आज उसे फिर देखा है, देखा है

पता नहीं क्यों आज शाम से ही मन उदास है, शायद उनकी याद में! आज अचानक उनकी झलक दिख गई, कुछ देर बाद भ्रम टूट गया, नहीं वो वो नहीं, कोई और ही…जब तुम नहीं थी तो मुझे तुम्हारे होने का अहसास क्यूं कर हुआ?
तुम्हारी इस झलक ने पता नहीं क्या क्या याद दिला दिया।
आज तुम्हे फिर देखा है- देखा है।

आज उसे फिर देखा है, देखा है -२
रोज किया करता था याद
लेकिन आज बहुत दिन बाद-२
गाँव के छोटे पनघट में-२
चांद सा चेहरा घूंघट में
मैने चमकते देखा है-२
आज उसे फिर देखा है, देखा है-२

शाम का बादल छाने को था
सूरज भी छुप जाने को था-२
उसके रूप के सूरज को जब
मैने उठते देखा है,
मैने उठते देखा है
आज उसे फिर देखा है, देखा है-२

नाम मुझे मालूम नहीं है
शर्मिली है कमसिन है वो-२
दिल की रानी बना चुका, बना चुका हूँ-२
कहने को पनहारिन है वो-२
एक नजर में दिल की दुनियां
मैने बदलते देखा है-२
आज उसे फिर देखा है
देखा है।

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(स्व. तलत महमूद को नमन, यह उनकी एक गैर फिल्मी रचना है। आपने कई सुन्दर गैर फिल्मी गीत- गज़लें गाई है। और कभी मौका मिला तो सुनाई जायेंगी। इस गीत के संगीतकार-गीतकार के बारे में जानकारी नहीं मिली अगर आप में से किसी को पता हो तो बतायें, ताकि इसे सुधारा जा सके)

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