>सुन्दरता के सभी शिकारी: तलत महमूद

>1950 में बनी और दिलीप कुमार- नरगिस अभिनीत फिल्म जोगन (Jogan) दिलीप- नरगिस के अभिनय के अलावा मधुर गीतों के कारण भी बहुत ही लोकप्रिय हुई। इस फिल्म में संगीतकार बुलो सी रानी ने मीरा बाई के भजनों को बहुत ही सुन्दर धुनों में ढ़ाला था। सुन्दर धुन के साथ अगर गीतादत्त (रॉय) की आवाज मिल जाये तो गीत कितने सुन्दर बनेंगे; सहज ही कल्पना की जा सकती है।
इस फिल्म में सभी गाने नरगिस पर फिल्माये गये हैं, स्वाभाविक है कि वे गीतादत्त ने ही गाये होंगे परन्तु आज जो गीत मैं आपको सुनवाने जा रहा हूँ उसे तलत महमूद ने गाया है। यह गीत फिल्म में पार्श्‍व में बजता है।

http://sagarnahar.googlepages.com/player.swf

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शिकारी, शिकारी
सुन्दरता के सभी शिकारी
कोई नहीं है पुजारी
सुन्दरता के सभी शिकारी

महल-दोमहलों बीच खड़ी कोई
चन्द्रकिरन सी नारी
छल से बल से
छल से बल से तन-मन-जोबन
लूटे हाय शिकारी
सुन्दरता के सभी शिकारी

बाग-बगीचों खिली कली तो आया वहीं शिकारी
देख-देख जी भरा न उसका चुन ली कलियाँ सारी
सुन्दरता के सभी शिकारी

बन-उपवन में सुन्दर हिरनी दौड़-दौड़ के हारी
देख के कंचन काया उसकी पीछे पड़ा शिकारी
सुन्दरता के सभी शिकारी
_____________________________________________________________________________________

10 Comments

  1. yunus said,

    March 26, 2009 at 6:40 am

    >जोगन बुलो सी रानी और गीता राय की जोड़ी की एक महान फिल्‍म थी । इस गाने को याद दिलाकर आपने बहुत उत्‍कृष्‍ट काम किया है ।

  2. महेन said,

    March 26, 2009 at 6:09 pm

    >वाह सागर साहब गीत पहली बार सुना. तलत तो हैं ही मेरे पसंदीदा गायक. रात नशे में कटेगी.

  3. March 29, 2009 at 10:12 am

    >ये गीत पहली बार ही सुना. बहुत आनंद आया.आपको और मेहफ़िल को नव वर्ष की शुभकामनायें…

  4. March 29, 2009 at 2:06 pm

    >चिट्टाचर्चा मे संगीत चर्चा पढकर इधर का रुख किया.. तलदजी की आवाज़ मे एक खासियत है जो अपनी ओर खीचती है.

  5. March 30, 2009 at 5:49 am

    >बहुत ही प्‍यारा कलेक्‍शन है। बधाई।———–तस्‍लीम साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

  6. irdgird said,

    April 4, 2009 at 12:59 pm

    >तलत साहब का ये गीत नहीं सुना था। आनंद आया सुनकर। आभार आपका।

  7. Anonymous said,

    April 9, 2009 at 3:18 pm

    >dusro k gaane pe khud publicity paana- ye behad galat aur sharmnaak hai. apko sharm aani chahie ki kis prakaar aap dusro ki mehnat pe swayam apne lie rozgar peda kar rahe hai advertisement lekar. bahut galat aur nindniya hai apke blog ka ye roop. koi kadam awashya uthna chahie.

  8. April 9, 2009 at 4:17 pm

    >प्रिय अनाम महोदय,वाकई शर्मनाक है, इस तरह नाम छिपाकर टिप्पणी देना। आपने जो बात नाम छिपाकर लिखी वह नाम के साथ भी कहते तो मुझे कोई तकलीफ नहीं होती।अब आपके आरोप की बात करते हैं, पहले आंखे खोलकर देखिये इस पेज पर कहां कोई विज्ञापन लगा है? जिससे मैने रोजगार पैदा किया है। और ये भी बताईये कि कहां मैने लिखा है कि यह गीत मैने लिखा है, या मैने गाया है या मैने बजाया है? ये भी बताईये कि इससे मुझे कौनसी पब्लिसिटी मिल गई?आप कदम उठाना चाहते हैं, अवश्य उठायें। आपका स्वागत है। हमारी टीम का बस इतना ही उद्देश्य है कि जिन मधुर गानों को दुनिया ने नहीं सुना उन्हें खोजकर लाना और श्रोताओं को सुनाना। आप पहले अपनी बगल झांकिये कि क्या आप अपने मोबाइल में गा्ने नहीं बजाते, डाउनलोड नहीं करते? तो मेरे प्रिय अनाम दोस्त मुझ पर एक उंगली उठाने से पहले चार आप पर भी उठ रही है।

  9. April 23, 2009 at 4:49 am

    >सुरेश जी, गीतों की महफिल बहुत बढ़िया है। शानदार ब्लॉग है आपका। मेरे ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया… आपके कमेंट्स का इंतज़ार रहेगा।

  10. Gajendra said,

    April 23, 2009 at 8:42 pm

    >Nice post. I read somewhere that this was Talat ji’s first recorded song in Hindi films. Earlier ones were non-films or in bengali films where he went by name of Tapan Kumar.


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