>खेलण द्‍यो गिणगौर भँवर म्हाने पूजण द्‍यो गिणगौर: एक राजस्थानी लोकगीत

>दिनेशराय द्विवेदी जी ने कुछ महीनों पहले एक पोस्ट लिखी थी ‘भँवर म्हाने पूजण दो गणगौर’, इस पोस्ट के साथ ही राजस्थान से बचपन की जुड़ी कई बातें एक एक कर याद आ गई कैसे हम हर साल गणगौर के दिन “रावळे” (महलों में) गणगौर देखने जाते थे और उस दिन राजा साहब- रानी साहिबा को देखकर रोमांचित होते थे।

यहाँ ऑफ द रिकॉर्ड एक बात कहना चाहूंगा कि पूर्वप्रधानमंत्री विश्‍वनाथ प्रताप सिंह हमारे देवगढ़ गाँव के दामाद हैं। यानि श्रीमती सीतादेवीजी हमारे रावळे की बेटी हैं और उस नाते हमारे पूरे गाँव की बुआजी हैं। और उनकी भी बुआजी रानी लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत जो राजस्थानी भाषा की सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं वे भी उसी रावळे की बेटी हैं यानि वे भी हमारे गाँव की बुआजी है। लक्ष्मीकुमारी जी 1961 से 1971 तक राजस्थान विधान सभा की सदस्या रही| सन‍ 1972 से 78 तक राज्य सभा की सदस्या रही है। राजस्थान काँग्रेस कमिटी की अध्यक्षा रही। और सबसे बड़ी बात राजस्थानी भाषा में साहित्य के लिये साहित्य अकादमी की पुरस्कार विजेता भी रही। मेरे लिए गौरव की बात यह रही कि कई बार मैने उनके हाथों से पुरस्कार प्राप्‍त किया।

हाँ तो बात चल रही थी गणगौर की, ऑफ द रिकॉर्ड कुछ ज्यादा लम्बा हो गया, पूरी बात करता तो पोस्ट में सिर्फ ऑफ दी रिकॉर्ड ही होता। 🙂 गणगौर राजस्थान का प्रसिद्ध त्यौहार है यह तो आपको दिनेशजी की पोस्ट से पता चल ही गया होगा, पर मेरे लिए दिनेशजी की पोस्ट परेशान करने वाली थी पता है क्यों?

कुछ सालों पहले मेरे पास वीणा ओडियो कैसेट्स कम्पनी की एक कैसेट थी “घूमर” इस एल्बम में राजस्थान कोकिला सीमा मिश्रा ने एक से एक लाजवाब गीत गाये हैं। पर मुझे सबसे ज्यादा पसन्द आया “भँवर म्हाने खेलण दो गिणगौर”। कोई मित्र कैसेट मांगकर ले गया और गई सो गई आज तक वापस नहीं मिली। सागरिका के एल्बम माँ की तरह और उसके साथ घूमर को भी बहुत खोजा, पर नहीं मिली। कई बार राजस्थान में अपने गाँव जाना हुआ पर लाना भूल गये। दिनेश जी ने एक बार फिर से उस गीत को सुनने के लिए अधीर कर दिया। ( दिनेशजी को इस बात के लिए धन्यवाद) आज जाकर मुझे यह गीत मिला है, सो मैं बहुत रोमांचित हूँ। परदेस में अपना कोई खोया सा मिल गया प्रतीत होता है।

यह राजस्थान का लोकगीत है पर इस एल्बम के संगीतकार ने संगीत और गीत में कुछ बदलाव कर इसको बहुत ही सुन्दर और कर्णप्रिय बना दिया है। कन्याएं मनपसंद वर पाने के ले और महिलाएं सदा सुहागन रहने के लिए देवी गणगौर की पूजा करती है और साथ में यह गीत गाती है; पर सीमा मिश्रा के इस गीत में कुछ बदलाव किया गया दीखता है। इस गीत में नायिका अपने भँवरजी ( पति) से अलग अलग गहनों की मांग कर रही है।
आईये अब ज्यादा बातें ना कर आपको गीत ही सुनवा देते हैं। और हाँ ध्यान दीजिये सारंगी कितनी मधुर बजी है।

http://sagarnahar.googlepages.com/player.swf
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खेलण द्‍यो गिणगौर
भँवर म्हाने पूजण दो दिन चार
ओ जी म्हारी सहेल्यां जोवे बाट
भँवर म्हाने खेलण द्‍यो गिणगौर

माथा रे मेमद ल्याव
आलीजा म्हारे माथा रे मेमंद ल्याव
ओ जी म्हारी रखड़ी रतन जड़ाय
आलीजा म्हाने खेलण द्‍यो गिणगौर

मुखड़ा ने बेपड़ ल्याव
भँवर म्हारे मुखड़ा ने बेपड़ ल्याव
ओ जी म्हारी सूंपा रतन जड़ाय
भँवर म्हाने खेलण द‍यो गिणगौर

हिवड़ा ने हार ज ल्याव
आलीजा म्हारे हिवड़ा ने हार ज ल्याव
ओ जी म्हारी हंसली उजळ कराव
आलीजा म्हाने खेलण द्‍यो गिणगौर

बहियां ने चुड़लो ल्याव
भँवर म्हारे बहियां ने चुड़लो ल्याव
ओ जी म्हारे गज़रा सूं मुजरो कराव
भँवर म्हाने खेलण द‍यो गिणगौर

पगल्या ने पायल ल्याय
आलिजा म्हारे पगल्या रे पायल ल्याव
ओ जी म्हारा बिडियां रतन जड़ाव
आलीजा म्हाने खेलण द्‍यो गिणगौर

खेलण द्‍यो गिणगौर
भँवर म्हाने पूजण दो दिन चार
ओ जी म्हारी सहेल्यां जोवे बाट
भँवर म्हाने खेलण द्‍यो गिणगौर
पूजण द्‍यो गिणगौर.. पूजण द्‍यो… खेलण द्‍यो…

7 Comments

  1. November 18, 2008 at 4:38 am

    >बहुत बहुत धन्यवाद! मुझे पता नहीं था कि आप का राजस्थान से संबंध है। पर मेरी गणगौर वाली पोस्ट किसी को इतना (परेशान) प्रेरित कर सकती है, इस का मुझे अंदाज भी नहीं था। डाउनलोड कर सुन लिया है। यह कैसेट पर तो मेरे पास है,अब कम्प्यूटर पर भी सुना जा सकेगा। आभार!

  2. saptrang said,

    November 18, 2008 at 5:36 am

    >एक बार हमें आदेश किया होता सागर भाई।वीणा कैसेट्स के कई सारे अलबम यहाँ डाउनलोड के लिये उपल्ब्ध हैं।http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/rj_geet.htmकुछ अन्य लोकगीत यहाँ भी उपल्ब्ध हैंhttp://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/aud_0001.htm

  3. November 18, 2008 at 6:43 am

    >ऑफ रेकोर्ड ऑन रेकोर्ड जैसे भी हो, आपकी पोस्ट तो आई. गीत सुनाने के लिए आभार. अच्छा लग रहा है.

  4. November 18, 2008 at 5:05 pm

    >गीत सुनाने के लिए आभार. अच्छा लग रहा है.

  5. November 18, 2008 at 5:26 pm

    >बहुत ही सुंदर लगा यह गीत.धन्यवाद

  6. November 18, 2008 at 7:40 pm

    >सुमधुर लोक गीतोँ को सुनना हमेशा विशेष आनँद देता है शुक्रिया– लावण्या

  7. June 13, 2009 at 2:49 pm

    >Bahut dino se jis geet ko talaash raha tha vo aaj mil gaya !!!Vastav me is sumadhur geet ka milna sukoon milne se kam nahin hain !!!!!Hardik aabhaar sahit… Gautam Kansara


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