बचपन की शरारतों की याद दिलाता एक अफ़लातून गीत… Kitab, Gulzar, Masterji

हिन्दी फ़िल्मों में बाल मानसिकता और बच्चों की समस्याओं से सम्बन्धित फ़िल्में कम ही बनी हैं। बूट पॉलिश से लेकर मासूम और मिस्टर इंडिया से होते हुए फ़िलहाल बच्चों की फ़िल्म के नाम पर कूड़ा ही परोसा जा रहा है जो बच्चों के मन की बात समझने की बजाय उन्हें “समय से पहले बड़ा करने” में समय व्यर्थ कर रहे हैं। बाल मन को समझने, उनके मुख से निकलने वाले शब्दों को पकड़ने और नये अर्थ गढ़ने में सबसे माहिर हैं सदाबहार गीतकार गुलज़ार साहब। “लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा, घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा” तो अपने आप में एक “लीजेण्ड” गाना है ही, इसी के साथ “जंगल-जंगल बात चली है पता चला है, चड्डी पहन के फ़ूल खिला है…” जैसे गीत भी गुलज़ार की पकड़ को दर्शाते हैं। हालांकि हिन्दी फ़िल्मों में विशुद्ध बालगीत कम ही लिखे गये हैं, फ़िर भी मेरी पसन्द का एक गीत यहाँ पेश कर रहा हूँ… आगे पढ़ने के लिये क्लिक करें… गीतों की महफ़िल पर…(http://mahaphil.blogspot.com/)

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16 Comments

  1. अर्शिया अली said,

    August 12, 2009 at 8:59 am

    Hamen bhi bachpan yaad aa gayaa.
    { Treasurer-S, T }

  2. August 12, 2009 at 8:59 am

    Hamen bhi bachpan yaad aa gayaa.{ Treasurer-S, T }

  3. smart said,

    August 12, 2009 at 1:45 pm

    "पप्पू कांट डांस साला" जैसे गीतों से तो लाख दर्जे अच्छे और मासूम हैं ये गीत.सामान्य शब्दों से रचा गया एक असामान्य गीत है ये.
    एक बात और मैं यहाँ कहना चाहूँगा ,ऋचा से सावधान रहना, ये लड़की नहीं लड़का लग रहा है मुझे तो.
    सभी ब्लोगरों से इस मामले में राय मांगता हूँ.

  4. smart said,

    August 12, 2009 at 1:45 pm

    "पप्पू कांट डांस साला" जैसे गीतों से तो लाख दर्जे अच्छे और मासूम हैं ये गीत.सामान्य शब्दों से रचा गया एक असामान्य गीत है ये. एक बात और मैं यहाँ कहना चाहूँगा ,ऋचा से सावधान रहना, ये लड़की नहीं लड़का लग रहा है मुझे तो.सभी ब्लोगरों से इस मामले में राय मांगता हूँ.

  5. काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said,

    August 12, 2009 at 5:59 pm

    पहले के गानों की बात ही कुच और होती थी….एक मतलब, एक एहसास होता था…आजकल तो बस…..क्या कहें अब

  6. August 12, 2009 at 5:59 pm

    पहले के गानों की बात ही कुच और होती थी….एक मतलब, एक एहसास होता था…आजकल तो बस…..क्या कहें अब

  7. वाणी गीत said,

    August 13, 2009 at 12:00 am

    फ़िल्मी गीतों के प्रति आपके रुझान को देखकर यकीन ही नहीं होता की ये सुरेशजी वही हैं जो कहते है…"हा हा हा हा, वाह वाह नटखट बच्चे… मुझे कविता की समझ नहीं है और मैं कभी कविता वाले ब्लॉग पर झाँकता तक नहीं…।"

  8. August 13, 2009 at 12:00 am

    फ़िल्मी गीतों के प्रति आपके रुझान को देखकर यकीन ही नहीं होता की ये सुरेशजी वही हैं जो कहते है…"हा हा हा हा, वाह वाह नटखट बच्चे… मुझे कविता की समझ नहीं है और मैं कभी कविता वाले ब्लॉग पर झाँकता तक नहीं…।"

  9. वाणी गीत said,

    August 13, 2009 at 2:27 am

    टिपण्णी में लिंक देना भूल गयी… http://natkhatbachha.blogspot.com/2009/07/blog-post_10.html

  10. August 13, 2009 at 2:27 am

    टिपण्णी में लिंक देना भूल गयी… http://natkhatbachha.blogspot.com/2009/07/blog-post_10.html

  11. cmpershad said,

    August 13, 2009 at 5:01 am

    यह सही है कि बच्चों की फिल्में कम बन रही है, परंतु बच्चे हैं कहां जो इन फिल्मों को देखें? हर वर्ष हैदराबाद में इंटरनेशनल चिल्ड्रन फ़िल्म फ़ेस्टिवल होता है पर इस फ़ेस्टिवल से चिल्ड्रन ही नदारत होते है । हर वर्ष विदेशी निर्देशक इसी मुद्दे पर बात करते हैं और चले जाते हैं।

    अब कुछ अच्छी कार्टून फिल्में बन रही हैं पर बच्चे तो पोकिमान ही देखने में व्यस्त हैं:)

  12. cmpershad said,

    August 13, 2009 at 5:01 am

    यह सही है कि बच्चों की फिल्में कम बन रही है, परंतु बच्चे हैं कहां जो इन फिल्मों को देखें? हर वर्ष हैदराबाद में इंटरनेशनल चिल्ड्रन फ़िल्म फ़ेस्टिवल होता है पर इस फ़ेस्टिवल से चिल्ड्रन ही नदारत होते है । हर वर्ष विदेशी निर्देशक इसी मुद्दे पर बात करते हैं और चले जाते हैं। अब कुछ अच्छी कार्टून फिल्में बन रही हैं पर बच्चे तो पोकिमान ही देखने में व्यस्त हैं:)

  13. Rakesh Singh - राकेश सिंह said,

    August 13, 2009 at 3:59 pm

    सम्पूर्णा नन्द सिंह जी लाजवाब लिखते हैं | चाहे उनके गाने हो, फिल्म का निर्देशन, पटकथा लेखन हर जगह उनका कोई जोड़ ही नहीं |

    गच्चा खा गए क्या? अरे ये सम्पूर्णा नन्द सिंह कौन हैं ? अरे भाई गुलजार साहब का वास्तविक नाम है |
    खैर गुलजार साहब ने जितने विविधता भरे गीत लिखे हैं शायद ही कोई और गीतकार उनके सामने ठहरता हो |

    बहुत कम लोगों को पता होगा की गुलजार साहब ने बच्चों के लिए कई कहानियां, कवितायें भी लिखी है |

    सुरेश जी बहुत बहुत धन्यवाद आपने ये गाना ढूंढ़ कर निकाला

  14. August 13, 2009 at 3:59 pm

    सम्पूर्णा नन्द सिंह जी लाजवाब लिखते हैं | चाहे उनके गाने हो, फिल्म का निर्देशन, पटकथा लेखन हर जगह उनका कोई जोड़ ही नहीं | गच्चा खा गए क्या? अरे ये सम्पूर्णा नन्द सिंह कौन हैं ? अरे भाई गुलजार साहब का वास्तविक नाम है | खैर गुलजार साहब ने जितने विविधता भरे गीत लिखे हैं शायद ही कोई और गीतकार उनके सामने ठहरता हो | बहुत कम लोगों को पता होगा की गुलजार साहब ने बच्चों के लिए कई कहानियां, कवितायें भी लिखी है | सुरेश जी बहुत बहुत धन्यवाद आपने ये गाना ढूंढ़ कर निकाला

  15. TUMHARI KHOJ ME said,

    August 16, 2009 at 5:47 pm

    Yes. I agree.

  16. August 16, 2009 at 5:47 pm

    Yes. I agree.


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