>बिहार के कॉलेज में बिहारियों का अपमान

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क्यूँ सुन कर कुछ हैरानी सी हो रही है ? वाकई ये चौकाने वाली घटना है । नीतीश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थानके सभी ४८ छात्र -छात्राएं निदेशक और प्रशासक को हटाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं । आई आई एम् अहमदाबाद की तर्ज पर स्थापित इस संस्थान में फेकल्टी की भारी कमी और सिलेबस को लेकर महज खानापूर्ति की गई है । शैक्षिक गुणवत्ता की कमी से परेशान छात्र मजबूर हो गए जब उन्हें इडियट बिहारी कह कर अपमानित किया गया । हड़ताली छात्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ख़ुद इस संस्थान के अध्यक्ष हैं और उन्होंने उनसे मिलकर अपना पक्ष रखना चाहा तो दिन भर इन्तेजार के बाद भी मिलना नही हो पाया । हार कर उन लोगों ने भूख हड़ताल का सहारा लिया है । बिहारी सम्मान की बात को लेकर राज ठाकरे पर नीतीश -लालू समेत कई नेताओं ने खूब हवाबाजी की थी । आज उन्ही की नाक के नीचे छात्रों को बिहारी कहकर प्रताडित किया जा रहा है । बेहतर बिहार बनानेके लिए , बिहारियों को सम्मान दिलाने के लिए पहले अपने घर को दुरुस्त करना होगा । इस तरह की मानसिक प्रताड़ना से सम्बंधित घटनाओं को कड़े अपराध की श्रेणी में रखा जन चाहिए और तत्काल उस पर कड़ी से कड़ी कार्यवाई होनी चाहिए । उच्च शिक्षा की दिशा में राज्य के छात्रों को केवल कागजी कॉलेजों की जरुरत नही है , जहाँ शैक्षिक केलेंडर तक की व्यवस्था नही है । ऐसे संस्थानों के होने न होने का कोई फर्क नही पड़ता है । बहरहाल नाराज छात्र मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं । छात्र तनाव में हैं । उनके सपनो के साथ खिलवाड़ हो रहा है । वक्त का पहिया खिसकता जा रहा है । कुछ ही महीनों बाद उन्हें उस दुनिया का सामना करना है जहाँ हर पल संघर्ष करना है । संस्थान की लापरवाही इन छात्रों के आशावान मन में अंधेरे का दीपक जलने पर मजबूर कर रही है ।

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