>"सच बोलना मना है" का पाठकों के नाम संदेश

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“सच बोलना मना है “ के नियमित पाठकों को नमस्ते !
आज संचार की इस लोकतान्त्रिक दुनिया में मुझे लगभग ६ महीने हो गए हैं । इस दौरान अनेक खट्ठे -मीठे अनुभवों से गुजरना पड़ा । शुरुआत में लोगों की टिप्पणी न मिलना काफी खलता था । अब ठीक है पर , ऐसे लोगों का जो केवल ‘ सही है ‘ , अच्छा लिखा है , बहुत खूब , जैसी टिप्पनिओं से नाराजगी होती है । ऐसी टिप्पणियाँ साफ़ जाहिर करती हैं कि उस टिप्पणीकार ने आलेख को पढ़ा नही बस देखा और कर दी टिप्पणी ! चलिए जाने दीजिये , अब बात करते हैं दूसरे पहलु पर । अभी पिछले महीने ही मैंने “सच बोलना मना है” को सामुदायिक ब्लॉग बनाया ताकि स्वस्थ और निर्भीक विचारों वाले लेखकों को आप एक जगह पढ़ सकें । वैसे तो यहाँ कई सामुदायिक ब्लॉग है , उनका नाम भी है , लोग-बाग भी काफी हैं ,और विजिट भी परन्तु विचारों में पूर्वाग्रह और वर्तमान मीडिया का झूठा सेकुलरिज्म सर्वत्र विराजमान है । विकास की बात करते तो मानो सबकी जुबान गलती है । जब देखों एक धर्म विशेष का धुखडा लेकर बैठे हैं । मेरे भी कई मित्र ब्लॉग्गिंग करते हैं उनमे से दो-तीन ने सामुदायिक ब्लॉग बनाया है । अभी कल ही मैंने एक का ब्लॉग देखा जहाँ उसके ब्लॉग के उद्देश्यों (जो वहां लिखा था ) और प्रकाशित आलेखों में विरोधाभास स्पष्ट झलक रहा था । मैंने उससे बात की तो जवाब मिला “अरे जो भी छाप रहा है छपने दो एक बार लोग जानने लगें फ़िर बदल दंगे और ऐसे लेखकों को हटा देंगे । भाई ! इधर फेम चाहिए तो विवादों में रहना सीखो । ” मैंने कहा अपनी -अपनी बात है । वैसे आज कल सबको शार्टकट में लोकप्रिय होने की चाह विचारधारा से समझौता करने पर मजबूर करती है । कुछ लोग ऐसे भी है जो पैसों के लिए ऐसा करते हैं । पर मैं साफ़ कर देना चाहता हूँ मेरे यहाँ (अर्थात पत्रकारिता जगत )आने का मकसद न तो सस्ती लोकप्रियता बटोरना है और न ही इसे पेशा बनाना है । सामाजिक और राजनैतिक सुधार मेरा लक्ष्य है जो बगैर जन चेतना के संभव नही । जन -जागृति का सबसे सशक्त हथियार लेखन है । पैसों की कमी है अतः लेखन के लिए ब्लॉग से बेहतर माध्यम और क्या हो सकता है ! इसके अलावा भी महीने में २०-२५ संगोष्ठियाँ आयोजित कर वैचारिक आदान -प्रदान का कार्य हम करते रहते हैं । हमारा मानना है -” जब भी कोई बदलाव का प्रयास मुनाफे की और झुकने लगता है उसका उद्देश्य से भटकना स्वाभाविक है । “ वस्तुतः हमें किसी प्रकार के हानि -लाभ ( चाहो वो मौद्रिक हो अथवा किसी और रूप में )की चिंता नही है । हाँ अपने उद्देश्यों की चिंता जरुर है । अब थोड़ा बहुत अपने उद्देश्यों की बात भी एकाध वाक्य में बता देते हैं । दरअसल मारा उद्देश्य है ” भारतवर्ष में समसामयिक राजनैतिक और सामाजिक मुद्दों पर सही वैचारिक दृष्टिकोण , जिसे हम भारतीय नजरिया भी कहते हैं , प्रस्तुत करना । “ भारतीय दृष्टिकोण का जिक्र इसलिए किया क्योंकि आज के सारे संचार माध्यम के अधिकांश छोटे-बड़े नाम पश्छिमी चश्मे से हर चीज को देखते हैं । यहाँ भी वही गलती दुहरे ज रही है जो आधुनिक भारत के निर्मातों ने भारत के संविधान रचते समय किया था । देश- काल -परिस्थिति की तिकडी पर दुनिया की साड़ी चीजें निर्भर हैं पर हमारे पहले की पीढी भी और हम भी इसबात को नजरंदाज करते रहे हैं । जिसका खामियाजा हमें आज आर्थिक , राजनितिक, सामाजिक , न्यायिक , शिक्षा हर क्षेत्र में भुगतना पड़ रहा है । आप मेरा इशारा तो समझ ही गए होंगे । यहाँ अब आपके दिमाग ज्यादा बोझिल नही करूँगा । अंत में आप सब से उम्मीद है कि जिन -जिन को हमारे विचारों की बिजलियों ने कुछ हद तक सहमत किया हो अथवा कैसा भी असर डाला हो और वो भी जिन्हें ये विचार पसंद न आए हों , हमारा मार्गदर्शन करें तथा इस मंच को और भी ज्यादा प्रखर बनाने हेतु मेल करें अथवा फोन करें । फोन नम्बर और ईमेल पता नीचे दिया हुआ है । जय हिंद !

ईमेल :- jay.choudhary16@gmail.com
mobile :- 9718108845, 9210907050

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