>अड़ियल व्यक्ति को जवाब देने का “खांटी” स्टाइल…

>(वैधानिक चेतावनी – इन दोनों किस्सों में पात्र व घटनायें काल्पनिक हैं, इनका किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है, हिन्दी ब्लॉग जगत से तो बिलकुल भी नहीं है…)

किस्सा क्रमांक 1

एक बार एक बैंक की शाखा में एक आदमी आया और चेक जमा करते हुए काउंटर पर बैठे बैंककर्मी से पूछा, क्यों भाई साहब यह एक चेक मैं आज डाल रहा हूँ, कब तक क्लियर होगा? कर्मचारी ने जवाब दिया कि परसों तक होगा। उस व्यक्ति ने कहा कि भाई साहब यह चेक तो आपकी बैंक के सामने वाली दूसरी बैंक का ही है… कर्मचारी ने कहा कि फ़िर भी तीसरे दिन ही आपके खाते में आयेगा। वह व्यक्ति लगभग अड़ते हुए बोला कि “भाई साहब, जब दिये गये चेक की बैंक शाखा सड़क के उस पार ही है तो इतना समय क्यों लगेगा, चेक तो कल ही क्लियर हो जाना चाहिये?” अब बैंककर्मी से नहीं रहा गया, उसने जवाब दिया, भाई साहब ऐसा नहीं होता, जो प्रक्रिया है उसी हिसाब से चलेगा… वह व्यक्ति फ़िर से बोला, लेकिन इतनी देर तो लगना ही नहीं चाहिये…

बैंककर्मी ने सोचा कि अब तो इसे “निपटाना” ही पड़ेगा, वह बोला – मैं आपको समझाता हूँ, मान लीजिये कि आप मर गये, तो आप तुरन्त स्वर्ग नहीं चले जायेंगे… पहले कुछ देर आप भूत बनकर घर के आसपास ही किसी पेड़ पर टंग़े रहेंगे, फ़िर स्वर्ग-नर्क के दरवाजे पर चित्रगुप्त आपके पाप-पुण्य का हिसाब देखेंगे, यमराज से सलाह लेंगे और उसके बाद ही आप स्वर्ग या नर्क में घुस पायेंगे, है ना? तो जो प्रक्रियागत समय लगना है वह तो लगेगा ही…। नौ औरतें मिलकर एक महीने में बच्चा पैदा नहीं कर सकतीं, नौ माह तो लगेंगे ही…।

यह जवाब आजीवन उस अड़ियल व्यक्ति को याद रहेगा और फ़िर दोबारा कभी भी, कहीं भी वह “जवाब दो, जल्दी करो” की रट नहीं लगायेगा…
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किस्सा क्रमांक 2
एक बार एक व्यक्ति रेलयात्रा में लम्बे सफ़र पर जा रहा था, साथ में एक-दो किताबें थीं और उन्हें पढ़ते हुए वह चुपचाप अपना सफ़र तय कर रहा था। एक स्टेशन पर एक मुस्लिम यात्री भी चढ़ा और बराबर वाली सीट पर आकर बैठा। कुछ देर तो सफ़र शान्ति से कटा, लेकिन फ़िर मुस्लिम भाई ने उस पहले व्यक्ति से कहा कि आप बातें क्यों नहीं करते हैं, इतना लम्बा सफ़र है बातें करते-करते कट जायेगा। उस व्यक्ति ने कहा कि मुझे फ़िजूल की बातें करने में मजा नहीं आता, इसमें समय भी बरबाद होता है और बहसबाजी में कई बार मूड भी खराब हो जाता है। फ़िर भी मुस्लिम व्यक्ति बोला कि हाँ बात तो सही है, लेकिन टाइम पास करने के लिये हमें कुछ न कुछ तो करना ही होगा। पहले व्यक्ति ने पूछा कि आप क्या चाहते हैं कि हमें किस विषय पर चर्चा करनी चाहिये? मुस्लिम व्यक्ति बोला कि वैसे तो काफ़ी विषय हैं, लेकिन मेरा पसन्दीदा विषय है धर्मग्रन्थों का अध्ययन, तो क्यों न हम वेदों और कुरान पर चर्चा और बहस करें…। अब तक वह पहला व्यक्ति उसे टालने की नाकाम कोशिश कर चुका था, अब उसका धैर्य जवाब दे गया, उसने कहा, ठीक है चलो हम वेदों और कुरान पर बहस करें, लेकिन पहले आपका ज्ञान परखने के लिये मैं एक सवाल पूछता हूँ, यदि आप उसका सही-सही जवाब दे सकें तब हम वेद-कुरान जैसे मुश्किल विषय पर बातें करेंगे…। मुस्लिम भाई ने कहा कि “ठीक है, पूछिये।

पहले व्यक्ति ने प्रश्न किया – एक बात बताईये, गाय-भैंस घास खाती है और गोबर करती है, उसी प्रकार हिरन और बकरी भी घास खाते हैं लेकिन वे छोटी-छोटी लेंडियाँ करते हैं, जबकि गधे-घोड़े भी घास खाते हैं तथा वे रेशेदार लीद निकालते हैं, ऐसा क्यों?

मुस्लिम व्यक्ति भौंचक हुआ और गड़बड़ाते हुए बोला- इस बारे में तो बताना मुश्किल है कि ऐसा क्यों होता है।

तब पहले व्यक्ति ने उसे कहा कि – भाई, जब आप जीवन की सबसे मूलभूत बात यानी “गू” के बारे में ही ठीक से नहीं जानते हैं, तब मैं आपसे वेद-कुरान पर क्या बहस करूं? और वह अपनी किताब निकालकर पढ़ने लगा।

इसके बाद उसका बाकी का सफ़र शान्ति से कटा।

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