भारतीय समाज, सच का सामना, TRP की भूख और कुछ महत्वपूर्ण सवाल… Sach Ka Samna, TRP Rating & Indian Society

“सच का सामना”(?) नामक फ़ूहड़ टीवी कार्यक्रम से सम्बन्धित मेरी पिछली पोस्ट “नारी का सम्मान और TRP के भूखे…” पर आई हुई विभिन्न टिप्पणियों से एक नई बहस का जन्म होने जा रहा है… वह ऐसे कि उनमें से कई टिप्पणियों का भावार्थ यह था कि “यदि स्मिता (या कोई अन्य प्रतियोगी) को पहले से ही पता था कि उससे ऐसे सवाल पूछे जायेंगे तो तब वह वहाँ गई ही क्यों…?”, “यदि प्रतियोगी को पैसों का लालच है और वह पैसों के लिये सब कुछ खोलने के लिये तैयार है तब क्या किया जा सकता है, यह तो उसकी गलती है”… “चैनलों का तो काम यही है कि किस तरह से अश्लीलता और विवाद पैदा किया जाये, लोग उसमें क्यों फ़ँसते हैं?”… “स्मिता ने अपनी इज़्ज़त खुद ही लुटवाई है, इसे बलात्कार नहीं कहा जा सकता, बलात्कार और स-सहमति शयन में अन्तर है…”।

कुछ टिप्पणियों का भावार्थ यह भी था कि “फ़िर क्यों ऐसे चैनल देखते हो?”, “यह कार्यक्रम वयस्कों के लिये है, क्यों इसे परिवार के साथ देखा जाये?”, “टीवी बन्द करना तो अपने हाथ है, फ़िर इतनी हायतौबा क्यों?”… ज़ाहिर है कि मुण्डे-मुण्डे मतिर्भिन्नाः की तर्ज़ पर हरेक व्यक्ति के अपने विचार है, और यही स्वस्थ लोकतन्त्र की निशानी भी है।

अब ज़रा निम्नलिखित घटनाओं पर संक्षेप में विचार करें –

1) सोना दोगुना करने का लालच देकर कई ठग “अच्छी खासी पढ़ी-लिखी” शहरी महिलाओं को भी अपना शिकार बना लेते हैं, वह महिला लालच के शिकार में उस ठग की बातों में आ जाती है और अपना सोना लुटवा बैठती है। इस “लुट जाने के लिये” वह महिला अधिक जिम्मेदार है या वह ठग? सजा उस “ठग” को मिलनी चाहिये अथवा नहीं, सोना गँवाकर महिला तो सजा पा चुकी।

2)शेयर बाज़ार में पैसा निवेश करते समय निवेशक को यह पता होता है कि वह एक “सट्टा” खेलने जा रहा है और इसमें धोखाधड़ी और “मेनिपुलेशन” भी सम्भव है, ऐसे में यदि कोई हर्षद मेहता या केतन पारेख उसे लूट ले जाये तो क्या मेहता और पारेख को छोड़ देना चाहिये?

3) मान लें यदि कोई पागल व्यक्ति आपके घर के सामने कूड़ा-करकट फ़ैला रहा है, सम्भव है कि वह कूड़ा-करकट आपके घर को भी गन्दा कर दे, तब आप क्या करेंगे? A) पागल को रोकने की कोशिश करेंगे, B) अपने घर के दरवाजे बन्द कर लेंगे कि, मुझे क्या करना है? (यह बिन्दु शंकर फ़ुलारा जी के ब्लॉग से साभार)

4) इसी से मिलता जुलता तर्क कई बार बलात्कार/छेड़छाड़ के मामले में भी दे दिया जाता है, कि अकेले इतनी रात को वह उधर गई ही क्यों थी, या फ़िर ऐसे कपड़े ही क्यों पहने कि छेड़छाड़ हो?

इन तर्कों में कोई दम नहीं है, क्योंकि यह पीड़ित को दोषी मानते हैं, अन्यायकर्ता को नहीं। मेरे ब्लॉग पर आई हुई टिप्पणियों को इन सवालों से जोड़कर देखें, कि यदि स्मिता लालच में फ़ँसकर अपनी इज़्ज़त लुटवा रही है तो आलोचना किसकी होना चाहिये स्टार प्लस की या स्मिता की? सामाजिक जिम्मेदारी किसकी अधिक बनती है स्मिता की या स्टार प्लस की? “चैनलों का काम ही है अश्लीलता फ़ैलाना और बुराई दिखाना…” यह कहना बेतुका इसलिये है कि ऐसा करने का अधिकार उन्हें किसने दिया है? और यदि वे अश्लीलता फ़ैलाते हैं और हम अपनी आँखें या टीवी बन्द कर लें तो बड़ा दोष किसका है? आँखें (टीवी) बन्द करने वाले का या उस चैनल का? इस दृष्टि से तो हमें केतन पारिख को रिहा कर देना चाहिये, क्योंकि स्मिता की तरह ही निवेशक भी लालच में फ़ँसे हैं सो गलती भी उन्हीं की है, वे लोग क्यों शेयर बाजार में घुसे, केतन पारेख का तो काम ही है चूना लगाना? शराब बनाने वालों को छोड़ देना चाहिये क्योंकि यह तो “चॉइस” का मामला है, सिगरेट कम्पनियों को कानून के दायरे से बाहर कर देना चाहिये क्योंकि पीने वाला खुद ही अपनी जिम्मेदारी से वह सब कर रहा है? यह भी तो एक प्रकार का “स-सहमति सहशयन” ही है, बलात्कार नहीं।

इसी प्रकार यदि कहीं पर कोई अपसंस्कृति (कूड़ा-करकट) फ़ैला रहा है तब अपने दरवाजे बन्द कर लेना सही है अथवा उसकी आलोचना करके, उसकी शिकायत करके (फ़िर भी न सुधरे तो ठुकाई करके) उसे ठीक करना सही है। दरवाजे बन्द करना, आँखें बन्द करना अथवा टीवी बन्द करना कोई इलाज नहीं है, यह तो बीमारी को अनदेखा करना हुआ। ऐसे चैनल क्यों देखते हो का जवाब तो यही है कि वरना पता कैसे चलेगा कि कौन-कौन, कहाँ-कहाँ, कैसी-कैसी गन्दगी फ़ैला रहा है? न्यूज़ चैनल देखकर ही तो पता चलता है कि कितने न्यूज़ चैनल भाजपा-संघ-हिन्दुत्व विरोधी हैं?, कौन सा चैनल एक परिवार विशेष का चमचा है, कौन सा चैनल “तथाकथित प्रगतिशीलता” का झण्डाबरदार बना हुआ है। अतः इस “अपसंस्कृति” (यदि कोई इसे अपसंस्कृति नहीं मानता तो यह उसकी विचारधारा है) की आलोचना करना, इसका विरोध करना, इसे रोकने की कोशिश करना, एक जागरूक नागरिक का फ़र्ज़ बनता है (भले ही इस कोशिश में उसे दकियानूसी या पिछड़ा हुआ घोषित कर दिया जाये)।

यदि यह शो वयस्कों के लिये है तब इस प्रकार की वैधानिक चेतावनी क्यों नहीं जारी की गई और इसका समय 10.30 की बजाय रात 12.30 क्यों नहीं रखा गया? कांबली-सचिन के फ़ुटेज दिखा-दिखाकर इसका प्रचार क्यों किया जा रहा है? क्योंकि पहले भी कंडोम के प्रचार में राहुल द्रविड और वीरेन्द्र सहवाग को लिया जा चुका है और कई घरों में बच्चे पूछते नज़र आये हैं कि पापा क्रिकेट खेलते समय मैं भी राहुल द्रविड जैसा कण्डोम पहनूंगा… क्या यह कार्यक्रम बनाने वाला चाहता है कि कुछ और ऐसे ही सवाल बच्चे घरों में पूछें?

बहरहाल, यह बहस तो अन्तहीन हो सकती है, क्योंकि भारत में “आधुनिकता”(?) के मापदण्ड बदल गये हैं (बल्कि चालबाजी द्वारा मीडिया ने बदल दिये गये हैं), एक नज़र इन खबरों पर डाल लीजिये जिसमें इस घटिया शो के कारण विभिन्न देशों में कैसी-कैसी विडम्बनायें उभरकर सामने आई हैं, कुछ देशों में इस शो को प्रतिबन्धित कर दिया गया है, जबकि अमेरिका जैसे “खुले विचारों”(?) वाले देश में भी इसके कारण तलाक हो चुके हैं और परिवार बिखर चुके हैं…।

प्रकरण – 1 : मोमेंट ऑफ़ ट्रुथ का ग्रीक संस्करण प्रतिबन्धित किया गया…

मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक जिन्होंने अपनी पोती की उम्र की लड़की वेंडी से शादी की है और मीडिया के जरिये “बाजारू क्रान्ति” लाने के लिये विख्यात हैं उनकी पुत्री एलिज़ाबेथ मर्डोक द्वारा निर्मित यह शो कई देशों में बेचा गया है और इसकी हू-ब-हू नकल कई देशों में जारी है, का ग्रीक संस्करण ग्रीस सरकार ने प्रतिबन्धित कर दिया है। ग्रीस के सरकारी चैनल “एण्टेना” द्वारा इस शो में विभिन्न भद्दी स्वीकृतियों और परिवार पर पड़ने वाले बुरे असर के चल्ते यह शो बन्द कर दिया गया। इसके फ़रवरी वाले एक शो में एक माँ से उसकी बेटी-दामाद के सामने पूछा गया था कि “क्या वह अपनी बेटी की शादी एक अमीर दामाद से करना चाहती थी”, उसने हाँ कहा और उसके गरीब दामाद-बेटी के घर में दरार पड़ गई। मार्च में हुए एक शो में पति के सामने महिला से पूछा गया था कि क्या वह पैसों के लिये किसी गैर-मर्द के साथ सो सकती है?
खबर का स्रोत यहाँ है http://www.guardian.co.uk/world/2009/jun/24/greek-quiz-show-confessions-banned

इसका वीडियो लिंक यहाँ है http://www.youtube.com/watch?v=yMvuQugBKCE

प्रकरण 2 – पति की हत्या के लिये भाड़े का हत्यारा लेना स्वीकार करने पर कोलम्बिया में भी इस शो पर प्रतिबन्ध (मूल रिपोर्ट जोशुआ गुडमैन APP)

कोलम्बिया में गेम शो “नथिंग बट ट्रूथ” को बैन कर दिया गया, जब एक प्रतिभागी ने 25,000 डालर के इनाम के लिये यह स्वीकार कर लिया कि उसने अपने पति की हत्या के लिये एक भाड़े के हत्यारे को पैसा दिया था। कोलम्बिया में प्रसारित इस शो में सभी प्रतिभागियों ने ड्रग स्मगलिंग, समलैंगिक सम्बन्धों और शादीशुदा होने के बावजूद रोज़ाना वेश्यागमन को स्वीकार किया। लेकिन 2 अक्टूबर 2007 को रोज़ा मारिया द्वारा यह स्वीकार किये जाने के बाद कि उसने अपने पति की हत्या की सुपारी दी थी लेकिन ऐन वक्त पर उसका पति हमेशा के लिये कहीं भाग गया और यह काम पूरा न हो सका, के बाद यह शो बन्द कर दिया गया।
खबर का स्रोत यहाँ देखें http://www.textually.org/tv/archives/2007/10/017595.htm

प्रकरण 3 – लॉरेन क्लेरी : मोमेंट ऑफ़ ट्रुथ ने उसका तलाक करवा दिया…

इस शो में लॉरेन क्लेरी नामक महिला ने यह स्वीकार कर लिया कि वह अपने पति को धोखा दे रही है और अपने पूर्व मित्र से शादी करना चाहती है। लॉरेन ने स्वीकार किया किया कि वह यह सब पैसे के लिये कर रही है। उसके पति फ़्रैंक क्लेरी ने कहा कि उसे शक था कि उसकी पत्नी उसके प्रति वफ़ादार नहीं है और शायद मामला धीरे-धीरे सुलझ जायेगा, लेकिन इस तरह सार्वजनिक रूप से पत्नी के यह स्वीकार करने के बाद उसे बेहद शर्मिन्दगी हुई है। लॉरेन क्लेरी इस कार्यक्रम से कुछ पैसा ले गई, लेकिन शायद यह उसे तलाक दिलवाने से नहीं रोक सकेगा।

इसका वीडियो लिंक देखने के लिये यहाँ चटका लगायें…
Video link : http://www.transworldnews.com/NewsStory.aspx?id=38398&cat=14

प्रकरण 4 – अमेरिका में इस शो के सातवें एपीसोड में एक कारपेंटर ने स्वीकार किया कि वह अपनी पत्नी की बहन और उसकी सहेलियों के साथ सोता रहा है और कई बार उसने एक माह में विभिन्न 25 महिलाओं के साथ सेक्स किया है। एपीसोड क्रमांक 9 में पॉल स्कोन ने एक लाख डालर में यह सच(?) कहा कि वह प्रत्येक सेक्स की जाने वाली महिला की अंडरवियर संभालकर रखता है, और कई महिलाओं से उसने सेक्स करने के पैसे भी लिये हैं।

खबर का स्रोत देखने के लिये यहाँ चटका लगायें http://en.wikipedia.org/wiki/List_of_The_Moment_of_Truth_episodes#Episode_7

अब कहिये… इतना सब हो चुकने के बावजूद फ़िर भी यदि हम भारत में इस शो को जारी रखने पर उतारू हैं तब तो वाकई हमारा भयानक नैतिक पतन हो चुका है। एक बात और है कि “नाली में गन्दगी दिखाई दे रही है तो उसे साफ़ करने की कोशिश करना चाहिये, यदि नहीं कर सकते तो उसे ढँकना चाहिये, लेकिन यह जाँचने के लिये, कि नाली की गन्दगी वाकई गन्दगी है या नहीं, उसे हाथ में लेकर घर में प्रवेश करना कोई जरूरी नहीं…”।

(नोट – इस लेख के लिये भी मैं अपनी कॉपीराइट वाली शर्त हटा रहा हूँ, इस लेख को कहीं भी कॉपी-पेस्ट किया जा सकता है।)

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58 Comments

  1. दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said,

    July 20, 2009 at 1:06 pm

    बहुत सुंदर आलेख। अपसंस्कृति फैलाने वालों पर वज्र प्रहार है यह। बधाई!

  2. July 20, 2009 at 1:06 pm

    बहुत सुंदर आलेख। अपसंस्कृति फैलाने वालों पर वज्र प्रहार है यह। बधाई!

  3. महेन्द्र मिश्र said,

    July 20, 2009 at 1:56 pm

    बहुत सुंदर आलेख…

  4. July 20, 2009 at 1:56 pm

    बहुत सुंदर आलेख…

  5. दीपक भारतदीप said,

    July 20, 2009 at 2:02 pm

    आपने बहुत अच्छे ढंग से इस विषय को उठाया है। इस पर सकारात्मक बहस हो सकती है।
    दीपक भारतदीप

  6. July 20, 2009 at 2:02 pm

    आपने बहुत अच्छे ढंग से इस विषय को उठाया है। इस पर सकारात्मक बहस हो सकती है।दीपक भारतदीप

  7. सागर नाहर said,

    July 20, 2009 at 2:17 pm

    सुरेशभाई
    सब कुछ आप ही लिख दोगे या कुछ टिप्प्णीकर्ताओं के लिये भी रख छोड़ोगे?
    खैर… बहुत बढ़िया लेख।

  8. July 20, 2009 at 2:17 pm

    सुरेशभाईसब कुछ आप ही लिख दोगे या कुछ टिप्प्णीकर्ताओं के लिये भी रख छोड़ोगे?खैर… बहुत बढ़िया लेख।

  9. भारतीय नागरिक - Indian Citizen said,

    July 20, 2009 at 2:44 pm

    हमारे देश की समस्या यही है कि हर कोई भगत सिंह को पैदा देखना चाहता है लेकिन पड़ोसी के घर में. जो हजार साल की गुलामी हुई, उसके मूल में यही कारण था, कि मैं अपना काम बना लूं, दूसरे के साथ जो भी हो, होने दो. यही प्रवृत्ति आज तक चली आ रही है. किसी समय राष्ट्र हित (मैं यही कहूंगा) में दधीचि ने शरीर का त्याग कर दिया, आज बिना स्वार्थ के कोई कटे पर पेशाब करने को तैयार नहीं. (माफ कीजियेगा इस के प्रयोग के लिये). यही सभी समस्याओं का मूल है. अब जो तैयार होना चाहते हैं, वह सामाजिक व्यवस्था और नौकरशाही इत्यादि तमाम चीजों के चलते पीछे हट जाते हैं>

  10. July 20, 2009 at 2:44 pm

    हमारे देश की समस्या यही है कि हर कोई भगत सिंह को पैदा देखना चाहता है लेकिन पड़ोसी के घर में. जो हजार साल की गुलामी हुई, उसके मूल में यही कारण था, कि मैं अपना काम बना लूं, दूसरे के साथ जो भी हो, होने दो. यही प्रवृत्ति आज तक चली आ रही है. किसी समय राष्ट्र हित (मैं यही कहूंगा) में दधीचि ने शरीर का त्याग कर दिया, आज बिना स्वार्थ के कोई कटे पर पेशाब करने को तैयार नहीं. (माफ कीजियेगा इस के प्रयोग के लिये). यही सभी समस्याओं का मूल है. अब जो तैयार होना चाहते हैं, वह सामाजिक व्यवस्था और नौकरशाही इत्यादि तमाम चीजों के चलते पीछे हट जाते हैं>

  11. डॉ .अनुराग said,

    July 20, 2009 at 2:59 pm

    यही होना है लोग सिर्फ ऐसी टिपण्णी करके गुजर जायेगे जो फौरी होगी…..आपने जो तर्क दिए वो इस शो से क्या सम्बन्ध रखते है वो समझ नहीं आया ..हाँ पहले भावनाओ का व्यापारीकरण था …अब निजी जिंदगी का है…अजूबा कुछ नहीं है…किरण बेदी के प्रोग्राम में आकर भी रिश्ते सुधरेगे नहीं …एम् टी वी के रोडिस में वर्जिनिटी पर बहसे खूब हुई….लड़कियों ने माँ बहन की खुलेआम गाली दी .आज कई सफल एम् जे है …वक़्त बदल रहा है .टी वी की दुनिया भी …चैनल भी बाज़ार का ही हिस्सा है .जैसे यूरोप ओर दूसरे देशो में कुछ सामय के बाद रियल्टी शो का बूम आया .यहाँ ऐसा आना ही है …अभी कई ओर कांसेप्ट आयेगे …जो अभी वहां चल रहे है ..क्या एकता कपूर के सीरयल एक आदर्श सामाज स्थापित कर रहे थे ? इतने सारे चैनल की भीड़ में अब आपको सिर्फ ये तय करना होगा की आपने क्या कब देखना है …क्यूंकि खुशकिस्मती से रिमोट की ताकत आपके हाथ में है ……
    दिक्कत ये है की भारतीय दर्शक को अब स्टार प्लस ने एक मैच्यूर दर्शक समझ लिया है …कितना है ?ये आने वाला वक़्त बतायेगा .. …..इससे समाज में गंदगी फ़ैल जायेगी …भ्रष्ट हो जाएगा .ये डर जरूर बेकार है .क्यूंकि जो कुछ समाज में है वही इस सीरियल में है ……यहाँ आने वाले लोग इसी समाज का हिस्सा है ..शोहरत का लालच कहिये या पैसे का….वे स्वंय आ रहे है …इससे पूर्व में भी हत्यारे रेपिस्ट किताब लिखते है ओर लाखो की रोयल्टी कमाते है ..क्या कोई रोक पाया है उन्हें ?
    वैसे मेरा मानना है जिस सच से समाज के स्ट्रक्चर को हानि होती हो उससे झूठ भला …परिवार की तो खैर बात जाने दीजिये ….पर ये मेरा निजी विचार है .ओर मै कोई प्रिचर या समाज सुधारक तो हूँ नहीं…एक वक़्त के बाद हमें उन सचो से परहेज करना पड़ता है जिनसे किसी दूसरे इन्सान या समाज की निजता को हानि पहुँचती हो……पर अब वक़्त बदल रहा है …ओर हम सिर्फ अपना निजी विचार रख सकते है .थोप नहीं सकते ….या ये भी हो सकता है हम आम आदमी को जितना बेवकूफ समझ रहे है वो उतना हो नहीं……
    मेरी समझ से अगर
    इस शो के साथ यदि आपति की कुछ बाते है तो वो ये है ….
    इसका अडल्ट प्रोग्राम घोषित न किया जाना( जैसे स्टार मूवी वाले किसी मूवी को दिखाने से पहले बताते है)
    इसके प्रमोस का टाइम निश्चित न होना (ऐसे प्रोमो …जिसमे केवल सेक्स रिलेटेड प्रशन ही मैन है जाहिर है क्यों ?)
    प्रमोस के कंटेंट पर गौर करने की आवश्यकता ….मनोहर कहानियों की तरह न किया जाये
    इसका रिपीट टेलीकास्ट सुबह के वक़्त भी होना ( कम उम्र के बच्चो के लिए दिन में उपलब्ध )
    पर
    इस शो के जरिये अगर कुछ अच्छा होना चाहिए तो शायद एक बहस छिडेगी अश्लीलता की परिभाषा पर ,मसलन क्या अश्लील है ओर क्या नहीं ?चुम्बन ओर बलात्कार की खबरे कैसे ओर क्यूकर दिखाई जाए ?क्या किसी भी प्राइवेट चैनल को कुछ भी दिखाने का अधिकार है स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के नाम पर ?मीडिया में संपादक का कितना ओर कैसा रोल है ..मीडिया द्वारा गठित रेगुलेटरी औथोरटी क्या कार्य प्राणाली में है या नहीं….?.
    कब कहाँ ओर कैसे किस खबर को ,किस तरह से सार्वजनिक किया जाए की वो किसी समाज के लिए हानिकारक न हो…….
    उम्मीद है कोई बहस तो सार्थक छिडे ….कही तो कुछ नतीजे आये …इस बहाने ही सही…

  12. July 20, 2009 at 2:59 pm

    यही होना है लोग सिर्फ ऐसी टिपण्णी करके गुजर जायेगे जो फौरी होगी…..आपने जो तर्क दिए वो इस शो से क्या सम्बन्ध रखते है वो समझ नहीं आया ..हाँ पहले भावनाओ का व्यापारीकरण था …अब निजी जिंदगी का है…अजूबा कुछ नहीं है…किरण बेदी के प्रोग्राम में आकर भी रिश्ते सुधरेगे नहीं …एम् टी वी के रोडिस में वर्जिनिटी पर बहसे खूब हुई….लड़कियों ने माँ बहन की खुलेआम गाली दी .आज कई सफल एम् जे है …वक़्त बदल रहा है .टी वी की दुनिया भी …चैनल भी बाज़ार का ही हिस्सा है .जैसे यूरोप ओर दूसरे देशो में कुछ सामय के बाद रियल्टी शो का बूम आया .यहाँ ऐसा आना ही है …अभी कई ओर कांसेप्ट आयेगे …जो अभी वहां चल रहे है ..क्या एकता कपूर के सीरयल एक आदर्श सामाज स्थापित कर रहे थे ? इतने सारे चैनल की भीड़ में अब आपको सिर्फ ये तय करना होगा की आपने क्या कब देखना है …क्यूंकि खुशकिस्मती से रिमोट की ताकत आपके हाथ में है ……दिक्कत ये है की भारतीय दर्शक को अब स्टार प्लस ने एक मैच्यूर दर्शक समझ लिया है …कितना है ?ये आने वाला वक़्त बतायेगा .. …..इससे समाज में गंदगी फ़ैल जायेगी …भ्रष्ट हो जाएगा .ये डर जरूर बेकार है .क्यूंकि जो कुछ समाज में है वही इस सीरियल में है ……यहाँ आने वाले लोग इसी समाज का हिस्सा है ..शोहरत का लालच कहिये या पैसे का….वे स्वंय आ रहे है …इससे पूर्व में भी हत्यारे रेपिस्ट किताब लिखते है ओर लाखो की रोयल्टी कमाते है ..क्या कोई रोक पाया है उन्हें ?वैसे मेरा मानना है जिस सच से समाज के स्ट्रक्चर को हानि होती हो उससे झूठ भला …परिवार की तो खैर बात जाने दीजिये ….पर ये मेरा निजी विचार है .ओर मै कोई प्रिचर या समाज सुधारक तो हूँ नहीं…एक वक़्त के बाद हमें उन सचो से परहेज करना पड़ता है जिनसे किसी दूसरे इन्सान या समाज की निजता को हानि पहुँचती हो……पर अब वक़्त बदल रहा है …ओर हम सिर्फ अपना निजी विचार रख सकते है .थोप नहीं सकते ….या ये भी हो सकता है हम आम आदमी को जितना बेवकूफ समझ रहे है वो उतना हो नहीं……मेरी समझ से अगर इस शो के साथ यदि आपति की कुछ बाते है तो वो ये है ….इसका अडल्ट प्रोग्राम घोषित न किया जाना( जैसे स्टार मूवी वाले किसी मूवी को दिखाने से पहले बताते है) इसके प्रमोस का टाइम निश्चित न होना (ऐसे प्रोमो …जिसमे केवल सेक्स रिलेटेड प्रशन ही मैन है जाहिर है क्यों ?)प्रमोस के कंटेंट पर गौर करने की आवश्यकता ….मनोहर कहानियों की तरह न किया जाये इसका रिपीट टेलीकास्ट सुबह के वक़्त भी होना ( कम उम्र के बच्चो के लिए दिन में उपलब्ध )पर इस शो के जरिये अगर कुछ अच्छा होना चाहिए तो शायद एक बहस छिडेगी अश्लीलता की परिभाषा पर ,मसलन क्या अश्लील है ओर क्या नहीं ?चुम्बन ओर बलात्कार की खबरे कैसे ओर क्यूकर दिखाई जाए ?क्या किसी भी प्राइवेट चैनल को कुछ भी दिखाने का अधिकार है स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के नाम पर ?मीडिया में संपादक का कितना ओर कैसा रोल है ..मीडिया द्वारा गठित रेगुलेटरी औथोरटी क्या कार्य प्राणाली में है या नहीं….?.कब कहाँ ओर कैसे किस खबर को ,किस तरह से सार्वजनिक किया जाए की वो किसी समाज के लिए हानिकारक न हो…….उम्मीद है कोई बहस तो सार्थक छिडे ….कही तो कुछ नतीजे आये …इस बहाने ही सही…

  13. विवेक सिंह said,

    July 20, 2009 at 3:00 pm

    आप महज ब्लॉगिंग नहीं कर रहे समाज में एक क्रान्ति लाने का सद्प्रयास कर रहे हैं . आपके परिश्रम को सलाम !

  14. July 20, 2009 at 3:00 pm

    आप महज ब्लॉगिंग नहीं कर रहे समाज में एक क्रान्ति लाने का सद्प्रयास कर रहे हैं . आपके परिश्रम को सलाम !

  15. डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said,

    July 20, 2009 at 3:42 pm

    भइया जी, श्लील अश्लील की परिभाषा बड़ी ही विचित्र है। रही बात मानसिकता की तो इस पर आप अब कुछ नहीं कर सकते हैं। हम लोग तो वही देख रहे हैं जो हम देखना चाहते हैं, इसमें कार्यक्रमों का क्य दोष? (यही तो कुतर्क किया जाता है)
    चलिये इज्जत उनकी वे उतरवा रहे हैं, आप समझायेंगे तो कहा जायेगा कि संस्कृति के ठेकेदार खड़े हो रहे हैं।

  16. July 20, 2009 at 3:42 pm

    भइया जी, श्लील अश्लील की परिभाषा बड़ी ही विचित्र है। रही बात मानसिकता की तो इस पर आप अब कुछ नहीं कर सकते हैं। हम लोग तो वही देख रहे हैं जो हम देखना चाहते हैं, इसमें कार्यक्रमों का क्य दोष? (यही तो कुतर्क किया जाता है) चलिये इज्जत उनकी वे उतरवा रहे हैं, आप समझायेंगे तो कहा जायेगा कि संस्कृति के ठेकेदार खड़े हो रहे हैं।

  17. वाणी गीत said,

    July 21, 2009 at 2:15 am

    टीवी चैनल्स के द्वारा पेश किये जा रहे ऐसे कार्यक्रमों और विज्ञापनों पर बहस जारी रहे …साधुवाद!!

  18. July 21, 2009 at 2:15 am

    टीवी चैनल्स के द्वारा पेश किये जा रहे ऐसे कार्यक्रमों और विज्ञापनों पर बहस जारी रहे …साधुवाद!!

  19. कुश said,

    July 21, 2009 at 4:09 am

    टी आर पी के भूखे चैनल की टी आर पी आप बढा रहे है.. मैंने अभी तक इसका पहला एपिसोड देखा है.. मोमेंट ऑफ़ ट्रुथ पहले भी देख चूका हूँ.. मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है.. मैं सच का सामना नहीं देखता.. ये मेरे ऊपर है मैं क्या देखना चाहता हूँ और क्या नहीं.. जबरदस्ती मुझे कोई सच का सामना नहीं दिखा सकता.. इन्टरनेट पर गालिया सरे आम आ रही है.. ब्लोग्स को भी परिवारों द्वारा ही पढ़ा जाता है.. किस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल होता है यहाँ?
    आपकी पिछली पोस्ट पर पंकज बेंगाणी जी की टिपण्णी बिलकुल सही है..

  20. कुश said,

    July 21, 2009 at 4:09 am

    टी आर पी के भूखे चैनल की टी आर पी आप बढा रहे है.. मैंने अभी तक इसका पहला एपिसोड देखा है.. मोमेंट ऑफ़ ट्रुथ पहले भी देख चूका हूँ.. मुझे कोई प्रोब्लम नहीं है.. मैं सच का सामना नहीं देखता.. ये मेरे ऊपर है मैं क्या देखना चाहता हूँ और क्या नहीं.. जबरदस्ती मुझे कोई सच का सामना नहीं दिखा सकता.. इन्टरनेट पर गालिया सरे आम आ रही है.. ब्लोग्स को भी परिवारों द्वारा ही पढ़ा जाता है.. किस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल होता है यहाँ?आपकी पिछली पोस्ट पर पंकज बेंगाणी जी की टिपण्णी बिलकुल सही है..

  21. संजय बेंगाणी said,

    July 21, 2009 at 4:32 am

    काफी तर्कसंगत लिखा है इसलिए लिख देने के लिए टिप्पणी लिखना सही नहीं है. आपने दुसरे पहलू को सही सही उजागर किया है.

    वैसे सच का सामना करने के लिए अब प्रतियोगी मिलने बन्द हो गए है, निर्माता को चिंता हो रही है 🙂

  22. July 21, 2009 at 4:32 am

    काफी तर्कसंगत लिखा है इसलिए लिख देने के लिए टिप्पणी लिखना सही नहीं है. आपने दुसरे पहलू को सही सही उजागर किया है. वैसे सच का सामना करने के लिए अब प्रतियोगी मिलने बन्द हो गए है, निर्माता को चिंता हो रही है 🙂

  23. बी एस पाबला said,

    July 21, 2009 at 5:22 am

    अफसोस यह भी है कि हमने कई पश्चिमी अनुकरण किए हैं किन्तु वहाँ जैसा एक भी ऐसा सामाजिक 'प्रेशर ग्रुप' नहीं बना सके हैं, जो सरकार को नीतियाँ बदलने पर मजबूर करे।

    जो ग्रुप दबाव डाल सकता है वह मात्र अपने व्यव्सायिक लाभ को ध्यान में रख कर काम करता है।

    अनुकरण अच्छी बातों का भी होता है।

  24. July 21, 2009 at 5:22 am

    अफसोस यह भी है कि हमने कई पश्चिमी अनुकरण किए हैं किन्तु वहाँ जैसा एक भी ऐसा सामाजिक 'प्रेशर ग्रुप' नहीं बना सके हैं, जो सरकार को नीतियाँ बदलने पर मजबूर करे। जो ग्रुप दबाव डाल सकता है वह मात्र अपने व्यव्सायिक लाभ को ध्यान में रख कर काम करता है।अनुकरण अच्छी बातों का भी होता है।

  25. Dikshit Ajay K said,

    July 21, 2009 at 5:46 am

    Ek sakaratmak bahas kee shuruat. Badhai. Par afsos is saaree bahas ko NAKKAR KHANE ME TUTI se adhik kuchh nahin kaha ja sakta. ye ant heen bahas bahas kahan tak jai gee ye dekhna hai. Vaise natija sab ko maaloom hai – DHANK KE TEEN PAT.

  26. July 21, 2009 at 5:46 am

    Ek sakaratmak bahas kee shuruat. Badhai. Par afsos is saaree bahas ko NAKKAR KHANE ME TUTI se adhik kuchh nahin kaha ja sakta. ye ant heen bahas bahas kahan tak jai gee ye dekhna hai. Vaise natija sab ko maaloom hai – DHANK KE TEEN PAT.

  27. रचना said,

    July 21, 2009 at 6:16 am

    मैने अपनी १४ साल की भांजी से पूछा बेटा सच
    का सामना प्रोग्राम देखती हो क्या , कैसा लगता
    हैं जवाब मिला मौसी मै ऐसे LS प्रोग्राम नहीं
    देखती आज की जनरेशन ज्यादा परिपक्व हैं .

  28. रचना said,

    July 21, 2009 at 6:16 am

    मैने अपनी १४ साल की भांजी से पूछा बेटा सचका सामना प्रोग्राम देखती हो क्या , कैसा लगताहैं जवाब मिला मौसी मै ऐसे LS प्रोग्राम नहीं देखती आज की जनरेशन ज्यादा परिपक्व हैं .

  29. cmpershad said,

    July 21, 2009 at 6:21 am

    जब आप अपने घर का दरवाज़ा खुला रखते हैं तो चोर को यह अधिकार दे देते हैं कि चोरी करें। या तो आप सावधानी बरतें या परिणाम भोगें। यही होता है जब लालच में सोना दुगना करने वाला आप को ठगता है या……. इसीलिए तो कहा है_ जागो ग्राहक जागो॥

  30. cmpershad said,

    July 21, 2009 at 6:21 am

    जब आप अपने घर का दरवाज़ा खुला रखते हैं तो चोर को यह अधिकार दे देते हैं कि चोरी करें। या तो आप सावधानी बरतें या परिणाम भोगें। यही होता है जब लालच में सोना दुगना करने वाला आप को ठगता है या……. इसीलिए तो कहा है_ जागो ग्राहक जागो॥

  31. बेरोजगार said,

    July 21, 2009 at 6:40 am

    सुरेश जी ये दुनिया बड़ी विचित्र है . अश्लील और श्लील की सीमाएं हम तय नही कर सकते. जब हमारे द्वारा किये गए गलत कार्य निजता की सीमाएं लाँघ कर सार्वजनिक होते है तो वो अश्लील और घिनौने लगते हैं. प्रकृति अपने आप में कितनी अश्लील है की वो हमें नंगा पैदा करती है. हमारे उन अंगों का निर्माण करती है, जिन्हें हम गन्दा और अश्लील कहतें है. पशु जब मैथुन करतें है तो हमें सहज लगता है. बस यदि गन्दगी है तो कही हमारे दिमागों में है.
    इस कार्यक्रम की जो गलत बात है वो ये है की ये आदमी के लालच को जगा कर सच बोलने के लिए प्रेरित करता है और आदमी उस वक्त अपने रिश्तों और स्वत्व से ज्यादा अहमियत पैसों को देता है .लालच के आधार पर सच बोलना हिम्मत का काम नहीं हो सकता. कुछ पागल आपके सामने आ कर नंगे नाचने लग जाएँ तो आँख बंद करने या फेरने के सिवा क्या कर सकते हैं ?

  32. July 21, 2009 at 6:40 am

    सुरेश जी ये दुनिया बड़ी विचित्र है . अश्लील और श्लील की सीमाएं हम तय नही कर सकते. जब हमारे द्वारा किये गए गलत कार्य निजता की सीमाएं लाँघ कर सार्वजनिक होते है तो वो अश्लील और घिनौने लगते हैं. प्रकृति अपने आप में कितनी अश्लील है की वो हमें नंगा पैदा करती है. हमारे उन अंगों का निर्माण करती है, जिन्हें हम गन्दा और अश्लील कहतें है. पशु जब मैथुन करतें है तो हमें सहज लगता है. बस यदि गन्दगी है तो कही हमारे दिमागों में है. इस कार्यक्रम की जो गलत बात है वो ये है की ये आदमी के लालच को जगा कर सच बोलने के लिए प्रेरित करता है और आदमी उस वक्त अपने रिश्तों और स्वत्व से ज्यादा अहमियत पैसों को देता है .लालच के आधार पर सच बोलना हिम्मत का काम नहीं हो सकता. कुछ पागल आपके सामने आ कर नंगे नाचने लग जाएँ तो आँख बंद करने या फेरने के सिवा क्या कर सकते हैं ?

  33. khursheed said,

    July 21, 2009 at 7:00 am

    Well said.

  34. khursheed said,

    July 21, 2009 at 7:00 am

    Well said.

  35. Suresh Chiplunkar said,

    July 21, 2009 at 8:23 am

    डॉ अनुराग के अलावा अभी तक चैनलों हेतु सेंसर अथवा नीति अथवा लगाम सम्बन्धी कोई टिप्पणी अभी तक नहीं आई है, जबकि पोस्ट का मूल विचार यही था कि इसमें शामिल होने वाली जनता की बात छोड़ भी दें तो इस दिशा में कोई बहस हो कि क्या चैनलों की कोई सामाजिक जिम्मेदारी नहीं है? नहीं है तो क्यों नहीं है और यदि है तो फ़िर सरकार की रेगुलरिटी संस्थायें क्या कर रही हैं? मुम्बई हमलों के देशद्रोही कवरेज के बाद भी क्या अब तक मीडिया ने कोई सबक नहीं सीखा? आदि… इन मुद्दों पर भी गौर करें…। कार्यक्रम घटिया है और इसमें शामिल लोग लालची और नंगे हैं यह अलग से सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है, इस बहस का फ़ोकस उधर से हटाकर सामाजिक दशा-दिशा, सरकार के रोल और भारतीय समाज पर पड़ने वाले प्रभावों पर हो तो बहुत अच्छा…

  36. July 21, 2009 at 8:23 am

    डॉ अनुराग के अलावा अभी तक चैनलों हेतु सेंसर अथवा नीति अथवा लगाम सम्बन्धी कोई टिप्पणी अभी तक नहीं आई है, जबकि पोस्ट का मूल विचार यही था कि इसमें शामिल होने वाली जनता की बात छोड़ भी दें तो इस दिशा में कोई बहस हो कि क्या चैनलों की कोई सामाजिक जिम्मेदारी नहीं है? नहीं है तो क्यों नहीं है और यदि है तो फ़िर सरकार की रेगुलरिटी संस्थायें क्या कर रही हैं? मुम्बई हमलों के देशद्रोही कवरेज के बाद भी क्या अब तक मीडिया ने कोई सबक नहीं सीखा? आदि… इन मुद्दों पर भी गौर करें…। कार्यक्रम घटिया है और इसमें शामिल लोग लालची और नंगे हैं यह अलग से सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है, इस बहस का फ़ोकस उधर से हटाकर सामाजिक दशा-दिशा, सरकार के रोल और भारतीय समाज पर पड़ने वाले प्रभावों पर हो तो बहुत अच्छा…

  37. Sanjay said,

    July 21, 2009 at 8:39 am

    Dear Suresh,
    I thank u for ur crystal-clear views on this problem. There has to be some full stop somewhere.
    If u c the condition of news channels , it is worse than entertainment channels.Let us not forget that when licences were issued to news channels then everyone talked about having a BBC like set up in Hindi . Just compare our news to BBC. S H A M E.

  38. Sanjay said,

    July 21, 2009 at 8:39 am

    Dear Suresh, I thank u for ur crystal-clear views on this problem. There has to be some full stop somewhere. If u c the condition of news channels , it is worse than entertainment channels.Let us not forget that when licences were issued to news channels then everyone talked about having a BBC like set up in Hindi . Just compare our news to BBC. S H A M E.

  39. Sanjay said,

    July 21, 2009 at 8:42 am

    THIS IS THE BIGGEST ISSUE FACED BY OUR SOCIETY. DEVIL HAS ENTERED EVERY DRAWING ROOM . LET US TAME IT BEFORE IT EATS OUR FAMILIES !

  40. Sanjay said,

    July 21, 2009 at 8:42 am

    THIS IS THE BIGGEST ISSUE FACED BY OUR SOCIETY. DEVIL HAS ENTERED EVERY DRAWING ROOM . LET US TAME IT BEFORE IT EATS OUR FAMILIES !

  41. Dipti said,

    July 21, 2009 at 10:01 am

    सही है कि शो में बेहूदें और निजी सवाल जिनसे घर टूटे नहीं पूछे जाने चाहिए। लेकिन, अगर ऐसा न हो तो शो को टीआरपी कैसे मिलेगी। लेकिन, एक शो से ही सारा सामाजिक पतन होगा ये डर कुछ अतिश्योक्ति-सा लगा रहा है। आप इतनी चिंता न करें एकता कपूर के घर तोड़ू सीरियल आज सबसे नीचे है टीआरपी में। दर्शक पहले से ज़्यादा समझदार हो चुका हैं।

  42. Dipti said,

    July 21, 2009 at 10:01 am

    सही है कि शो में बेहूदें और निजी सवाल जिनसे घर टूटे नहीं पूछे जाने चाहिए। लेकिन, अगर ऐसा न हो तो शो को टीआरपी कैसे मिलेगी। लेकिन, एक शो से ही सारा सामाजिक पतन होगा ये डर कुछ अतिश्योक्ति-सा लगा रहा है। आप इतनी चिंता न करें एकता कपूर के घर तोड़ू सीरियल आज सबसे नीचे है टीआरपी में। दर्शक पहले से ज़्यादा समझदार हो चुका हैं।

  43. dschauhan said,

    July 21, 2009 at 3:31 pm

    आदरणीय सुरेश जी,
    बहुत ही सराहनीय प्रयास है आपका!
    मेरे घर में यह चैनल प्रसारित नही
    होता है, परन्तु आपने बहुत ही सामाजिक
    मुद्दा उठाया है! आपके इस लेख का बहुत
    ही प्रभाव पड़ने वाला है! हार्दिक बधाई
    एवं शुभकामनाएं!
    देवेन्द्र सिंह चौहान

  44. dschauhan said,

    July 21, 2009 at 3:31 pm

    आदरणीय सुरेश जी,बहुत ही सराहनीय प्रयास है आपका!मेरे घर में यह चैनल प्रसारित नही होता है, परन्तु आपने बहुत ही सामाजिक मुद्दा उठाया है! आपके इस लेख का बहुत ही प्रभाव पड़ने वाला है! हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!देवेन्द्र सिंह चौहान

  45. RAJ said,

    July 21, 2009 at 4:10 pm

    Star Plus and foreign channels should be banned in India for showing these type of Programs.

    Pls Bycott these channels….

  46. RAJ said,

    July 21, 2009 at 4:10 pm

    Star Plus and foreign channels should be banned in India for showing these type of Programs.Pls Bycott these channels….

  47. venus kesari said,

    July 21, 2009 at 7:10 pm

    आपकी आजकी पोस्ट ने तो हिला कर रख दिया
    आपने कुछ ऐसे तथ्य बताये जो वास्तव में चौकंने वाले हैं
    जनजाग्रति फैलाने के लिए धन्यवाद
    वीनस केसरी

  48. venus kesari said,

    July 21, 2009 at 7:10 pm

    आपकी आजकी पोस्ट ने तो हिला कर रख दिया आपने कुछ ऐसे तथ्य बताये जो वास्तव में चौकंने वाले हैंजनजाग्रति फैलाने के लिए धन्यवाद वीनस केसरी

  49. Rakesh Singh - राकेश सिंह said,

    July 21, 2009 at 9:53 pm

    आपके विचार से सहमत हूँ | ऐसे चेनल या भद्दी हरकत को बर्दास्त नहीं किया जाना चाहिए | सुरेश जी आप ही बताइए क्या करें हमलोग ? क्या आपको लगता है की सुचना प्रसारण मंत्रालय कुछ कारवाही करेगी इसपे ? चलिए मान भी लिया की इस शो को बंद कर दिया लेकिन इससे क्या, चेनल वाले दुसरे नाम से कुछ और इसी तरह का ले आयेंगे | देखिये जब तक ऐसी हरकतों पर चेनल वाले को कडा दंड नहीं दिया जाएगा कुछ बात नहीं बनने वाली | और आप भी जानते हैं की कडा दंड की बात करना कम से कम इस सरकार से तो संभव नहीं है |

    रह-सह कर एक ही कारगर उपाय हमारे पास है की ऐसे चेनलों का बहिस्कार करें | वैसे भी सायद ही कोई अच्छा प्रोग्राम इनदिनों टीवी पे आता है | सभी तो बस थोक के भाव मैं सेक्स और वेस्टर्न कूड़ा-करकट परोस रहे हैं | किन्तु शायद एक बात आप लिखना भूल गए जहाँ पे अभद्रता होती है वैसे जगहों से संस्कारित घर की लड़कियां और लड़को नहीं जाती |

    चेनल के गन्दी हरकत के खिलाफ अवियाँ जारी रहना चाहिए, जो की आप कर ही रहे है और हम आपका समर्थन करते हैं | एक गुजारिश है कि : जब तक की ये लोग सुधर ना जाएँ क्यों ना हम ही 'EDIT BOX' देखना कम कर दें ?

  50. July 21, 2009 at 9:53 pm

    आपके विचार से सहमत हूँ | ऐसे चेनल या भद्दी हरकत को बर्दास्त नहीं किया जाना चाहिए | सुरेश जी आप ही बताइए क्या करें हमलोग ? क्या आपको लगता है की सुचना प्रसारण मंत्रालय कुछ कारवाही करेगी इसपे ? चलिए मान भी लिया की इस शो को बंद कर दिया लेकिन इससे क्या, चेनल वाले दुसरे नाम से कुछ और इसी तरह का ले आयेंगे | देखिये जब तक ऐसी हरकतों पर चेनल वाले को कडा दंड नहीं दिया जाएगा कुछ बात नहीं बनने वाली | और आप भी जानते हैं की कडा दंड की बात करना कम से कम इस सरकार से तो संभव नहीं है | रह-सह कर एक ही कारगर उपाय हमारे पास है की ऐसे चेनलों का बहिस्कार करें | वैसे भी सायद ही कोई अच्छा प्रोग्राम इनदिनों टीवी पे आता है | सभी तो बस थोक के भाव मैं सेक्स और वेस्टर्न कूड़ा-करकट परोस रहे हैं | किन्तु शायद एक बात आप लिखना भूल गए जहाँ पे अभद्रता होती है वैसे जगहों से संस्कारित घर की लड़कियां और लड़को नहीं जाती | चेनल के गन्दी हरकत के खिलाफ अवियाँ जारी रहना चाहिए, जो की आप कर ही रहे है और हम आपका समर्थन करते हैं | एक गुजारिश है कि : जब तक की ये लोग सुधर ना जाएँ क्यों ना हम ही 'EDIT BOX' देखना कम कर दें ?

  51. ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said,

    July 22, 2009 at 12:21 pm

    हमें लेखन का सन्दर्भ नहीं पता – कोई टीवी सीरियल लगता है।
    पर तर्क आपके सशक्त हैं!

  52. July 22, 2009 at 12:21 pm

    हमें लेखन का सन्दर्भ नहीं पता – कोई टीवी सीरियल लगता है। पर तर्क आपके सशक्त हैं!

  53. Common Hindu said,

    July 22, 2009 at 4:32 pm

    Hello Blogger Friend,

    Your excellent post has been back-linked in
    http://hinduonline.blogspot.com/

    – a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu
    – Hindu Online.

    very well said by
    बी एस पाबला

    "अफसोस यह भी है कि हमने कई पश्चिमी अनुकरण किए हैं किन्तु वहाँ जैसा एक भी ऐसा सामाजिक 'प्रेशर ग्रुप' नहीं बना सके हैं, जो सरकार को नीतियाँ बदलने पर मजबूर करे।

    अनुकरण अच्छी बातों का भी होता है।"

    i personally think
    that govt. should not
    allow adult content
    on TV before 12pm
    and there can be
    seperate blockable
    paid channel
    for dishing out
    all the dirt,
    sex, violance
    and reality TV
    to viewers

    at present
    what is telecasted
    by news channels
    in the name of
    article 377
    or by entertainment
    channels in the name
    of reality TV
    is simply not
    tolrable in a
    family of kids

    govt should penalise
    such channels
    to set an example

  54. Common Hindu said,

    July 22, 2009 at 4:32 pm

    Hello Blogger Friend,Your excellent post has been back-linked inhttp://hinduonline.blogspot.com/– a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu- Hindu Online.very well said by बी एस पाबला "अफसोस यह भी है कि हमने कई पश्चिमी अनुकरण किए हैं किन्तु वहाँ जैसा एक भी ऐसा सामाजिक 'प्रेशर ग्रुप' नहीं बना सके हैं, जो सरकार को नीतियाँ बदलने पर मजबूर करे। अनुकरण अच्छी बातों का भी होता है।"i personally thinkthat govt. should notallow adult contenton TV before 12pmand there can be seperate blockablepaid channelfor dishing out all the dirt, sex, violance and reality TV to viewersat present what is telecastedby news channels in the name of article 377or by entertainment channels in the name of reality TVis simply not tolrable in a family of kidsgovt should penalisesuch channelsto set an example

  55. Anil Pusadkar said,

    July 23, 2009 at 5:13 am

    बहुत बढिया भाऊ।इस अभियान मे मै भी आपके साथ हूं।आपके इस सद्प्रयास को सलाम करता हूं।

  56. July 23, 2009 at 5:13 am

    बहुत बढिया भाऊ।इस अभियान मे मै भी आपके साथ हूं।आपके इस सद्प्रयास को सलाम करता हूं।

  57. कृष्ण मोहन मिश्र said,

    August 17, 2009 at 5:48 pm

    सुरेश जी आप तो बेलचा लेकर जुटे हुये हैं कीचड़ साफ करने में ।

  58. August 17, 2009 at 5:48 pm

    सुरेश जी आप तो बेलचा लेकर जुटे हुये हैं कीचड़ साफ करने में ।


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