>तृष्णा नशे की

>

ड्रग का तात्पर्य क्या है अगर मेरे शब्दों में देखा गए तो…………
D=DESTRUCTION
R=RECRIMINATION
U=UNSIGHTLY
G=GASTLY
S=SURREPTITIOUS
दृग्स ऐसी नशीली पदार्थ है जो हमारे पुरे शरीर को अपने आधीन कर लेती है. ये हमारे नर्वस सिस्टम पर कुछ ऐसा प्रभाव डालती है जिससे हमें कुछ समय के लिए सुकून का अनुभव तो होता है मगर हमारी पुरी ज़िन्दगी गहरी खाए माँ गिरती चली जाती है जहाँ हमारी चीखे सुनने वाला कोए नही होता है और धेरे धेरे हम इसके इतने जादा आदि हो जाती है की ड्रग नही मिलने पर हम अपना दिमागी संतुलन कहोंय लगते है,आखो के आगे आन्ध्र चने लगता है,हमारे हाथपव हमारे काबू माँ नही होते है.उस वक्त बस यही महसूस होता है की बस कही से थोड़ा सा दुर्ग मिल गए और हम अपनी व्याकुलता शांत कर पाए.नही चाहते हुए भी हम दुग के गुलाब बनते जाते है.हमारी शाररिक संरचना ड्रग के आधीन होती चली जाती है और हम ड्रग अद्दिक्ट बन जाते है.दृग्स की गिनती माँ कुछ बहुत ही खतरनाक ड्रग होते है वो है मरिफुअना,कोकां,अल्कोहल,अम्फेतामिनेटाइपस्तिमुलंत(अतस),ओपिअतेस,वोलातिले सोल्वंट्स…….अज हमारे देश माँ लगभग ७६. मिलियन लोग ड्रग के शिकार है और ड्रग से मरने वाले लोगो की शंख्या प्रति वर्ष . मिलियन है.अज भी पुरे विश्वा माँ १८५ मिलियन लोग ड्रग की चपेट माँ है जिनमे १५ साल सा अधिक वर्ष वाले बच्चो की संख्या अधिक है.सबसे अस्चर्या की बात तो यह है की हमारी युवा पीढी सबसे अधिक ड्रग की चपेट माँ है.सबसे पहले तो ड्रग पद्द्लिंग वाले लोग इन बच्चो को ड्रग की लत लगाते है फ़िर जब ये ड्रग के आदि हो जाते है तो ड्रग का लालच देकर ये इनसे गैर कानूनी काम करवाते है जैसे ड्रग स्मुग्लिंग इत्यादि और वो मासूम बच्चा गुनाहों की खाए माँ गिरता चला जाता है और ड्रग अद्दिक्ट के साथ क्रिमिनल भी बनता चला जाता है.हमारी युवा पीढी ही नही बल्कि के अनुभाबी लोग भी अपनी थकन को दूर करने के लिए ड्रग अद्दिक्ट बन जाते है मगर ये कोए सही तरीका नही है.के बार ज़िन्दगी सा हताश लोग भी जिंदगी को नीरस समझ कर अल्कोहलिक बन जाते है.यह ऐसी मिट्ठी ज़हर है अपने बार इससे चखा की धीरेधीरे आपके दिमाग पर ये हावी होता चला जाता है.के बार जो लड़किया ड्रग का शिकार होती है.उन्हें ड्रग देने के नाम पर या ड्रग हासिल करने के लिए ये कुछ भी करने को तैयार हो जाती है जिसका ये पद्द्लिंग वाले लोग फ़ायदा उठाते है.इनसे अश्लील हरकते कर वाते है..इनके सामने सिर्फ़ ही विकल्प होते है या तो ये सुसाईड कर लेती है या फ़िर सेक्स राक्केट का हिस्सा बन जाती हैऔर बदले माय ड्रग जैसे हैवान के शिकंजे माय कसती चली जाती है.
यदि हम अच्छा और निक भविष चाहते है तो हमें ही हमारी मदद करनी होगी.कोए भी समाज,इंसान या सरकार हमारी मदद नही कर सकती है……हा मगर के ऐसी अल्कोहलिक ग्रुप इन्स्तितुशन चुकी है जो हमें ड्रग चोरने माँ हमारी मदद करती है हमारे आत्मविश्वास को बढाती है हमें उम्मीद की किरण दिखाती है हमें हर प्रक्रिया सा अवगत कराती हैडॉक्टर का कहना है की जब भी हमें ड्रग लेने का मन करे हो हमें वर्क आउट करना चाहिए जैसे स्वीमिंग करना,ट्रेड मिल पर दौरना,स्किप्पिंग करना या कोए भी ऐसा हैवी एक्सेर्सिसे करना जिससे हमें बहुत पसीना आए और हम बुरी तरह से थक गए इससे हमारी दिमाग माँ ड्रग की जो चाहत होती है वो काम हो जाती है और हम ड्रग को नज़र अंदाज़ कर पते है…….ये हम युवा पीढी का भी फ़र्ज़ बनता है की हम स्कूल,कोल्लागे,मॉल,या जगह जगह पर जाकर ड्रग के खिलाफ काम्पैग्न करे लोगो को ड्रग के प्रति जागरूक करे उनकी जानकारी बढाये उनको उन लोगो की कहानी सुनाये जो ड्रग अद्दिक्ट थे मगर अज वो ड्रग से मुक्त है
अज मई भी आपको इक ४१ वार्शिये पुरूष डेविड पर्नेल की कहानी सुनाने रही हु जो कनाडा के निवासी है.ये १३ वर्ष की आयु मई ही ड्रग(मरिफुअना)के शिकार हो गए थे.धेरे धेरे ये इससे भी जादा खतरनाक ड्रग (मठं फेतामिने) के आदि हो गए थे.इन्होने के बार ड्रग चोरने की कोशिश की मगर नही चोर पाए इनके पास उतने पैसे नही हुआ करते थे की वो हर बार ड्रग कह्रिड सके..पैसे के लिए इन्हों ने के शोप्स माँ चोरी की अपने ख़ुद के घर माँ चोरी की,तब भी काम नही बना तो दृग्स भी स्मगल किया..ये पुरी तरह से गुनाहों से घिर चुके थे दोस्तों ने गर्ल फ्रंड यहाँ तक की परिवार वालो भी साथ चोर दिया थाऔर दिन २३ वर्ष की आयु माँ हताश होकर सुसाईड करने की कोशिश की मगर वो बच गएफ़िर इन्होने जेल माँ ही ड्रग आवारे हाउस ज्वाइन किया जो ड्रग चोरने माँ मदद करती है.डेविड ने अपना आत्मविश्वास इतना बढ़ा लिया,अपने एपी को इतना मजबूत कर लिया की अज वो ड्रग सा मुक्त होकर सामान्य ज़िन्दगी जी रहे है,और अज भी डेविड नॉर्थ अमेरिका माय युवा पीढी और ड्रग अद्दिक्ट लोगो को अपनी कहानी सुनकर ड्रग चोरने के लिए प्रोत्साहित कर रहे है…………
माँ भी बस इतना कहना चाहुगी की युवा पीढी अपना आत्मविश्वास,अपनी उम्मीद,अपने हव्स्लय,अपना लक्ष्य,अपने इरादे,अपना व्यक्तित्वा,अपने चरित्र को इतना मजबूत कर लो की कोए भी नापख इरादे इससे हिला तक सके……………..और सिर्फ़ युवा पीढी ही नही वो हर लोग जो नशे के आदि
(SAY NO TO ALCOHAL)

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