“मुगलिस्तान” और “लाल गलियारा” मिलकर तोड़ेंगे भारत को… (भाग-3)

Mugalistan and Red Corridor – Threat to Indian Security-3

(भाग-2 से जारी) “मुगलिस्तान” के लक्ष्य में सबसे पहले पश्चिम बंगाल और असम का नाम आयेगा। ऐसे कई इलाके “पहचाने” गये हैं जिन्हें “मिनी पाकिस्तान” कहा जाने लगा है, असम में पाकिस्तानी झंडे लहराने की यह घटना कोई अचानक जोश-जोश में नहीं हो गई है, इसके पीछे गहरी रणनीति काम कर रही है, मुगलिस्तान का सपना देखने वालों को इस पर प्रतिक्रिया देखना थी, और असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने यह कहकर कि “ये कोई पाकिस्तानी झंडे नहीं थे…” इनका काम और भी आसान बना दिया है। भारत के उत्तर-पूर्वी इलाके को मुख्य भूमि से जोड़ने वाली छोटी सी भूमि जिसे “चिकन नेक” या “सिलीगुड़ी कॉरीडोर” कहा जाता है, इनके मुख्य निशाने पर है और इस ऑपरेशन का नाम “ऑपरेशन पिनकोड” रखा गया है, जिसके मुताबिक बांग्लादेश की सीमा के भीतर स्थित 950 मस्जिदों और 439 मदरसों से लगभग 3000 जेहादियों को इस विशेष इलाके में प्रविष्ट करवाने की योजना है। उल्लेखनीय है कि यह “चिकन नेक” या सिलिगुड़ी कॉरीडोर 22 से 40 किमी चौड़ा और 200 किमी लम्बा भूमि का टुकड़ा है जो कि समूचे उत्तर-पूर्व को भारत से जोड़ता है, यदि इस टुकड़े पर नेपाल, बांग्लादेश या कहीं और से कब्जा कर लिया जाये तो भारतीय सेना को उत्तर-पूर्व के राज्यों में मदद पहुँचाने के लिये सिर्फ़ वायु मार्ग ही बचेगा और वह भी इसी जगह से ऊपर से गुजरेगा। इतनी महत्वपूर्ण सामरिक जगह से लगी हुई सीमा और प्रदेशों में कांग्रेस इस प्रकार की घिनौनी “वोट बैंक” राजनीति खेल रही है। जैसा कि पहले भी कहा जा चुका है कि जहाँ हिन्दू बहुसंख्यक होता है वहाँ धार्मिक स्वतन्त्रता, अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता और लोकतन्त्र होता है, लेकिन जहाँ भी मुस्लिम बहुसंख्यक होता है वहाँ इनमें से कुछ भी नहीं पाया जाता, और आजादी के बाद पश्चिम बंगाल, असम, मणिपुर, नागालैण्ड और त्रिपुरा के कुल मिलाकर 20 से अधिक जिले अब मुस्लिम या ईसाई बहुसंख्यक बन चुके हैं, लेकिन “सेकुलर” नाम के प्राणी को यह सब दिखाई नहीं देता।

(चित्र से स्पष्ट है कि सामरिक महत्व के “चिकन नेक” पर कितना बड़ा खतरा मंडरा रहा है)

अपने लेख “डेमोग्राफ़ी सर्वे ऑन ईस्टर्न बॉर्डर” में भावना विज अरोरा कहती हैं, “
जिस समय भारत का विभाजन हुआ उसी वक्त मुस्लिम नेता पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान को पाकर पूरी तरह खुश नहीं थे, उस वक्त से ही “अविभाजित आसाम” उनकी निगाहों में खटकता था और वे पूरा उत्तर-पूर्व पाकिस्तान में मिलाना चाहते थे। मानुल-हक-चौधरी, जो कि जिन्ना के निजी सचिव थे (और बाद में असम में मंत्री भी बने) ने 1947 में जिन्ना को पत्र लिखकर कहा था कि “कायदे-आजम आप मुझे सिर्फ़ 30 साल दीजिये मैं आपको आसाम तश्तरी में सजाकर दूँगा…” उसी समय से “पूरे उत्तर-पूर्व में मुस्लिम जनसंख्या बढ़ाओ” अभियान चलाया जा रहा है, जो कि अब विस्फ़ोटक स्थिति में पहुँच चुका है, जबकि देश के साथ-साथ असम में भी अधिकतर समय कांग्रेस का शासन रहा है। इसीलिये जब अनुभवी लोग कहते हैं कि कांग्रेस से ज्यादा खतरनाक, वोट-लालची और देशद्रोही पार्टी इस दुनिया में कहीं नहीं है तब उत्तर-पूर्व और कश्मीर को देखकर इस बात पर विश्वास होने लगता है। आज की तारीख में असम के 24 में 6 जिले मुस्लिम बहुसंख्यक हो चुके हैं, 6 जिलों में मुस्लिम जनसंख्या लगभग 40 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, अभी 126 विधानसभा सीटों में से 54 पर मुस्लिम वोट ही निर्णायक हैं, कुल 28 से अधिक मुस्लिम विधायक हैं, और चार मंत्री हैं। स्वाभाविक सी बात है कि मुस्लिम समुदाय (स्थानीय और बांग्लादेश से आये हुए मिलाकर) राज्य में नीति-नियंता बन चुके हैं। इन घुसपैठियों ने असम के स्थानीय आदिवासियों को उनके घरों से खदेड़ना शुरु कर दिया है और असम में आये दिन आदिवासी-मुस्लिम झड़पें होने लगी हैं। असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का पूरा संरक्षण इन लोगों को प्राप्त है, और यह “भस्मासुर” एक दिन इन्हीं के पीछे पड़ेगा, तब इन्हें अकल आयेगी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

(चित्र से स्पष्ट है कि प्रत्येक दशक में मुस्लिम जनसंख्या ने जन्मदर में हिन्दुओं को पछाड़ा है)

लगभग यही हालात नागालैण्ड में हैं, जहाँ दीमापुर जिले में बांग्लादेशी घुसपैठियों की तादाद बहुत बढ़ चुकी है। रिक्शा चलाने वाले, खेतिहर मजदूर, ऑटो-चालक अब बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुख्य काम बन चुके हैं, इन्होंने नगा खेत मालिकों पर भी अपना रौब गाँठना शुरु कर दिया है। आये दिन चोरी, लूट, तस्करी, नशीली दवाईयों का कारोबार जैसे अपराधों में बांग्लादेशी मुस्लमान लिप्त पाये जाते हैं, लेकिन राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी के चलते उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। राजधानी कोहिमा, मोकोकचुंग, वोखा, जुन्हेबोटो, फ़ेक, मोन और त्सुएनसांग इलाकों में भी ये पसरते जा रहे हैं।

एक बार नागालैण्ड के मुख्यमंत्री एस सी जमीर ने कहा था कि “बांग्लादेशी मुसलमान हमारे राज्य में मच्छरों की तरह फ़ैलते जा रहे हैं…”, कुछ साल पहले नगा छात्रों ने इनके खिलाफ़ मुहिम चलाई थी, लेकिन “अज्ञात” कारणों से इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। खतरनाक बात तो यह भी है कि नगा विद्रोहियों और उल्फ़ा-बोडो संगठनों के कई कैम्प बांग्लादेश के इलाके में चल रहे हैं और जब भी बांग्लादेशी मुसलमानों पर कोई कड़ी कार्रवाई करने की बात की जाती है तब बांग्लादेश की ओर से धमकी दी जाती है कि यदि भारत में रह रहे (आ-जा रहे) बांग्लादेशियों पर कोई कार्रवाई हुई तो हम इनके कैम्प बन्द करवा देंगे। दीमापुर के स्थानीय अखबारों के छपी खबर के अनुसार किसी भी मुस्लिम त्यौहार के दिन कोहिमा और दीमापुर के लगभग 75% बाजार बन्द रहते हैं, इससे जाहिर है कि व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भी इनका कब्जा होता जा रहा है।

विस्तारित और बड़ी योजना –
मुगलिस्तान की इस संकल्पना को साकार करने के लिये एक साथ कई मोर्चों पर काम किया जा रहा है, देश के एक कोने से दूसरे कोने तक गहरी मुस्लिम जनसंख्या का जाल बिछाया जा रहा है। केरल राज्य में मुस्लिम जनसंख्या लगभग 25% तक पहुँच चुकी है, आये दिन वहाँ संघ कार्यकर्ताओं पर हमले होते रहते हैं। कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों (दोनों ही इन मुस्लिम वोटों के सौदागर हैं), ने अब्दुल मदनी जैसे व्यक्ति को छुड़वाने के लिये एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। मलप्पुरम जिला काफ़ी पहले मुस्लिम बहुल हो चुका है और इस जिले में लगभग हरेक संस्थान में शुक्रवार को छुट्टी मनाई जाती है (रविवार को नहीं) और सरकारें चुपचाप देखती रहती हैं। पड़ोसी दो जिले कोजीकोड और कन्नूर में भी हिन्दुओं की हत्याओं का दौर चलता रहता है, लेकिन दोनों ही पार्टियाँ इसे लेकर कोई कार्रवाई नहीं करतीं (ठीक वैसे ही जैसा कि कश्मीर में किया गया था)।

मुगलिस्तान की इस योजना में फ़िलहाल नक्सलवादियों और चर्च की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण है। जब नक्सलवादी और चर्च मिलकर आंध्रप्रदेश से नेपाल तक एक विशाल “लाल गलियारा” बना लेंगे उस वक्त तक भारत नामक सत्ता बहुत कमजोर हो चुकी होगी, जाहिर है कि इस खेल में हिन्दुओं को ही सबसे अधिक भुगतना पड़ेगा, फ़िर कब्जे के लिये अन्तिम निर्णायक लड़ाई इस्लामी कट्टरपंथियों, मिशनरी-ईसाई और वाम-समर्थित नक्सलवादी गुटों में होगी, तब तक पहले ये लोग एक साथ मिलकर भारत और हिन्दुओ को कमजोर करते रहेंगे, आये दिन बम विस्फ़ोट होते रहेंगे, हिन्दुओं, हिन्दू नेताओं, मन्दिरों पर हमले जारी रहेंगे, आदिवासियों और गरीबों में धर्म-परिवर्तन करवाना, जंगलों में नक्सलवादी राज्य स्थापित करना, मुस्लिम आबादी को पूर्व-नियोजित तरीके से बढ़ाते जाना इस योजना के प्रमुख घटक हैं। दुःख की बात यह है कि हम कश्मीर जैसे हालिया इतिहास तक को भूल चुके हैं, जहाँ यह नीति कामयाब रही है और लाखों हिन्दू अपने ही देश में शरणार्थी बने हुए हैं और अमरनाथ की एक छोटी सी जमीन के लिये भारत सरकार को नाक रगड़नी पड़ती है। लेकिन इस मुगलिस्तान के योजनाकारों को भारत में बैठे “सेकुलरों”, “बुद्धिजीवियों”, “कांग्रेस”, NDTV-CNNIBN जैसे चैनलों पर पूरा भरोसा है और ये इनका साथ वफ़ादारी से दे भी रहे हैं… बाकी का काम हिन्दू खुद ही दलित-ब्राह्मण-तमिल-मराठी जैसे विवादों में विभाजित होकर कर रहे हैं, जो यदि अब भी जल्दी से जल्दी नहीं जागे तो अगली पीढ़ी में ही खत्म होने की कगार पर पहुँच जायेंगे…

, , , , , , , ,

16 Comments

  1. COMMON MAN said,

    November 8, 2008 at 7:49 am

    दुर्भाग्य है कि आम हिन्दू इस बात को समझता ही नहीं. हिन्दू हितों की रक्षा में लगे लोगों को अपनी बात के प्रसार के लिये एक अखबार या चैनल की स्थापना करनी चाहिये, अन्यथा हिन्दू सिर्फ किताबों में ही मिलेगा.भारत में मीडिया के बारे में एक ई-मेल मुझे मिला था जो मैने अपने ब्लाग पर डाला है.

  2. November 8, 2008 at 9:03 am

    पूरा लेख अच्छा रहा.

  3. November 8, 2008 at 9:13 am

    भारत में भारत पर भारत के ही द्वारा अत्याचार हो रहा है… और भारत ही खामोश है.. इस लिए फिर्दौस ख़ान सरीखे ब्लॉगरो को हिम्मत मिलती है.. देश की अस्मिता को खंडित करने वाले लेख लिखने की.. ऐसे ब्लॉग्स पर मेरा एक भी कमेंट प्रकाशित नही हुआ.. भोंपु बजाने वाले ब्लोगो में सच्चाई का सामना करने की हिम्मत नही..

  4. BS said,

    November 8, 2008 at 10:56 am

    फिरदौस के ब्लॉग पर असहमति की टिप्पणी प्रकाशित नहीं की जाती हैं। मैंने कई बार वहां टिप्पणी देने की कोशिश की है लेकिन हर बार उसने उन्हें प्रकाशित नहीं किया। इसी से पत चलता है कि ये लोग केवल अपनी बात कोही मानते हैं और इनके यहां असहमति, लोकतन्त्र, बहस इत्यादि की कोई गुन्जाइश नहीं हैं।हिन्दुओं इन लोगों की तरह बन जाओ बर्ना खत्म हो खत्म हो जाओगे।

  5. sareetha said,

    November 8, 2008 at 10:58 am

    प्रजातंत्र के नाम पर चल रहे ढकोसले ने देश को महज़ साठ सालों में वहां पहुंचा दिया , जहां गुलामी के दौर में भी नहीं था । लोकतंत्र के रखवाले कहे जाने वाले स्तंभ विधायिका ,कार्यपालिका ,न्याय पालिका और मीडिया ही देश को लूट्ने के मिशन में एकजुट हो गये हैं । खेत ही बागड खाने लगे ,तो फ़िर फ़सल बचाने के लिए गाल बजाने से भी कुछ होने जाने वाला नहीं । कबीर कह ही गये हैं – साधो ये मुर्दों का गांव …….। देखें क्या क्भी मुर्दे क्रांति करेंगे ?

  6. November 8, 2008 at 12:46 pm

    फिरदौस में इतनी हिम्मत नहीं की सभ्य भाषा में लिखी मेरी एक पंक्ति की टिप्पणी को भी प्रकाशित कर सके. मुझे लगा मेरी टिप्पणी ही प्रकाशित नहीं होती, मगर और भी है….

  7. November 8, 2008 at 1:36 pm

    आपकी चिंताएं शत-प्रतिशत सही हैं….हमारी आने वाली नस्‍लें या तो मुसलमान हो जायेंगी या ईसाई यदि उन्‍हें जिंदा रहना होगा तो….महान सनातन धर्म म्‍यूजियम और इतिहास की किताबों में भी बच पाये इसमें शक है बाकी रही फिरदौस टाइप ब्‍लॉगरों की बात तो संविधान का अनुच्‍छेद 19 इन्‍हीं लोगों के लिए बना है हमारे लिए नहीं…..अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता आजकल आतंकियों, देशद्रोहियों, हिंदूधर्म का खात्‍मा चाहने वालों के पास ही है…बाकी यदि कोई मुंह खोलता है तो सांप्रदायिक, मानवताविरोधी कहलाता है…..यासीन मलिक जैसे लोग जिनकी इस राष्‍ट्र में कोई आस्‍था नहीं अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के तहत एनडीटीवी वाले कमीनों के चैनल पर खुलेआम तकरीर करते हैं…..संविधान में अब एक संशोधन अत्‍यावश्‍यक हो गया है वह ये कि जो व्‍यक्ति भी राष्‍ट्र के प्रति पूरी तरह निष्‍ठावान नहीं है उसे किसी भी प्रकार का कोई संवैधानिक या अन्‍य प्रकार का अधिकार प्राप्‍त नहीं होगा और ना ही उन्‍हें किसी भी प्रकार की स्‍वतंत्रता इस देश में दी जाएगी ना ही वे किसी आरोप में कानून के तहत अदालतों में सुनवाई के अधिकारी होंगे…..इस वक्‍त जरूरत है एक तानाशाह की और इसके लिए माननीय नरेंद्र मोदी ही एक योग्‍य व्‍यक्ति नजर आते हैं इस एक अरब दस करोड़ की जनता में….जो हर राष्‍ट्रद्रोही का सर कलम करने की ताकत रखते हैं….

  8. November 8, 2008 at 1:50 pm

    आपकी चिता जायज है . आपके विचारो से सहमत हूँ . धन्यवाद्.

  9. November 8, 2008 at 1:50 pm

    आपकी चिता जायज है . आपके विचारो से सहमत हूँ . धन्यवाद्.

  10. November 8, 2008 at 7:32 pm

    सच्चे राष्ट्रवादी चिंता ज़ाहिर करता है ये लेख। आपकी चिंता जायज है और मै उससे शत-प्रतिशत सहमत हूं।एक ईमानदार और दमदार लेख के लिये आपका शत-शत नमन्।

  11. दहाड़ said,

    November 9, 2008 at 6:11 am

    ब्लोग पर बकवास करने से कुछ नहीं होने वाला.जमीनी स्तर पर हरेक को कुछ व्यक्तिगत तौर पर करना होगा.जरा सोचिये यदि हर हिन्दु सिर्फ़ इतना सोच ले कि उसकी जेब से निकला हर पैसा किसी हिन्दु की जेब में ही जायेगा. इसका उदाहरण मैं धार में हुए दंगो के समय देख चुका हूं.जब हिन्दुओ ने ४ दिन पुरे मुसलमानो का विरोध करके उनका जीना हराम कर दिया था.अगर व्यापारी हो तो नोकरी सिर्फ़ हिन्दु को ही दो,और उसे बता के दो कि उसकी पहली योग्यता यही है

  12. November 9, 2008 at 7:24 am

    ब्लाग्स पर लिखना भी जरूरी है. इसे बकवास न कहें. लगता है आपने फिरदौस और उसके साथियों के हिन्दुओं के ख़िलाफ़ जहर उगलते लेख नहीं पढ़े. इस बार तो उस ने फौज को भी आतंकवादी करार दे दिया है.

  13. November 9, 2008 at 5:21 pm

    बिलकुल सच्चे खतरे से आगाह करती हुई पोस्ट है आपकी…। यह अलख जगाये रहिए। बधाई।

  14. lata said,

    November 10, 2008 at 5:48 am

    DAHAD sahab,aap sahi kah rahe hain, aapka gussa bhi jayaz hai par jis jagah aap apne vichar rakh rahe hain vo ek aisi jagah hai jahan hum sab ek hi vichar tale khud ko sangthit pa rahe hain, aise me blogs ko aapka “BAKWAS” kahna bilkul bhi shobha nahi deta.Gusse me bhi apno ko chot to nahi pahunchai jati na.

  15. November 10, 2008 at 8:17 pm

    उम्मीद कम है कि तथाकथित सेक्युलर भी पढेंगे।

  16. JP said,

    November 11, 2008 at 4:52 pm

    Arunachal never officially declared India’s: China.Can you put some concern on this matter. How the Indian Govt. is taking initative to handle this issue with China.


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: