टिप्पणी सम्बन्धी खुराफ़ात – एक गम्भीर मसला, कृपया सभी ब्लॉगर ध्यान दें…

(कृपया मेरे सभी “नॉन-ब्लॉगर” सब्स्क्राईबर इस पोस्ट को इग्नोर करें)
आज ई-मेल से किसी श्री राज सिंह का पत्र मिला कि आपने मेरे ब्लॉग पर जो भद्दी टिप्पणी की है उसे लेकर डॉ रूपेश श्रीवास्तव नाराज़ हैं और मुझसे स्पष्टीकरण माँग रहे हैं। इस मेल में राज जी ने मुझसे अनुरोध किया था कि इस टिप्पणी को लेकर कृपया अपना स्पष्टीकरण दें ताकि रूपेश श्रीवास्तव को सन्तुष्ट किया जा सके।
(प्राप्त ईमेल का स्नैपशॉट)

उनके कहे अनुसार उनके दिये ब्लॉग http://rajsinhasan.blogspot.com/2009/04/2.html पर जाकर देखा तो वाकई में बड़ी ही भद्दी भाषा में डॉ रूपेश श्रीवास्तव को भला-बुरा कहा गया था। जबकि यह टिप्पणी मैंने की ही नहीं थी, लेकिन टिप्पणी में मेरा नाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
(उक्त टिप्पणी का स्नैपशॉट)

मैंने तत्काल उनके ब्लॉग पर जाकर जवाब दिया और बताया कि मैंने इस प्रकार की कोई टिप्पणी नहीं की है, और यह निश्चित ही किसी की खुराफ़ात है।
(दिये गये जवाब का फ़ोटो स्नैपशॉट)

अमूमन मैं “कविता” वाले ब्लॉग पर जाता नहीं हूँ (जिस बात की मुझे समझ नहीं है वहाँ जाकर मैं क्यों अपना समय खराब करूँ, सभी कवितायें अच्छी ही होती हैं, लेकिन मुझे एक भी समझ नहीं आती, सो मैं कोई टिप्पणी भी नहीं करता)। मजे की बात यह है कि राज सिंह साहब का यह ब्लॉग मैंने आज से पहले कभी ठीक से देखा भी नहीं था, इसलिये इस प्रकार की टिप्पणी और उस पर आई हुई प्रति-टिप्पणियों से मैं भौंचक हो गया। कुछ लोगों को मुझे अशिष्ट, असभ्य होने तथा “संघी लोग ऐसे ही गालीगलौज करते हैं” टाइप की बात करने का भी मौका मिल गया। जबकि मेरे ढाई वर्ष के ब्लॉगिंग काल में मुझे याद नहीं कि मैंने किसी से भद्दी, गंदी गालीगलौज वाली भाषा में टिप्पणी की हो।

हालांकि मैं कोई तकनीकी व्यक्ति नहीं हूँ, और राज सिंह ने दावा किया कि उन्होंने पता किया है कि यह टिप्पणी मैंने ही की है (पता नहीं कैसे पता किया?)। इसलिये टिप्पणी का स्पष्टीकरण देने के बाद दोबारा मैंने अपनी उस कथित टिप्पणी को ध्यान से देखा तो पाया कि टिप्पणी में मेरे नाम के सामने जो “मार्क” है वह “अनाम” टिप्पणी वाला मार्क है, जबकि उसी टिप्पणी के नीचे रजनीश झा की टिप्पणी के नाम के सामने “ब्लॉगर” वाला मार्क (नारंगी घेरे में ‘B’ का मार्क) है। जब मैंने टिप्पणी का जवाब दिया तब भी उसके सामने वही ब्लॉगर वाला मार्क आया। इसका मतलब यह है कि अनाम टिप्पणीकर्ता ने किसी “ट्रिक” से मेरे नाम का उपयोग किया है।

एक बात और, कृपया अपने-अपने ब्लॉग (ब्लॉगर उपयोग करने वाले, वर्डप्रेस में तो अपने-आप IP Address आ जाता है) ध्यान से देखें तो पायेंगे कि जब टिप्पणीकर्ता के नाम पर माउस ले जायें तो वह “Blogger Profile और उस प्रोफ़ाइल का एक विशिष्ट अंक” दर्शाता है, जबकि उक्त टिप्पणी (जो अब हटा दी गई है) में जब मेरे नाम पर माउस ले जाता था तब मेरे ब्लॉग का पता आता था। अब यह तकनीकी लोग ही बता सकते हैं कि टिप्पणी करते समय ऐसा क्या किया जाता है कि “अनाम बनकर भी” किसी के भी नाम से टिप्पणी की जा सके। हालांकि मेरी उस टिप्पणी के बाद श्री अजय मोहन जी ने भी यही आशंका व्यक्त की है कि कहीं राज सिंह ने खुद ही सुरेश चिपलूनकर के नाम का उपयोग नहीं कर लिया? हालांकि मैं राज सिंह से परिचित नहीं हूँ, न ही कभी उन्होंने मेरे चिठ्ठे पर कोई टिप्पणी की, न ही मैंने उनके, इसलिये उनके बारे में कुछ कह नहीं सकता।
(अजय मोहन द्वारा व्यक्त की गई शंका का स्नैपशॉट)

मुझे नहीं पता था कि मैं इतना फ़ेमस(?) हो चुका हूँ कि मेरे नाम का इस प्रकार उपयोग(?) होने लगा है, लेकिन इस प्रकरण से जो मुद्दे सामने आये हैं, उसके हल के लिये मेरा सुझाव है कि – जिस प्रकार मैंने अपने प्रोफ़ाइल में और ब्लॉग पर भी मेरा ईमेल पता सार्वजनिक किया हुआ है, सम्भव हो तो सभी ब्लॉगर अपने प्रोफ़ाइल में अपना ईमेल पता डिस्प्ले करें, ताकि किसी भी विवाद की दशा में उनसे सीधे सम्पर्क किया जा सके। यदि राज सिंह मुझे मेल करके नहीं बताते तो मुझे पता भी नहीं चलता कि मेरे नाम से ऐसी कोई खुराफ़ात की जा चुकी है और रूपेश श्रीवास्तव जी आजीवन मुझसे नाराज़ रहते, और इस बात की भी कु-सम्भावना है कि पहले भी पता नहीं किस-किस के ब्लॉग पर मेरे नाम से अभद्र टिप्पणी की गई होगी। इसलिये जैसे ही यह बात मेरे संज्ञान में आई है समय निकालकर यह पोस्ट लिख रहा हूँ।

इसी प्रकार मैं सभी ब्लॉगरों से अनुरोध करता हूँ कि यदि मेरे नाम से कोई भी अश्लील, भद्दी, गालीगलौज वाली टिप्पणी प्राप्त हो तो इधर-उधर न जाते हुए पहले सीधे मुझसे मेरे ईमेल पते पर सम्पर्क करें और स्पष्टीकरण पूछें। “टिप्पणी में भाषा सम्बन्धी” अभी तक का मेरा “ट्रैक रिकॉर्ड” साफ़-सुथरा रहा है। अभी मेरे इतने बुरे दिन भी नहीं आये कि मुझे “बेनामी” रहकर किसी को गालियाँ देनी पड़ें।

एक बात और कि ऐसा भी नहीं है कि मुझे गालियाँ आती ही नहीं हैं, भोपाल में कई वर्ष बिताने के कारण “ट्रेडिशनल” से लेकर कुछ “इनोवेटिव” टाइप की गालियाँ तक आती हैं, लेकिन जब भी मैं किसी को गालियाँ दूँगा, कोसूंगा या भद्दी-गन्दी भाषा का इस्तेमाल करूंगा तो खुल्लमखुल्ला करूंगा (भगवान करे ऐसा दिन कभी न आये)। इसी प्रकार जिन “सज्जन” ने मेरा नाम लेकर यह हरकत की है कभी उनका आईपी एड्रेस पता चल जाये तो ब्लॉग पर उनका सार्वजनिक अभिनन्दन करूंगा। निश्चित रूप से यह मुझे बदनाम करने की कोई घटिया साजिश है, लेकिन इस पर एक पोस्ट लिखना इसलिये आवश्यक था, क्योंकि ऐसा भविष्य में किसी भी ब्लॉगर के साथ हो सकता है। अतः एक बार फ़िर अनुरोध है कि यदि भविष्य में कभी भी मेरे नाम से कोई गालीगलौज या अभद्र भाषा वाली टिप्पणी मिले तो पहले मुझसे सीधे सम्पर्क करें… ताकि आपस में कोई गलतफ़हमी न हो और मेरी छवि भी खराब न हो…। अन्य ब्लॉगरों से भी अनुरोध है कि वे भी यही तरीका अपनायें।

(नोट – मैं शुरु से ही “बेनामी” टिप्पणी व्यवस्था, तथा “टिप्पणी मॉडरेशन” का विरोधी रहा हूँ…)

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43 Comments

  1. संजय बेंगाणी said,

    June 19, 2009 at 7:46 am

    आपके ब्लॉग पर अनाम या दुसरे के नाम से टिप्पणी नहीं की जा सकती, क्योंकि लॉगइन करना पड़ता है. वरना कोई भी किसी के नाम से टिप्पिया ही सकता है. आइ.पी. से पहचान जरूर हो सकती है.

    किसी को बदनाम करने या आग लगाने के लिए दूष्ट दीमाग कुछ भी कर सकते है.

  2. पंकज बेंगाणी said,

    June 19, 2009 at 7:47 am

    जिस साहब के ब्लाग पर आपके नाम से टिप्पणी आई है, वहाँ यह सुविधा है कि कोई भी किसी के भी नाम से टिप्पणी दे सकता है.

    मैं अभी उसी पोस्ट पर "बराक ओबामा" के नाम से टिप्पणी देकर आया हूँ. लेकिन ब्लाग के लेखक ने अब टिप्पणी मोडरेशन पर कर दी है अन्यथा आ जाती.

    मेरा विचार है कि ब्लागधारकों को अनामी तथा किसी भी नाम से टिप्पणी कर देने की सुविधा या तो बंद कर देनी चाहिए या फिर उनमे यह विवेक होना चाहिए कि पहले देख ले कि यदि किसी जाने पहचाने नाम से टिप्पणी आई है तो वह वैध है या नही. अर्थात गूगल अकाउंट से लोगिन होकर आई है कि कोई खुराफाती लिख गया.

  3. पंगेबाज said,

    June 19, 2009 at 7:48 am

    सुरेश जी आपकी मेल से मै यहा पर पुन: आपसे अनुरोध करने आ गया हू कि आप भी या तो लेखन बंद करदे या धनात्मक सोच के प्रणेता से पूछ कर लिखे वरना जितने पंगे हो सकते है १००% किये जायेगे.
    और भी गम है जमाने मे ब्लोगिंग के सिवा क्यो जानपूछ्कर अपने आने वाले वक्त मे काम छॊड कर अदालतो के चक्करो मे फ़सना चाहते हो ? नंग बडे परमेश्वर से यू ही तो नही कहा गया था . बाकी आप स्वंय निर्णय ले
    आपका शुभेच्छू
    अरूण

  4. लवली कुमारी / Lovely kumari said,

    June 19, 2009 at 7:53 am

    सतर्क रहिये बंधू वरना लेने के देने पड़ेंगे यहाँ नकली प्रोफाइलें तक बनाई गई है अतीत में.
    अभी हाल में मेरी एक पोस्ट पर दो टिप्पणियाँ एक ही तरह की आई ..लेकिन अलग अलग आई डी से, वह भी कुछ सेकेंड्स के अंतराल पर. वैसे उन ब्लोगर महोदय ने नकली नाम से कहने के लिए ब्लॉग बनाया है और जो बातें उसमे लिखी हैं, वह असली नाम के साथ कही जा सकती थी ..पर क्या करें बेनामी का भूत सब के सर पर तांडव करता है, और गलती से उन्होंने नकली नाम से टिप्पणी कर दी फिर सुधार कर असली नाम से की, पर पहले वाली डिलीट करना भूल गए …तब मुझे लगा की हर इन्सान के दो पहलू होते हैं …(क्योंकी मै सिर्फ एक को ही जानती थी ).मुझे अजीब भी लगा.

  5. अंशुमाली रस्तोगी said,

    June 19, 2009 at 7:58 am

    यह जिसने भी किया गलत है। हम इसका विरोध करते हैं।

  6. Vivek Rastogi said,

    June 19, 2009 at 8:05 am

    सुरेशजी इस पर तो पूरी रिसर्च करनी पड़ेगी फ़िर आपको बताते हैं कि ये सब क्या हो रहा है।

  7. त्यागी said,

    June 19, 2009 at 8:09 am

    जो लोग लिखते है सतर्क हो जाये वो यह नहीं बता पाते हो तो कैसे सतर्क हो.
    अरुण जी ने बहुत अच्छा लिखा.
    दूसरा सुरेश जी यह तो काँटों वाली डगर है. यह लोग तो दक्ष है चरित्रहनन करने मैं.
    मुकाबला तो करना होगा ही.

  8. परमजीत बाली said,

    June 19, 2009 at 8:19 am

    तकनीकी जानकारों को इस बारे में कुछ करना चाहिए।जब दो चार के नाम उजागर होगें तो अनाम या दूसरों के नाम पर टिप्पणी करने वालों पर अंकुश लग सकेगा।वैसे इस से बचने के लिए ब्लोग मे दी गई सुविधाओ का प्रयोग भी किया जा सकता है।

  9. Shastri said,

    June 19, 2009 at 8:23 am

    प्रिय सुरेश,

    अनाम टिप्पणियां और दूसरे व्यक्ति के नाम से सनाम टिप्पणियां काफी चल रही हैं. अधिकतर चिट्ठाकार इस बात को जानते हैं एवं सीधे "सनाम" से संपर्क करके गलतफहमी दूर कर लेते हैं.

    इस विषय में एक तकनीकी लेख जल्दी ही सारथी पर देता हूँ

    सस्नेह — शास्त्री

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
    http://www.Sarathi.info

  10. राज भाटिय़ा said,

    June 19, 2009 at 8:33 am

    सुरेश जी, पता नही क्या बात है हम सब भारतीयो मै, कही भी प्यार मिल बेठ नही सकते, अगर दो आदमी प्यार से बात करे तो तीसरा जरुर भडकाने के लिये आ जाता है, यह कोई बहादुरी नही, अगर किसी से कोई दुवेष है तो भाई सीधे मर्दो की तरह से बात करो, क्यो मुंह छुपा कर, अनामी बन कर, दुसरो के कंधो पे बंदुक रख कर बात करते हो,अन्त मे, मै आप से, राज जी से, ओर डॉ रूपेश श्रीवास्तव जी से यही कहुंगा कि किसी तीसरे की लगी आग से बचो. ओर उसे ढुढने की कोशिश करो, आपिस मै लडने की वजायए.

  11. GJ said,

    June 19, 2009 at 9:01 am

    Suresh Ji,
    Have no doubte..
    You are indeed famous.

  12. मिहिरभोज said,

    June 19, 2009 at 9:09 am

    अब पक्का हो गया कि आप बहुत ही फै्मस ब्लोगर है …जय हो

  13. ‘नज़र’ said,

    June 19, 2009 at 9:28 am

    विवाद से सिवा टिप्पणी और कुछ नहीं हासिल होता है, सार्थक करें। जय हो!


    चर्चा । Discuss INDIA

  14. RAJ SINH said,

    June 19, 2009 at 9:36 am

    धन्यवाद सुरेशजी इस पोस्ट के लिए .

    दरअसल मैंने हाल में ही ब्लोगिंग शुरू की है और ये सब दांव पेंच न समझ सका .शुरू से ही मैंने अपने ब्लॉग की निति निर्धारित की थी की न मोदेरेसन करूँगा/रखूंगा न टिप्पणियां ही हटाऊँगा . शायद यह मेरा अतिआदार्श्वाद था .. जबकि इस तरह के ' दुष्ट ग्रह ' ऐसी दुष्टता कर सकते हैं सपने में भी नहीं आया था .
    मेरा मकसद यह था की ' अभिव्यक्ति की उन्मुक्त आज़ादी ' को बाधित न किया जाये .अब तक सिर्फ मुझे मेरे प्रति ही कुछ असम्मान दर्शाती कटु टिप्पणियां आयी थीं . मैंने उन्हें भी प्रकाशित होने के बाद नहीं हटाया .हाँ शालीनता से वहीं जबाब दे दिया .
    एक बार समीर लाल जी ने कहीं विचार व्यक्त किये थे की मोदेरेशन जरूरी है और उन्होंने उसकी अनिवार्यता भी बताई थी . कारन भी . पर शायद मेरी अनुभवहीनता थी और आदर्श के प्रति अतिउत्साह और दृढ़ता की मैंने सोचा भी नहीं की ये भी संभावनाएं हो सकती हैं .
    मैंने नीतिगत बदलाव किये यह सब उजागर होने पर और अब मोदेरेसन लगाने पर मजबूर हो गया .इस बीच स्पष्टीकरण देने के बाद भी रूपेश जी ने ( जो की इसी पोस्ट पर खुद हरकीरत हकीर जी के लिए असम्मान नीय टिप्पणी कर आये थे और मेरे लिए भी अकारण ही करीब करीब अश्लील तरह की ही टिप्पणी कर आये थे ) अपने भड़ास ब्लॉग पे कई पोस्टें अपने उसी अंदाज़ में दे आये .आपको और मुझे दोनों को गरियाते .अपने अंदाज़ में .

    अभी पता चला की बराक ओबामा नाम की टिप्पणी संजय जी की थी ( उसे छाप भी दिया मोदेरेसन के बाद )
    .

    लेकिन प्रश्न उठता है इसे रोका कैसे जाये . सारथी जी कुछ सुझाव देने वाले हैं पर यह मुद्दा गंभीर है और सब को मिल कर विचार करना होगा . मैंने भी अपनी उसी पोस्ट पर स्पष्टीकरण भी दिए हैं और निराकरण के सुझाव भी .जैसा की आपने कहा की हमारा आप का कोई परिचय भी नहीं था वर्ना शायद ये सब बातें न होती यदि संपर्क कर लेता .

    उम्मीद है की ब्लॉग जगत निराकरण का मार्ग निकालेगा .मैंने मोदेरेसन लागू किया यह मैं अब भी अपनी नैतिक पराजय मानता हूँ पर उपाय क्या है ?

  15. हिमांशु । Himanshu said,

    June 19, 2009 at 9:49 am

    राज सिंह जी की इस टिप्पणी से मन संतुष्ट हुआ कुछ । आभार ।

  16. mahashakti said,

    June 19, 2009 at 10:15 am

    सार्थक पोस्‍ट, यह टिप्‍पणी आपके एकाउन्‍ट से न नही हुई अन्‍यथा केसरिया रंग में सफेद ब्‍लागर का बी लिख कर आता।

  17. Udan Tashtari said,

    June 19, 2009 at 11:10 am

    चलो, यह तो तय है ही कि सुरेश बाबू फेमस हो लिए हैं और राज जी से भी अनुरोध है कि मॉडरेशन लगा लेने को वह अपनी जय/ पराजय की भावना न मानें. जैसा समाज होगा, उसी तरह रहना होगा.

    कुछ अति उत्साही लोग हैं ओ कुछ हीन भावग्रस्त कुंठाग्रसित-आपको सबके बीच अपनी बात रखनी है-ऐसे में सच्चा आदर्श भी कहता है कि सतर्कता बरतो अतः आपने ठीक ही किया.

    शुभकामनाऐं.

    सुरेश जी का यह आलेख सीखने योग्य है कि सतर्कता की कितनी आवश्यक्ता है. सभी तो राज सिंह नहीं होते कि आपसे पत्राचार कर स्पष्टीकरण मांग मामला साफ करें.

  18. aditya kumar gupta said,

    June 19, 2009 at 12:02 pm


    Suresh Ji as you have told that you are owing a cyber cafe so there are only two possibilities that anyone has accessed your computer and tracked your password with the help of keylogger.

    There are many softwares in the market which can trace any password after installation on system So if you are using in cafe then make sure that no Password hacking software is loaded on PC .

    Generally it is difficult to track this type of softwares. Only from control pannel you can check and remove these.

    It will be Better that never allow any external person to use your PC.

    Second point is :

    that offcourse you are a famous blogger so any one would like to comment with your name so that he could be taken seriously by writer.

    No one can do anything in case of Named or anonymous comments except writers .

    So I request to all my serious Bloggers to restrict anonymous and named comments by using blog settings.This will help you a lot in future and you will not fell in any conspiracy like this one.

    I think Here the problem was from writers End He should protect his blog from any anonymoous comments.

  19. तपन शर्मा said,

    June 19, 2009 at 12:05 pm

    aapka kewal naam hai..
    badhaai ho suresh ji.. aap famous ho gaye hain…

    waise yeh kaam aasaan hai…
    gmailid compulsory karke aap anaam comments kam kar sakte hain..

    waise agar koi chaahe to aapke naam ko lekar ek aur Id bana sakta hai aur aapko aur famous kar sakta hai… 🙂 matlab naam aapka gmail Id us anonymous ka,, 🙂

    bachke rahein

  20. Suresh Chiplunkar said,

    June 19, 2009 at 1:00 pm

    @ संजय बेंगाणी जी – यह सही है कि मेरे ब्लॉग पर टिप्पणी करने के लिये लॉग-इन होना ही पड़ेगा, क्योंकि मैंने सतर्कता बरत रखी है (जैसा कि समीर लाल जी ने निर्देशित किया), लेकिन कई दूसरे ब्लॉग्स पर ऐसा नहीं है, कई ब्लॉग्स ऐसे भी हैं जो चाहते ही हैं कि "बेनामी" विवादित टिप्पणियाँ आयें ताकि उनका ब्लॉग और फ़ेमस(?) हो सके। राज सिंह जी के ब्लॉग पर एक option है "नाम/URL" वाला, यह खुराफ़ात उससे की गई है।

    @ आदित्य कुमार जी – हालांकि मेरा सायबर कैफ़े है, लेकिन फ़िलहाल मेरे कम्प्यूटरों पर मेरा पूरा नियन्त्रण है,क्योंकि मेरे कैफ़े में केबिन व्यवस्था नहीं है, जो भी होता है खुलेआम। इसलिये यह डर नहीं है, लेकिन एक बात फ़िर भी हो सकती है कि मेरे सायबर कैफ़े का उपयोग करके कोई व्यक्ति अश्लील टिप्पणी करे, या किसी अन्य ब्लॉगर को धमकाये अथवा कोई अरुचिकर पोस्ट लिखे (अपने आईडी से), उस स्थिति में जब IP Address पता किया जायेगा तो वह मेरा ही निकलेगा, तब क्या किया जायेगा?

    इस सम्बन्ध में कानूनी स्थिति का स्पष्टीकरण द्विवेदी जी दे पायेंगे कि यदि मेरे सायबर कैफ़े से कोई राष्ट्रविरोधी ब्लॉग या अवमानना सम्बन्धी कोई लेख नेट पर लिखा जाता है तब उसमें मेरी क्या जिम्मेदारी बनती है? और कैसे तथा कितनी?

  21. Suresh Chiplunkar said,

    June 19, 2009 at 1:03 pm

    @ राज सिंह जी – इसमें हार या जीत का कोई सवाल ही नहीं है, आपने मुझे सूचित करके अच्छा किया और मुझे यह पता चला। आप अपने ब्लॉग के टिप्पणी option में सिर्फ़ गूगल और Open ID वाला ही चालू रखें, नाम/URL वाला तथा बेनामी वाला option हटा दें तो सुकून प्राप्त करने में काफ़ी मदद मिलेगी। 🙂 बहरहाल एक बार फ़िर धन्यवाद…

  22. Kashif Arif said,

    June 19, 2009 at 2:22 pm

    सुरेश जी, मै आपकी बात से सहमत हु। आप सही कह रहे है इस "बेनामी टिप्पणी" का ओपशन कभी भी चालु नही रखना चाहियें।

    मैनें भी नही रखा है।

    आपकी ये पोस्ट बताती है की वो टिप्पणी आपने नही की थी। और वैसे भी मैने भी अभी तक आपकी कोई इस तरह की टिप्पणी नही पढी।

  23. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said,

    June 19, 2009 at 2:27 pm

    सुरेश जी, वैसे तो देश भर में साइबर कैफे संचालन के लिए कोई स्पष्ट कानून नहीं है। लेकिन फिर भी पुलिस एक्ट और आई टी एक्ट के तहत प्रशासन कई तरह के काम करने को कहता है। जिस में साइबर कैफे से इंटरनेट प्रयोग करने वाले लोगों का नाम, पता, आईडी का प्रकार तथा इंटरनेट प्रयोग करने के समय का रिकॉर्ड रखा जाना सम्मिलित है। यदि आप यह सब रिकॉर्ड रखते हैं तो टिप्पणी करने वाले का भी पता लगाया जा सकता है। ऐसी अवस्था में आप उस टिप्पणी के दायित्व से बच सकते हैं। भारत में अभी सायबर लॉ शैशव अवस्था में है और न्याय व्यवस्था जर्जर हालत में। आप खुद अनुमान कर सकते हैं। वैसे इस टिप्पणी के बारे में मेरी राय यह है कि राजसिंह जी को उस आईपी एड्रेस का गूगल को लिख कर पता अवश्य करना चाहिए जिस से आपस में तो स्थिति स्पष्ट हो सके।

  24. HEY PRABHU YEH TERA PATH said,

    June 19, 2009 at 3:45 pm

    सुरेशजी,

    यह पुरे प्रकरण पर मेरी काफी दिनो से नजर थी। आज आपके वक्त्व्य को भी पढा। मेरे मित्र रुपेशजी कि भावनाओ को भी देखा। प्रथम दृष्टि से ऐसा प्रतित होता है दो ब्लोगर बन्धुओ मे आपसी द्वैश फैलाने के लिऐ किसी शरारती व्यक्ति ने गलत हरकत कि है। भाई रुपेशजी आप की ही तरह बडे ही स्पष्ट विचारो के व्यक्ती है ।

    सुरेशजी, इस बेनामी ब्लोगर आतकवाद के खिलाफ संजयजी बेंगाणी , पंकजजी बेंगाणी,पंगेबाज,लवली कुमारीजी ,Shastriजी ,Udanजी Tashtari ,राजजी भाटीया, दिनेशरायजी द्विवेदी इत्यादी आवाज उठाते रहे ।

    आपभी जानते है- ऐसे एवम इससे मिलते जुलते विवाद हमेसा ही वास्तविक ब्लोग लेखन को प्रभावित करने कि एक चाल है…..
    "बेनामी ब्लोगर आतकवादियो" के होसले बुलन्द हुऐ जा रहे है।
    एक दुसरे कि सात्वनाऔ से इस समस्या का हल नही निकलने वाला. जब तक हम सगठित होकर इस पर काम नही करते। हमारी टेक्निकल टीम जब तक इस तरह के बेनामी चोर-ऊचको को पकडने मे माहिर नही बनती तब तक या तो हमे ब्लोग लिखना छोड देना पडेगा या अपनी दुकानदारी समटकर घर चले जाऐ।
    इस बेनामी ब्लोग ऑतकवाद के डर से लिखना, टिपियाना छोड दे ?
    मैने पहले भी कहा है-"राष्ट्र स्तर पर एक ऐसा सगठन हो, जिसमे सभी हिन्दी ब्लोगर उस सगठन के सदस्य हो, सभी एग्रिगेटर एवम गुगल इस सगठन के निर्णय को मान्यता दे एवम इसके निर्णय एवम आदेशो का पालन करते हुऐ पकडे हुऐ बेनामी शरारती तथाकथित ब्लोगरो/व्यक्तियो/सोसलग्रुपज के सदस्यो/ एवम अन्य माध्यमो को बेण्ड कर दिया जाऐ। एवम कानुन के हवाले कर दिया जाऐ। इसके लिऐ सगठन के पास विश्वस्तरिय टेक्निकल टीम होनि चाहिऐ।
    शायद मेरी यह बात आज बेमानि भी लगे पर भविष्य मे इसके सिवा कोई साहरा नही-
    मोडरेशन इसका हल नही यह तो चुपाकर एवम घुट-घुट कर मरने वाली बाते है।
    आपका
    मुम्बई टाईगर

  25. P.N. Subramanian said,

    June 19, 2009 at 5:48 pm

    हमें विश्वास है कि राज सिंह जी इस तरह का गलत काम नहीं कर सकते. लेकिन मसला गंभीर है. जबरन अपने डिफेन्स में प्रमाण संजोने पड़ते हैं.

  26. निशांत मिश्र - Nishant Mishra said,

    June 19, 2009 at 6:15 pm

    सुरेश जी, अपने साइबर कैफे में सभी कंप्यूटरों में यह व्यवस्था कर लें कि बिना एडमिनिस्ट्रेटर अप्प्रोवल के कोई भी किसी सॉफ्टवेर को इंस्टाल न कर सके या किसी दुसरे कंप्यूटर से नेटवर्क न बना सके. आप केवल एक ही कंप्यूटर का प्रयोग करें और कम्प्युटर छोड़ते समय सारी हिस्ट्री और कैश को क्लीयर कर दें. वैसे तो आप शायद यह सब जानते ही होंगे लेकिन कभी-कभी असावधानी या जल्दबाजी में ध्यान नहीं रहता है.

  27. Anil Pusadkar said,

    June 19, 2009 at 6:39 pm

    कुछ भी कहो भाऊ अब आपको ये तो मानना ही पड़ेगा कि आप फ़ेमस हो गये हो।

  28. Sanjeet Tripathi said,

    June 19, 2009 at 8:15 pm

    prabhu itne famous ho gaye ho badhai! 😉

    sunil ko bhi aisi hi prasiddhi dilwa do boss 😉

  29. अविनाश वाचस्पति said,

    June 20, 2009 at 5:16 am

    विज्ञान वरदान है
    तो अभिशाप भी है
    क्‍या अब भी
    खुलासे की
    जरूरत है
    पता नहीं
    इस तरह से
    कौन रत है
    भाई मेरे
    यह
    भारत
    है।

  30. Ghost Buster said,

    June 20, 2009 at 6:34 am

    क्यों खामखाह परेशान हो रहे हैं? स्पष्ट दिख रहा है कि वह टिप्पणी आपकी नहीं है. किसी अन्य के नाम से टिप्पणी देने का घृणित कार्य दो तरीकों से किया जा सकता है लेकिन दोनों में ही इसे पकड़ना आसान है.

    १) Name/URL ऑप्शन का प्रयोग करके. लेकिन तब टिप्पणी में नाम के साथ ब्लॉगर का नारंगी चिह्न नहीं आता. साथ ही ब्लॉगर प्रोफ़ाइल में शामिल आपका चित्र भी नहीं दिखता. (इसी कारण से मैं हमेशा अनुशंसा करता हूं कि प्रोफ़ाइल में अपना चित्र अवश्य शामिल करना चाहिये.)

    २) आपके नाम से ही ब्लॉगर आई डी बना ली जाये और उससे कमेन्ट दिया जाये. लेकिन सभी का ब्लॉगर आई डी क्रमांक यूनीक होता है. (उदाहरण के तौर पर आपका क्रमांक है: 02326531486506632298) नकली टिप्पणी में यह नहीं बल्कि कुछ और क्रमांक दिखेगा.

    आप तो बस लगे रहें. शुभकामनाएं.

  31. भारतीय नागरिक - Indian Citizen said,

    June 20, 2009 at 7:44 am

    अच्छी जानकारी दी आपने.

  32. RAJ SINH said,

    June 20, 2009 at 8:54 am

    मुझे आज सभी जानकारियां जो मिली उनसे बड़ी सहायता मिली . अब पूरी सतर्कता बरतूँगा . जैसा सुझाया गया सब .

    समीर लाल जी अगर आपकी बात मान कर चलता तो इस बीच जिस तरस से गुजरा उस से बच जाता . द्विवेदी जी ने जो तरीका बताया है उसके तहत गूगल से भी कोशिश कर रहा हूँ तथा यहाँ verizon से भी जो मेरे प्रोविडर हैं .

    जानकारी के लिए अत्यंत धन्यवाद .आप सब ब्लॉगर जगत के मित्रों से अनुरोध करूंगा की जैसे HEY PRABHU YEH TERA PATH ने सुझाया उसके लिए जोरदार प्रयास किया जाये .साथ ही तकनालोजी में महारत रखने वाले बंधुओं को भी इस पर सभी ब्लोगरों को सीक्चित करने का निवेदन किया जाये

  33. aditya kumar gupta said,

    June 20, 2009 at 9:18 am


    Suresh Ji Please read this article for details about Cyber Cafe Security.

    http://www.bloggernews.net/119308

    As I have seen in Delhi according to rule all cyber cafe owner's are maintaining a User Register in which they are maintaining all the details of users like Name, Address, System Number,Time From-To, Identity Card Type and Number.

    Without Identity Proof nobody is allowed in Cafe.

  34. Science Bloggers Association said,

    June 20, 2009 at 11:01 am

    गम्भीर मामला है।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  35. डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said,

    June 20, 2009 at 3:19 pm

    tippani ka GORAKHDHANDHA hi badaa vikat hai. ab hamen bhi kuchh sochanaa padega.

  36. kailash said,

    June 20, 2009 at 5:32 pm

    Suresh ji
    Badhai
    Kripaya vyarth ki baton par dhyan n deven. Ap apne vicharon par dradh rahen. ek kahawat hai:-
    HATHI JAYE BAJAR,KUTTE BHOKEN HAJAR.

  37. bhoootbhooot@gmail.com said,

    June 20, 2009 at 6:56 pm

    sabkuchh dekha….padhaa aur mahsoos bhi kiya…magar kya hai ki sab kuchh sikha hamne…naa sikhi hoshiyaari….!!

  38. bhoootbhooot@gmail.com said,

    June 20, 2009 at 7:03 pm

    aur mazaa yah ki main khood apne blog aur gmail a/c tak nahin jaa paa rahaa…ab main kyaa karun…samajh hi nahin aa rahaa ki kyaa kisi ne mera password…yaa aur kuchh badal diyaa kyaa…isiliye aaj nayaa gmail aur google a/c bana kar yah tippani de rahaa hun…aap sabkaa bhootnath
    http://baatpuraanihai.blogspot.com

  39. प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said,

    June 21, 2009 at 3:04 am

    आप तो बस लगे रहें. शुभकामनाएं.

  40. सलीम खान said,

    June 22, 2009 at 7:05 am

    मेरे व्यक्तिगत विचार सुरेश भाई से भले ही मेल ना खाते हों, मगर सुरेश जी को इतना समझ चुका हूँ कि वह बेनामी टिपण्णी नहीं कर सकते. मैं इधर बैठ कर इस बात की गारंटी लेता हूँ….

  41. स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ said,

    June 22, 2009 at 7:09 am

    मेरे व्यक्तिगत विचार सुरेश भाई से भले ही मेल ना खाते हों, मगर सुरेश जी को इतना समझ चुका हूँ कि वह बेनामी टिपण्णी नहीं कर सकते. मैं इधर बैठ कर इस बात की गारंटी लेता हूँ….

  42. "मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " said,

    June 22, 2009 at 6:43 pm

    टिप्पणी सम्बंधित चिरकुटई कई दिनों से जारी है सुरेश जी इक बार हम भी हुए थे शिकार किसी अज्ञातानंद ने हरकत की थी
    -"मेरे व्यक्तिगत विचार सुरेश भाई से भले ही मेल ना खाते हों, मगर सुरेश जी को इतना समझ चुका हूँ कि वह बेनामी टिपण्णी नहीं कर सकते. मैं इधर बैठ कर इस बात की गारंटी लेता हूँ.."मैं भी इस बात से सहमत हूँ जी
    भाई राज़ जी यकीन कीजिये डाक्टर साब सच ये सब लोग कर लेतें है किसी की दीवार पोतने के लिए …. खैर सभी सजग रहें यही आशा है
    सादर
    आपका मुकुल

  43. Rakesh Singh - राकेश सिंह said,

    July 28, 2009 at 8:31 pm

    कोई भी computer हैकर ये काम कर सकता है | और computer की दुनिया मैं हाकरों की कमी नहीं | सुरेश जी आप अपना मन मिला ना करें और समय मिले तो दुसरे साईट पे भी जाकर अपना विचार रखें | हमारे vicharon पर आप अपनी tippani jarur दे | ये सब choti moti baaten हैं जो आती-जाती rahti हैं , इसे दिल पे न len |


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