>कैसे भाये सखी रुत सावन की: मल्हार राग, लताजी और सी रामचन्द्र जोड़ी की एक सुन्दर जुगलबन्दी

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सावन की ऋतु, बरखा की बूंदे और मल्हार राग…अगर यह तीनों एक साथ मिल जायें तो किसको नहीं सुहायेगा! पर हमारी नायिका को भी सावन की रुत नहीं भा रही, अपनी सखी से शिकायत कर रही है कि कैसे भाये सखी रुत सावन की…….! क्यों कि उसके पिया उसके पास नहीं है, मिलना तो दूर की बात आने की पाती का भी पता ठिकाना नहीं,ऐसे में नायिका अपनी मन की बात अपनी सखी को ही गाकर सुना रही है।
आप सब जानते हैं अन्ना साहब यानि सी रामचन्द्र और लताजी ने एक से एक लाजवाब गीत हमें दिये। फिल्म पहली झलक का यह गीत सुनिये देखिये सितार और बांसुरी का कितना सुन्दर प्रयोग मल्हार राग में अन्ना साहब ने किया है।
और हां…. यह गीत फिल्म पहली झलक का है।

कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
पिया भेजी ना पतियां आवन की-२
कैसे भाये सखी रुत सावन की
छम छम छम छम बरसत बदरा-२
रोये रोये नैनों से बह गया कजरा
आग लगे ऐसे सावन को-२
जान जलावे जो बिरहन की
कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
धुन बंसी की सावनिया गाये
आऽऽऽ सावनिया गाये
धुन बंसी की सावनिया गाये-२
घायल मन, सुर डोलत जाये
बनके अगन अँखियन में भड़के-२
आस लगी पिया दरशन की
कैसे भाये सखी रुत सावन की-२
पिया भेजी ना पतियां आवन की-२
कैसे भाये सखी रुत-२
आलाप आपके गुनगुनाने के लिये
म म रे सा, नि सा रे नि ध नि ध नि सा
म प द नि सा, रे सा रे नि सा ध निऽऽ प
म रे प ग म रे सा, प म रे प म नि द सा
म प द नि सा, नि नि प म ग म रि सा नि सा
प म ग म रे सा नि सा
प म ग म रे सा नि सा
सावन की
कैसे भाये सखी रुत आऽ सावन की

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http://www.esnips.com//escentral/images/widgets/flash/note_player.swf
Pahli Jhalak 1954 …
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5 Comments

  1. July 12, 2009 at 6:42 am

    >सुन्दर !!

  2. July 12, 2009 at 6:59 am

    >वाकई दुर्लभ गीत, धन्यवाद.

  3. July 12, 2009 at 1:59 pm

    >मस्त कर दिया सागर साहब जी, बहुत सुंदर.धन्यवाद

  4. vimal verma said,

    July 12, 2009 at 2:46 pm

    >सागर भाई बहुत बढ़िया यही तो आपकी तारीफ़ है कि दुर्लभ गीतों का खजाना बारी बारी से आप सुनवाते रहते हैं और हम सुन कर रस में डूबे रहते हैं, बहुत बहुत शुक्रिया।

  5. November 1, 2009 at 9:50 am

    >pahli baar suna ye geet kanon mein ras ghol gaya.dhanyavad.


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