हास्‍य कविता – गदही से काम चलाऊँगा

आज तुम्‍हारे पास मै आया,
लेकर प्रेम निवेदन,
स्‍वीकार करो राजकुमारी,
राजकुमार का विनम्र निवेदन।
अगले बरस मै आऊँगा,
घोड़ी पर ले जाऊँगा।
नही मिली अगर घोड़ी,
गदही से काम चलाऊँगा।।

5 Comments

  1. ‘नज़र’ said,

    June 30, 2009 at 1:50 pm

    हँसी तो आयी, सच!


    विज्ञान । HASH OUT SCIENCE

  2. राज भाटिय़ा said,

    June 30, 2009 at 2:03 pm

    महगाई का जमाना है जो सस्ती पडे उसी से गुजारा करो.गधी ना मिले तो गधा ही चलेगा

  3. Udan Tashtari said,

    June 30, 2009 at 3:39 pm

    सही है..घोड़ी तो मंहगी पड़ेगी.

  4. अजय कुमार झा said,

    June 30, 2009 at 4:42 pm

    अजी गधी , घोडी ..और तो और बकरी भी चलेगी… ..एडजस्ट हो जाएगा जी..जज्बा बरकारार रहना चाहिए…

  5. मुकेश कुमार तिवारी said,

    July 2, 2009 at 6:04 pm

    राजकुमार जी,

    पहली नज़र में पढने पर लगा कि यह जो सबस्टिट्यूशन है वो राजकुमारी को इंगित कर लिखा गया है।

    फिर बात समझ में आई यह मेरी अपनी भी कमी हो सकती है।

    मुकेश कुमार तिवारी


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