>जीवन की उलझी राहों में ………

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ख़ुद से दूर रहना चाहता हूँ ,

अपने हीं अक्स से घबराता हूँ ,

प्यार किसी से करता हूँ ,

क्या प्यार उसी से करता हूँ ?

अपने अन्दर के विद्रूप से डरता हूँ ।

जीवन की उलझी राहों में ,

ख़ुद के सवालों से घिरता हूँ ,

अपनी सोच , अपने आदर्शों के

पालन से जी चुराता हूँ ,

अपने अन्दर के विद्रूप से डरता हूँ । ।

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