दस रुपये के सिक्के पर “क्रूसेडर क्रॉस” – ईसाईयत की ओर बढ़ते कदम… New 10 Rs. coin and Evangelical Crusader’s Cross

केन्द्र सरकार द्वारा 10 रुपये का नया सिक्का जारी किया गया है, जो दो धातुओं से मिलकर बना है तथा जिस पर एक तरफ़ “ईसाई क्रूसेडर क्रॉस” का निशान बना हुआ है। हालांकि इस सिक्के पर सन् 2006 खुदा हुआ है, लेकिन हमें बताया गया है कि यह हाल ही में जारी किया गया है। इससे पहले भी सन् 2006 में ही 2 रुपये का जो सिक्का जारी किया गया था, उसमें भी यही “क्रॉस” का निशान बना हुआ था। “सेकुलरों के प्रातः स्मरणीय” नरेन्द्र मोदी ने उस समय गुजरात के चुनावों के दौरान इस सिक्के की खूब खिल्ली उड़ाई थी और बाकायदा लिखित में रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार का विरोध किया, तब वह सिक्का वापस लेने की घोषणा की गई। लेकिन सन् 2009 आते-आते फ़िर से नौकरशाही को फ़िर से वही बेशर्मी भरे “सेकुलर दस्त” लगे और दस रुपये का नया सिक्का जारी कर दिया गया, जिसमें वही क्रूसेडर क्रॉस खुदा हुआ है।

दूसरा फ़ोटो – एक रुपये के सिक्के में एक लकीर वाला क्रॉस तथा पुराने दो रुपये के सिक्के का जिसमें दोनाली क्रॉस दर्शाया गया है (जो मोदी द्वारा विरोध के बाद बन्द किया गया)

इसके बाद जो एक और दो रुपये के सिक्के जारी किये गये उसमें एक रुपये के सिक्के पर “अंगूठा दिखाते हुए” (Thumbs up) तथा दो रुपये के सिक्के पर “दो उंगलियों वाली विजयी मुद्रा” (Victory Sign) के चित्र खुदे हुए हैं। (इन सिक्कों पर ये “ठेंगा” किसे दिखाया जा रहा है, और “विक्ट्री साइन” किसे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है)।

एक रुपये का नया सिक्का जिसमें “अंगूठा” दिखाया जा रहा है।

अब आते हैं मूल बात पर – सन् 2005 वाले एक रुपये के सिक्के में जो क्रॉस दिखाया गया था वह साफ़-साफ़ क्रिश्चियन क्रॉस था, लेकिन जब हल्ला मचा तो सिक्का वापस ले लिया गया, लेकिन फ़िर से 2006 में जारी दो रुपये के सिक्के पर वही क्रॉस “थोड़े से अन्तर” के साथ आ गया। इस बार क्रॉस को दोहरी लाइनों वाला कर दिया गया, फ़िर से विरोध हुआ तो सिक्का वापस लिया गया, अब पुनः दस रुपये के सिक्के पर वही क्रॉस दिया गया है…। देश में इस्लामीकरण को बढ़ावा देना हो या धर्म परिवर्तन को, यह एक आजमाया हुआ सेकुलर तरीका है, पहले चुपके से कोई हरकत कर दी जाती है, एकाध-दो बार विरोध होता है, लेकिन कुछ समय बाद वही हरकत दोहरा दी जाती है, और फ़िर धीरे से वह परम्परा बन जाती है। हिन्दू संगठन कोई विरोध करें तो उन्हें “साम्प्रदायिक” घोषित कर दिया जाता है, बिके हुए मीडिया के सहारे “वर्ग विशेष” के एजेण्डे को लगातार आगे बढ़ाया जाता है। सिक्कों पर क्रूसेडर क्रॉस रचने के पीछे किस चापलूस मंत्री या सरकारी अधिकारी का हाथ है यह भी एक जाँच का विषय है। क्या सोनिया गाँधी का कोई ऐसा “सुपर-चमचा” अधिकारी है जो किसी “पद्म पुरस्कार” या अपनी पत्नी द्वारा चलाये जा रहे NGO को मिलने वाली भारी आर्थिक मदद के बदले में “ईसाईकरण” को बढ़ावा देने में लगा है? क्योंकि इस प्रक्रिया को सन् 2004 के बाद ही तेजी मिली है, अर्थात जबसे “माइनो सरकार” स्थापित हुई। जो भी हो, यह अपने देश की संस्कृति और परम्परा पर अभिमान करने वालों के लिये एक अपमानजनक बात तो है ही।

लुई द पायस द्वारा जारी सोने का सिक्का

दो और दस रुपये के सिक्के पर जो क्रूसेडर क्रॉस खुदा हुआ है वह असल में फ़्रांस के शासक लुई द पायस (सन् 778 से सन् 840) द्वारा जारी किये गये सोने के सिक्के में भी है। लुई का शासनकाल फ़्रांस में सन् 814 से 840 तक रहा, और उसी ने इस क्रूसेडर क्रॉस वाले सिक्के को जारी किया था। (लुई द पायस के सिक्के का चित्र देखें) अब चित्र में विभिन्न प्रकार के “क्रॉस” देखिये जिसमें सबसे अन्तिम आठवें नम्बर वाला क्रूसेडर क्रॉस है जिसे दस रुपये के नये सिक्के पर जारी किया है, जिसे सन् 2006 में ही ढाला गया है, लेकिन जारी अभी किया।

विभिन्न तरह के क्रॉस

जैसा कि चित्र में दिखाया गया है इस क्रूसेडर क्रॉस में चारों तरफ़ आड़ी और खड़ी लाइनों के बीच में चार बिन्दु हैं। RBI अधिकारियों का एक हास्यापद तर्क है कि यह चिन्ह असल में देश की चारों दिशाओं का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें चारों बिन्दु एकता को प्रदर्शित करते हैं, तथा “अंगूठे” और “विक्ट्री साइन” का उपयोग नेत्रहीनों की सुविधा के लिये किया गया है… अर्थात सूर्य, कमल, गेहूँ की बालियाँ, अशोक चक्र, सिंह आदि देश की एकता और संस्कृति को नहीं दर्शाते? तथा इसके पहले जो भी सिक्के थे उन्हें नेत्रहीन नहीं पहचान पाते थे? किसे मूर्ख बना रहे हैं ये?

जबकि इस क्रूसेडर क्रॉस के चारों बिन्दुओं का मतलब कुछ और है – जैसा कि सभी जानते हैं, “क्रूसेड (Crusade)” का मतलब होता है “धर्मयुद्ध”। नवीं शताब्दी के उन दिनों में “बाइज़ेन्टाइन शासनकाल” में क्रॉस के चारों तरफ़ स्थित इन चारों बिन्दुओं को को “बेसेण्ट” (Besants) कहते थे, Besant का ही दूसरा नाम था “सोलिडस” (Solidus), और यही चार बिन्दुओं वाले सोने के सिक्के नवीं शताब्दी में लुई तृतीय ने जारी किये थे। रोमन साम्राज्य द्वारा यूरोप में भी 15वीं शताब्दी में इन चिन्हों वाले सिक्के चलन में लाये गये थे, यह क्रॉस कालान्तर में “जेरुसलेम क्रॉस” के नाम से जाना गया। यह चारों बिन्दु आगे चलकर चार छोटे से क्रॉस में तब्दील हुए, जो कि यरूशलम से प्रारम्भ होकर धरती के चार कोनों में स्थित चार “एवेंजेलिस्ट गोस्पेल” (सिद्धान्त) के रूप में भी माने गये, जो कि क्रमशः “Gospel of Matthew”, “Gospel of Mark”, “Gospel of Luke” तथा “Gospel of John” हैं, जबकि बड़ा वाला क्रॉस स्वयं यीशु का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में रिज़र्व बैंक के अधिकारियों के “एकता” वाला तर्क बेहद थोथा और बोदा है, यह बात हमारे सदाबहार “सेकुलर” नहीं समझेंगे और हिन्दू समझना नहीं चाहते।

माइनो सरकार जबसे सत्ता में आई है, भारतीय संस्कृति के प्रतीक चिन्हों पर एक के बाद आघात करती जा रही है। सिक्कों से भारत माता, भारत के नक्शे और अन्य राष्ट्रीय महत्व के चिन्ह गायब करके “क्रॉस”, “अंगूठा” और “विक्ट्री साइन” के मूर्खतापूर्ण प्रयोग किये गये हैं, केन्द्रीय विद्यालय के प्रतीक चिन्ह “उगते सूर्य के साथ कमल पर रखी पुस्तक” को भी बदल दिया गया है, सरकारी कागज़ों, दस्तावेजों और वेबसाईटों से धीरे-धीरे “सत्यमेव जयते” हटाया जा रहा है, दूरदर्शन के “स्लोगन” “सत्यं शिवम् सुन्दरम्” में भी बदलाव किया गया है, बच्चों को “ग” से “गणेश” की बजाय “गधा” पढ़ाया जा रहा है, तात्पर्य यह कि भारतीय संस्कृति के प्रतीक चिन्हों को समाप्त करने के लिये धीरे-धीरे अन्दर से उसे कुतरा जा रहा है, और “हिन्दू” जैसा कि वे हमेशा से रहे हैं, अब भी गहरी नींद में गाफ़िल हैं। बहरहाल, यह तो खैर हिन्दुओं की शोकान्तिका है ही कि 60 में 50 साल तक एक “मुस्लिम-ईसाई परिवार” का शासन इस देश पर रहा।

किसी कौम को पहले मानसिक रूप से खत्म करने के लिये उसके सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों पर हमला बोला जाता है, उसे सांस्कृतिक रूप से खोखला कर दिया जाता है, पहले अपने “सिद्धान्त” ठेल दिये जाते हैं, दूसरों की संस्कृति की आलोचना करके, उसे नीचा दिखाकर एक अभियान चलाया जाता है, इससे धर्म परिवर्तन का काम आसान हो जाता है और वह कौम बिना लड़े ही आत्मसमर्पण कर देती है, क्योंकि उसकी पूरी एक पीढ़ी पहले ही मानसिक रूप से उनकी गुलाम हो चुकी होती है। वेलेंटाइन-डे, गुलाबी चड्डी, पब संस्कृति, अंग्रेजियत, कम कपड़ों और नंगई को बढ़ावा देना, आदि इसी “विशाल अभियान” का एक छोटा सा हिस्सा भर हैं।

किसी भी देश के सिक्के एक ऐतिहासिक धरोहर तो होते ही हैं, उस देश की संस्कृति और वैभव को भी प्रदर्शित करते हैं। पहले एक, दो और पाँच के सिक्कों पर कहीं गेहूँ की बालियों के, भारत के नक्शे के, अशोक चिन्ह के, किसी पर महर्षि अरविन्द, वल्लभभाई पटेल आदि महापुरुषों के चेहरे की प्रतिकृति, किसी सिक्के पर उगते सूर्य, कमल के फ़ूल अथवा खेतों का चिन्ह होता था, लेकिन ये “ईसाई क्रूसेडर क्रॉस”, “अंगूठा” और “विक्ट्री साइन” दिखाने वाले सिक्के ढाल कर सरकार क्या साबित करना चाहती है, यह अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है। इस देश में “हिन्दू-विरोधियों” का एक मजबूत नेटवर्क तैयार हो चुका है, जिसमें मीडिया, NGO, पत्रकार, राजनेता, अफ़सरशाही सभी तबकों के लोग मौजूद हैं, तथा उनकी सहायता के लिये कुछ प्रत्यक्ष और कुछ अप्रत्यक्ष लोग “सेकुलर” अथवा “कांग्रेसी-वामपंथी” के नाम से मौजूद हैं।

इन सिक्कों के जरिये आने वाली पीढ़ियों के लिये यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि, सन् 2006 के काल में भारत पर “इटली की एक ईसाई महारानी” राज्य करती थी… तथा भारत की जनता में ही कुछ “जयचन्द” ऐसे भी थे जो इस महारानी की चरणवन्दना करते थे और कुछ “चारण-भाट” उसके गीत गाते थे, जिन्हें “सेकुलर” कहा जाता था।

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38 Comments

  1. mahashakti said,

    May 12, 2009 at 9:01 am

    आपका यह लेख जागरूकता की ओर बढ़ता एक कदम है, पहले भी एक दो रूपये के सिक्‍के के साथ इस सरकार ने खिलवाड़ करने की कोशिश की थी और अब भी कर रहे है, इनको इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा।

  2. कुश said,

    May 12, 2009 at 9:03 am

    त्राहिमाम!!

  3. May 12, 2009 at 9:13 am

    है छोटी सी बात और सिक्का हर व्यक्ति के हाथ में आता है पर बात मुद्दा उठाने की है, हो सकता है कि इसके पीछे नौकरशाहों की चापलूसी हो या कोई बड़ा षड़यंत्र, जिसकी बू आपके पास आयी हो ।

  4. May 12, 2009 at 9:32 am

    यह सिक्का अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान मे डिजाइन किया गया है. मैं यहाँ के मुख्य डिजाइनर से मिला था और यह बात उठाई थी. उन्होने गहरा अफसोस जाहिर करते हुए कहा था कि इस निशान का ईसाई क्रोस से कोई लेना देना नहीं है. यह महज एक सयोंग है. उन्होने मुझे और भी कई डिजाइनें दिखाई थी. जो उनकी टीम ने सरकार को दी थी. उनमे से कुछ डिजाइने ऐसी थी जो गैर विवादित हो सकती थी. लेकिन यह क्रोस ही चुना गया. पहले मैं सोचता था कि क्रोस का निशान ऐसा नही होता, लेकिन आपके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य भी काफी गम्भीर है और इस सरकार की नियत हम सब जानते हैं ही. लेकिन सुरेशजी मैं एक बात कहना चाहुंगा, 1 और 2 रूपए के सिक्के पर अंगुठा और दो ऊंगली का निशान विवादित नही होना चाहिए. मैं इस बात से सहमत नही कि यह किसीको अंगुठा दिखाने के लिए बनाया गया है. इस तरह से हम एनआईडी के डिजाइनरों पर ऊंगली उठा रहे हैं जिन्होने एक अति सरल माध्यम के द्वारा ग्रामीण जनता को सिक्के का मूल्य पहचानने का अवसर दिया है. इन दो निशानों से गाँववाले सिक्के का मूल्य आसानी पहचान जाते हैं और यह मैने देखा है. हर जगह षडयंत्र नहीं भी होता है.मैं एक बात जोड़ता हूँ.. अहमदाबाद के बहुप्रतिक्षित बस रेपिड सिस्टम की बसों पर केसरिया ग्राफिक लगाए गए हैं. अब क्या समझें हम?

  5. May 12, 2009 at 9:50 am

    सरकार नेत्रहीनों की यदि सोचती तो ब्रेल लिपि में खुदवाती. यह स्वागत योग्य होता. यदि अंधों के लिए है तो एक दिखाने के लिए अंगूठा कभी भी प्रयुक्त नहीं किया गया है. सम्बंधित अधिकारी मानसिक रूप से दीवालिया हो गए हैं (एक और दो रुपयों के सन्दर्भ में). अब जो दस रुपये का सिक्का निकला है उसके पीछे निश्चित ही कुछ षडयंत्र ही है. प्रतीकात्मक कोई चिन्ह चाहिए थी तो हमारी पुरातन मुद्राओं से ही ली जा सकती थी. यदि स्वस्तिक होता तो हमें कोई एतराज न होता क्योंकि हमारे लिए वह एक शुभ सांकेतिक चिन्ह है भले वह यहूदियों के लिए डरावनी लगे. हमें सिक्के तो भारत में चलाना है न की इस्राइल या europe में.हम तो यहाँ तक कहते हैं की सिक्के के बीच में गौतम बुद्ध को बिठा दिया होता तो भी किसी को आपत्ति नहीं होती. शान्ति के प्रतीक के रूप में. इस दस रुपये के सिक्के का घोर विरोध होना ही चाहिए.

  6. May 12, 2009 at 10:12 am

    भईये हम तो ठहरे निपट अनपढ. जब हमे ये ही समझ मे नही आया कि दिल्ली मेट्रो के सारे स्टेशन एक रंग के है और सीलम पुर का स्टेशन हरे रंग का कैसे हो गया तो सिक्के वाला मामला कैसे समझ पायेगे ? आप ज्ञानी गुणी जनो मे से हॊ कोई हमे समझा दे कि क्या मुस्लिम आबादी के कारण ये स्टेशन स्वचालित तरीके से अपना रंग बदल गया ? वैसे अब हमे ऐसे सवाल करने से भी डर लगने लगा है कि कही कोई सेकुलर इस पर भी कोई तालीबानी का तमंगा ना टाग दे

  7. khursheed said,

    May 12, 2009 at 10:18 am

    पहली चीज़ तो ये इतना बड़ा मुद्दा नहीं है कि इसको इतनी गंभीरता से उठाया जाए. पहली बात तो सिक्के पर छापा गया निशान का क्रॉस से कोई लेना देना नहीं हैं और यदि है भी तो इसमें इतना परेशां होने कि ज़रुरत नहीं हैं. इंडोनेशिया एक मुस्लिम बहुल देश हैं वहां के नोट पर गणेश कि मूर्ति छापी जाती है इसी तरह पाकिस्तान में मोहन जोदरो कि तस्वीर छापी जाती हैं. अगर ये मुल्क भी अपनी मानसिकता ऐसी ही बना ले और इन सब चिन्हों को अपने नोट पर से हटाने लगें तो तब इन हिन्दुओं के कथित ठेकेदारों को बहुत बुरा लगेगा और इसी को लेकर वे भारत के मुस्लिमों को निशाना बनाने से नहीं चूकेंगे. रही बात इटली कि सोनिया कि तो बहुत से पश्चिम मुल्कों में भारतीय मूल के लोग ऊँचे-ऊँचे पदों पर पहुँच रहें है और हम बड़े गर्व से सीना फुलाकर इसको बताते व छापते हैं. जैसे अमेरिका में ओबामा मंत्रिमंडल में कई सदस्य भारतीय मूल के हैं.

  8. May 12, 2009 at 10:23 am

    सुब्रमणियमजी की बात से असहमति है. वे भारतीय प्रतिकों को अपनाने की बात करते है. वे भूल जाते है कि भारतीय प्रतिक अब साम्प्रदायिकता की श्रेणी में आते है. एक दिन संस्कृत, योग व देवनागरी भी साम्प्रदायिकता की श्रेणी में आ जाएंगे. हिन्दी हिन्दुओं की और उर्दू मुसलमानों की तो हो ही गया है. इसलिए धर्मनिरपेक्ष बन्धू अपनी भाषा में ज्यादा से ज्यादा अरबी शब्द ठूँसने का प्रयास करते पाए जाते है. सिक्को की डिजाइन के ढेर सारे विकल्प थे. देशी प्रक्षेपास्त्र वाला भी था. मगर सरकार बदली और “एकता” माता आ गई.

  9. May 12, 2009 at 10:23 am

    कांग्रेसनीत संप्रग सरकार द्वारा भारतीय सभ्‍यता और संस्‍कृति पर लगातार हमला जारी है। पहले इन्‍होंने राष्‍ट्रपुरूष श्रीराम को नकारा, रामसेतु पर प्रहार किया, शंकराचार्य का अपमान किया, राष्‍ट्रगीत का अपमान किया, केंद्रीय विद्यालय के लोगो से कमल के फूल को हटाया….और अब फिर दो रू. के सिक्‍के पर क्रॉस अंकित करने के पश्‍चात हुए भारी विरोध के बावजूद दस रूपए के सिक्‍के पर क्रॉस अंकित कर दिया।इन समस्‍याओं का बस एक ही उपाय है संगठित हिंदू प्रतिरोध। कांग्रेस की कारस्‍तानियों के बाद देश में हिंदू प्रतिरोध प्रबल हो रहा है।

  10. May 12, 2009 at 10:28 am

    अरे! यह तो सचमुच क्रुसेडर क्रास जैसा ही दिखता है, अभी आपने बताया तो इस और ध्यान गया. आपको यह भी जरूर पता होगा न कि क्रूसेड किसके खिलाफ लड़े गये थे? भाई क्रूसेडिये बांके वीर जब इटली में बैठे पोप ने भेजे थे तो कसम उठवा ली थी कि इस दुनिया से मुसलमानों का सफाया कर देंगे. वह धर्मयुद्ध करने निकले थे क्योंकि उनके अनुसार मुसलमानों ने जेरुसलेम की पवित्र धरती को गंदा कर दिया था. तो क्रूसेडिये अपने झ्ंडो, कवचों, ढालों, पर यह निशान लेकर निकले थे, इसके नीचे उन सभी राष्ट्रों के लोग एक ही लक्ष्य के साथ एकत्रित हुये थे. वह लक्ष्य था मुसलमानों को नेस्तानबूद करना.तो अगर वही क्रूसेड वाला झंडा अगर सिक्के पर चल गया है तो मुझे लगता है कि मुसलमानों को सावधान हो जाना चाहिये. वैसे भी पश्चिमी देश एक नई क्रूसेड तो चालू कर चुके हैं और लगता है कि उनका लक्ष्य इस बार उस काम को पूरा करना है जिसे पिछली बार नहीं कर पाये. अगर भारत में क्रुसेडिये सिम्बल राष्ट्र की सरकार द्वारा लाये जा रहे हैं तो इसका गूढ़ मतलब समझना जरूरी है. क्या हमारे राष्ट्र की सरकार अंदर ही अंदर मुसलमानों की चटनी बनाना चाहती है जैसा कि क्रुसेड वाले चाहते थे?भाई मेरा दिल तो त्राही-त्राही कर उठा. यह तो बड़ी खतरे कि बात हुई कि क्रुसेड का चिन्ह आ गया, उसी क्रुसेड का जिसमें लाखों नहीं करोड़ों मुसलमान मरे.खुर्शीद जी, क्या आप जानती हैं कि क्रुसेड में मुसलमानों के साथ क्या किया गया? अगर सचमुच इसके बाद आप इसका समर्थन करती हैं तो ‘जय हो’ नारा आप ही के लिये है.

  11. May 12, 2009 at 10:31 am

    @भाई खूरशीद,आपकी बात सोलह आने सही है. मैं समर्थन करता हूँ. यह देश हम सबका है. अतः किसी भी धर्म के प्रतिक को लेना उदारता दर्शता है. यह अपराध नहीं है. अपराध तब हो जाता है जब यहाँ की मूल संस्कृति के तमाम प्रतिकों को साम्प्रदायिक बना दिया जाता है, उन्हे अछूत बना दिया जाता. जब हिन्दूओं के प्रतिको को अपनाने से गुरेज करोगे तो वे अन्यों के प्रतिकों को लादना कैसे सहेगें?राम पर डाक टिकट विदेशों में छपे है, जो देश राम का था उसकी सरकार यह “साम्प्रदायिक” काम नहीं कर सकती. वह तो बस उसे खलनायक बनाने का जतन जरूर कर सकती है. कष्ट यहीं होता है.

  12. May 12, 2009 at 10:36 am

    भाई खुर्शिद, एक बात रह गई थी. क्षमा करना. अगर हमारी सरकार सिक्कों पर गणेशजी का चित्र छाप देती है तो इसमें आप भगवाकरण तो नहीं देखोगे ना? स्वागत ही करोगे शायद.

  13. May 12, 2009 at 10:50 am

    क्या बात कर रहे हैं आप बेंगाणी जी? आप को तो खुर्शीद की महानता का कायल होना चाहिये, आखिर कौन ऐसा मुसलमान मिलेगा जो अपनी कौम की करोड़ों लोगों की हत्या के चिन्ह ‘क्रुसेड क्रास’ का समर्थन करेगा! भाई इरान, में तो क्रुसेड क्रास का समर्थन करने वालों का वो हश्र होता है कि…इसलिये हमें सबको एक स्वर में क्रुसेड क्रास के समर्थन की हिम्मत रखने वाली खुर्शीद जी की प्रशंसा करने चाहिये, यह तो लेखिका तस्लीमा नसरीन से भी ज्यादा हिम्मती महिला हैं.जय हो खुर्शीद आपकी

  14. Rachna Singh said,

    May 12, 2009 at 12:03 pm

    Bravo to you for this post i will not accept this coin and will return to bank if i ever get it { if is it still cirulating } commendable post suresh ji

  15. May 12, 2009 at 1:04 pm

    एक बात ज्ञान वर्धन के लिए…जब किसी चीज की डिजाइन करनी होती है, उस क्षेत्र के नमुनों का अध्ययन किया जाता है. जब सिक्कों को डिजाइन करने की बात आयी तो दुनिया भर के आधुनिक और प्राचीन सिक्कों का अध्ययन किया गया….यह प्रतिक प्राचीन सिक्के से इंपायर हो कर बनाया गया होगा….कोई शक?

  16. May 12, 2009 at 1:45 pm

    hindoo ko dharm-nirpekshta ka ghol pilaye raho, baaki sab theek hai, lekin yaad rakhne wali baat yah hai ki yah mulk tabhi tak secular hai jab tak hindoo 70 % hain. aane wale dinon men sthiti kya hogi, sochkar rongte khade ho jate hain.

  17. May 12, 2009 at 1:56 pm

    जो जीतता है, राजा बनता है, सिक्का उसी का चलता है..और भिश्ती राजा बने तो, चमडे का भी सिक्का चलता है..आप किस बात की बात करते हैं..बाकी सब तो बस चुप रहते हैं!!!!!वाह वाह सुरेश जी, आपसे यही उम्मीद थी.आप ना हो तो ब्लोग्स पढ़ कर सिर्फ शर्म-निरपेक्षता दिखे..बाकियों ने असली मुद्दा उठाया ही नहीं..आप सच की ध्वजा यूँ ही फहराते रहें.. बढ़ते रहें, लिखते रहें..~Jayant

  18. May 12, 2009 at 3:41 pm

    Hamesha ki taraha tathyperk lekh

  19. रंजन said,

    May 12, 2009 at 4:16 pm

    ना जी.. मैं इसमें धर्म का कोण नहीं देखता… और अगर है भी तो क्या फर्क पड़ने वाला? ये देश/सभ्यता/धर्म सदियों से इस धरा पर है और आने वाले कई सदियों तक अक्षुण है… इन छोटी छोटी बा्तों से कुछ नहीं होगा.. जस्ट इग्नोर दिस.. this is just a symbol which represent anything.. by saying or witting we make it religious…

  20. May 12, 2009 at 5:01 pm

    मैं भी रंजन जी की बात से पूर्ण रूप से सहमत हूं. यह तो बस एक चिन्ह है हमें क्या मतलब कि यह क्या कह रहा है. सही है न?वैसे जो हम दनादन कमेंट में छाप रहे हैं वह भी कुछ चिन्ह भर ही हैं, उनका मतलब अब हमारे लिये खास है क्योंकि हमें उनका मतलब समझना सिखाया गया है. तो रंजन भाई जो चिन्ह आज हमारे सिक्के पर छपा है उसका मतलब भी एक खास है जिसे सारा जग जानता है. आप अनभिज्ञ बने रहना चाहें तो रहिये, लोग तो अनभिज्ञ नहीं रहेंगे. जिन्हें इसका मतलब पता है वह इसके लिये प्रेम नहीं उड़ेल सकता, क्योंकि यह चिन्ह लाखों यहूदियों, इतने ही मुसलमानों और इतने ही क्रिस्तानियों कि मौत का प्रतीक है. यह चिन्ह प्रतीक है उस खतरनाक धार्मिक जेहादी मानसिकता का जिससे आज सारा विश्व त्रस्त है.वैसे मैं एक बार फिर खुर्शीद जी को मुबारकबाद देना चाहूंगा जिन्होंने इस चिन्ह और प्रतीक के बारे में जानकर भी इसका समर्थन कर साहस और आत्मबल का परिचय दिया है. उन्होंने इस चिन्ह और क्रूसेड का खुले दिल से आलिंगन कर उस साहस का परिचय दिया है जो शायद सलमान रश्दी में ही था नहीं, मैं तो यह कहूंगा कि सलमान रश्दी में भी वह आत्मबल नहीं था जो खुर्शीद जी में है.उन्हें मैं धन्य कहूंगा.

  21. May 12, 2009 at 6:17 pm

    को को रोते हो? अभी जूते पड़ना बाकी रह गया है हिन्दू होने के मान पर। ये सब एक तरह की शुरुआत है। पकड़े गये तो कह देंगे कि धोखे से हुआ और न पकड़े गये तो बल्ले-बल्ले। कभी चित्रकार हिन्दू देवी-देवताओं के चित्र आपत्तिजनक बना देते हैं, फिर माफी भी तो माँग लेते हैं, देखा कितने सहिष्णु हैं। हिन्दू हैं इतने सहिष्णु, बस होहल्ला और मारपीट पर उतर आते हैं। बन्द करो बकवास और जोर से बोलो……हम हिन्दू नहीं हैं, हम हिन्दू नहीं हैं

  22. May 12, 2009 at 7:15 pm

    अभी तो सिक्के पर है कल सो काल्ड सेकुलर लोगो के माथे पर भी छपा दिखाई देगा। आंख खोल दी आपने।

  23. May 13, 2009 at 12:36 am

    कहावत है ‘भैस के आगे बीन बाजे, भैस खड़ी पगुराए’। सेक्युलर और भैंस में क्या अन्तर होता है? भैंस घास खाती है सेक्युलर देश खा रहे हैं। खाली-पीली बीन बजानें से कूछ नहीं होगा। हिन्दू ‘वीर भोग्या वसुन्धरा’ का मन्त्र भूल गये हैं?इसाई और मुसलमानों में होड़ लगी है देश को खानें की। सेक्युलर और कम्युनिस्टों मे होड़ है दलाली खानें की। जय हो!

  24. dschauhan said,

    May 13, 2009 at 4:58 am

    श्री सुरेश जी में आप की बात से पूरी तरह से सहमत हूँ! श्री संजय जी ने कहा है कि यह एक इत्तेफ़ाक भी हो सकता है पर मित्र इत्तेफ़ाक एक बार हो सकता है बार बार नहीं जब विरोध के फलस्वरूप 2 रुपये का सिक्का वापस लिया जा चुका था तो वही गलती दोहराने की क्या आवश्यकता थी! देश वैसे ही कई धार्मिक उन्मादों कि चपेट में है फिर यह सरकारी प्रयास क्यों? देश हित में आप द्वारा दी गई अति महत्वपूर्ण जानकारी के लिए हार्दिक धन्यवाद!

  25. May 13, 2009 at 5:35 am

    तर्क और और कुतर्क में क्या अंतर होता है जानने के लिए आप सुरेश जी के इस ब्लॉग पर हमेशा आते रहें… पता चल जायेगा |जब स्वयं तर्क में इतनी शक्ति है कि वह सत्य की ‘वाट’ लगा देता है तो कुतर्क तो उससे भी भयानक हथियार है. कुतर्क से कोई भी किसी भी साधारण मष्तिष्क वाले इन्सान को पल भर में बरगला सकता है और ब्रेन वाश कर सकता है|हाँ अगर आप में से किसी को भी लगता है कि ईश्वर एक है और सिर्फ एक और देवताओं और फरिश्तों या अन्य किसी का उसके (ईश्वर) के काम में शिरक़त (हस्तक्षेप) नहीं है तो आप यहाँ चटका लगा कर पता कर सकते हैं|

  26. May 13, 2009 at 5:48 am

    जय हो,श्रीमान जी कृपा कर के मुझे इटली के संविधान और संस्कृति की थोरी जानकारी देने की कृपा करें, क्योंकी पिछले कुछ दिनों से यह देखने मैं आ रहा की देश मैं हवा का रुख कुछ बदल रहा है और विदेशी दलालों के समर्थकों की संख्या दिन-पर-दिन बढ़ रही है हो सकता है सिक्कों और संस्कृति के बाद इटली की कोई फर्म देश मैं संविधान की आपूर्ती का ठेका ले ले, इसे मैं अपने आप को आने वाली विदेशी सर्कार का सब से बार चमचा साबित करने के लिए मैं पहले से तय्यारी कर के रखना चाहता हूँ.जय हो मेरी, जय हो माइनो मैय्या की, जय हो छक्का पार्टी की, जो अपनी २०० साल पुराणी पार्टी मैं से एक मर्द / भारतीय को अध्यक्ष पद के लिए नहीं तलाश सकी जय हो, जय हो, जय हो जय हो

  27. Archit said,

    May 13, 2009 at 5:54 am

    its the worst thing done by this UPA govt. they are just going to convert every indian into CHRISTIANS..

  28. May 13, 2009 at 12:33 pm

    सलीम खान जी, आपकी वेबसाइट पर जाकर कुतर्क के नमूने तो देख ही लिये आप कहते हैं: -0. आप कहते हैं आप हिन्दू हैंमुबारक हो, हमें खुशी है कि आपने हिन्दू को धर्म से आगे माना, हम भी यही कहते हैं कि हिन्दुस्तान को प्यार करने वाला हर व्यक्ति हिन्दू ही है.1. कि मुस्लिम धर्म न मानने वाले को काफिर ही कहते हैं क्योंकि यही शब्द आपके इस्लाम ने दिया हैमाफ कीजिये, अगर मनमाफिक शब्द ही चलेंगे चाहे जिस व्यक्ति के बारे में उनका प्रयोग किया जा रहा है उन्हें बुरे लगें, तो जो काफिर कहता है उसके लिये हमारे पास शब्द है ‘सुअर’ और यही शब्द सही लगता है किसी भी व्यक्ति को उसके धर्म के आधार पर अपमानित करने वाले व्यक्ति के लिये.

  29. GJ said,

    May 13, 2009 at 4:19 pm

    Hello suresh ji,Your post has been back-linked in http://hinduonline.blogspot.com/ – a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu – Hindu Online.Please visit the blog Hindu Online for posts from a large number of blogs, sites worth reading out of your precious time and give your valuable suggestions and comments.

  30. cmpershad said,

    May 13, 2009 at 7:26 pm

    हां भई, सिक्के पर राम तो नहीं रह सकता क्यों कि वह हिंदुवादी हो जाता, अल्लाह का नहीं हो सकता क्योंकि निज़ामिया दौर बीत चुका। कभी नेहरू जी भी जार्ज की तरह सिक्के पर विराजमान थे। अब उनकी नतबहू अपने देश का सिक्का जमा रही है…तो विरोध किस बात का???!!!

  31. July 28, 2009 at 5:03 pm

    बिलकुल सही लिखा है सुरेश जी | जब तक हम हिन्दू सुतुर्मुर्ग बन कर रहेंगे तब तक ये चलता रहेगा |पोस्ट के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |

  32. August 17, 2009 at 6:26 pm

    माइनो का जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है सब पर । हम हजारों साल से गुलाम लोग एकाएक कैसे गणतंत्र स्वीकार कर लें । हमें चाहिये एक राजा वो भी विदेशी जो रोज हंटर मार मार कर हमारी पीठ चमढ़ी उधेड़ता रहे ।

  33. sunil patel said,

    August 27, 2009 at 7:12 am

    सुरेश जी ने बहुत ही सटीक मुद्दा उठाया है। वाकई जन सामान्य आपस में बोल कर या ब्लाग पर लिख कर अपने मन की बात बोल देता है। किन्तु दुर्भाग्य है इस देश का जिसे चलाने वाले अधिकांश नेता अपना इमान धर्म बेच कर बैठे हैं और बहुत से उच्च श्रेणी अफसर (राजपत्रित अधिकारी) केवल यस बास बोलने के लिए मोटी तन्ख्वाह और लाल बत्ती पाते हैं।

  34. Bajrang said,

    August 27, 2009 at 1:25 pm

    मुद्दे की बात यह है की मुझे क्या करना चाहिए ? मैं यहाँ जयपुर मैं विवेकानंद यूथ क्लब चलाता हूं ! हम सबको मिलकर क्या करना चाहिए ?ऐसे लेख भेजते रहे तथा साथ मैं यह भी यह भी गाइड करें की उसमें हमें क्या करना चाहिए ?धन्यवादबजरंग लाल जयपुर , राजस्थान

  35. 'अदा' said,

    August 28, 2009 at 11:07 pm

    bahut hi zabardast baat kahi hai aapne ..aaj to maine padh li hai is par tipanni karne ke liye aaungi kyonki yah mamla chutikiyon mein tipanni karne waala nahi hai…yah bahut hi ganbheer baat hai…abhi ungali pakdi hai …fir kalaai aur fir pahuncha…aapka bahut bahut dhanyawaad yah sab prakash mein laane ke liye…

  36. March 19, 2010 at 10:38 pm

    खाली गाल बजाये जा रहे हो..हॉं भाईया ये भी ठीक. हॉं भाईया वो भी ठीक..कोई ठोस प्लानिंग है ..वरना मुम्बई हमले के बाद सब कुछेक रैली हूयी, गिद्ड भभकीयां दि गयी…मामला नेताओं के गलत बयानो और मिनिस्टिरी पोर्टफोलियो चेन्ज कराके उलझा दिया…जो कुछ सुना झाड पोछ कर रफा दफासुरेश जी यदि अनुमति हो तो क्या ये पोस्ट मै अपने ब्लाग पर लगा सकता हु

  37. DON said,

    May 22, 2010 at 11:52 am

    muje to ye hi aacha laga me nai chahta k hamare dharma ka koi pratik sab k hath me aaye ya feka jaye ye aacha he q bhaiyo? me to kehta hu army k shoes me b ye symbol bana do hahahahahahaha

  38. June 2, 2010 at 10:09 am

    प्रतीक्षा कीजिए, आपके हाथ में भी आता ही होगा संत अल्फ़ोंज़ा की मूर्ति वाला ५ रुपए का नया सिक्का। जो उनकी जन्मशताब्दी पर भारत सरकार ने निकाला है। फ़ेसबुक पर आज उसी का चित्र लगाया है और भाई लोग डंडे लेकर चालू हो गए हैं। 🙂


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