राप्ति स्रोत इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक (जेद्दाह) और हबीब बैंक (कराची) हैं, इनका साथ देने के लिये नेपाल की हिमालयन बैंक ने अपनी शाखायें विराटनगर और कृष्णानगर में भी खोल दी हैं। यह तो सर्वविदित है कि नेपाल के रास्ते ही भारत में सर्वाधिक नकली नोट खपाये जाते हैं, यहाँ दाऊद की पूरी गैंग इस काम में शामिल है जिसे ISI का पूरा कवर मिलता रहता है।

पश्चिम बंगाल और असम में स्थिति और भी खराब हो चुकी है। 2001 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या 28% तथा आसाम में 31% तक हो चुकी है। अरुण शौरी जी ने इंडियन एक्सप्रेस के अपने कालम में लिखा है कि – 1951 में भारत में मुस्लिम जनसंख्या 10% थी, 1971 में 10.8%, 1981 में 11.3% और 1991 में लगभग 12.1%। जबकि 1991 की ही जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले में मुस्लिम जनसंख्या 56%, नदिया में 48%, मुर्शिदाबाद में 52%, मालदा में 54% और इस्लामपुर में 60% हो चुकी थी। बांग्लादेश से लगी सीमा के लगभग 50% गाँव पूरी तरह से मुस्लिम बहुल हो चुके हैं। असम में भी सीमावर्ती जिले पूरी तरह से हरे रंग में रंगे जा चुके हैं, ऐसे में किसी बाहरी आक्रमण के वक्त हमारे सुरक्षा बल बुरी तरह से दो पाटों के बीच फ़ँस सकते हैं, और न तो तब न ही अभी हमारे परमाणु शक्ति होने का कोई फ़र्क पड़ेगा। जब आक्रमणकारियों को “लोकल सपोर्ट” मिलना शुरु हो जायेगा, तब सारी की सारी परमाणु शक्ति धरी रह जायेगी।

आँकड़े बताते हैं कि 24 परगना और दिनाजपुर से लेकर बिहार के किशनगंज तक का इलाका पूरी तरह से मुस्लिम बहुल हो चुका है। 1991 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल की कुल 7 करोड़ जनसंख्या में से लगभग 2.8 करोड़ मुस्लिम थे जिसमें से भी 1.2 करोड़ तो सिर्फ़ सीमावर्ती जिलों में रहते हैं। बंगाल और बिहार का यह गंगा-हुगली के किनारे का महत्वपूर्ण इलाका लगभग पूरी तरह से मुस्लिम देश की तरह लगने लगा है। ऐसे में देश की सुरक्षा कितनी खतरे में है यह आसानी से समझा जा सकता है। कुल मिलाकर उभरने वाली तस्वीर बेहद चिंताजनक है, 24 परगना से शुरु करके, नदिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, दिनाजपुर, रायगंज, इस्लामपुर, किशनगंज (बिहार), सिलिगुड़ी, दार्जीलिंग, न्यू-जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और आसाम में प्रवेश करते ही धुबरी, ग्वालपाड़ा, बोंगाईगाँव, कोकराझार और बारपेटा… एक बेहद सघन मुस्लिम बहुल इलाका पैर पसार चुका है।

“द पायनियर” में प्रकाशित संध्या जैन के लेख “इंडियाज़ कैंसर वार्ड” के मुताबिक, अरुणाचल के पूर्व IGP आर के ओहरी पहले ही इस सम्बन्ध में चेतावनी जारी कर चुके हैं कि पश्चिम एशिया से लेकर बांग्लादेश तक एक “इस्लामी महाराज्य” बनाने की एक व्यापक योजना गुपचुप चलाई जा रही है (“मुस्लिम बंगभूमि”(?) की माँग एक बार उठाई जा चुकी है)। बांग्लादेश के मानवाधिकार कार्यकर्ता सलाम आज़ाद कहते हैं कि “तालिबान की वापसी” के लिये बांग्लादेश सबसे मुफ़ीद जगह है। बांग्लादेश में हिन्दुओं और उनकी महिलाओं के साथ बदसलूकी और ज्यादतियाँ बढ़ती ही जा रही हैं और वहाँ की सरकार को भी इसका मूक समर्थन हासिल है। (बांग्लादेश दुनिया का एकमात्र देश होगा जो उसकी आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भारत के खिलाफ़ ही सोचता है, आखिर यह कौन सी भावना है और किस प्रकार की मानसिकता है?) नॉर्थ-ईस्ट स्टूडेण्ट ऑर्गेनाइजेशन के चेयरमैन समुज्जल भट्टाचार्य बताते हैं कि असम के लगभग 49 आदिवासी इलाके बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण अल्पमत में आ गये हैं और घुसपैठियों की यह छाया अरुणाचल, नागालैण्ड, मणिपुर और मेघालय तक फ़ैलती जा रही है। वैसे भी भारत “एक विशाल धर्मशाला” है जहाँ कोई भी, कभी भी, कहीं से भी अपनी मर्जी से आ-जा सकता है, यह गाँधीवादियों का भी देश है और करुणा की जीती-जागती मिसाल भी है जहाँ घुसपैठियों को राशन कार्ड और मतदाता परिचय पत्र भी दिये जाते हैं, कांग्रेस का एक सांसद तो भारत का नागरिक ही नहीं है, और 8000 से अधिक पाकिस्तानी नागरिक वीसा अवधि समाप्त होने के बाद भारत में कहीं “गुम” हो चुके हैं, है ना हमारा भारत एक सहनशील, “धर्मनिरपेक्ष” महान देश???। जब आडवाणी गृहमंत्री थे तब इस समस्या के हल के लिये उन्होंने एक विशेष योजना बनाई थी जो कि यूपीए सरकार के आते ही ठण्डे बस्ते में डाल दी गई।

2001 की जनगणना के अनुसार लगभग 1.6 करोड़ बांग्लादेशी इस समय भारत में अवैध निवास कर रहे हैं। एक सर्वे के अनुसार लगभग 3 लाख बांग्लादेशी प्रति दो माह में भारत मे प्रवेश कर जाते हैं। अगस्त 2000 की सीमा संगठन की रिपोर्ट के अनुसार 13 लाख से अधिक बांग्लादेशी इस समय अकेले दिल्ली में मौजूद हैं। ये “भिखारी” लोग भारत की अर्थव्यवस्था के लिये बोझा तो हैं हीं, देश की सुरक्षा के लिये भी बहुत बड़ा खतरा हैं, लेकिन वोटों के लालच में अंधे हो चुके कांग्रेस और वामपंथियों को यह बात समझायेगा कौन? भारत-बांग्लादेश की 2216 किमी सीमा पर तार लगाने का काम बेहद धीमी रफ़्तार से चल रहा है और मार्च 2007 तक सिर्फ़ 1167 किमी पर ही बाड़ लगाई जा सकी है, पैसों की कमी का रोना रोया जा रहा है, जबकि देश के निकम्मे सरकारी कर्मचारियों और सांसदों के वेतन पर अनाप-शनाप खर्च जारी है। पश्चिम बंगाल की 53 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक की स्थिति में आ चुके हैं, अब ऐसे में भला कौन सी राजनैतिक पार्टी उनसे “पंगा” लेगी? रही बात हिन्दुओं की तो वे कभी एक होकर वोट नहीं दे सकते, क्योंकि उन्हीं के बीच में “सेकुलर” नाम के जयचन्द मौजूद रहते हैं। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 45 मुस्लिम हैं, जबकि 5 मंत्री हैं, इसी प्रकार 42 लोकसभा सीटों में से 5 पर मुस्लिम सांसद हैं, ऐसे में सरकार की नीतियों पर इनका प्रभाव तो होना ही है। यूपीए सरकार को समर्थन देने के एवज में वामपंथियों ने वोट बैंक बनाने के लिये इस क्षेत्र का जमकर उपयोग किया।

(भाग-3 में जारी रहेगा…)

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23 Comments

  1. Shishu said,

    November 6, 2008 at 8:50 am

    प्रिय सुरेश भाई
    आपके द्वारा दी गई जानकारी अच्छी है
    पुरा लेख पढ़ पाना अभी सम्भव नही मैंने आंकडों परे गौर किया है जो काफ़ी चौकाने वाले हैं.
    अच्छे लेख के लिए धन्यवाद्
    शिशु

  2. संजय बेंगाणी said,

    November 6, 2008 at 9:04 am

    हिन्दुओं का बिखराव देश को भारी पड़ेगा.

  3. sareetha said,

    November 6, 2008 at 9:16 am

    महज़ आंकदे गिनाने से काम चलने वाला नहीं । समस्या नज़र आ रही है , तो समाधान पर भी निगाह गई ही होगी । इससे निजात पाने के तरीकों पर गौर करने और उन पर अमल का वत्त आ गया है ।

  4. ab inconvenienti said,

    November 6, 2008 at 9:44 am

    लेख तथ्यात्मक है पर इतने ज़्यादा आंकडे हैं की कम ही लोग इसे पढ़ सकेंगे, लंबे और आंकडों से भरपूर लेख सिर्फ़ कुछ विशेष प्रकार के पाठकों को ही रुचते हैं.

    भारत की स्थितियां ऐसी बनती जा रहीं हैं की इसका ईश्वर भी चाहे तो कुछ नहीं कर सकता. बहुत सम्भव है की देश जल्द ही अगले विभाजन की तरफ़ हो.

  5. COMMON MAN said,

    November 6, 2008 at 10:07 am

    यह बात हर आम आदमी तक पहुंचाना पडेगा और हिन्दुओं को जाग्रत करना पडेगा अन्यथा हम लोग एक बार फिर इस्लामी शासन देखेंगे, कहना गलत न होगा कि जो काम सैकडों सालों का इस्लामी शासन न कर सका वह ६० साल के लोकतन्त्र ने कर दिया, आपकी लेखनी हमेशा की तरह जोरदार है

  6. lata said,

    November 6, 2008 at 10:29 am

    SANJAY BEGANI JI ki bat se 100% sahmat.
    हिन्दुओं का बिखराव देश को भारी पड़ेगा.

  7. dhiru singh {धीरू सिंह} said,

    November 6, 2008 at 3:08 pm

    हिन्दू अब भी बटे रहे तो अल्पसंख्यक बनने से कोई नहीं रोक सकता

  8. All Mighty Spiritual Society said,

    November 6, 2008 at 3:36 pm

    इस गंभीर समस्या से निपटने के उपाय भी यहाँ चर्चा में लाये!

  9. yantrikbharat said,

    November 6, 2008 at 3:59 pm

    अच्छे आंकडो के लिए धन्यवाद पर कृप्या यह भी तो बताएं की इस समस्या से कैसे निकला जाए!

    यह भी तो बतायें की कैसे इस समस्या को और पास आने दे या कुछ करना चाहिए !

    मुझे तो लगता है की हम हिन्दुओं के लिए यही सही है की हमेशा की तरह फ़िर बस अगले चुनाव का इंतज़ार करें ( और शायद इस चुनाव में कोई दूसरी पार्टी जीत जायेगी ) पर फ़िर कांग्रेस के बनने का अफ़सोस एक और चिठा लिखकर मनाएं! शयद हम लोग यही काम सबसे अच्छे से कर सकते है!

  10. वेद रत्न शुक्ल said,

    November 6, 2008 at 4:38 pm

    देश में भयंकर खून-खराबा और बंटवारे जैसी स्थिति तो निश्चित है। कहने में डर लगता है लेकिन बहुत मुमकिन है कि बंटवारा हो भी जाए। कांग्रेस का कुर्सी मोह निश्चित रूप से ऐसा ही गुल खिलायेगा। मेरे ख्याल से गलती लगभग 60 साल पहले हुई है जिसका खामियाजा तो भुगतना ही पड़ेगा।

  11. Ratan Singh Shekhawat said,

    November 6, 2008 at 4:47 pm

    हिन्दू अब भी बटे रहे तो अल्पसंख्यक बनने से कोई नहीं रोक सकता

  12. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said,

    November 6, 2008 at 4:54 pm

    स्थिति गम्भीर नहीं खतरनाक है। हम एक ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठे हुए हैं। यदि विस्फोट रोकना है, तो लोकतंत्र के भारतीय मॉडल को तिलाञ्‍जलि देनी होगी।

    गृहयुद्ध अपरिहार्य लगता है। 😦

  13. PD said,

    November 6, 2008 at 5:46 pm

    भारत एक विशाल धर्मशाला हैअ जहां कोई भी नहीं, बल्की बांग्लादेशी और पाकिस्तानी कभी भी आ सकते हैं.. किसी अमेरिकन या यूरोपियन को इंटेरेस्ट नहीं होगा यहां आकर रहने में..

    बेहद विचारोत्तेजक लेख..

  14. ummed Singh Baid "saadahak " said,

    November 6, 2008 at 5:55 pm

    हूजी-सिमी-मुजाहिदीन-लश्कर-तालिबान.
    भारत के दुश्मन सभी ,बँगला-पाकिस्तान.
    बँगला-पाकिस्तान,अँग हैं इसी भूमि के.
    पूरे नमक-हराम,बने द्रोही मिट्टी के.
    कह साधक कवि, इनमें भारत-भक्ति जगाओ.
    सबका हित अखण्ड भारत में इन्हें बताओ.

    चोर-उच्चक्के घुस गये, घर का मालिक कौन?दुर्जन सारे शेर हैं, सज्जन सारे मौन.
    सज्जन सारे मौन,देखते हैं भौंच्चके.
    नेता-अफ़सर-आतंकी सब च्चट्टे-बट्टे.
    कह साधक कवि, सुन हिन्दू यह तेरा घर है.
    जो नुक्सान हो रहा है, सब तेरे सर है.

  15. राजेश कुमार said,

    November 6, 2008 at 7:12 pm

    किस हिन्दू की बात कर रहें हैं अगड़ा हिंदू या पिछडे वर्ग का हिन्दू या मराठी हिन्दू या उत्तर भारतीय हिन्दू। आर्थिक विकास जरूरी है।

  16. Anil Pusadkar said,

    November 7, 2008 at 4:27 am

    तथ्यपरक और गभीर खतरे से सचेत करने वाला लेख है।इसमे मेहनत के साथ-साथ ईमानदारी और देशभक्ती साफ़ नज़र आती है मगर कथित धर्मनिरपेक्ष ताक़तें इसे मुस्लिम विरोधी करार दे सकती है।वैसे भी आप के ब्लोग को देश-तोडक ब्लोग जैसी उपाधी से नवाज़ा जा चुका है।एक ईमानदार लेख की ईमानदारी से तारीफ़ कर रहा हूं महज़ औपचारिकता नही पूरी कर रहा हूं।

  17. मिहिरभोज said,

    November 7, 2008 at 6:59 am

    राजेश कुमार जी ये भांति भांति के हिंदु का विचार ही हमारे विचार का खोट है….इसे निकाल दो सारी समस्या का समाधान हो जायेगा

  18. COMMON MAN said,

    November 7, 2008 at 7:03 am

    राजेश जी, यह खयाल मन से निकाल दीजिये कि आर्थिक समस्या के कारण ऐसा है. मुसलमानों की आर्थिक स्थिति बडी तेजी से अच्छी हो रही है. रही बात अगडा-पिछडा और दलित की, खुद तय करें कि इस्लामी शासन चाहिये या अपना, इस्लामी शासन में दलितों को गले से नहीं लगाया जायेगा. देश हम दलितों का भी है, जब हिन्दू बचेंगे तभी अगडा-पिछडा-दलित कर पायेंगे, इसलिये बांटना बन्द कीजिये. आसन्न बडे खतरे को महसूस कीजिये.

  19. कुश एक खूबसूरत ख्याल said,

    November 7, 2008 at 7:56 am

    आँखें खोल देने वाला लेख है.. गणपति विसर्जन पर मुसलमानो द्वारा किए पथराव को देख चुका हू

  20. राजेश कुमार said,

    November 10, 2008 at 12:13 pm

    मिहिर जी और कॉमन मैन जी, भारत में जो लोग भी मुसलमान या ईसाई बने वे पहले हिन्दू हीं थे। दलितो समुदाय के लोगों को मंदिर में घुसने नहीं देंगे तो क्या होगा। महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों पर जो हमले हुए उसमें आठ लोगों की मौत हुई। वे सारे हिन्दू थे। उस समय आपलोग कहां थे। बांटने का काम आप कर रहे हैं।

  21. GJ said,

    November 22, 2008 at 5:22 pm

    .

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    i agree with rajesh

    .

    .

  22. op said,

    December 23, 2008 at 2:36 pm

    है कोई आप में से जो अपना सब कुछ छोड़कर देश के लिए मिटने को तैयार हो (मेरे साथ) ……… या फिर केवल आंकडे सुनकर ……..बाप रे बाप !! करते रहेंगे……

  23. Ummed Singh Baid "Saadhak " said,

    December 24, 2008 at 8:09 am

    जो सारा नुक्सान है, हिन्दू के सिर बोझ.
    डुश्मन या सैलानी सब,क्या कर सकते सोच.
    क्या कर सकते सोच, बचाना है निज घर को.
    मुश्किल कितना भी हो, करना होगा खुद को.
    कह साधक यह मुद्दा है अब परिवर्तन का.
    हिन्दू करता आया कौशल परिवर्तन का.


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