>प्रेम भी शायद ऐसी हीं एक घटना है …………….

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संसार दो शक्तियों का घोर संघर्ष है । ये शक्तियां परस्पर भिन्न नहीं , एक ही पथ के राही हैं

एक संयोजक है जैसे ; फूलों से भंवरों के मिलन में , विटप से लता के आश्लेषण में , रात्रि से अन्धकार के प्रणय में , नदी के सागर में समा जाने में आदि ।

दूसरी शक्ति विच्छेदक है मसलन ;आंधी से वृक्षों का विनाश , दावानल से वनों का जलना ,व्याध द्वारा कपोतों की मृत्यु आदि ।

कभी-कभी दोनों शक्तियों का एक ही घटना में ऐसा सम्मिलन होता है कि हम भौंचक रह जाते हैं । कुछ भी सहजता से समझना कठिन होता है । प्रेम भी शायद ऐसी हीं एक घटना है ………………………………………………………………………………………………….

(अमरवल्लरी :सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय )

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