>मनमोहन को चिठ्ठी

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सेवा में ,

प्रधानमंत्री और ख्यातिप्राप्त अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह जी !

विषय :- नक़ल की आर्थिक घुसपैठ को नियंत्रित करने के सन्दर्भ में ।

महोदय ,

आजकल भारतीय बाज़ार में जाली नोटों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है । जिधर देखिये उधर से जाली नोट इस कदर घुसा आ रहा है मानो बरसाती नाले में गन्दा पानी । इसकी वज़ह से आम आदमी कठिनाइयों को झेल रहा है । मामले की गंभीरता तब मालूम हुई जब संसद भवन के ए० टी० एम से नकली नोटों के मिलने की शिकायत सामने आई । बसपा के एक संसद ने सदन में ए ० टी ० एम से प्राप्त जाली नोट को पेश करते हुए हंगामा मचाया । उक्त घटनाक्रम से सरकार की नाकामी साफ़ हो गई है । जब संसद के भवन के ए ० टी ० एम में नकली नोटों ने पैठ बना ली है तब अन्य स्थानों का क्या कहना ! महंगाई की मार और जाली नोटों के हमले से भारतीय बाज़ार की कमर टूटती दिख रही है । नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते आर्थिक आतंकवाद की यह खेप भारत पहुँच रही है और सरकारी तंत्र अनजान बन अपनी चिरपरिचित अनंत निंद्रा में सो रहा है । नकलीपन का यह धंधा नोटों तक ही सिमित नही है । खाद्य सामग्रियों में मिलावट का काम भी बेरोकटोक जारी है । तेल , घी , दूध , अनाज , फल ,मिठाई और यहाँ तक की शराब में भी नकली पदार्थ को मिला कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है । हर वर्ष रक्षा और खाद्य सुरक्षा के नाम पर करोड़ों खर्च किए जाते हैं पर नतीजा वही ढाक के तीन पात। नक़ल की इस आर्थिक घुसपैठ को अभी तक आतंकवाद की श्रेणी में नही रखा गया है । स्थानीय स्तर पर होने वाला यह कार्य अब ग्लोबल रूप धारण कर चुका है परन्तु आज भी हमारी तैयारियां सदियों पुरानी है । देश की संसद को आर्थिक आतंकवाद को चिन्हित कर इन्हे रोकने का उपाय करने का प्रयास करना होगा । आशा है श्रीमान हमारे सुझाव और समस्या को आम समझ कर भूल जायेंगे । दरअसल आप जैसे प्रथम श्रेणी के नागरिकों के लिए इस तरह का ख्याल लाना भी पाप है ।

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