दो अफ़ज़ल, मिरज़ के दंगे, महाराष्ट्र सरकार और सेकुलर मीडिया… Miraj Riots Ganesh Mandal Mumbai Secular Media

दो अफ़ज़ल? जी हाँ चौंकिये नहीं, पहला है अफ़ज़ल गुरु और दूसरा शिवाजी द्वारा वध किया गया अफ़ज़ल खान, भले ही इन दोनों अफ़ज़लों में वर्षों का अन्तर हो, लेकिन उनके “फ़ॉलोअर्स” की मानसिकता आज इतने वर्षों के बाद भी वैसी की वैसी है।

हाल ही में सम्पन्न गणेश उत्सव के दौरान मुम्बई में “अफ़ज़ल गुरु और कसाब को फ़ाँसी कब दी जायेगी?” का सवाल उठाते हुए, कुछ झाँकियों और नाटकों में इसका प्रदर्शन किया गया। वैसे तो यह सवाल समूचे देश को मथ रहा है, लेकिन मुम्बईवासियों का दर्द ज़ाहिर है कि सर्वाधिक है, इसलिये गणेशोत्सव में इस प्रकार की झाँकियाँ होना एक आम बात थी, इसमें भला किसी को क्या आपत्ति हो सकती है? लेकिन नहीं साहब, “सेकुलरिज़्म” के झण्डाबरदार और “महारानी की गुलाम” महाराष्ट्र सरकार की वफ़ादार पुलिस ने ठाणे स्थित घनताली लालबाग गणेशोत्सव मण्डल को धारा IPC 149 के तहत एक नोटिस जारी करके पूछा है कि “मुस्लिम भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली अफ़ज़ल गुरु की झाँकियाँ क्यों निकाली गईं?”। ध्यान दीजिये कांग्रेस सरकार कह रही है कि अफ़ज़ल गुरु को फ़ाँसी लगाने की माँग करने का मतलब है मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुँचान।

महाराष्ट्र में चुनाव सिर पर हैं, उदारवादी मुसलमान खुद आगे आकर बतायें कि क्या अफ़ज़ल गुरु को फ़ाँसी देने से उनकी भावनायें आहत होती हैं? यदि नहीं, तो मुस्लिमों को कांग्रेस के इस घिनौने खेल को उजागर करने हेतु आगे आना चाहिये। उपरोक्त गणेश मण्डल ने अपने जवाब में कहा है कि “हमारी झाँकी का उद्देश्य आम जनता को आतंकवाद के खिलाफ़ जागरूक और एकजुट करना है, इसमें साम्प्रदायिकता कहाँ से आ गई? भारत सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बावजूद अफ़ज़ल गुरु की फ़ाँसी में देरी से लोगों में बेचैनी है इसलिये गणेश मण्डल की यह झाँकी कहीं से भी आपत्तिजनक और देशविरोधी नहीं है…”।

यह तो हुई पहले अफ़ज़ल की बात, अब बात करते हैं दूसरे अफ़ज़ल की यानी अफ़ज़ल खान की। कांग्रेस द्वारा देश भर में “सेकुलरिज़्म” का जो खेल खेला जाता है और मुस्लिमों की भावनाओं(?) को देशहित से ऊपर रखा जाता है, उसका एक नमूना आपने ऊपर देखा इसी कांग्रेसी नीति और चालबाजियों का घातक विस्तार महाराष्ट्र के ही सांगली जिले के मिरज तहसील में देखने को मिला। सांगली जिले के मिरज़ में महाराणा प्रताप गणेशोत्सव मंडल द्वारा एक चौराहे पर विशाल झाँकी लगाई गई थी, जिसमें शिवाजी महाराज द्वारा “बघनखा” द्वार अफ़ज़ल खान का पेट फ़ाड़ते हुए वध का दृश्य चित्रित किया गया था।

3 सितम्बर को मुस्लिमों के एक उन्मादी समूह ने इस पोस्टर पर आपत्ति जताई (पता नहीं क्यों? शायद अफ़ज़ल खान को वे अपना आदर्श मानते होंगे, मुस्लिम सेनापति रखने वाले शिवाजी को नहीं)। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भीड़ को समझाया, लेकिन वे नहीं माने, अन्ततः कांग्रेस सरकार के दबाव में शिवाजी वाला वह पोस्टर पुलिस प्रशासन द्वारा हटाने की घोषणा की गई। भीड़ ने खुशी में पाकिस्तान के झण्डे लहराये और पुलिस की जीप पर चढ़कर हरा झण्डा घुमाया,

पुलिस चुपचाप सब देखती रही, एक युवक ने नज़दीक के खम्भे पर पाकिस्तान का एक और झण्डा लगा दिया, मुस्लिमों की भीड़ नारेबाजी करती रही, लेकिन इतने भी उन्हें संतोष नहीं हुआ और उन्होंने सुनियोजित तरीके से दंगा फ़ैलाना शुरु कर दिया, और आसपास स्थित तीन गणेश मण्डलों में गणपति की मूर्तियों को पत्थर मार-मारकर तोड़ दिया।

आप सोच रहे होंगे कि प्रशासन क्या कर रहा था, आप प्रशासन को इतना निकम्मा न समझिये, पुलिस ने शिवसेना के दो पार्षदों, गणेशोत्सव मण्डल अध्यक्षों और अन्य हिन्दूवादी नेताओं को “भावनायें भड़काने” के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया। पुलिस ने बाद में कहा कि इन्होंने झाँकियों की “आचार संहिता” का उल्लंघन किया है (यानी शिवाजी महाराज द्वारा हकीकत में घटित एक घटना को चित्रित करना आचार संहिता का उल्लंघन है)। दंगों में पुलिस की एक जीप, चार सार्वजनिक वाहन और कुछ अन्य निजी वाहन जला दिये गये। इसके विरोध में हिन्दू संगठनों ने गणेश मूर्ति विसर्जित करने से इंकार कर दिया तब पुलिस ने उन्हें धमकाया और जबरदस्ती पुलिस गाड़ी में डालकर गणेश जी का विसर्जन करवा दिया। सांगली जिले में 2 दिन तक कर्फ़्यू लगा रहा और हिन्दू संगठनों ने अभी तक गणेश विसर्जन नहीं किया है उनकी मांग है कि अफ़ज़ल खान की वह झाँकी जब तक दोबारा उसी स्थान पर नहीं लगाई जाती, गणेश विसर्जन नहीं होगा। यह सारा मामला पूर्वनियोजित और सुनियोजित था इसका सबूत यह है कि जिस रास्ते से गणेश मूर्तियाँ निकलने वाली थीं, वहाँ एक दरवाजे के सामने दो दिन पहले ही लोहे के एंगल लगाकर रास्ता सँकरा करने की कोशिश की गई थी, ताकि मूर्तियाँ न निकल सकें

यह जानकर भी बिलकुल आश्चर्य मत कीजियेगा कि उस पूरे इलाके की मुस्लिम महिलायें एक दिन पहले ही इलाका छोड़कर बाहर चली गई थीं… बाकी तो आप समझदार हैं।

इन दोनों मामलों में हमारे सबसे तेज़, सबसे सेकुलर, मीडिया ने “ब्लैक आउट” कर दिया, किसी-किसी चैनल पर सिर्फ़ एक लाइन की खबर दिखाई, क्योंकि मीडिया को सलमान खान, महेन्द्रसिंह धोनी और राखी सावन्त जैसे लोग अधिक महत्वपूर्ण लगते हैं, या फ़िर गुजरात की कोई भी मोदी विरोधी खबर या भाजपा की उठापटक। “मीडिया हिन्दूविरोधी है” इस श्रृंखला में यह एक और सबूत है, (सुना आपने “बुरका दत्त”)।

सारे झमेले से कई सवाल खड़े होते हैं कि – उदारवादी मुस्लिम इस प्रकार की हरकतों को रोकने के लिये आगे क्यों नहीं आते? यदि घटना हो ही जाये तब इसकी कड़ी आलोचना या कोई कार्रवाई क्यों नहीं करते? शाहबानो मामले में पीड़ित महिला के पक्ष में बोलने वाले आरिफ़ मोहम्मद खान को मुस्लिम समाज अपना नेता क्यों नहीं मानता, बुखारियों को क्यों मानता है? कांग्रेस की चालबाजियों को हमेशा नजर-अंदाज़ कर देते हैं, दंगों के मुख्य कारणों पर नहीं जाते और गुस्साये हुए हिन्दुओं का पक्ष रखने वाली भाजपा-शिवसेना के दोष ही याद रखते हैं? और सबसे बड़ी बात कि अफ़ज़ल खान या अफ़ज़ल गुरु का विरोध करने पर मुस्लिम भड़कते क्यों हैं? यह कैसी मानसिकता है? ऊपर से तुर्रा यह कि पुलिस हमें अनावश्यक तंग करती है, हिन्दू नफ़रत की निगाह से देखते हैं, अमेरिका जाँच करता है… आदि-आदि। उदारवादी मुस्लिम खुद अपने भीतर झाँककर देखें कि उग्रवादी मुस्लिमों की वजह से उनकी छवि कैसी बन रही है।

नीचे दिये हुए पहले वीडियो (7 मिनट) में आप देख सकते हैं कि किस तरह डीएसपी स्तर का अधिकारी मुस्लिमों की भीड़ को समझाने में लगा हुआ है, एक युवक सरकारी “ऑन ड्यूटी” जीप पर चढ़कर हरा झण्डा लहराता है, लेकिन पुलिस कुछ नहीं करती (जबकि उसी समय उसका पुठ्ठा सुजाया जाना चाहिये था)। वीडियो के अन्त में एक लड़का पाकिस्तान का झण्डा एक खम्भे पर खोंसता दिखाई देगा। पथराव करने वाली भीड़ में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं, क्या है यह सब?

First Video (7 min.)
http://www.youtube.com/watch?v=o-J0mD8naAg

इस वीडियो में भीड़ गणेशोत्सव मण्डलों के मण्डप में मूर्ति पर पथराव करती दिखाई देगी…

Second Video (3 min.)
http://www.youtube.com/watch?v=nsX6LYdNBNw

अब अन्त में एक आसान सा “ब्लड टेस्ट” कर लीजिये… यदि यह सब पढ़कर आपका खून उबालें नहीं लेता, तो निश्चित जानिये कि या तो आप “सेकुलर” हैं या “नपुंसक” (दोनो एक साथ भी हो सकते हैं)…

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66 Comments

  1. September 9, 2009 at 6:18 am

    लाजवाब पोस्ट आपसे सहमत हैं और तस्वीरें देख कर किसका खून उबाल नहीं खायेगा उसी का जो इस देश से प्यार नहीं करता आभार्

  2. September 9, 2009 at 6:27 am

    पता नहीं मीडिया ने इस खबर पे चुप्पी क्यों साध रक्खी है ? वैसे भी सेकुलर मीडिया यदि इसपे मुह खोलेगी तो हमेशा की तरह हिन्दुओं को ही दोषी ठहरायेगी | अपनी पुलिस का खेल देख रहे हैं … वाह भाई वाह … इसे कहते हैं सेकुलर पुलिस ….

  3. September 9, 2009 at 6:27 am

    भाऊ मीडिया फ़िर गुजरात के फ़र्ज़ी एनकाऊंटर पर फ़र्ज़ी आंसू बहा रहा है।उसे सिर्फ़ वंही मानवाधिकार,या दुनिया भर के अन्याय नज़र आ रहे हैं।एक इश्मत का मारा जाना नेशनल न्यूज़ है और इस देश मे घोषित दुश्मन देश पाकिस्तान का झंडा फ़हराना कोई खबर नही बनी,ये इस दोगले तंत्र की पोल खोलने वाला सबूत है।

  4. कुश said,

    September 9, 2009 at 6:37 am

    एक अकेला भारतीय, भीड़ में शामिल होते ही हिन्दू या मुसलमान बन जाता है.. ऐसी घटनाये स्वच्छ समाज का पतन दर्शाती है.. ये पढ़कर किसी भी भारतीय का खून खौलना स्वाभाविक है.. फिर चाहे वो किसी भी दर्म का हो.. उदारवादी मुस्लिम क्यों चुप रहते है समझ नहीं आता.. ?

  5. arun arora said,

    September 9, 2009 at 6:37 am

    मेरे ख्याल से जिसने ये विडीओ बनाया उस पर और आप पर रासुका लगा देना चाहिये . पाकिस्तानी झंडा फ़हराना कोई गैरकानूनी नही है भारत का झंडा फ़हराने पर भी रासुका लगा ही देनी चाहिये सेना के लोगो को पाक बारडर से हटा देना चाहिये

  6. flare said,

    September 9, 2009 at 6:45 am

    sali media kamini hai …….. aur hinduo ka koi rakshak nahi hai ?

  7. September 9, 2009 at 7:44 am

    क्या है यह सब? हिन्दुस्तान जो अब गाँधिस्तान है में यह पाकिस्तान है. मगर खबरदार कुछ बोला तो वरना ये देशद्रोही जो कर रहें है, उसके लिए भी आप जैसे कट्टरपंथी हिन्दु ही जिम्मेदार है.

  8. September 9, 2009 at 7:56 am

    आपके खिलाफ मन-हित याचिका दायर करनी पड़ेगी. हमारा मन तो यही कहता है और यही हमारे मन के हित में है. आप ये कहाँ की बातें ले आते हैं? इन बातों का क्या मोल है? ऊपर से वीडियो वगैरह भी लगा देते हैं. रुकिए ज़रा हम सुबूत लेकर आते हैं कि आपका लगाया वीडियो नकली है.

  9. September 9, 2009 at 8:53 am

    एक कहावत है "अल खामोशी नीम रजा" अर्थात खामोशी आधी स्वीकृति होती है. परन्तु यहाँ मुस्लिम समाज की लगातार खामोश रहने की प्रवृति सभी पूरे समाज को शक के दायरे में लाकर खडा देती है. कोई कुछ भी कहे परन्तु सच्चाई यही है कि भारत के हिन्दू समाज की सहिष्णुता और संविधान द्वारा दी गयी आजादी का मुस्लिम समाज बेजा फ़ायदा ही उठाता रहा है और देशद्रोही "सेकुलर" जमातें उसे बढावा देने में लगी रही हैं. अब समय आ गया है कि इन्हें याद दिलाया जाए कि इन्होने या इनके बाप- दादा ने इसलाम भले ही तलवार की नोक पर कुबूल किया हो लेकिन विभाजन के बाद भारत में रहना इन्होने अपनी मर्जी से ही कुबूल किया था. ऐसे में अगर इनके दिल में भारतीय समाज, संस्कृति, संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान हो तो शौक से भारत में रहें वरना पाकिस्तान का झंडा उसी गलीचस्तान में लहराएँ.

  10. September 9, 2009 at 9:19 am

    सब साले अंधभक्त है गाँधी – नेहरु के !!मरो मरो क्यों कि हिन्दू हो !!खबरदार जो कुछ बोला हम सेकुलर है !!अरे,भाई वोट बैंक है न क्या करे ??

  11. ek aam aadmi said,

    September 9, 2009 at 9:47 am

    आओ वीर आतंकियो आओ तुम्हारा स्वागत हैइस धर्मनिरपेक्ष मुल्क में हम तैयार हैं तुम्हारे स्वागत कोहमारे बच्चे भी, आओ तुम बम लगाओहमारी जडें बहुत मजबूत हैं हिलेंगी नहींतब भी, जब हमारा अस्तित्व खत्म हो जायेगातब भी, कौमी तराने गूंजते रहेंगेचाहे उन्हें सुनने वाला कोई न होतुम हमारी पीढियों को तबाह कर सकते होक्योंकि तुम अल्प होहम अपने बच्चों को आगे करते रहेंगेतुम उनके सीने चाक करते रहनाक्योंकि तुम अल्प होऔर जो चीज बढ जाती हैउसे खत्म होना ही होता हैइसलिये तुम बम लगाओहम तुम्हें सजा नहीं देंगे, खीर देंगेखीर खाओ और इन्तजार करोकि कब एक आई सी ८१४ उडेऔर कब तुम्हें शाही मेहमान की तरह छोडा जायेतुम हमारे उन बच्चों के सीने गोलियों से छलनी कर दोजिन्हें हमने प्यार से पाला थाबडे अरमानों से पोसा थातुम बम लगा सकते होहम कोई कार्रवाई नहीं करेंगेक्योंकि हम वास्तविक धर्म निरपेक्ष हैंहम इतिहास से भी सबक नहीं लेंगेक्योंकि हम बहुल हैं, हम निरपेक्ष हैंआओ तुम स्वतन्त्र होकहीं भी बम लगाओट्रेन में, पार्क में, पूजा स्थलों में, अदालतों मेंलेकिन हम फिर भी चुप रहेंगेतुम हमें सिरे से खत्म कर सकते होहमारी पीढियों को फना कर सकते होतुम कुछ भी कर सकते होलेकिन हम यूं ही रहेंगेक्योंकि आत्मा अमर हैऔर हमें अमरत्व से प्रेम हैइसलिये हे वीर आतंकियोहमें अमरत्व प्रदान करोऔर फिर अगर सौ पचास रोज भी मर जायें तो क्या हैकाफी तो फिर भी बाकी रहेंगे हीऔर फिर उनके जाने से कुछ तो भला होगाजिन्दा रहे तो क्या कर पायेमरकर एक लाख तो पायेऔर फिर सौ पचास वोट ही तो कम हुयेपता नहीं उनमें से कितने सत्तों को मिलतेकितने विरोधियों कोक्या पता इनमें कुछ साम्प्रदायिक भी होतेऔर कडी निन्दा कर तो दी हैसद्भाव बनाने की अपील भी कर दी हैफिर मौत को एक दिन तो आना ही थाशायद तुम्हारे बमों पर ही उनका नाम लिखा थाविधाता को भी यही स्वीकार थाइसलिये क्या फायदा मरे हुओं को रोने काअपना चेहरा आंसुओं से भिगोने काऔर उनमें कौन देश की धडकन थाकौन युवा ह्रदय सम्राट थाकिस का बाप सांसद या मन्त्री थाएक का बाप तो सेना में सन्त्री थाएक अनाथ थाएक के घर में तीन ही वोटथे इनके मरने से कौन सा पहाड टूट गयाकौन सा समझौता टूट गयालोग तो मरते ही हैं, कुछ बीमारी सेकुछ जरूरत से ज्यादा तीमारदारी सेबेकारी से, बेरोजगारी से सर्दी से, गरमी से, बाढ से, सूखे सेअकाल से, भूखे सेइनको लेकर क्या रोनाक्यों अपने नयन खोनायह दुनिया है ही एक माया-भ्रमइसलिये क्यों कुछ करें हमबेकार ही में साम्प्रदायिक सद्भाव को ठेस पहुंचायेंहम बहुल हैं, उदारमना हैं, इसलिये सबकुछ चलेगाहम क्यों अपने बी०पी० को बढाएंबढाने को तो व्यापार हैजिसके लिये हम तैयार हैंहम सब कुछ बेच सकते हैंअपने आप कोअपने बाप कोआओ हमें खरीदो तुम्हारा स्वागत हैहमने बेच दिया है अपना आत्म सम्मानअपना स्वाभिमान, अपना ईमानअपना धर्म, अपनी नीतिहम बेचने से पहले खुद को तौलते हैंफिर अपनी कीमत बोलते हैंजिसमें खाते हैं उसी में छेद करते हैंजिस पर बैठते हैं उसी को काटते हैंहम गलतियां दोहराते ही नहीं उन्हें बहुगुणित कर डालते हैंतुम्हें ऐसे लोग और कहां मिलेंगेइसलिये आओ तुम्हारा स्वागत है।

  12. September 9, 2009 at 10:07 am

    please read an article on shivaji written by a old BJP thinktank anil chawala at samarthbharat.com

  13. Santosh said,

    September 9, 2009 at 10:19 am

    @ Mr.Veerendra JainWhy cant you comment on the post, sir? The post is not about Shivaji. The post is about behaviour of certain elements, who are protected by so called seculars who think they have a right to rule the country and its states just because they call themselves secular.Its people like you, who have this stupid habit of closing their eyes whenever they are posed with such straight forward questions. People like you have cheated not one but many generations.

  14. September 9, 2009 at 10:24 am

    आपका कोटिशः आभार………

  15. Azad said,

    September 9, 2009 at 10:46 am

    लाजवाब लेख!!अगर इजाज़त हो तो इस मुद्दे को मैं अपने ब्लॉग में भी उठाना चाहूँगा…http://hshekhar.blogspot.com

  16. September 9, 2009 at 10:57 am

    स्तब्धकारी ध्यान दीजिएगा:अंतिम वीडियो में लिखा आ रहा है This video is not available in your country due to copyright restrictions. बी एस पाबला

  17. khursheed said,

    September 9, 2009 at 11:02 am

    कमाल है चिपलूनकर जैसे विद्वान को पाकिस्तानी झंडे और आम हरे झंडे में फर्क नहीं समझ आता. अगर कोई मुसलमान हरी सब्जी भी सड़क पर लेकर जायेगा तो संघियों को वो पाकिस्तानी झंडा ही नज़र आयेगा.

  18. Santosh said,

    September 9, 2009 at 11:18 am

    खुर्शीद मियाँ, कमाल का ही तो जिक्र है इस पोस्ट में. झंडा हाथ में लिए ये लम्पट कमाल ही तो कर रहे हैं.

  19. psudo said,

    September 9, 2009 at 11:47 am

    Aaap ne sahi kaha.. aam hindu sach me Napunsak hi hai…

  20. September 9, 2009 at 11:52 am

    पता नहीं ओर क्या क्या देखने को मिलेगा , मैने भी अपने ब्लॉग पर इस सम्बन्ध मे अपना दर्द व्यक्त किया है , इस को भी देखे http://kharwal.blogspot.com/2009/09/blog-post.html खुर्शीद जी , अफज़ल ओर इन दंगो पर आप ने कुछ नहीं कहा , एक देश वासी के नाते इन का भी तो विरोध करे

  21. September 9, 2009 at 12:05 pm

    खीच लो कृपाण सुप्त म्यान में है जो पड़ी आ गई है तेरे इम्तिहान की घडी लेकिन जब भाजपा की सरकार आती है तो वह भी तो तुष्टिकरं करती है . naqvi और sayead jaiso को maai baap bna कर . और यह दोनों भी तो hinduo के damaad है . कौन है जो हमारे khoon के ubaal को mahsus करे .

  22. khursheed said,

    September 9, 2009 at 12:06 pm

    चिपलूनकर जी हरा झंडा पर पाकिस्तान का अधिकार नहीं है बल्कि हरा रंग को हर मुसलमान पवित्र मानता है जैसे आप लोग भगवा रंग को पवित्र मानते है. वैसे जो झंडा फहराते हुए दिखाया जा रहा है वो भी पाकिस्तान का नहीं है क्योंकि पाकिस्तानी झंडे में किनारे पर एक सफ़ेद पट्टी होती है और हरे रंग पर सफ़ेद रंग से एक चाँद और एक तारा बना होता है. गूगल पर सर्च कर के देख लें.

  23. Santosh said,

    September 9, 2009 at 12:10 pm

    अल्ल, बल्ल, सल्ल नहीं आये अभी तक?पाकिस्तानी झंडा फहराने में व्यस्त तो नहीं हैं कहीं?

  24. arun arora said,

    September 9, 2009 at 12:24 pm

    koi is andhi ko samajhao baat khet ki ho rahi hai dange ki ho rahi hai ye jhanda samajhane me lagi iase dande ki bhasha hi samjh me aati hai shaayad isake bhai bam lekar foda rahe hai vaha yaha ye safai de rahi hai

  25. September 9, 2009 at 12:25 pm

    @ खुर्शीद – पाकिस्तानी और हरे झण्डे में अन्तर समझा दिया (हमें तो पता ही नहीं था ना)। लेकिन 2-2 टिप्पणी करने के बावजूद उस जीप पर चढ़कर झण्डा लहराने, मूर्तियों पर पथराव करने वाली "मानसिकता" और दोनों अफ़ज़लों पर एक शब्द भी नहीं कहा, इस से क्या समझा जाये? @ वीरेन्द्र जैन – आपकी निगाह में शिवाजी क्या हैं?

  26. September 9, 2009 at 12:42 pm

    खून भी गरम है और उबलने भी लगा है, फिर भी ना जाने क्यूं अपने आप को सेकुलर और नपुंसक महसूस कर रहा हूं।दूसरा वीडियो नही देख पायाखु्र्शीद जी और स्वच्छता वाले भाई साहब पथराव करने वालों के बारे में कु्छ नही बोलेंगें ये बात आपको भी मालूम हैइनके विचार से जो मुजरिम है उन्हें (दो पार्षद, मण्डल अध्यक्षों को) तो गिरफ्तार किया ही जा चुका हैप्रणाम स्वीकार करें

  27. September 9, 2009 at 1:21 pm

    इस कुकृत्य को पढ़कर मुझे वो दिन याद आ रहा है, जब इन्ही इस्लाम के पुरोधाओं ने गोधरा में कारसेवकों की बोगियां जलाई थीं. उस घटना को हुए अभी कुछ ज्यादा समय नहीं बीता था कि अक्षरधाम पर इन्ही मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा हमला किया गया था. अपनी उसी चोटिल मानसिकता में मैंने अक्षरधाम पर हुए हमले के अगले दिन कुछ पंक्तियां लिखी थी, जिसे नवम्बर, 17, 2009 को अपने ब्लॉग पर "धर्मनिरपेक्षता के पाखंडी वाहक" नामक शीर्षक पर डाला था. इन पंक्तियों के द्वारा आम हिंदू मानस की घायल, व्यथित दशा को आप भी महसूस करें- उन्होनें कहा-लादेन मरे या बुश, हम दोनों में खुश.फिर जोड़ा-ना लादेन मरे ना बुश, लगे दोनों पर अंकुश.उनकी बातें सुनकर पूछा मैनें उनसेलादेन और बुश की हो रही है लड़ाईउसमें हिन्दूओं की क्यों हो रही है कुटाई ?आपके पास क्या है इसका जवाब ?उन्होनें उत्तर दिया-सरासर गलती तो हिन्दूओं की हीं है.क्यों वह समर्थन सच्चाई का कर रहे हैं ?तब मैनें पूछा- हे जनाब !उन निहथ्थे रामसेवकों का दोष क्या था,जो जला दिये गये साबरमती की बोगियों में?मेरी बात सुनकर रहा न गया उनसेतमतमा गया चेहरा उनकाबोले,क्या बात करते हो यार !क्यों गये थे अयोध्या में होकर तैयार ?वो जले तो ठीक हीं जले,मरे तो ठीक हीं मरे.यदि कोई हिन्दू मरा तो समझो कि उसने जरूर कोई गलती की होगी.आखिर इस धर्मनिरपेक्ष देश में,क्या उनको यह भी नहीं है अधिकारकि वो मार सकें काफिरों को बार-बार?वे तो अपने धर्म पर हैं अडिग.उनका तो धर्म कहता है-जो तेरी राह में हो पड़े,उन्हे मारकर बनो तगड़े (गाज़ी).उन्होनें तो केवल अपना काम कियानाहक हीं उनको तुमने बदनाम किया.जरा-सा रूक कर पूछा उन्होनें मुझसे-बताओ श्रीमान् !ये संघी क्यों लगाते हैं साम्प्रदायिक आग,हिन्दूओं को ये क्यों भड़काते हैंक्यों उन्हें जागृति का पाठ पढ़ाते हैं ?ये तो सो रहे थे, नाहक हीं उन्हे जगा दिया.अरे ! हिन्दूओं का तो काम ही है सहनाऔर बार-बार मरना.ये लोग भी कोई लोग हैं,आज मर-कट रहे हैं तो हो रहा है हल्ला.इतना सुनकर रहा न गया मुझसेमैनें कहा-धन्य हो मेरे भाईतुम्हारे रहते अन्य कौन बन सकता है कसाई.हमें मारने के लिये तो आप जैसे धर्मनिरपेक्ष हीं काफी हैं.अब वह दिन दूर नहीं,जब आप जैसों के अनथक प्रयास सेये अपाहिज-कायर हिन्दू मिट जायेंगे जहाँ सेमैं तो बेकार हीं कोस रहा था आपके प्यारों कोअरे ! आपके सामने उनकी क्या औकात है ?ये सब घटनायें तो आप जैसों की सौगात है.

  28. September 9, 2009 at 2:24 pm

    सुरेश जी , आप की इन तस्वीरों मे से २ मैने अपने ब्लॉग पर लगा रहा हूँ , इजाजत चाहूँगा

  29. September 9, 2009 at 2:53 pm

    @ Prashant ji, – Please go ahead, you can take whole matter… with mentioning the link and reference. Thanks for appreciating…

  30. haal-ahwaal said,

    September 9, 2009 at 3:21 pm

    iss kodh ko khatm karne ke liye ab gandhiji ki homeopathy ki nahi, seedhe surgery ki jaroorat hai.

  31. September 9, 2009 at 3:35 pm

    @ खुर्शीद मियाँ,वो जरूर कोई आँख का अंधा ही होगा, जिसे कि वीडियो में झंडे के बीचो बीच बने चाँद-तारे का निशान नहीं दिखाई दे रहा होगा……चिपलूनकर जी, लाशों में कभी खून का उबाल नहीं आया करता……

  32. Common Hindu said,

    September 9, 2009 at 3:57 pm

    Hello Blogger Friend,Your excellent post has been back-linked inhttp://hinduonline.blogspot.com/– a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu- Hindu Online.

  33. September 9, 2009 at 4:22 pm

    सुरेशजी शानदार रिपोर्ट है। खून तो बहुत सी बातों पर खौलता है। बस क्या करें कोईसही नेतृत्व नहीं है जो, इस भावना को समझ सके। दरअसल आम हिंदुस्तानी स्वभावत: बीच की लाइन ही पसंद करता है। औऱ, इसी का फायदा उठाकर सब सेक्युलर बनने में लग जाते हैं। औऱ, सेक्युलरिज्म की आड़ में कुछ भी हो रहा है।

  34. September 9, 2009 at 5:04 pm

    ये सब देखकर् तो ऐसा लगता है कि मारो इनको जूते चार और भगाओ पाकिस्तान, जहाँ न गणपति होंगे न शिवाजी होंगे वहाँ तो ये शिया और सुन्नी में लड़ झगड़कर मरेंगे।एक बेहतरीन तथ्यपरक शोध एवं खबर। काश कि हमारी मीडिया नपुंसक न होती।

  35. September 9, 2009 at 5:04 pm

    ये सब देखकर् तो ऐसा लगता है कि मारो इनको जूते चार और भगाओ पाकिस्तान, जहाँ न गणपति होंगे न शिवाजी होंगे वहाँ तो ये शिया और सुन्नी में लड़ झगड़कर मरेंगे।एक बेहतरीन तथ्यपरक शोध एवं खबर। काश कि हमारी मीडिया नपुंसक न होती।

  36. psudo said,

    September 9, 2009 at 5:26 pm

    Hamara Media Bika hua hai

  37. September 9, 2009 at 5:52 pm

    है राम मै तो देख कर हेरान रह गया, मेरे पास तो कोई शव्द ही नही बचे, क्या ऎसा भी हो सकता है… हम किस हिदुस्तान मै रहते है ? जहां ८०% के वाव्जुद भी हमे आजादी नही, ओर …..

  38. sajid khan said,

    September 9, 2009 at 6:01 pm

    itni bewakufi karne wale ko arrest karna chaiye.

  39. September 9, 2009 at 6:03 pm

    Excellent post..Khursheed saahib… jhande ke alaawa bhi "bahut kuchh" hua… us par bhi comment kar hi dein….

  40. September 9, 2009 at 6:22 pm

    सुरेश जी, बहुत अच्छी पोस्ट आजकल इस तरह की खबरें टी.वी. और अखबारों में नही मिलती है….लेकिन मैं खुर्शीद जी से सहमत हूं वो झंडा पाकिस्तान का नही है….मेरे आज तक ये समझ में नही आया के दुनिया के मुसलमान हरे रंग को इस्लाम से क्यौं जोडते है?????? इसका तो दुर-दुर तक इस्लाम से कोई वास्ता ही नही है………..खैर आपके लेख के बारे में बात करते है….जिस तरह ये दंगा जो की आपके लेख से महसुस हो रहा है की पूर्व-नियोजित था ठीक इसी तरह हिन्दुस्तान में होने वाले ज़्यादातर दंगे पूर्वे नियोजित होते है…..एक चीज़ आप हर दंगे में समान पायेंगे की ""दंगाई चाहे किसी भी धर्म के हो वो होते है सबसे पिछ्डी जाति के कम पढे-लिखे लोग""ये वो लोग होते है जो अपना दिमाग कभी-भी इस्तेमाल नही करते है बस इसी का अंजाम हमारा देश भुगत रहा है………और पता नही कब तक भुगतेगा……..पता नही हमारी सरकार को आतंकियों और देश के दुश्मनों को अपना दामाद बनाने का क्या शौक है????? जिसको देखो अपने पास रख लेते है खिलाने और ठुसाने के लिये चाहे वो अफ़ज़ल हो या कसाब..!!!!!

  41. September 9, 2009 at 6:59 pm

    ये धर्म-स्थलों और मुर्तियों को तोडने से घिनौना काम कोई नही है……..इसकी इज़ाज़त ना तो हमारे देश का कानुन देता है, ना इन्सानियत का कानुन और ना इस्लाम का कानुन….

  42. September 9, 2009 at 7:02 pm

    I simply take it this way—One man army has fucked the entire T.V. news industry in India today.It is a defining moment for media. ANDFocus of intelligent T.V. news viewer shifts to net from now onwards.A parallel media is born.

  43. cmpershad said,

    September 9, 2009 at 7:03 pm

    खून जनता का खौले न खौले, पर नेताओं काक्यों नहीं खौल रहा है? क्या सारी यश और अपयश की ज़िम्मेदारी मोदीजी पर ही डाल दी जाय!

  44. September 9, 2009 at 7:28 pm

    ब्लॉग जगत इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बहिष्कार का आन्दोलन चलाये तभी ये सुधरेंगे अन्यथा जो चाहे परोसते रहेंगेहमें अपना घर ठीक करना होगा तभी समाज और देश सुधरेगा

  45. Kumar Dev said,

    September 9, 2009 at 10:48 pm

    सुरेश जी हार्दिक बधाई स्वीकारे, ये क्या अनाप शनाप लिखते रहते है आपके पास कोई काम धाम नहीं है क्या जब देखिये इन निर्दोष बेचारे अल्पसंख्यको पर इल्जाम लगाते रहते है,कितनी शरीफ कौम है ये बिलकुल गौ मूत्र से नहलाई हुई.इन #$%#((^#%)%#) के तशरीफ़ में पृथ्वी मिसाइल दाग देनी चाहिए ताकि ये आपने अल्लाह के काबा पर जाके शहीद हो जाए.और हाँ जरा आप भी कुछ सेकुलरिज्म का चश्मा पहन लीजिये ताकि आपको सिर्फ और सिर्फ गोधरा के दंगे दिखाई दे,मुर्शिदाबाद, 1984, मऊ के दंगे नहीं, वो दंगे नहीं थे वो तो दो कौम के लोग गले मिल रहे थे.सुरेश जी कोशिश कीजिये की चुप रहने की ( क्योंकि गर्व से कहो की हम हिन्दू नपुंसक है )…….प्रिय चिठ्ठा जगत के भाईयों " नपुंसक सर्कार का ऐलान ( बड़े दुःख के साथ ) है की इशरत जहां के आतंकवादियों से लिंक थे लेकिन एंकाउन्टर फर्जी था ( मोदी जी जिसे सारी दुनिया राक्षस कहती है, को खुश करने के लिए किया गया )लोग चाहे कुछ भी कहे मैं खुश हूँ की ( इस देश में 12 आतंकवादी जन्म तो ना ले सके, जिसे वो पैदा करती )… खुर्शीद बोल बे…जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय भगवान्

  46. September 10, 2009 at 1:15 am

    वीरेंद्र जी कहाँ चले गए? सुरेश जी के साथ साथ हम भी शिवाजी महाराज के बारे मैं आपके विचार जानने के लिए उत्सुक हैं |

  47. September 10, 2009 at 4:37 am

    ये महज़ एक पोस्ट नहीं इतिहास का एक निर्णायक पल है . इसलिए नहीं की वो सब इसमें दिखाया गया है जो कश्मीर में दशकों से हो रहा है . वो सब तो यू-ट्यूब में है ,जो चाहे देख ले . ये पोस्ट याद की जायेगी तो इसलिए की कैसे एक आदमी ..एक अकेला निहथ्था तमाम चैनलों को उनकी औकात बता सकता है कि तुम सच नहीं दिखाओगे तो वो आने से रुक नहीं जाएगा . आदमी खबर देखता है तो क्या रंडियों की हिलती कमर देखने के लिए ?या इसलिए कि हो असल में क्या रहा है ?

  48. September 10, 2009 at 6:09 am

    शर्म से डूब मरने की बात है……….न केवल पुलिस और प्रशासन के लिएबल्कि समूची भारत सरकार व महाराष्ट्र सरकार के लिएअफ़सोस………बहुत अफ़सोसदेश में शिखंडी लोग राज कर रहे हैं और इस तरह कर रहे हैंलाहनत है ……लाहनत है ……लाहनत है ……

  49. September 10, 2009 at 7:44 am

    पोस्ट को 'परीक्षा' की वजह से देर से पढ़ पाया और टिप्पणी में भी पिछड़ गया.सुरेश जी सर गलती सुधार के लिए कोटिश: धन्यवाद!! आप ने सही कहा था, अनिल कुमार, वाई एस आर के दामाद हैं.नाम के आगे 'ब्रदर' लगने से गलतफहमी हो गई थी.@ आप की पोस्ट 'सदा-सर्वदा' बेहतरीन है. वही पढ़ने को मिलता है, जिसकी हमें अपेक्षा रहती है. इस तरह की पोस्टें आइना तो दिखाती ही है साथ ही 'अहसास-ए-नपुंसकता' भी कराती है. कभी कभी तो लगता है की हिंदुस्तान में (जो एक मात्र देश है जहाँ हिन्दू बहुसंख्यक है) हिन्दू अल्पसंख्यक होने वाले हैं यही हाल रहा तो. ईसाई मिशनरियों और मुसलमानों के दोहरे आक्रमण से हिन्दुओं और हिंदुत्व को बचाने शायद कोई अवतार आ जाये!!(बेवकूफों की तरह मैं भी ये बेवकूफी भरी आशा कर सकता हूँ,क्योंकि खुद तो किसी मस्जिद या चर्च पर पत्थर भी नहीं फेंक सकता!!)

  50. September 10, 2009 at 8:33 am

    एक बात जोड़ना चाहता हूँ. मीडिया ने इस खबर को नहीं दिखाया क्योंकि तनाव भड़क सकता था. ठीक है तब अरूण गाँधी व कल्याणसिंह के वक्तव्य बार बार क्यों दिखाए जा रहे थे? तब कहाँ गई थी मीडिया की जिम्मेदारी? और यह लिडर लिडर रोना छोड़ दें. हर व्यक्ति लिडर है. अपने बस में हो उतना जरूर करें. सब कुछ भगवान भरोसे न छोड़ें.

  51. vijay said,

    September 10, 2009 at 9:01 am

    सुरेश जी, हम आपकी बात से पूर्णरूपेण सहमत है.राष्ट्रवादियों को देशद्रोहियों से डरना पड़ रहा है.मेरे विचार से यह जनतंत्र के पतन की पराकाष्ठा है.ये तथाकथित नेता केवल वोटों के लिये शुतुरमुर्ग बन रहे हैं कभी कभी विचार आता है कि भारत में आंतरिक व्यवस्था के लिये सेना का सहयोग क्यों नहीं लिया जाता.ऐसा होने से ही यहां का खाने वाले और वहां की गाने वालों के सिर कुचले जा सकेंगे.आज का प्रशासन और व्यवस्था इच्छा शक्ति विहीन, दोगले नेताओं ( सभी वर्गों- दलों के) के आगे बेबस है, कुंठित है. चाह कर भी कुछ कर नहीं पाता और करता है तो झूठे मुकदमों, आरोपों में ( जैसे हैद्राबाद का मक्का मस्जिद फ़ायरिंग प्रकरण) उलझा-फंसा दिया जाता है.और आम जन तो दाल रोटी के चक्कर में उलझा पड़ा है. किन्तु अब उन्हें भी सब कुछ दिख रहा है समझ आ रहा है.उनके भीतर भी लावा सुलग रहा है यह स्वाभाविक ही है कि जब अति होगी तो प्रतिक्रिया भी होगी अवश्य होगी लावा फूटेगा अवश्य फूटेगा और अंत में यही कहूंगा परिवर्तन होगा और इसे आप हम जैसे लोग ही लायेंगे.विजयप्रकाश

  52. September 10, 2009 at 9:50 am

    media is khabar ko nahi uchhalega… pata hai kyo sab jante hai… media ek tarfa hai…

  53. Dr. Bhaskar said,

    September 10, 2009 at 10:25 am

    मैं तो मज़हबी सम्प्रदायों से ही नफ़रत करता हूं। कोई हो इंसानियत से बेहतर कुछ नहीं। मज़हब के नाम पर या मज़हब के लिए हर तर्क कुतर्क है, एवं भावना दुर्भावना।

  54. ek aam aadmi said,

    September 10, 2009 at 11:10 am

    एक दिन इन निरपेक्षियों के कारण ही हिन्दुओं का समूल नाश हो जायेगा जिसके जिम्मेदार खुद हिन्दू हैं. यह ऐसी कौम है जिसने इतिहास से कुछ नहीं सीखा. इन निरपेक्षियों की औलादें ही इन्हें पानी पीकर कोसेंगी, लेकिन तब हासिल कुछ नहीं होगा. इन दंगों के ऊपर आई मुस्लिमों (अपवाद छोड़कर) की टिप्पणियां ही अपने आप ही बताती हैं कि मुस्लिम को इस्लाम के अतिरिक्त कुछ नहीं दिखाई नहीं देता. अगर पूर्वज निरपेक्ष होते तो मुसलमानों या अंग्रेजों के गुलाम होते. उन साम्प्रदायिक लोगों द्वारा दिलाई गई स्वतन्त्रता की ऐसी-तैसी करा रहे हैं यह धर्म-निरपेक्षिये.मीडिया,प्रशासन,नेता और ऐसे हिन्दू(?) सब आगे चल रोयेंगे.

  55. mulqkiaawaaz said,

    September 10, 2009 at 11:36 am

    ये मीडिया क्रियेशन है और आउट ऑफ़ कांटेक्स्ट है. काट-छाट कर खबर कैसे बनाई जाती है शायद इसकी ट्रेनिंग चिपलूनकर ने उत्तर भारत के संघी अखबार दैनिक जागरण से ली है. हिन्दू खुद सोचे कि उनके लिए भारत का विस्तार करने वाले अफज़ल खान का महत्व ज्यादा है या क्षेत्रवाद को बढावा देने वाले 'पहाड़ी चूहे' का जिसके आदर्शों पर चलकर शिव सेना और मनसे जैसे उग्रवादी और आतंकवादी संगठन भारत को उत्तर दक्षिण और पश्चिम में बाटने में लगे हुए हैं.

  56. September 10, 2009 at 11:50 am

    "मुल्क की आवाज़" उर्फ़ खुर्शीद – भारत का विस्तार करने वाला अफ़ज़ल खान? और पहाड़ी चूहा याने शिवाजी? क्या कहने… अकल ठिकाने है पर है या नहीं, कि "हिन्दुस्तान की आवाज़" के साथ-साथ गिरवी रख आये कहीं? काशिफ़ आरिफ़ से थोड़ा दिमाग उधार ले लेते…

  57. Chitragupta said,

    September 10, 2009 at 1:22 pm

    suresh ji jordar ahet bhau tumache lekh.Chalu rahude asech lekh

  58. khursheed said,

    September 10, 2009 at 1:58 pm

    Whatever I have to say, Jassu Bhaiyya has already said. Now, I have nothing to say.

  59. haal-ahwaal said,

    September 10, 2009 at 3:26 pm

    mulk ki aawaz ko padhkar aaj ye pakka yakeen ho gaya k musalman iss desh ki sabse gaddar kaum hai. arey murakh, iss mulk ka hero afzal khan nahi, APJ abdul kalam aur unn jaise rashtrabhakt musalman hain, jinhe iss desh ne hamesha hi sir-aankho par bithaya hai. lekin afsos, ki tere jaiso ko ye nahi dikhta aur namak-haraami me lage huwe ho.kal ko to tu afzal guru aur kasab ko apna hero maan-ne lagega. kahega- in logo ne pakistan ke vistar ke liye kurbani di. mujhe pata hai, tu bhi jaha kahi hoga, pakistan hi paida kar raha hoga. tere jaise murkh na to asli turk hain aur na hi asli mughal. tujh jaise do kaudi ke, vatanfarosh, converted neech insaan jo apne asli dharm ke nahi huwe to iss mulk ke kya hoge. ye iss desh ka durbhagya hai ki tujh jaise halkat iss desh me pal rahe hain.

  60. September 11, 2009 at 8:45 am

    Sureshji,Pranaam!kindly check this out.I think you can answer him better.http://bharhaas.blogspot.com/2009/09/blog-post_11.html

  61. September 11, 2009 at 3:30 pm

    ये टिपण्णी मैंने भडास ब्लॉग पे दी है | यहाँ पे इसलिए दे रहा हूँ क्योंकि भडास पे टिप्पणी moderation लगा दिया है | हो सकता है मेरी टिपण्णी सेंसर हो जाए | रुपेश जी, मुझे आश्चर्य इस बात का हुआ की आपने सुरेश जी के पोस्ट को ठीक से पढा नहीं और उसको गलत साबित करने के लिए एक पोस्ट भी कर दिया ??? ध्यान से पढिये देखिये सुरेश जी ने क्या लिखा है : – पुलिस की गाडी पर हरा झंडा फहराया गया और एक युवक ने नजदीक के खम्भे पर पाकिस्तान का झंडा लगा दिया ….. नहीं समझ मैं आई तो फिर से पढ़ लीजिये | भडास की टीम दीनबन्धु जी की टिपण्णी से भी मैं हैरान हूँ की वो भी रुपेश जी की तरह ही मुख्य बात को पचा गए और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाली सेकुलर भाषा बोलने लगे | टिप्पणी moderation वो भी भडास पे …. वाह भाई वाह … मतलब जो कोई इनके सेकुलर सुर मैं सुर नहीं मिलायेंगे उनकी टिपण्णी भी सेंसर बोर्ड के मेल मैं गम हो जायेगी |

  62. sunil patel said,

    September 12, 2009 at 6:24 am

    अगर यह घटना सही है तो यह एक बहुत ही बड़ा ष़यंत्र है जिसमे सरकार पूरी तरह से किसी भारी दवाब में कार्य कर रही है। एक गंभीर मुद्दा है। दोषी व्यक्तियों ऐजेंसियों पर राष्ट्रद्रोह या कम से कम गंभीर आपराधिक केस चलना चाहिए। नहीं भूलना चाहिए बाबरी मस्ज़िद केस के बाद चार राज्यों की सरकारे बर्खास्त की गई थी।

  63. आनंद said,

    September 12, 2009 at 8:16 am

    हिला देने वाली पोस्‍ट है…. – आनंद

  64. September 26, 2009 at 12:25 am

    इतिहास का साम्‍प्रदायिकीकरणः शिवाजी और अफ़जल खान–शिवाजी, जनता में इसलिए लोकप्रिय नहीं थे क्‍योंकि वे मुस्लिम-विरोधी थे या वे ब्राह्मणों या गायों की पूजा करते थे। वे जनता के प्रिय इसलिए थे क्‍योंकि उन्‍होंने किसानों पर लगान ओर अन्‍य करों का भार कम किया था। शिवाजी के प्रशासनिक तंत्र का चेहरा मानवीय था और वह धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता था। सैनिक और प्रशासनिक पदों पर भर्ती में शिवाजी धर्म को कोई महत्‍व नहीं देते थे। उनकी जलसेना का प्रमुख सिद्दी संबल नाम का मुसलमान था और उसमें बडी संख्‍या में मुस्लिम सिददी थे। दिलचस्‍प बात यह है कि शिवाजी की सेना से भिडने वाली औरंगज़ेब की सेना नेतृत्‍व मिर्जा राजा जयसिंह के हाथ में था, जो कि राजपूत था। जब शिवाजी आगरा के किले में नजरबंद थे तब कैद से निकल भागने में जिन दो व्‍यक्तियों ने उनकी मदद की थी उनमें से एक मुलमान था जिसका नाम मदारी मेहतर था। उनके गुप्‍तचर मामलों के सचिव मौलाना हैदर अली थे और उनके तोपखाने की कमान इब्राहिम गर्दी के हाथ मे थी। उनके व्‍यक्तिगत अंगरक्षक का नाम रूस्‍तम-ए-जामां था। शिवाजी सभी धर्मों का सम्‍मान करते थे। उन्‍होंने हजरत बाबा याकूत थोर वाले को जीवन पर्यन्‍त पेंशन दिए जाने का आदेश दिया था। उन्‍होंने फादर अंब्रोज की उस समय मदद की जब गुजरात में स्थित उनके चर्च पर आक्रमण हुआ। अपनी राजधानी रायगढ़ में अपने महल के ठीक सामने शिवाजी ने एक मस्जिद का निर्माण करवाया था जिसमें उनके अमले के मुस्लिम सदस्‍य सहूलियत से नमाज अदा कर सकें। ठीक इसी तरह, उन्‍होंने महल के दूसरी और स्‍वयं की नियमित उपासना के लिए जगदीश्‍वर मंदिर बनवाया था। अपने सैनिक अभियानों के दौरान शिवाजी का सैनिक कमांडरों को यह सपष्‍ट निर्देश था रहता था कि मुसलमान महिलाओं और बच्‍चों के साथ कोई दुर्व्‍यवहार न किया जाए। मस्जिदों और दरगाहों को सुरक्षा दी जाए और यदि कुरआन की प्रति किसी सैनिक को मिल जाए तो उसे सम्‍मान के साथ किसी मुसलमान को सौंप दिया जाए। एक विजित राज्‍य के मुस्लिम राजा की बहू को जब उनके सैनिक लूट के सामान के साथ ले आए तो शिवाजी ने उस महिला से माफी माँगी और अपने सैनिकों की सुरक्षा में उसे उसके महल तक वापस पहुँचाया शिवाजी को न तो मुसलमानों से घृणा थी और न ही इस्‍लाम से। उनका एकमात्र उद्देश्‍य बडे से बडे क्षेत्र पर अपना राज कायम करना था। उन्‍हें मुस्लिम विरोधी या इस्‍लाम विरोधी बताना पूरी तरह गलत है। न ही अफजल खान हिन्‍दू विरोधी था। जब शिवाजी ने अफजल खान को मारा तब अफजल खान के सचिव कृष्‍णाजी भास्‍कर कुलकर्णी ने शिवाजी पर तलवार से आक्रमण किया था। आज सांप्रदायिकरण कर उनका अपने राजनेतिक हित साधान के लिए उपयोग कर रही हैं। सांप्रदायिक चश्‍मे से इतिहास को देखना-दिखाना सांप्र‍दायिक ताकतों की पुरानी आदत है। इस समय महाराष्‍ट्र में हम जो देख रहे हैं वह इतिहास का सांप्रदायिकीकरण कर उसका इस्‍तेमाल समाज को बांटने के लिए करने का उदाहरण है। समय का तकाजा है कि हम संकीर्ण भावनाओं से ऊपर उठें ओर राष्‍ट्र निर्माण के काम में संलग्‍न हों। हमें राजाओं, बादशाहों और नवाबों को किसी धर्म विशेष के प्रतिनिधि के तौर पर देखने की बजाए ऐसे शासकों की तरह देखना चाहिए जिनका एकमात्र उद्देश्‍य सत्‍ता पाना और उसे कायम रखना था।(लेखक 'राम पुनियानी' आई. आई. टी. मुंबई में प्रोफेसर थे, और सन 2007 के नेशनल कम्‍यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्‍मानित हैं।)साभार दैनिक 'अवाम-ए-हिंद, नई दिल्‍ली, बृहस्‍पतिवार 24 सितंबर 2009,पृष्‍ठ 6http://www.awamehind.com/भारत का एममात्र सेकुलर समाचार पत्र जो श्री शेष नारायण सिंह sheshji.blogspot.com की जेरे निगरानी हिन्‍दू-मुस्लिम सहित सर्व धर्म के समाचार दे

  65. October 12, 2009 at 6:35 am

    shree suresh jiyou should be awarded for true journalism. the manner you have written the whole article , is well appreciated by all of us.thanks for eye opener article.keep it upregardsparshuramhttp://parshuram27.blogspot.com/

  66. P K Surya said,

    August 4, 2011 at 5:08 am


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