भारतीय नौकरशाही का एक और कारनामा… (अति-माइक्रो पोस्ट)

पुरुलिया कांड की याद है ना आपको? जिसमें एक विमान द्वारा दर्जनों की तादाद में एके-47 के बक्से गिराये गये थे…। 17 दिसम्बर 1995 की कड़कड़ाती ठण्ड में आधी रात को उस घटना की खबर दौड़कर पुलिस को सबसे पहले देने वाले दोनों युवकों (सुभाष तान्तुबी और तारित बंदोपाध्याय) को सरकार ने 10,000 रुपये का पुरस्कार दिया है, सिर्फ़ 13 साल बाद… जी हाँ, यह कार्यप्रणाली है भारत की हरामखोर नौकरशाही-अफ़सरशाही और हमारे नेतागणों की। उन दोनों युवकों ने जो उस समय 20 साल के थे और अब 33-34 साल के हो गये हैं, एक सम्मानजनक निर्णय लेते हुए यह पुरस्कार(?) वापस कर दिया है। तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष वाजपेयी जो बाद में प्रधानमंत्री भी बने, उन्होंने इन युवकों को नौकरी देने की घोषणा की थी, जबकि ये लोग आज भी बेरोजगार हैं।

एक खबर और है… ताजा बजट में राष्ट्रपति भवन का बजट 21.39% बढ़ाकर 27 करोड़ रुपये कर दिया गया है तथा माननीय राष्ट्रपति की तनख्वाह हेतु 38 लाख का प्रावधान किया गया है… 27 करोड़ के इस बजट में राष्ट्रपति भवन का रखरखाव, सचिवों के वेतन-भत्ते और नई गाड़ियों को खरीदने की योजना है…

इन दोनों खबरों का आपस में कोई ताल्लुक बनता हो तो बनाईये…

(ना ना ना ना ना, गाली देना बहुत बुरी बात है…, जी? क्या कहा… ऊपर “हरामखोर” लिखा है… लेकिन साहब ये तो गाली नहीं है यह तो एक प्रवृत्ति है, उपमा है… ठीक “जयचन्द” या “सेकुलर” की तरह)

(प्रिय सब्स्क्राइबर्स और पाठकों… रोजी-रोटी में व्यस्तता की वजह से इस प्रकार की अति-माइक्रो पोस्टें लिख रहा हूँ… शीघ्र ही एक चिर-परिचित बड़ी पोस्ट लेकर आउंगा…)

43 Comments

  1. HEY PRABHU YEH TERA PATH said,

    July 7, 2009 at 7:47 am

    भाई सुरेशजी
    आपकी लेखनी मे भारत एवम भारतियो के लिए जो दर्द झलक रहा है वह सहरानीय है। आपने जो लिखा अक्षर-अक्षर सत्य है। पर अब इस बिगडैल तन्त्र कोन ठीक केरे ?
    मगलकामनाओ सहीत
    हे प्रभु यह तेरापन्थ
    मुम्बई टाईगर

  2. July 7, 2009 at 7:47 am

    भाई सुरेशजी आपकी लेखनी मे भारत एवम भारतियो के लिए जो दर्द झलक रहा है वह सहरानीय है। आपने जो लिखा अक्षर-अक्षर सत्य है। पर अब इस बिगडैल तन्त्र कोन ठीक केरे ?मगलकामनाओ सहीतहे प्रभु यह तेरापन्थमुम्बई टाईगर

  3. बी एस पाबला said,

    July 7, 2009 at 7:47 am

    मन ही मन में जो कुछ बुदबुदाया, उसे लिख नहीं सकता। इसलिए चुपचाप जा रहा।

  4. July 7, 2009 at 7:47 am

    मन ही मन में जो कुछ बुदबुदाया, उसे लिख नहीं सकता। इसलिए चुपचाप जा रहा।

  5. संजय बेंगाणी said,

    July 7, 2009 at 8:19 am

    जमाना माइक्रो का है, अतः मन में ऐसा वैसा न सोचें.

    आम आदमी के हाथ जो लगे वही ज्यादा है.

    'आम आदमी के साथ' वालों की सरकार की मुखिया के खास "राष्ट्रपति" को जितना मिले उतना कम है.

    आप तो कमाओ और टेक्स भरो ताकि गाँधीस्तान जिसे मूर्ख भारत भी कहते है, में कोई अपने नाम से योजना चालू कर खैरात बाँट सके और वोट बटोर जा सके.

  6. July 7, 2009 at 8:19 am

    जमाना माइक्रो का है, अतः मन में ऐसा वैसा न सोचें. आम आदमी के हाथ जो लगे वही ज्यादा है.'आम आदमी के साथ' वालों की सरकार की मुखिया के खास "राष्ट्रपति" को जितना मिले उतना कम है.आप तो कमाओ और टेक्स भरो ताकि गाँधीस्तान जिसे मूर्ख भारत भी कहते है, में कोई अपने नाम से योजना चालू कर खैरात बाँट सके और वोट बटोर जा सके.

  7. पंगेबाज said,

    July 7, 2009 at 8:26 am

    लिखा बढिया है पर इस तरह लिखने से पहले किसी अच्छे वकील से सलाह अवश्य ले ले . वरना बाद पता मे पता चले कि हरामियो उह माफ़ करे जिन्हे आपने कहा है वे सम्मन भिजवा दे 🙂
    वैसे एक जज साहब को तालीबानी कहने पर माफ़ी मांगनी पड गई है. लेकिन वकील किसी को भि तालीबानी कह कर भी सम्मन भिजवाने के लिये धमका सकते है बच कर रहे 🙂

  8. July 7, 2009 at 8:26 am

    लिखा बढिया है पर इस तरह लिखने से पहले किसी अच्छे वकील से सलाह अवश्य ले ले . वरना बाद पता मे पता चले कि हरामियो उह माफ़ करे जिन्हे आपने कहा है वे सम्मन भिजवा दे :)वैसे एक जज साहब को तालीबानी कहने पर माफ़ी मांगनी पड गई है. लेकिन वकील किसी को भि तालीबानी कह कर भी सम्मन भिजवाने के लिये धमका सकते है बच कर रहे 🙂

  9. त्यागी said,

    July 7, 2009 at 8:45 am

    प्रिये सुरेश जी,
    देश के प्रति आपकी चिंता हर द्रष्टि से उचित है.
    देश के रक्षक जब अपमानित होंगे तो देश को किस प्रकार बचाया जा सकता है.
    http://parshuram27.blogspot.com/2009/07/blog-post.html

  10. July 7, 2009 at 8:45 am

    प्रिये सुरेश जी,देश के प्रति आपकी चिंता हर द्रष्टि से उचित है. देश के रक्षक जब अपमानित होंगे तो देश को किस प्रकार बचाया जा सकता है.http://parshuram27.blogspot.com/2009/07/blog-post.html

  11. भारतीय नागरिक - Indian Citizen said,

    July 7, 2009 at 8:58 am

    अरुण जी ने ठीक लिखा है, बाकी सभी ने भी उचित लिखा है. मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि इस देश में लोगों को बेवकूफ बन कर खुश रहने की आदत पड़ चुकी है.

  12. July 7, 2009 at 8:58 am

    अरुण जी ने ठीक लिखा है, बाकी सभी ने भी उचित लिखा है. मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि इस देश में लोगों को बेवकूफ बन कर खुश रहने की आदत पड़ चुकी है.

  13. राज भाटिय़ा said,

    July 7, 2009 at 11:17 am

    दिल मै आग तो बहुत है जनता के, जो भडके गी भी एक दिन देख लेना….ओर उस दिन यह नेता क्या बच पायेगे,??? जब जनता भुखी मरे गी तो क्या होगा…एक आदमी को एक एक रोटी नसीब नही हो रही ओर दुसरी तरफ़ एक आदमी के लिये 27 करोड़ रुपये…. यह सरकार ख्रर्च कर रही है…

  14. July 7, 2009 at 11:17 am

    दिल मै आग तो बहुत है जनता के, जो भडके गी भी एक दिन देख लेना….ओर उस दिन यह नेता क्या बच पायेगे,??? जब जनता भुखी मरे गी तो क्या होगा…एक आदमी को एक एक रोटी नसीब नही हो रही ओर दुसरी तरफ़ एक आदमी के लिये 27 करोड़ रुपये…. यह सरकार ख्रर्च कर रही है…

  15. हिमांशु । Himanshu said,

    July 7, 2009 at 1:10 pm

    इस प्रकार की प्रविष्टि भीतर ही भीतर क्षोभ का भाव पैदा करती है । देश और उसके निवासियों के प्रति आपकी तीव्र संवेदना के सम्मुख नत हूँ ।

  16. July 7, 2009 at 1:10 pm

    इस प्रकार की प्रविष्टि भीतर ही भीतर क्षोभ का भाव पैदा करती है । देश और उसके निवासियों के प्रति आपकी तीव्र संवेदना के सम्मुख नत हूँ ।

  17. काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said,

    July 7, 2009 at 1:15 pm

    छोटा लेख लेकिन बहुत उम्दा। आपने सरकारी तन्त्र पर बहुत अच्छा प्रहार किया है…

    इसका हिसाब मागंना चाहिये…मुझे पता नही है की सूचना के अधिकार का इस्तेमाल कैसे करते है वरना मैं तो पुछ लेता।

    अगर किसी को पता हो तो मुझे मेल करके बताये

  18. July 7, 2009 at 1:15 pm

    छोटा लेख लेकिन बहुत उम्दा। आपने सरकारी तन्त्र पर बहुत अच्छा प्रहार किया है…इसका हिसाब मागंना चाहिये…मुझे पता नही है की सूचना के अधिकार का इस्तेमाल कैसे करते है वरना मैं तो पुछ लेता।अगर किसी को पता हो तो मुझे मेल करके बताये

  19. स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ said,

    July 7, 2009 at 2:46 pm

    एक उपाय है अगर देश की जनता अपने मूल की ओर लौट जाये और वेदों आदि पर चलना शुरू कर दे….

  20. July 7, 2009 at 2:46 pm

    एक उपाय है अगर देश की जनता अपने मूल की ओर लौट जाये और वेदों आदि पर चलना शुरू कर दे….

  21. Anil Pusadkar said,

    July 7, 2009 at 5:28 pm

    ये साले लातों के भूत है।इस चुनाव मे सिर्फ़ हवा मे चप्पलें चली है यही हाल रहा तो आप देखना ये लातो के भूत भी सुधार दिये जायेंगे।अति माईक्रो नही अति मारक है आपकी पोस्ट्।

  22. July 7, 2009 at 5:28 pm

    ये साले लातों के भूत है।इस चुनाव मे सिर्फ़ हवा मे चप्पलें चली है यही हाल रहा तो आप देखना ये लातो के भूत भी सुधार दिये जायेंगे।अति माईक्रो नही अति मारक है आपकी पोस्ट्।

  23. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said,

    July 7, 2009 at 6:25 pm

    यह हरामखोरी की हद है। माइक्रो पोस्ट इतनी छोटी भी नहीं है।

  24. July 7, 2009 at 6:25 pm

    यह हरामखोरी की हद है। माइक्रो पोस्ट इतनी छोटी भी नहीं है।

  25. डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said,

    July 7, 2009 at 7:06 pm

    तुलसी जा संसार में भँति-भाँति के लोग,
    कुछ तो ?????? हैं, कुछ बहुतई ??????।
    ——————
    श्लीलता-अश्लीलता के कारण एक शब्द लिखा नहीं है, जो समझदार हैं वे शब्द जोड़ कर पढ़ लें।

  26. July 7, 2009 at 7:06 pm

    तुलसी जा संसार में भँति-भाँति के लोग, कुछ तो ?????? हैं, कुछ बहुतई ??????। —————— श्लीलता-अश्लीलता के कारण एक शब्द लिखा नहीं है, जो समझदार हैं वे शब्द जोड़ कर पढ़ लें।

  27. Bhavesh (भावेश ) said,

    July 8, 2009 at 4:25 am

    ये माइक्रो पोस्ट नहीं है. ये पोस्ट सतसैया के दोहरे,ज्यों नाविक के तीर की भांति जन मानस में और समाज़ में गहन प्रभाव डालता है. आशा करे की भर्ष्टाचार के प्रति उदासीन देश में कुम्भकर्ण की भांति सोये हुए लोग, इन कर्णभेदी बातो को सुन कर जागे.

  28. July 8, 2009 at 4:25 am

    ये माइक्रो पोस्ट नहीं है. ये पोस्ट सतसैया के दोहरे,ज्यों नाविक के तीर की भांति जन मानस में और समाज़ में गहन प्रभाव डालता है. आशा करे की भर्ष्टाचार के प्रति उदासीन देश में कुम्भकर्ण की भांति सोये हुए लोग, इन कर्णभेदी बातो को सुन कर जागे.

  29. cmpershad said,

    July 8, 2009 at 5:13 am

    न जाने कितने देश के लिए कुर्बान शहीदों के परिजनों को सरकार के झूठे आश्वासनों को झेलना पड़ रहा है। क्यों न ऐसा कानून लाया जाय कि झूठे आश्वासन देनेवाले नेताओं और अधिकारियों को गोली दाग दी जाय???????

  30. cmpershad said,

    July 8, 2009 at 5:13 am

    न जाने कितने देश के लिए कुर्बान शहीदों के परिजनों को सरकार के झूठे आश्वासनों को झेलना पड़ रहा है। क्यों न ऐसा कानून लाया जाय कि झूठे आश्वासन देनेवाले नेताओं और अधिकारियों को गोली दाग दी जाय???????

  31. suntel said,

    July 8, 2009 at 5:30 am

    We got Independence 62 years back but many times we observe that our government policies, rules and regulations are still working under Britishers slavery mentality.

  32. suntel said,

    July 8, 2009 at 5:30 am

    We got Independence 62 years back but many times we observe that our government policies, rules and regulations are still working under Britishers slavery mentality.

  33. RAJIV MAHESHWARI said,

    July 8, 2009 at 6:22 am

    सच ही तो कहा है आपने…

  34. July 8, 2009 at 6:22 am

    सच ही तो कहा है आपने…

  35. महामंत्री - तस्लीम said,

    July 8, 2009 at 9:34 am

    धन्य सरकारी तंत्र।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  36. July 8, 2009 at 9:34 am

    धन्य सरकारी तंत्र।-Zakir Ali ‘Rajnish’ { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  37. Dikshit Ajay K said,

    July 8, 2009 at 10:27 am

    Jai Ho

  38. July 8, 2009 at 10:27 am

    Jai Ho

  39. Bimal chaudhri said,

    July 9, 2009 at 12:04 pm

    bahut hi ghatiya baat hai ki aap micro-post likh kar ulloo banaa jaate hain.
    ab yah nahin chalega, hamaare prati bhi aapki koi zimmedaari banti hai ya nahin.
    🙂
    BIG POST ki darkaar hai sir ji.

  40. July 9, 2009 at 12:04 pm

    bahut hi ghatiya baat hai ki aap micro-post likh kar ulloo banaa jaate hain. ab yah nahin chalega, hamaare prati bhi aapki koi zimmedaari banti hai ya nahin. :)BIG POST ki darkaar hai sir ji.

  41. khursheed said,

    July 9, 2009 at 2:14 pm

    पिछले हफ़्ते देहरादून के रणवीर सिंह की फर्ज़ी मुठभेड़ में पुलिस द्वारा हत्या करने पर छुब्ध होकर जामिया मिल्लिया अध्यापक संघीय ग्रुप ने भारी मन से कंडोलेंस घोषित किया. रणबीर सिंह का मुठभेड़ प्रकरण एक बार फिर भारतीय पुलिस का वह चेहरा बेनक़ाब करता है जिसके लिए वे मैडल और प्रमोशन के लिए किस तरह से मासूमों को उत्पीडित करते है और जान से मारने में भी नहीं हिचकते हैं. मैं तो कहता हूँ कि इन दरिन्दे पुलिस वालों को क़ानून सख्त से सख्त सज़ा दे.

    रणवीर का पुलिस द्वारा फर्ज़ी मुठभेड़ में मारने पर एक और घटना ताज़ा हो गयी, वह थी बाटला हाउस एनकाउंटर (पिछले सितम्बर में) जो पूरी तरह से फर्ज़ी था और उस एनकाउंटर में भी पुलिस ने फर्ज़ी तरीके से दो बेगुनाह युवकों को मार डाला था, यही नहीं अपने ही पुलिस साथी को भी मार डाला था.

    हालाँकि दोनों फर्ज़ी मुठभेडों में जन-क्रोध का सैलाब उमड़ पड़ा था और यह मुठभेडें हमारे देश और उत्तराखंड राज्य की राजधानी में हुईं. एक ख़ास बात यह रही कि रणवीर प्रकरण में जिस तरह से 'सेकुलर' कांग्रेस ने तत्परता दिखाते हुए इसके खिलाफ आन्दोलन में सहयोग किया और जन सैलाब का साथ देकर भारत के मानवाधिकार आयोग से निष्पक्ष जांच करने के लिए ज्ञापन आदि दिए, वह तत्परता बाटला हाउस के फर्ज़ी मुठभेड़ में कथित सेकुलर कांग्रेस में नहीं नज़र आई थी.

    इस प्रकरण में सीबी-सीआईडी जांच का आर्डर पहले ही दे दिया गया और मुठभेड़ में शामिल सभी पुलिस वालों के खिलाफ़ हत्या का मुकदमा दर्ज़ किया गया.

    ज़्यादातर मिडिया इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ़ गलत बयानी करती रहती है और तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करती है. पहले कहा जाता था कि मुसलमान पढ़ते लिखते नहीं है, इन्हें पढाओ-लिखाओ, फिर कहते है कि मदरसा आतंकवादी को जन्म देता है. (हालाँकि मैं भारत के अन्दर एक भी ऐसे मदरसे को नहीं जानता जो इस तरह की गतिविधियों में लिप्त हो, भारत के बाहर मैं नहीं जानता). फिर कहते है कि पढ़े लिखे मुसलमान (आईटी स्पेशलिस्ट) आतंकवादी है… मास्टरमाईंड हैं, इन्हें अन्दर करो!!

    क्या है ये, कभी कहते हो मुसलमान अनपढ़ है, कभी कहते हो पढ़े लिखे हैं…..हाँ, हम मास्टरमाईंड हैं मगर आतंकवादी नहीं. हम मिडिया से अमन चाहते हैं जंग नहीं.

    याद कीजिये किस तरह से बाटला हाउस के फर्ज़ी एनकाउंटर में मारे गए बेगुनाह युवकों को प्रति मिडिया ने और राजनैतिक पार्टियों ने देशविरोधी और आतंकवादी करार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन सच आखिर सच ही होता है. यह भी कहा गया कि अगर बाटला हाउस की फर्ज़ी मुठभेड़ की जांच सीआईडी से कराई जायेगी तो पुलिस का मनोबल कमज़ोर होगा. तो क्या अब रणवीर की हत्या करने वाले पुलिसवालों के खिलाफ़ जांच करने पर पुलिस वालों का मनोबल नहीं गिरेगा…??? आखिर मिडिया, पुलिस और शासन क्यूँ मुसलमानों के लिए दोगलेपन का-सा व्यवहार करती है? क्यूँ???

  42. khursheed said,

    July 9, 2009 at 2:14 pm

    पिछले हफ़्ते देहरादून के रणवीर सिंह की फर्ज़ी मुठभेड़ में पुलिस द्वारा हत्या करने पर छुब्ध होकर जामिया मिल्लिया अध्यापक संघीय ग्रुप ने भारी मन से कंडोलेंस घोषित किया. रणबीर सिंह का मुठभेड़ प्रकरण एक बार फिर भारतीय पुलिस का वह चेहरा बेनक़ाब करता है जिसके लिए वे मैडल और प्रमोशन के लिए किस तरह से मासूमों को उत्पीडित करते है और जान से मारने में भी नहीं हिचकते हैं. मैं तो कहता हूँ कि इन दरिन्दे पुलिस वालों को क़ानून सख्त से सख्त सज़ा दे.रणवीर का पुलिस द्वारा फर्ज़ी मुठभेड़ में मारने पर एक और घटना ताज़ा हो गयी, वह थी बाटला हाउस एनकाउंटर (पिछले सितम्बर में) जो पूरी तरह से फर्ज़ी था और उस एनकाउंटर में भी पुलिस ने फर्ज़ी तरीके से दो बेगुनाह युवकों को मार डाला था, यही नहीं अपने ही पुलिस साथी को भी मार डाला था. हालाँकि दोनों फर्ज़ी मुठभेडों में जन-क्रोध का सैलाब उमड़ पड़ा था और यह मुठभेडें हमारे देश और उत्तराखंड राज्य की राजधानी में हुईं. एक ख़ास बात यह रही कि रणवीर प्रकरण में जिस तरह से 'सेकुलर' कांग्रेस ने तत्परता दिखाते हुए इसके खिलाफ आन्दोलन में सहयोग किया और जन सैलाब का साथ देकर भारत के मानवाधिकार आयोग से निष्पक्ष जांच करने के लिए ज्ञापन आदि दिए, वह तत्परता बाटला हाउस के फर्ज़ी मुठभेड़ में कथित सेकुलर कांग्रेस में नहीं नज़र आई थी.इस प्रकरण में सीबी-सीआईडी जांच का आर्डर पहले ही दे दिया गया और मुठभेड़ में शामिल सभी पुलिस वालों के खिलाफ़ हत्या का मुकदमा दर्ज़ किया गया.ज़्यादातर मिडिया इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ़ गलत बयानी करती रहती है और तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करती है. पहले कहा जाता था कि मुसलमान पढ़ते लिखते नहीं है, इन्हें पढाओ-लिखाओ, फिर कहते है कि मदरसा आतंकवादी को जन्म देता है. (हालाँकि मैं भारत के अन्दर एक भी ऐसे मदरसे को नहीं जानता जो इस तरह की गतिविधियों में लिप्त हो, भारत के बाहर मैं नहीं जानता). फिर कहते है कि पढ़े लिखे मुसलमान (आईटी स्पेशलिस्ट) आतंकवादी है… मास्टरमाईंड हैं, इन्हें अन्दर करो!! क्या है ये, कभी कहते हो मुसलमान अनपढ़ है, कभी कहते हो पढ़े लिखे हैं…..हाँ, हम मास्टरमाईंड हैं मगर आतंकवादी नहीं. हम मिडिया से अमन चाहते हैं जंग नहीं.याद कीजिये किस तरह से बाटला हाउस के फर्ज़ी एनकाउंटर में मारे गए बेगुनाह युवकों को प्रति मिडिया ने और राजनैतिक पार्टियों ने देशविरोधी और आतंकवादी करार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन सच आखिर सच ही होता है. यह भी कहा गया कि अगर बाटला हाउस की फर्ज़ी मुठभेड़ की जांच सीआईडी से कराई जायेगी तो पुलिस का मनोबल कमज़ोर होगा. तो क्या अब रणवीर की हत्या करने वाले पुलिसवालों के खिलाफ़ जांच करने पर पुलिस वालों का मनोबल नहीं गिरेगा…??? आखिर मिडिया, पुलिस और शासन क्यूँ मुसलमानों के लिए दोगलेपन का-सा व्यवहार करती है? क्यूँ???

  43. RAJENDRA said,

    August 5, 2009 at 12:48 pm

    Ye bhi vichitra baat hai musalmaan ko kabhi bhi sahee baat suhati hee nahin. Sahee aadmi musalmaan bhi ho sakta isme kya pareshani hai Khursheed ki baat kuch hazam nahi ho rahi


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