>जनता का अविश्वास बढ़ा है : युवा सांसदों का बयान

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सरकार और जनता के बीच अविश्वास की खाई का बड़ा कारण देश का विकास धीमी गति से होना है । यह विश्वास देश के विकास की गति को बढ़ा कर ही वापस लाया जा सकता है और विकास के लिए जरुरी है कि सभी के पास रोजगार उपलब्ध हों ।१५ वीं लोकसभा में भले ही १०० से ज्यादा आपराधिक पृष्ठभूमि के सांसद जीत कर आए हो लेकिन युवा ब्रिगेड के जलवे से अपराधीकरण और वंशवाद जैसे मुद्दे गौण होते जा रहे हैं ।
वर्तमान लोकसभा की युवा ब्रिगेड के कुछ सदस्यों ने एसोचेम की एक परिचर्चा में अपनी प्राथमिकतायें सामने रखी । विभिन्न दलों से जीत कर आए इन युवा प्रतिनिधियों का मानना है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर , कृषि , सैन्य क्षमता से लेकर जनसँख्या नियंत्रण और शिक्षा – स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देकर ५-१० सालों में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की बदहाल सूरत को खुशहाली में बदला जा सकता है । भाजपा नेता कीर्ति आजाद ने कहा , ” युवा सांसदों के लिए शिक्षा और जनसँख्या नियंत्रण अहम् मुद्दे हैं । जैसे चीन ने इस दिशा में काफ़ी कार्य किया है वैसे ही भारत में कुछ कदम उठाने होंगे । “
भाजपा सांसद दुष्यंत सिंह ने भी कहा, ” सरकार को लोगों की शिक्षा और जनसँख्या नियंत्रण पर उचित ध्यान देने की जरुरत है । आने वाले समय में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर मुहैया करना सरकार की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी । “
एक अन्य युवा सांसद विजय इंदर सिंघल बोले , ” चुनाव में जनता ने युवाओ को पसंद किया । यदि देश को विकास के रास्ते पर जाना चाहते हैं तो हमें सही जगह सही लोगों को रखना होगा ।”
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा , ” मंदी के समय उद्योग जगत को कामगारों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनके नौकरियों की रक्षा करनी चाहिए क्योंकि इंडस्ट्री के अच्छे समय में इन्होंने ही साथ दिया था । मुनाफे की आढ़ में मानवीय मूल्यों का गला नहीं घोटा जाना चाहिए । “
कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल ने मौके पर कहा , “देश में मतदान के तरीके सुधारने की जरुरत है ताकि चुनाव के समय बाहर गए हुए लोग और प्रवासी भारतीय भी वोट कर सकें । और सरकार को देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काम करना होगा क्योंकि विकास की नीव यही है । “
कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा ” हमारे पास चुनौती और मौके दोनों हैं हर दिन चीन सबसे ज्यादा खर्च सैन्य ताकत को बढ़ाने में कर रहा है । दक्षिण एशिया के हालत ठीक नही हैं । इसलिए देश को इन सब चुनौतियों से आगे बढ़ना होगा । सरकार को कृषि पर ध्यान देना होगा क्योंकि ६५% जनता अभी भी खेती से जुडी है ।
एसोचेम द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में कई और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने सुझाव दिए । चर्चा का सार यही रहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर , कृषि , सैन्य क्षमता , जनसंख्या नियंत्रण , शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए । युवा सांसदों बयानबाजी एक ने लड़ते अहसास दिलाने वाला है लेकिन तब जब ये बातें उनके व्यवहार में भी सामने आए । क्योंकि मनसा , वाचा फ़िर कर्मणा के सिधान्तों से विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकता है । थोथी बयानबाजी से जनता को भरमाया नहीं जा सकता है और इन्हें भी समय रहते समझ जाना चाहिए कि कागज़ के फूलों से अधिक दिनों तक खुशबू नहीं आ सकती है ।

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