>अब भी चेतो , ऐसा न हो की देर हो जाए ………..

>कब तक मुह छिपाते फिरोगे ? हर बात की एक सीमा होती है । वर्षों से रोटी,कपड़ा, मकान , बिजली, पानी , रोजगार की समस्या झेल ही रहे थे अब ये आतंकवाद तो जान के पीछे ही पड़ गया है । देश आतंक की मार से बदहाल है ।, हमारे नेता लोग अपनी -अपनी डफली बजाने मेलगे है। हम लोग भी अपने- अपने करियर प्लानिंग मे जी जान से जुटे है । किसी को ऊँची पढ़ाई के लिए विदेश जानाहै तो कोई इन्जिनेरिंग करके मोटा माल कमाना चाहता है, कोई फैशन की दुनिया मे नाम चाहता है , मतलब हर कोई प्रोफेशनल होकर अच्छी जिन्दगी जीने की तमन्ना रखता है। आज सामाजिक और राष्ट्रीय सरोकारों से जुड़े क्षेत्रों मे कामगारों की भरी कमी है । सेना जैसे सम्माननीय विभाग को भरती के लिए विज्ञापनों का सहारा लेना पड़ रहा है । राजनीति मे युवाओ की अरुचि तो और भी चोंकाने वाली है। राजनीती जो हरेक के जीवन को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से प्रभावित करती है , पर निजी स्वार्थवश हम राजनीती को गंदगी मन कर ख़ुद को दूर रखने का प्रयत्न करते है । जहा भी मौका मिला तो हम युवा राजनीती को गाली देने से नही चूंकते । यूँ बाहर से आलोचना करना बहुत आसन है भाई । मन की आज दागी और भ्रष्ट लोगो की भीड़ है लेकिन प्रश्न है की उन्हें यहाँ तक लाने मेकिसका योगदान है ? बिल्कुल ये काम हम लोगो का ही to है । जब rajniti मे भाग नही लेंगे , achchhe netao को chun कर नही bhejange to ये सब होगा ही ! फ़िर घर के अन्दर baith कर bahas करने से क्या फायदा जनाब ? जो होना है होने दो । आपका और हमारा क्या जाएगा , यही कहते है न आप । जरा sochiye जब ये देश ही नही bachega to हम कहा gayenge । शायद मैं कुछ jyade दूर की बात बता रहा हूँ चलिए आज को ही देखिये पर गौर से । देश और समाज को prabhawit करने wala हर karak आपको भी utna ही prabhawit करता है । mumbai मे जो भी हुआ वो to एक छोटा नमूना है अगर जल्द ही हम नही jaage to परिणाम बहुत बुरे हो सकते हैं । भारत के wartman rajnitik paridrishya से किसी prakar की badlav की ummid नही की ja सकती है । आज hamhe एक शक्तिशाली और majboot manobal wale shasan की जरुरत है । शान्ति और sahishnuta की बात kitabo मे ही शोभा पाती है । erik kafman ने कहा था “राज्य के ३ mukhya lakshya होने चाहिए -शक्ति sanchay , शक्ति prasar, शक्ति प्रदर्शन । ” इसी सम्बन्ध मे vir savarkar ने कहा था -‘शान्ति की ichchha भी उसी की sarthak होती है जो शक्ति sampanna हो । ‘ आज आंतरिक asuraksha से jujh रहे भारत मे राजनैतिक badlav की mahti aawasyakta है । और ये badlav yuvao के rajniti मे sakriya bhagidari से ही sunishchit की ja सकती है । अब भी वक्त baki है अपनी jimmedari को pahchanna sikhiye । कही देर न हो जाए warna आने वाली pidhi को क्या muh dikhayenge आप और हम ?????////////

2 Comments

  1. therajniti said,

    November 30, 2008 at 12:45 pm

    >nice article.http://therajniti.blogspot.com/

  2. December 1, 2008 at 12:25 pm

    >nirhu achha likh rahe ho ,lage raho , aasha hai hum desh ke dhara aur vichardhara ko ek din jaroor jhakjhorenge,all the best,


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