ब्लॉगरों और पाठकों से एक कठिन सवाल – ये मूर्ति किसकी है? (माइक्रो पोस्ट)

अब जबकि आईपीएल देश से बाहर किया जा चुका है, क्योंकि खिलाड़ियों की सुरक्षा की बजाय भारत के “ईमानदार, कर्मठ, नैतिक, सीधे-सादे और लगनशील” नेताओं की सुरक्षा अधिक महत्वपूर्ण है… लेकिन IPL सम्बन्धी एक-दो विज्ञापन टीवी पर जारी हैं… ऐसे ही दो विज्ञापन आप देखें और बतायें कि एक विज्ञापन में यह मूर्ति किसकी है?
(जिन भाईयों के पास नेट का धीमा कनेक्शन है, उनके लिये उस खास क्षण का स्थिर चित्र भी लगाया जा रहा है)

IPL के विज्ञापन की “पंचलाइन” में कहा जा रहा है कि “सौ करोड़ लोगों को एक साथ एक ही काम करते देखा है कभी…” और फ़िर कई लोग, ताली बजाते, कपड़े धोते, चाय पीते, माथा पीटते आदि दिखाये गये हैं, लेकिन असल में इस मूर्ति को लेकर जिज्ञासा इसलिये है कि आखिर यह मूर्ति है किसकी, जिसके सिर पर पक्षियों को “एक साथ एक ही काम” यानी कि मूर्ति के सिर पर बीट करते दिखाया गया है। इसे देखकर निम्न सवाल भी उठते हैं-

1) हाथ की मुद्रा जानी-पहचानी है, लेकिन मूर्ति के हाथ में किताब नहीं है, इसलिये अम्बेडकर की मूर्ति नहीं है, तो फ़िर किसकी है?

2) मूर्ति के हाथ में डंडा भी नहीं, गंजा भी नहीं है, इसलिये मूर्ति गाँधी की भी नहीं है, तो फ़िर किसकी है?

3) पिछवाड़े से यह मूर्ति किसी अंग्रेज की लगती है, तो फ़िर IPL के मैच इंग्लैण्ड में करवाने के लिये BCCI क्यों मरी जा रही है?

4) माना कि हमारे भारत में तमाम मूर्तियाँ सिर्फ़ बीट करने और साल में एक दिन माला पहनाने के लिये ही होती हैं, लेकिन इतने सारे पक्षियों को “एक ही साथ एक समय” पर मूर्ति के सिर पर बीट करने की “तकनीक” कैसे सिखाई जायेगी?

इस पहेली के उत्तर के “क्लू” (Hint) के तौर पर दूसरा विज्ञापन देखें जिस में बनारस में घाटों पर संस्कृत पढ़ रहे वेदपाठी बच्चे के सिर पर भी पक्षी हगता दिखाया गया है (हो सकता है कि संस्कृत सीखते हुए हिन्दू बच्चे का सिर, बीट किये जाने लायक ही हो), अतः दोनों विज्ञापनों में “सिर पर पक्षी द्वारा की गई बीट” महत्वपूर्ण है, तो भाईयों और बहनो अब आप पर छोड़ता हूँ कि पता लगायें आखिर यह मूर्ति किस महानुभाव की है, जिस पर तमाम पक्षी……

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चलते-चलते :- भाइयों, यदि कभी आम चुनाव के दौरान देश में दीवाली की तारीखें आ जायें तो सभी देशवासी साइबेरिया में दीवाली मनायेंगे और यदि कभी आम चुनाव 15 अगस्त के आसपास आ गये तो देश का झण्डा भी टिम्बकटूं में फ़हराया जायेगा… आखिर इस देश के नेता और उनकी सुरक्षा हमें जान से भी ज्यादा प्यारी हैं भई… फ़िलहाल तो आप अपना ध्यान मूर्ति और पक्षी की बीट पर केन्द्रित करें…
(इस पोस्ट के लिये भाई नीरज दीवान को विशेष धन्यवाद)

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17 Comments

  1. March 24, 2009 at 11:28 am

    बहुत खूब.. मान गए आपकी पारखी नज़र को.. वैसे यह मूर्ति किसी हिंदुस्तानी की तो नहीं लगती..

  2. cmpershad said,

    March 24, 2009 at 11:30 am

    चुनाव यानि बाहुबल और बाहुबल यानि………..सोचते रह जाओगे:)

  3. March 24, 2009 at 11:33 am

    अब यह तो वो सोचे जिसकी है।

  4. March 24, 2009 at 12:13 pm

    आचार संहिता लागू है अतः कुछ बोल नहीं सकता 🙂 माफ करें वैसे मूर्ति राजीवजी की लग रही है. किसी का मन दुखाने का कोई इरादा नहीं था, मगर जो लगा वह लिखा है. क्षमा याचना सहित….

  5. March 24, 2009 at 12:44 pm

    मूर्ति के ब्‍लॉग का नाम बतलायेंहम उस ब्‍लॉग पर जाकर देख आएंगेलेकिन इनाम या नाम जो भी होगाहम ही पाएंगे, और टोपी पहन कर आएंगे।

  6. March 24, 2009 at 1:00 pm

    महाराज कहा कहाँ से खोद कर लाते है आप? 🙂

  7. Amit Sharma said,

    March 24, 2009 at 1:48 pm

    बहुत सही चीजों पर ध्‍यान जाता है जी आपका…लगे रहो सुरेश भाई

  8. March 24, 2009 at 2:06 pm

    कोई महापुरुष ही है , पर पीछे से देख कर बताना बड़ा कठिन है .

  9. March 24, 2009 at 2:32 pm

    yah doctor ambedkar aur bhartiya sanskriti ka apmaan hai.

  10. mahashakti said,

    March 24, 2009 at 2:35 pm

    वाह, मजेदारअम्‍बेडकर तो नही है पर अम्‍बेडकर से कम नही है। किताब दूसरे हाथ के नीचे दबी हु्ई है। पर यह जरूर है कि मूर्ति में थोड़ा अम्‍बेडकर को जवान कर दिया गया है।

  11. अजय said,

    March 24, 2009 at 2:36 pm

    हमें तो बस आपके लेख का कुछ हिस्सा पढ्ने को मिल जाय यही बहुत है पता लगाने का समय होतातो ……….

  12. sareetha said,

    March 24, 2009 at 3:34 pm

    इससे मिलती जुलती मूर्ति भोपाल के हबीबगंज चौराहे पर भी है । वहाँ काँग्रेस के शासन काल में हाईमास्ट लगाये गये थे । अब इससे ज़्यादा क्या कहें । कहीं इसी से नाराज़ होकर ही तो सुरक्षा का बखेड़ा खड़ा नहीं किया गया ।

  13. March 24, 2009 at 9:48 pm

    Shahrukh Khan तो नही है??

  14. आशीष said,

    March 25, 2009 at 1:34 am

    विज्ञापन वाले किसी पर भी बीट करवा सकते हैं

  15. March 25, 2009 at 5:07 am

    आप भी सुरेश भाऊ दूर की कौड़ी लाते हो।सच मे ये विज्ञापन वाले जंहा चाहे,जिस पर चाहे बीट करवा दे।

  16. March 25, 2009 at 5:16 am

    AAp kee khoji nazron kee dad to shuru se hi dta aaya hon, par es bar samajh nahin aaya kee aap es se sabit kya karna chahate hain?

  17. March 26, 2009 at 1:06 pm

    लेख पढ़ने के बाद में इस विज्ञापन को गैर से देखा अब सामने जो निकल कर आया आपको बता रहाँ हू आप भी गौर से देखियेगा। इस विज्ञापन का लोकेशन कोलकत्ता है कोलकत्ता का टैक्सी, कोलकत्ता का फुचका (गोलगप्पा) कोलकत्ता के ट्राम के पटरी पर बच्चे खेल रहें है। इस से यही सिद्ध होता है कि जो मुर्ती लगी है वह भी कोलकत्ता का ही है। और कोलकत्ता के गली – गली में किसी ना किसी काम्युनिष्ट का ही मुर्ती लगा है इसका मतलब है पक्षि जो बीट कर रहा है किसी काम्युनिष्ट नेता के उपर ही कर रहा है।जय हो


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