>मोहल्ले की करतूतों से इसे ‘संडास’ बोलना उचित होगा !

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अविनाश दास आज कल नए कलमतोडों के मसीहा बने बैठे हैं । नए लोगों में फैली छपास बीमारी का ईलाज जो कर रहे हैं । मतलब नही समझे अब तक ! अरे , मोहल्ले में आज कल सब की मुफ्त एंट्री है । जो चाहे लिखो क्योंकि दास जी तो मोहल्ला लाइव सँभालने में व्यस्त हैं । काफ्फी मश्शकत का काम है तमाम अपने लाल लंगोट वालों का बचाव यही से तो करना है । आज कल आलोक मेहता को गरियाने का काम चल रहा है । इससे भी दो हितों की पूर्ति हो रही है एक तो मोहल्ला लाइव की रेंकिंग बढेगी दूसरा अरुंधती जैसी देशद्रोहियों का बचाव भी हो रहा है । एक खास विचारधारा को प्रमोट किया जा रहा है इसलिए नही किये उसके प्रति समर्पित हैं बल्कि इसी बाज़ार की प्रतियोगिता में इसी वाद का बोलबाला है । किस मीडिया हाउस से कौन निकला गया , किसका प्रमोशन हुआ , किसकी छुट्टी , अलेक्सा रंकिंग में कौन कहाँ है आदि -आदि तमाम रपट मीडिया मंडीके कॉलम से खूब लिखा जा रहा है । लिखे भी क्यों नही मंडी भी इनकी और इस मंडी के दलाल भी ये हीं वैसे अविनाश कोई नया काम नही कर रहे हैं । इससे पहले यशवंत यह कम करते आ रहे हैं । पिछले दिनों अरुंधती को जूते लगने पर इसी भडासी ने कहा था वो अरुंधती को पूजते हैं । अविनाश की साईट पर अलोक मेहता एक आलेख से बिलबिलाये अरुंधती के चाटुकार खूब तिक्तिकाए शब्दों में लिख रहे हैं । बुकर और मग्सेसे अवार्ड की दुहाई देकर अरुंधती की महिमा का गान हो रहा है । “कश्मीर को पकिस्तान को दे देना चाहिए ” , नक्सली गरीबों के लिए लड़ रहे हैं ” ऐसे बयां देकर मीडिया की सुर्खियों में रहने वाली इस देशद्रोहिनी

को मानवाधिकार कार्यकर्त्ता बताने में कोई शर्म नही आती । वैसे तो आज कल रमणिका गुप्ता भी नक्सल प्रभावित क्षेत्र में मानवाधिकार के लिए लड़ रही हैं । एक बात समझ नही आती क्या मानवाधिकार केवल आतंकिओं , नक्सलियों , देशविरोधियों के लिए हीं है ? उन नागरिकों का कुछ नही जो धमाके में मारे जाते हैं , उन किसानों का क्या जो आत्महत्या को विवश हैं ? कभी बुंदेलखंड और विदर्भ के किसानों के अधिकारों की बात कोई नही करता । और जो करते हैं उन्हें कोई नही जानता! क्या मोहल्ले के धुरंधरों को , भड़ासियों को किशोर तिवारी का नाम पता है नही ? होगा कैसे किशोर तिवारी बुकर प्राइज़ विनर नही है न !

ब्लॉग जगत में कुछ लोग भड़ास को पीकदान कहते हैं । अब मोहल्ले की करतूतों से इसे संडास बोलना पड़ेगा ! वैसे हमारे एक साथी ने खुलने की ख़बर के साथ ही मोहल्ला लाइव के बारे में कहा था :-
http://mohallalive.com/2009/05/28/criticism_mohallalive_website/

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