>ज़रा देखिये तो इन बेशर्म ब्लोग्गरों को कहीं भी घुसे आते हैं ……..

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ब्लॉगर साथियों को नमस्कार ! पिछले कई दिनों से अंतरजाल पर यत्र-तत्र भटकते हुए कई सज्जनों की हरकतों से आजिज हो कर आज शिकायत कर रहा हूँ । कुछ लोग ब्लॉग जैसे समाजोन्मुखी मंच की महत्ता को नही समझ पा रहे हैं । एक ओर ब्लॉग्गिंग को लोकतंत्र के भावी स्तंभों की कड़ी में गिना जाने लगा है वहीँ दूसरी तरफ़ हम बेहद लापरवाह होते जा रहे हैं । हिन्दी चिठ्ठों की भरमार हो गई है । गली -गली खुल रहे ट्यूशन सेंटर की भांति हर दिन १०० के करीब चिठ्ठों का पदार्पण होना खुशी की बात है । पर कई लोग ब्लॉग्गिंग को महज निजी स्वार्थों की पूर्ति के रूप में देख रहे हैं । पोस्ट और कमेन्ट की कहानी पर अब तक कई लोग ऐतराज जता चुके हैं । लोग किसी के भी पोस्ट पर आते हैं पढ़े अच्छा है , अति सुंदर रचना , बधाई हो , कभी इधर भी आयें , मेरा ब्लॉग पता आदि लिख कर अपना पता दे जाते हैं । उदाहरण के लिए इस लिंक पर देखें http://gap-shapkakona.blogspot.com/2009/07/blog-post_29.html

{नोट :- इसे अन्यथा न लिया जाए हमारी किसी से निजी रंजिश नही है }

बार-बार लिंक देकर अपनी पाठक संख्या बढ़ाने को प्रयासरत मूढ़ लोग भूल जाते हैं कि बाँध कर भक्ति नहीं करवाई जा सकती !बात यही नहीं रुकती। इनकी जमात के कई लोग निजी दुश्मनी निकालने , धर्म -पंथ-विचारधारा को खुले तौर पर प्रचारित करने , आदि में लगे हुए हैं । धार्मिक भावनाओं को सीढ़ी बना कर खूब भीड़ बटोरी जा रही है । जरा निचे दिए गए लिंक पर देखें किस तरह एक बरगलाया हुआ इंसान अपनी उर्जा बेकार कि उलजुलूल बातों में नष्ट कर रहा है । किस प्रकार पूरी दुनिया को एक ही रंग में जबरन रंग डालने कि बौद्धिक कोशिश की जा रही है ! ये तू पूरी दुनिया के समय मानकों को भी केवल अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं ।इनका मानना है कि चुकि दुनिया के सबसे अंतिम समय में आया हुआ इनका धर्म है अतः लेटेस्ट होने के कारण सभी को उसका अनुयायी हो जाना चाहिए . http://swachchhsandesh.blogspot.com/2009/07/bhagwan-shiv-esteblished-in-kaaba.html

देखिये एक अन्य लेख में किस तरह मिथकों के आधार पर बहुपत्नी प्रथा जैसी अप्रासंगिक बातों का समर्थन कर रहे है …http://swachchhsandesh.blogspot.com/2009/07/why-more-then-one-wives-in-islam.html

इस तरह के और भी कई उदाहरण हैं जिन्हें अगली कड़ी में दूंगा तब तक उनका लिंक इकठ्ठा कर लूँ !

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