कसाब के मुकदमे पर 30 लाख का खर्च और सैकड़ों जान बचाने वाले को 500 रुपये Mumbai Attack Kasab Trial and Unsung Heroes

“बबलू कुमार दीपक”, यह नाम आप में से कुछ ही लोगों ने सुना होगा, यह सज्जन मुम्बई सीएसटी स्टेशन पर 26/11 के हमले के वक्त ड्यूटी पर थे। श्री दीपक रेलवे में अनाउंसर हैं और उस काली रात को दूसरे अनाउंसर श्री विष्णु झेण्डे के साथ दूसरे अनाउंसमेंट केबिन में उनकी ड्यूटी थी। उस समय मुम्बई-पुणे के बीच चलने वाली इंद्रायणी एक्सप्रेस मुम्बई से निकली ही थी, तथा उस प्लेटफ़ॉर्म पर अगली गाड़ी के इन्तज़ार में लगभग 300 से अधिक यात्री थे। श्री बबलू दीपक ने अचानक प्लेटफ़ॉर्म नम्बर 13 और 14 पर कुछ हलचल देखी, उन्होंने एक बड़े धमाके की आवाज़ सुनी और देखा कि दो लड़के हाथों में एके-47 लिये गोलीबारी करते हुए आ रहे हैं। दोनों आतंकवादी अंधाधुंध गोलीबारी करते हुए तेजी से लोकल मेन लाइन की तरफ़ आ रहे थे। बबलू दीपक ने तुरन्त लोकल लाइन के अनाउंसर विष्णु झेण्डे को सूचित किया और उन्हें सावधान रहने को कहा, उन्होंने फ़ुर्ती से रेल्वे पुलिस के अधिकारी को फ़ोन लगाया तथा रेल्वे पुलिस फ़ोर्स के थाने में इत्तला दी। अपना सन्तुलन न खोते हुए बहादुरी से इस बीच उन्होंने प्लेटफ़ॉर्म पर स्थापित पब्लिक एड्रेस सिस्टम से यात्रियों को हमले के बारे में बताना शुरु किया। चूँकि ये दोनों अनाउंसर अलग-अलग केबिन में लेकिन एक ऊँची जगह पर थे, इसलिये इन्हें सब कुछ दिखाई दे रहा था। श्री झेण्डे ने हिन्दी और मराठी में जब तक वह प्लेटफ़ॉर्म खाली नहीं हो गया, लगातार 15 मिनट तक “कृपया सभी यात्री पिछले गेट नम्बर 1 से बाहर निकल जायें…” घोषणा की
(चित्र में श्री झेण्डे, अनाउंसमेंट केबिन में)।

घोषणा सुनकर बहुत से यात्री पटरी कूदकर और जिस दिशा में आ रहे थे, तत्काल वापस दूसरे गेट की तरफ़ से बाहर भाग गये। घोषणा सुनकर आतंकवादियों ने रिजर्वेशन काउंटर और अनाउंसर केबिन की तरफ़ गोलियाँ दागनी शुरु कीं । झेण्डे ने केबिन की लाईट बुझा दी और नीचे छिप गये, हालांकि गोलीबारी से केबिन के काँच फ़ूट गये लेकिन झेण्डे सुरक्षित रहे, इसी प्रकार दीपक ने भी अपना केबिन भीतर से बन्द कर लिया और टेबल के नीचे छिप गये। बबलू दीपक के शब्दों में “मैंने इस प्रकार का घटनाक्रम जीवन में पहली बार देखा था, मैंने अपना केबिन अन्दर से बन्द कर लिया लेकिन उसका दरवाजा कोई खास मजबूत नहीं था इसलिये मैं काँप रहा था, जब सब कुछ शान्त हो गया तब एक वरिष्ठ अधिकारी की आवाज़ सुनकर ही मैंने दरवाजा खोला… और सुरक्षित घर पहुँचा…” लेकिन इन दोनों व्यक्तियों के दिमागी सन्तुलन और जान की परवाह न करते हुए लगातार अनाउंसमेंट के कारण उस दिन कई जानें बचीं।

इस घटना के कुछ ही दिनों के बाद श्री विष्णु दत्तात्रय झेण्डे और एक अन्य हवलदार श्री झुल्लू यादव को रेल मंत्रालय की ओर से दस-दस लाख का ईनाम मिल गया, लेकिन बबलू दीपक को सभी ने भुला दिया, जबकि दोनों अनाउंसरों की भूमिका, ड्यूटी और हमले के वक्त खतरा एक समान था। बबलू दीपक ने रेल्वे अधिकारियों को इस सम्बन्ध में 17 दिसम्बर 2008 को एक पत्र लिखा, कि लगभग समान बहादुरीपूर्ण कार्य के लिये झेण्डे के साथ ही मुझे भी इनाम मिलना चाहिये था। इस पर कोई जवाब नहीं आया, बबलू दीपक ने फ़िर से अप्रैल 2009 में एक स्मरण पत्र मंडल रेल प्रबन्धक को भेजा, तब कहीं जाकर 5 मई को उनका जवाब आया और 7 मई 2009 को यानी हमले के 5 माह बाद बबलू दीपक को 500 रुपये नगद का इनाम और एक सर्टिफ़िकेट दिया गया।

(चित्र में बबलू दीपक पुरस्कार ग्रहण करते हुए)

भारत की नौकरशाही, अफ़सरशाही और नेता जिस “मक्कार कार्य संस्कृति” में ढल चुके हैं, लगता है अब उन्हें बदलना बेहद मुश्किल है। कभी सियाचिन में तैनात सैनिकों के जूतों और कपड़ों में भ्रष्टाचार, कभी संसद पर हमले के शहीदों की विधवाओं को पेट्रोल पंप के लिये चक्कर कटवाना, कभी शहीद करकरे की पत्नी को अन्तिम संस्कार का बिल भेजना, कभी कश्मीर और असम में जान हथेली पर लेकर देश की रक्षा करने वाली सेना की आलोचना करना, लगता है देशद्रोहियों की एक जमात खूब फ़ल-फ़ूल रही है। जो राष्ट्र अपने शहीदों और बहादुरों का उचित सम्मान करना नहीं जानता, उसके लिये नपुंसक शब्द का उपयोग करना भी नपुंसकों का अपमान है। कई बार महसूस होता है कि अफ़ज़ल को फ़ाँसी इसलिये नहीं देना चाहिये कि उसने संसद पर हमला क्यों किया… बल्कि इस बात के लिये देना चाहिये कि आखिर उसने अपना काम ठीक ढंग से क्यों नहीं किया और सफ़ल क्यों नही हुआ? बहरहाल…

चलते-चलते – एक बात बताते जाईये, क्या आपने अपना इन्कम टैक्स भर दिया है? यदि नहीं भरा हो तो जल्दी भर दीजिये, अफ़ज़ल को चिकन उसी पैसे से तो मिलेगा, अफ़ज़ल को किताबें-अखबार, सुबह के वक्त घूमना-फ़िरना आदि मुहैया करवाया जा रहा है। कसाब ने भी अपने लिये इत्र-फ़ुलैल, उर्दू अखबार की मांग कर ही दी है, शायद अब मुजरा देखने की मांग भी करे। आपके इसी आयकर के पैसे से कसाब पर मुकदमा चलेगा तथा अदालत और वकील का खर्चा भी निकलेगा…। जल्दी कीजिये आयकर भरिये, सरकार भी कब से चिल्ला रही है।

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34 Comments

  1. संजय बेंगाणी said,

    June 22, 2009 at 7:39 am

    पाँच सौ रूपयों जितनी बड़ी रकम दे तो दी, और क्या चाहिए? बोनस में सर्टिफिकेट भी तो दी है.
    आयकर अग्रीम भरा है. देखा, देश के मेहमानों का हमें भी खयाल है. उन्हे कोई तकलिफ हुई तो मोर्चा निकालेंगे, आप चिंता न करें.

  2. भारतीय नागरिक - Indian Citizen said,

    June 22, 2009 at 7:55 am

    जब अजमल के वकील को २५०० रुपये प्रतिदिन दिये जा सकते हैं तो हर कोई वकील यही चाहेगा कि उसे भी एक अजमल मिल जाये! माननीय यह भारत है, जिन्हें सलाखों के पीछे होना चाहिये वे कानून बनाते हैं. बाजपेई जी की सबसे बड़ी गलती क्या थी, जानते हैं? उन्हें इस देश में हर जिले में एक जेल और एक फांसीघर बनाना चाहिये था और जिसकी शुरूआत टाप के भ्रष्टाचारियों से की जाती, पूरा देश एक वर्ष में अपने आप सुधर जाता.

  3. अजय कुमार झा said,

    June 22, 2009 at 9:14 am

    सुरेश जी…
    बिलकुल ठीक कह रहे हैं..अफजल को तो इसीलिए फंसी पर नहीं चढ्या जाना चाहिए क्यूंकि उसने काम पूरा नहीं क्या..मैं तो सोच रहा हूँ….ये अपह्रंकर्ता..ये डकैत ..लुटेरों को भी इन नेताओं का पता नहीं मालूम होता क्या…उन्हीं अपना निशाना नहीं बनाते…हाँ सरकार तो यही कर सकती है…और यही सब देख के लगता है की बताओ इस देश और इस देश के इन राजनेताओं के लिए हम मरने मारने पर उतारू हो जाते हैं….

  4. Vivek Rastogi said,

    June 22, 2009 at 9:19 am

    अरे हम तो टेक्स समय पर भरते हैं पर पता नहीं कसाब को टाईम पर अच्छा खाना ये लोग देते हैं या नहीं या फ़िर उसका स्पेशल खाना ये पुलिसवाले खाकर अपना टिफ़िन कसाब को खिला देते हों।

  5. राज भाटिय़ा said,

    June 22, 2009 at 10:41 am

    मेहमां जो हमारा होता है (वो जान से) से प्यारा होता है, अब क्या कहे जब आप लोगो ने ही इसे जीताया है, खुशियां मनाई फ़िर गिला शिकवा केसा, अभी तो आगे आगे देखे….
    अभी वो गुमनाम भाई नही आये, उन का आना एक आदत बन गई है, ओर जब तक वो ना आये टिपण्णियां भी सुनी सुनी लगती है.
    सुरेश जी आप का लेख लाखो मे एक है, दिल की आवाज आप के लेखो से बहुत मेल खाती है.
    धन्यवाद
    मुझे शिकायत है
    पराया देश
    छोटी छोटी बातें
    नन्हे मुन्हे

  6. रंजना said,

    June 22, 2009 at 10:54 am

    क्या कहा जाय…………

  7. अन्तर सोहिल said,

    June 22, 2009 at 11:17 am

    "भारत की नौकरशाही, अफ़सरशाही और नेता जिस “मक्कार कार्य संस्कृति” में ढल चुके हैं, लगता है अब उन्हें बदलना बेहद मुश्किल है।"
    मुश्किल ही नही असंभव है जी
    नमस्कार स्वीकार करें

  8. Shahi said,

    June 22, 2009 at 11:35 am

    सुरेश जी आप किसी न्यूज़ चैनल पर क्यों नही आते …..????

    प्रयास तो कर ही सकते है…..जितनी तेज़ी से ये सेकुलारवाद देश को खोखला कर रहा है अगर आप जैसे लोग सामने नही आए तो भारत की जनता हमेशा सोती रहेगी….

  9. स्वाति said,

    June 22, 2009 at 11:56 am

    es khabar ko new channel wale highlight kyon nahin karte ?
    badhiya jankari.

  10. पंकज बेंगाणी said,

    June 22, 2009 at 12:42 pm

    इस देश मे यही होता है, और शायद होता रहेगा!

    ये बहादूर मौत से खेलते रहेंगे और ये अफसर इन लोगों से. देश का क्या है चलता रहेगा.

  11. परमजीत बाली said,

    June 22, 2009 at 2:10 pm

    यह सब देख सुन कर बस खींझ होती है।समझ नही आता क्या किया जाए……

  12. डॉ .अनुराग said,

    June 22, 2009 at 3:11 pm

    पांच सौ रुपये तो एक परिवार के मॉल में जाकर एक पिक्चर देखने में ही खर्च हो जाते है …ऐसे व्यक्ति तात्कालिक प्रमोशन ,ओर लाखो रुपये के इनाम के हकदार है.

  13. GJ said,

    June 22, 2009 at 3:31 pm

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  14. PD said,

    June 22, 2009 at 3:54 pm

    Maine nahi bhara..
    kal hi bhar dete hain.. mehmano ki baat hai aakhir..

  15. dhiru singh {धीरू सिंह} said,

    June 22, 2009 at 4:37 pm

    अरे ड्यूटी ही तो कर रहे थे इस बात की तो तनखा मिलती है इनेह . ईनाम तो रिश्वत के सामान है . और बेचारा कसाब और उसके पैरोकारों को तो सहयता की आवश्यकता है .आखिर अपनी जान की बाज़ी लगाकर हमारे देश में आये है

  16. Priyanka Singh Mann said,

    June 22, 2009 at 5:01 pm

    bilkul sahi kah rahe hain aap…deepak ji jaise logon ke haq ki baat karte hue sab ko saamp sungh jaata hai aur hoga bhi kyon nahin in baton se media coverage thode hi na milti hai par kasab ki baat karenge to shaam ki headlines main chaa jayenge…is desh main jo desh ki baat kar raha hai vah baagi hai aur deshdrohi phal-phool rahen hain..

  17. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said,

    June 22, 2009 at 5:45 pm

    बिलकुल पते की बात कह दी आपने। हमें ऐसी सरकार पर शर्म आती है। इन्हें मगर नहीं आती।

  18. Anil Pusadkar said,

    June 22, 2009 at 6:50 pm

    कीड़े पड़ेंगे सालो को।शर्म भी नही आती।पता नही क्या सोच के देश को आज़ाद कराया था आज़ादी के मतवालों ने।

  19. GITESH UPPAL said,

    June 23, 2009 at 6:00 am

    Bhagwan jane kya hoga,par bhai saheb ,sab humhi logo ka kiya dhara hai,ye system bhi hum hee logo ne banaya hai,humhi is system ko chalate hain,baki ????????????????

  20. Jayant Chaudhary said,

    June 23, 2009 at 6:36 am

    अपनी आजादी को हम हरगिज बचा सकते नहीं…
    सर झुका सकते हैं, लेकिन सर कटा सकते नहीं..

    धर्म निरपेक्ष पार्टियों के राज में यही सब होना है..
    वैसे मेरा भी एक छोटा सा रोना है…
    जैसी होगी प्रजा,
    वैसा मिलेगा राजा..
    देशभक्त खाएँगे सूखी रोटी,
    गद्दार खाएँगे मोती बोटी,
    और खाएँगे जनाब,
    लजीज कबाब,
    मियाँ कसाब..

    ~जयंत

  21. Jayant Chaudhary said,

    June 23, 2009 at 6:42 am

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    I hope you will not mind it.
    I just want to make it visible to as many people as I can.

    Pranaam,
    ~Jayant

  22. महामंत्री - तस्लीम said,

    June 23, 2009 at 7:04 am

    ये तो चिंता की बात है।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  23. गिरिजेश राव said,

    June 23, 2009 at 4:09 pm

    भारतेन्दु रचित 'अन्धेर नगरी' का प्रारम्भिक श्लोक याद आ रहा है:

    "छेदस्चन्दंचूतचम्पक वने रक्षा करीरद्रुम:. . . "

  24. RAJ SINH said,

    June 24, 2009 at 3:39 am

    शाब्बास !

    आपने खुल कर कहा .

  25. Kashif Arif said,

    June 25, 2009 at 6:16 pm

    सुरेश जी, बहुत अच्छा लेख। अरे हमारे देश मे यही होता आया है ऐसे बहुत उदाहरण मिल जायेंगें।

  26. KK Yadav said,

    June 26, 2009 at 1:40 pm

    आपका ब्लॉग नित नई पोस्ट/ रचनाओं से सुवासित हो रहा है ..बधाई !!
    __________________________________
    आयें मेरे "शब्द सृजन की ओर" भी और कुछ कहें भी….

  27. स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ said,

    June 26, 2009 at 2:52 pm

    यहाँ की न्याय प्रक्रिया इतनी धीमी और थकी हुई है जिसका फायेदा हर मुजरिम उठा लेता है. मसलन आज तक जितने भी घोटाले हुए उसका आजतक फैसला तक ना आ सका. अगर भारत की पुलिस भ्रष्ट ना हो, अफसरशाही भ्रष्ट ना हो तो मजाल है नेता अपनी भष्टता चला सकें….. और न्याय प्रक्रिया ठीक हो जाये तो देश अगले दिन ही व्विश्व शक्ति बन जायेगा. लेकिन क्या किया सकता है…

    यहाँ का कानून तो अंग्रेजों के ज़माने के क़ानून का कॉपी-पेस्ट (copy-paste) है…..

  28. स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ said,

    June 27, 2009 at 8:46 am

    अति-बुद्दिजीवी वर्ग सांप्रदायिक होता जाता है…

  29. त्यागी said,

    June 27, 2009 at 11:53 am

    भाई सुरेश जी
    आजकल आप व्यस्त होगये है. दुसरो के ब्लॉग पर ध्यान ही नहीं दे रहे है.

  30. दर्पण साह "दर्शन" said,

    June 28, 2009 at 4:06 pm

    please read my comment in your older post:

    http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2009/06/jamat-e-islami-pakistan-talibani-plans.html

  31. दर्पण साह "दर्शन" said,

    June 28, 2009 at 4:10 pm

    pata nahi kyun par aapki is baat se sehmat hoon ki shayd voting machine main gadbadi ki gayi hai…

    …kyunki blogging jagat main…
    …mahajaal main…

    har jagah BJP chai thi…

    …aur Uttaranchal (mere grah rajya) main to natije aprtyashit hain…

    agar ye sach hai
    to "Rajshahi Jindabaad"

  32. दर्पण साह "दर्शन" said,

    June 28, 2009 at 4:12 pm

    darpansah@yahoo.com
    darpansah@gmail.com

  33. Rakesh Singh - राकेश सिंह said,

    July 28, 2009 at 6:44 pm

    ये सब तो ट्रेलर है भाई | आगे-आगे देखिये , कोई भी किसी भी तरह का इनाम सिर्फ और सिर्फ सेकुलार्स को ही दिया जाएगा | अच्छा आप माथे पे तिलक लगते हैं भगवान् राम को पूजते है तो भाई आप किसी सरकारी सुविधा के हकदार नहीं |

  34. Mrs. Asha Joglekar said,

    September 7, 2009 at 6:45 pm

    Aansoo na baha faryad na kar dil jalata hai to jalane de.


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