>मज़हबी एकता का एक सुन्दर गीत !!!

>देश में चुनाव सम्पन्न हो गये हैं और इस चुनाव में बहुत से लोगों ने हिन्दुस्तानियों को एक दूसरे से लडाने के प्रयास किये। इस गीत में ऐसे फ़िरकापरस्तों के लिये करारा जवाब भी है और अपने देश की संस्कृति की साझा झलकी भी,

फ़िल्म: धर्मपुत्र (1961)
संगीत: नारायण दत्ताजी
गीतकार: साहिर लुधियानवी
गायक कलाकार: महेन्द्र कपूर, बलबीर और साथी

ये गीत कुछ कुछ कव्वाली की शक्ल लिये हुये है। गीत में ताली की थाप प्रारम्भ से बिल्कुल अलग सुनायी देती है लेकिन उसके बाद ताली की थाप सुनना थोडा मुश्किल है, ऐसे में क्या इसे कव्वाली कह सकते हैं? फ़िलहाल आप इस गीत को सुने और अपनी बेशकीमती राय से हमें अवगत करायें।

http://www.divshare.com/flash/playlist?myId=7370164-0fa

14 Comments

  1. May 13, 2009 at 5:30 pm

    >बहुत सुन्दरआभारमुम्बई टाईगर हे प्रभु यह तेरापन्थ

  2. May 13, 2009 at 6:36 pm

    >बहुत दिनों बाद सुना यह गीत .. अच्‍छा लगा।

  3. May 13, 2009 at 7:11 pm

    >वाकई बहुत दिनों बाद सुना..अच्छा लगा.

  4. May 14, 2009 at 1:43 am

    >बहुत खूबसूरत !!

  5. Anonymous said,

    May 14, 2009 at 2:10 am

    >The music is by N.Datta whose real name was Datta Naik.

  6. May 14, 2009 at 1:51 pm

    >नीरज भाई, बहुत सुन्दर गीत, मैने भी इसे एक लम्बे अरसे के बाद सुना।धन्यवाद।

  7. May 14, 2009 at 5:19 pm

    >कव्वालीयों में शीर्ष स्थान के लिये चयनित कव्वाली!!शुक्रिया.

  8. May 15, 2009 at 12:17 am

    >Nice quwalli — thanx Neeraj bhai

  9. May 23, 2009 at 10:26 am

    >काबे के देश में हैं और इस कव्वाली का लुत्फ बार बार ले रहे हैं…बहुत बहुत शुक्रिया

  10. May 29, 2009 at 5:39 pm

    >इसलाम को लेकर आपके सवालों का जवाब यहाँ तलाशें

  11. Anonymous said,

    May 30, 2009 at 1:01 am

    >इसलाम क्या है , इसके बारे मे वाकई मे जानना चाहते हैं तो यहाँ किल्क करें

  12. sanjay patel said,

    June 3, 2009 at 4:19 am

    >विशुध्द क़व्वाली ही है ये सागर भाई.कई बार लाइव क़व्वाली प्रस्तुति में भी तालियों का दौर थम जाता है.क़व्वाली का अंदाज़े बयाँ ही उसे क़व्वाली बनाता है.तालिया,हारमोनियम,ढोलक तो उसके आभूषण हैं.लाजवाब प्रस्तुति है यह

  13. Mired Mirage said,

    June 4, 2009 at 3:20 pm

    >रेडिओ के जमाने में यह गीत ख़ूब सुना है। सुनवाने के लिए आभार।घुघूती बासूती

  14. June 4, 2009 at 6:24 pm

    >इन उस्तादोँ की गायकी के तो क्या कहने !! वाह वाह …एकता का सँदेश आज ओबामा भी दे रहे हैँ पर जो कट्टरवादी हैँ उनके दिलोँ मेँ किसी के लिये जगह ही नहीँ :-(- लावण्या


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