देश की आतंरिक सुरक्षा के सूत्र


1. भारत में कोई भी व्यक्ति या समुदाय किसी भी स्थिति में जाति, धर्म,भाषा,क्षेत्र के आधार पर बात करे उसका बहिष्कार कीजिए ।
2. लच्छेदार बातों से गुमराह न हों ।
3. कानूनों को जेबी घड़ी बनाके चलने वालों को सबक सिखाएं ख़ुद भी भारत के संविधान का सम्मान करें ।
4. थोथे आत्म प्रचारकों से बचिए ।
5. जो आदर्श नहीं हैं उनका महिमा मंडन तुंरत बंद हो जो भी समुदाय व्यक्ति ऐसा करे उसे सम्मान न दीजिए चाहे वो पिता ही क्यों न हो।
6. ईमानदार लोक सेवकों का सम्मान करें ।उनको हताश न होनें दें
7. भारतीयता को भारतीय नज़रिए से समझें न की विदेशी विचार धाराओं के नज़रिए से
8. अंधाधुंध बेलगाम वाकविलास बंद करें
9. नकारात्मक ऊर्जा उत्पादन न होनें दें ।
10. देश का खाएं तो देश के वफादार बनें ।
11. किसी भी दशा में हुई एक मौत को सब पर हमला मानें ।
12. देश की आतंरिक बाह्य सुरक्षा को अनावश्यक बहस का मसला न बनाएं प्रेस मीडिया आत्म नियंत्रण रखें ।
13. केन्द्र/राज्य सरकारें आतंक वाद पे लगाम कसने देश में व् देश के बाहर सख्ती बरतें ।
14: वंदे मातरम कहिये

5 Comments

  1. varun jaiswal said,

    November 30, 2008 at 10:58 pm

    मुकुल जी सामाजिक सूझ-बूझ विकसित करने की सार्थक पहल के बाद ही आम जनता को हम इन सुझावों
    पर अमल करने का मार्ग दिखा सकते हैं |
    उन्नत विश्लेषण के लिए धन्यवाद |

  2. गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said,

    December 1, 2008 at 2:30 am

    सच हम केवल इन्हीं बातों पे
    आज से कार्य शुरू कर दें आइये हाथ मिलाएं
    आज से एक हो जाएँ

  3. mahashakti said,

    December 1, 2008 at 4:03 am

    आपके द्वारा सुझाये गये सूत्र भारत की एकता और अखंडता में सहायक शिद्ध हो सकते है। ये जरूर है कि कुछ बातों में किसी की राय विशेष न मिले, किन्‍तु हम जिन बातों पर एक मत हो उन पर सहयोग और सौर्ह्द के साथ, साथ- साथ तो चल ही सकते है।

    राष्‍ट्रभक्ति में पंथ धर्म आड़े नही आनी चाहिये, राष्‍ट्र ने हमें बहुत कुछ दिया है और देता आया है, हमें इसे सम्‍मान देने में नही हिचकना चाहिये। जिन्‍हे भारत को माता कहने में शर्म आती है उनके लिये इस देश में कोई जगह नही है।

    वन्‍देमातरम्

  4. गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said,

    December 1, 2008 at 4:32 am

    jin binduon par samarthan naheen mil sakata hai unako saf karen ki ve koun se bindu hain वन्‍देमातरम्

  5. prakharhindutva said,

    December 1, 2008 at 5:41 am

    अत्युत्तम मिहिर जी पर ज़रा सोचिए-

    एक मुसलमान

    1.हमेशा क़ौम की बात करता है। इस्लाम को देश से ऊपर रखता है। उसका क्या

    2.सेक्युलरवाद की बातें करके बहुसंख्यकों को गुमराह करता है। उसका क्या

    3.भारत के संविधान का कभी सम्मान नही करता और देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होता है। उसका क्या

    4.अपना झूठा प्रचार अपने आप करता है। जैसे मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। उसका क्या

    5.इमाम के देशविरोधी बयान पर उसका सम्मान करता है। उसका क्या

    6.शहादत को फ़र्ज़ी मुठभेड़ बताता है। उसका क्या

    7.कैसी भारतीयता? नमाज़ के वक़्त सऊदी अरब की ओर झुकता है। उसका क्या

    8.भारत माता को डायन बताता है। उसका क्या

    9.बम विस्फोट करके जो ऊर्जा पैदा करता है। उसका क्या

    10.जिस थाली में खाता है उसी में छेद करता है उसका क्या

    11.देश के बहुसंख्यकों की मौत का एमएमएस बना कर मज़ा लूटता है उसका क्या

    12.प्रेस में घुस कर खबरों के साथ छेड़छाड़ करता है।उसका क्या

    13.आतंकवादी समर्थक दलों के पक्ष में वोट डालता है उसका क्या

    14.वन्दे मातरम् को कुफ़्र बताए उसका क्या

    हम गृह युद्ध की कगार पर बैठे हैं।

    समय निकाल कर कभी आएँ हमारे ब्लॉग पर व टिप्पणियाँ दें

    http://www.prakharhindu.blogspot.com


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