>बुद्ध की प्रतिमा पर जूते लटकते हैं जीनेवा में

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एक लघु पत्रिका के मध्यम से पता चला कि भगवान् बुद्ध की प्रतिमा पर जूते लटकाए गए । दरअसल , बुद्ध के ज्ञान की धरती बिहार की राजधानी पटना का एक परिवार स्वीट्ज़रलैंड गया हुआ था । प्रभात चौधरी के परिवार ने जिनेवा की एक फ़ुटवेअर दूकान से ऐसे दृश्य अपने कैमरे में कैद कर लाये हैं । पटना के इस सज्जन ने देश की संस्कृति-सभ्यता के अपमान के ख़िलाफ़ अपनी आवाज बुलंद कर उन करोडों लोगों को सबक दिया है जो देश की अस्मिता को भूलते जा रहे हैं । ऐसे लोग जो संस्कृति , समाज , धर्म और अध्यात्म जैसी व्यवस्था को बुढापे में टाइम पास की चीज मानते हैं । सभ्यता संस्कृति वही है जिससे केवल भौतिक समृद्धि जुटी जा सके । यहाँ लंबा भाषण न देकर इतना बताना चाहूँगा कि भारत के इस बेटे ने एन फाउंटेन नमक डिजाइनर दूकान पर जो अपने महा पुरुषों की प्रतिमा के साथ दुर्व्यवहार देखा , उससे कहीं न कहीं उद्वेलित हुए । और यही बेचैनी भारतीय संस्कृति को आज भी जीवंत बनाये हुए है। विश्व के कई छोटे -छोटे देश ऐसी बैटन पर सड़कों पर उतर आते हैं और एक हम हैं ! शर्म आनी चाहिए हमें । भगवान् कहे गए गौतम बुद्ध किसी एक वर्ग , जाती अथवा सम्प्रदाय का नेतृत्व नही करते हैं अपितु उनकी शिक्षा में संपूर्ण मानव के कल्याण का भाव निहित है । भारतीय संस्कृति के प्रमाणित अभिन्न अंग बुद्ध की प्रतिमा का अपमान हमारी सभ्यता का अपमान है । (प्रमाणित इसलिए क्यूंकि इनसे पूर्व के कई महापुरुषों जिनको हम सदियों से पूजते आए हैं , जिनको भगवान् बताते आए हैं , उनको मिथक माना गया है । अभी पिछले सालों में ही तो हमारी केन्द्र सरकार ने भारतीय जनमानस के प्रेरणा पुरूष श्रीराम के अस्तित्व को नाकारा था । परन्तु बुद्ध को नकारना इनके बस की नही इनका तो सब कुछ इतिहास से अभिप्रमाणित है । )

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