>भारत एक मिशन है,एक गौरवपूर्ण भविष्य है : "नेता जी "

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मनुष्य -जीवन में जिस प्रकार शैशव ,यौवन,प्रौढावस्थाऔर वार्धक्य आते हैं , राष्ट्रीयजीवन में भी ऐसी अवस्थाएं उसी क्रम में आती है । मनुष्य मरता है , एक शरीर को त्याग कर नया कलेवर धारण करता है । राष्ट्र भी मरता है और मरण के भीतर से ही नवजीवन प्राप्त करता है । फ़िर भी व्यक्ति और राष्ट्र का अन्तर यह है कि सब राष्ट्र मृत्योपरांत जीवन नहीं पाते । भारतवर्ष एक से अधिक बार मरा है , किंतु हमेशा पुनर्जीवन मिलता रहा है । उसका कारण यह है कि भारत के अस्तित्व की सार्थकता रही है और आज भी विद्यमान है । भारत का एक संदेश संसार के कोने-कोने तक पहुँचाना है; भारत की संस्कृति में ऐसे कुछ तत्व हैं जिसे प्राप्त किए बगैर विश्व सभ्यता वास्तविक उन्मेष नही पा सकती है । केवल यही नहीं , विज्ञान , कला , संगीत , साहित्य , व्ययसाय , वाणिज्य आदि तमाम क्षेत्रों में हमारा राष्ट्र कुछ देगा और सिखायेगा । इसीलिए भारतीय मनीषियों ने अंधकारपूर्ण युगों में भी अपलक भारतीय ज्ञान का दीपक प्रज्वलित रखा । हम उन्ही की संतान हैं । अपना राष्ट्रीय लक्ष्य प्राप्त किए बिना हम मर सकते हैं क्या ?

जंग -ऐ- आजादी के सच्चे सेनानायक सुभाष चन्द्र बोस “नेता जी ” ने कहा था -” बाहर के जेलखानों में रहने के दौरान अक्सर मेरे मन में यह प्रश्न उठता -किसके लिए , किसकी प्रेरणा से हम इतनी यातनाएं सहकर भी टूटे नहीं बल्कि और अधिक शक्तिशाली हो उठे हैं ? भीतर से जबाव आता – भारत एक मिशन है , एक गौरवपूर्ण भविष्य है ; भारत के उस भविष्य के उत्तराधिकारी हम हैं । नए भारत के मुक्ति के इतिहास की रचना हम ही कर रहे हैं और हम ही करेंगे । यह आस्था है तभी सब दुःख कष्ट सह सकता हूँ , भविष्य के अंधेरे को स्वीकार कर सकता हूँ , यथार्थ के निठुर सत्यों को आदर्श के कठोर आघात से धुल में मिला सकता हूँ । ”

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