भारतीय महिला सैनिक "वेश्याएं" हैं, पाकिस्तानी अखबार की निगाह में…. Indian Women Soldiers, Pakistan & Anti-India Propaganda

गत शुक्रवार को भारतीय सेना ने एक नया इतिहास रचा, और पंजाब में भारत-पाक सीमा पर पहली बार 178 महिलाओं की बीएसएफ़ की टुकड़ी तैनात की गई। बीएसएफ के पंजाब सीमा के उप महानिरीक्षक जागीर सिंह ने बताया कि सभी 178 महिला सुरक्षाकर्मियों को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात किया जाएगा। प्रारंभ में सभी महिला सुरक्षाकर्मियों को पंजाब में भारत-पाक सीमा [553 किलोमीटर] पर तैनात किया जाएगा लेकिन बाद में इनमें से 60 को भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात किया जाएगा। सभी 178 महिला सुरक्षाकर्मी हथियारों के इस्तेमाल, गश्त और युद्ध से संबंधित अन्य कार्यो में दक्ष है। अधिकांश महिला सुरक्षाकर्मियों की उम्र 19 से 25 वर्ष के बीच है। सिंह ने कहा कि महिला सुरक्षाकर्मी सीमा द्वारों की देखभाल करेगी और सीमावर्ती क्षेत्रों में खेती के लिए जाने वाली महिलाओं और आने वाली महिला घुसपैठियों की तलाशी लेंगी।

खानगढ़ सीमा चौकी के समीप रहने वाले किसान गुरदेव सिंह ने कहा, “इससे हमारी महिलाओं को आसानी होगी। तारों की बाड़ के उस पार अपने खेतों में काम करने के लिए महिलाओं को जाने में काफी मुश्किल होती है। अब महिला बीएसएफ कर्मचारियों की उपस्थिति में खेत में काम करने वाली महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा।” पंजाब सीमा पर 1990 के दशक में लगने वाली कांटेदार तारों की बाड़ के पार खेतों में काम करने जाने पर होने वाली तलाशी के कारण महिलाओं ने उस पर जाना बंद कर दिया था। भारत ने आतंकवादियों की घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए बाड़ लगाई थी। किसानों को केवल सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक बाड़ के पार अपने खेतों में काम करने जाने की अनुमति है। इसके लिए भी कड़ी तलाशी देनी पड़ती है।

नई महिला सुरक्षाकर्मियों में 15 स्नातकोत्तर और 22 स्नातक है, जबकि 128 ने 12वीं तक की पढ़ाई की है। यह समाचार यहाँ पढ़ा जा सकता है।

इस खबर पर प्रत्येक भारतीय को गर्व है कि भारतीय सेना में भी हमारी जाँबाज़ महिलाएं भी अब दुश्मन के दाँत खट्टे करने मैदान में आ चुकी हैं, हालांकि पहले भी हर क्षेत्र में भारतीय महिलाओं ने अपने शौर्य, साहस और कौशल से अपना लोहा मनवाया है। 

लेकिन हमारे पड़ोस में एक देश है पाकिस्तान, जो शायद अपने “जन्म सहित” हर बात में अवैध है, और भारत में होने वाली प्रत्येक प्रगतिशील बात को तोड़मरोड़ कर पेश करना जिसकी गंदी फ़ितरत में शामिल है। वहाँ से एक अंग्रेजी अखबार निकलता है “द डेली मेल”, पवित्र रमज़ान माह के शुक्रवार (11 सितम्बर 2009) को इसके मुख्यपृष्ठ पर इसने एक “स्पेशल रिपोर्ट” प्रकाशित की है, जिसमें लिखा है कि “भारत अपनी सीमा पर वेश्याओं को तैनात करने जा रहा है…”। इस खबर को यह अखबार एक विशेष बॉक्स में “स्पेशल रिपोर्ट” बताता है और इसे “इन्वेस्टिगेशन सेल” की खास रिपोर्ट बताकर छापा गया है। यह एक खुली बात है कि महिलाओं की यह पहली टुकड़ी पंजाब में तैनात होने वाली है, लेकिन अखबार लिखता है कि ये महिला सैनिक “Held Kashmir” (जी हाँ हेल्ड कश्मीर) में तैनात किये जायेंगे, ऐसा “जबरदस्त इन्वेस्टिगेशन” है इस अखबार का!!! अखबार की रिपोर्टर (कोई क्रिस्टीना पाल्मर है) आगे कहती हैं कि सीमा पर तैनात बीएसएफ़ के जवानों की मानसिक परेशानियों और उनकी बढ़ती आत्महत्याओं के मद्देनज़र भारत सरकार ने इन “वेश्याओं” की नियुक्ति सेना में करने का फ़ैसला किया है। खबर में आगे कल्पना की उड़ान हाँकते हुए अखबार लिखता है कि “भारतीय सेना का एक उच्चाधिकारी रूस के दौरे पर गया था, जहाँ उसने जवानों की बढ़ती आत्महत्याओं के बारे में समाधान पूछा। रूस के सेनाधिकारी ने कहा कि कश्मीर में सेना के जवान स्त्री देह के बहुत भूखे हो रहे हैं, इसलिये जैसा “हमने” 20 साल पहले किया था, वैसा ही आप भी कीजिये और वेश्याओं की एक टुकड़ी तैनात कीजिये ताकि जवान अपनी “भूख” शान्त कर सकें। यह महान पत्रकार कहती है, कि “रॉ” ने लगभग 300 वेश्याओं को फ़ौजी ट्रेनिंग देकर इन्हें फ़ौजी के भेष में सैनिकों को खुश करने हेतु भारत की फ़ौज में भरती करवा दिया है। (खबर यहाँ पढ़ी जा सकती है)

 
 

यह तो हमें पहले से ही पता है कि पाकिस्तान नामक देश न कभी खुद खुश रह सकता है, न दूसरों को शान्ति से रहने दे सकता है। सो ऐसे देश में ऐसे अखबार और ऐसी रिपोर्टें प्रकाशित होती हैं तो आश्चर्य कैसा? मुम्बई हमले के तुरन्त बाद एक पागल पत्रकार टीवी पर चिल्ला-चिल्लाकर अज़मल कसाब को भारत का नागरिक बता रहा था, जो बाद में कहीं दिखाई नहीं दिया। असल में बात यह है कि, “खुद की कनपटी पर पिस्तौल रखकर (बाबा, मुझे डॉलर दे दो, वरना तालिबान आ जायेगा, कहकर) भीख माँगने वाला देश”, महिलाओं के बारे में “वेश्या” से आगे सोच ही नहीं सकता।

अब हमारी जांबाज महिला सैनिकों पर यह जिम्मेदारी बनती है कि पाकिस्तान से आने वाले प्रत्येक घुसपैठिये को उसकी “औकात” बतायें…, और उनके शरीर में जो कुछ भी थोड़ा बहुत “काटने लायक” बचा हो, काटकर वापस भेजें… ताकि उन्हें भी महिला सैनिक और वेश्या के बीच का अन्तर समझ में आये।

(नोट – मुझे अपने देश से प्यार है, अपने देश की बहादुर महिलाओं पर गर्व है। अब जबकि पाकिस्तान नामक “नासूर” हमारा सबसे अधिक नुकसान कर रहा है, कर चुका है, करता रहेगा…, क्या इसी “कंजर किस्म” के पाकिस्तान से गले मिलने, दोस्ती करने का ख्वाब देखा जा रहा है, ट्रेनें-बसें चलाई जा रही हैं, जो अफ़ज़ल खान की तरह, शिवाजी की पीठ में छुरा घोंपने का मौका ढूँढ रहा है? दुर्भाग्य तो यह है कि सो कॉल्ड “सेकुलर”(?) लोग इस लेख को भी इस्लाम या मुस्लिम विरोधी समझेंगे…)

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50 Comments

  1. September 13, 2009 at 12:12 pm

    वैसे हमारे हिन्दुस्थान में भी ये बीमारी काफी लोगों में है , और रही बात इस्लाम और मुसलमान की तो जहाँ तक देखते हैं आज भी इस कौम की ९५ % आबादी की नजरें महिलाओं को (लौंडी , बांदी , गुलाम ) के स्तर से ऊपर नहीं देख पाती |:) 😦 😛 😀 :$ 😉

  2. September 13, 2009 at 12:25 pm

    वैसे इस्लाम की नज़र में स्त्रियों का क्या हाल है ये बताने अभी स्वच्छ ? बिरादरी ( अरे वही अल्ल , बल्ल , सल्ल वाली ) आती ही होगी |बात भले ही पाकिस्तान की हो , लेकिन खुजली वाले कुत्ते हर जगह होते हैं |:) 😦 😛 😀 :$ 😉

  3. आमीन said,

    September 13, 2009 at 12:30 pm

    पाकिस्तान की यही औकात है.. वहां की जनता के बारे में कुछ कहा नही जा सकता. लेकिन उनकी रगों में भी खून की जगह पर जहर भरा जा चूका होगा… खैर हम आगे बढ़ते ही रहेंगे…

  4. September 13, 2009 at 12:37 pm

    आपने महिला सिपाहियों क्ो बहुत अच्छी सलाह दी है बहुत सही लिखा है आपने धन्यवाद

  5. September 13, 2009 at 12:44 pm

    इस्लामी देशों में स्त्रियों की क्या स्थिति है यह किसी से छुपी नहीं है. ऐसे में वे इससे ज्यादा कुछ सोच भी नहीं सकते. पाकिस्तान तो सिर्फ नाम का पाकिस्तान है वास्तव में वह गलीचिस्तान है. आपने ठीक कहा- हमारे बहादुर महिला सीमाप्रहरियों को उन्हें उनकी औकात बता देनी चाहिए.

  6. September 13, 2009 at 1:01 pm

    सुरेश भाई,इससे ज्यादा वो कर भी क्या सकता था। हमारे देश की महिला सिपाहियों के रूप में रानी लक्ष्मी बाई उसे दिखाई नही दी। दुख नही है इस बात का क्यों की दुष्टो से अच्छे की उम्मीद करना मूर्खता है।

  7. flare said,

    September 13, 2009 at 1:26 pm

    hud hai ….

  8. September 13, 2009 at 2:55 pm

    salo ko iske alwa ata kya hai. haramkhor kahi ke.

  9. September 13, 2009 at 3:18 pm

    यह साले पाकी समझ क्या रहे है . वैसे वह भी ठीक सोचते है हमें गाली दो मारो काटो हम कुछ नहीं करते कुछ नहीं कर सकते क्योकि हम सहिष्णु है आप नपुंसक भी समझ सकते है हमें

  10. September 13, 2009 at 4:04 pm

    अपने जन्म से ही अवैध एक देश और सोच भी क्या सकता है? जिनका खून ही गन्दा हो उनसे और क्या अपेक्षा की जाए? पर कमी तो हममें ही है. हम न कुछ कर पाए हैं न ही कर पाएँगे… कसाब ज़िन्दाबाद! तुष्टिकरण ज़िन्दाबाद! शर्मनिरपेक्षता ज़िन्दाबाद!!! पाकिस्तान तुम आगे बढो, भारत के महान लोग तुम्हारे साथ है…

  11. September 13, 2009 at 4:30 pm

    दरअसल ये पाकिस्तानी अपनी मां और बहन को भी वेश्या मानते हैं…इसी लिए उन पर विश्वास नहीं करते हैं और 'बूरका' और परदे की तमाम व्यवस्थाएं करते हैं. आज अमेरिका और पश्चिमी देशों में महिलाएं पुरूषों से कंधे से कन्धा मिला कर सेना में अपनी भागीदारी निभा रही है. जिस राष्ट्र का निर्माता (कातिले-आजम- जिन्ना) ही चरित्रहीन हो. जो बाप बेटी जैसे पवित्र रिश्तों की समझ भी न रखता हो,उससे और उम्मीद ही क्या की जा सकती है? इन पाकिस्तानियों के लिए ही मादर…और भेन…जैसी गालियाँ बनी हैं.भाई में तो चलता हूँ…. देखो 'खुर्शीद' और 'स्वच्छ' आते होंगे पाकिस्तान का पक्ष लेने…

  12. September 13, 2009 at 4:50 pm

    घटिया देश के घटिया लोग और सोच ही क्या सकते है ? सुरेश जी अभी कोई सेकुलर टपकने वाला ही होगा ! आपको साम्प्रदायिक होने का तगमा देने ! हो सकता है अनामी के रूप में आये |

  13. September 13, 2009 at 4:58 pm

    ये पाक केवल नाम से ही पाक है इरादे और सोच सब नापाक हैं, काश ये अपने नाम के अनुरुप ही कुछ करें।

  14. September 13, 2009 at 5:08 pm

    पहले-पहले जब कभी कोई इंसान किसी चीज़ पर ऊंगली ऊठाता है तो लोगो उस की बात को सुनते है और कुछ सोचते है लेकिन जब कोई बार-बार चीखता है तो लोग उसे "पागल और सनकी" कह कर आगे बढ जाते है….बिल्कुल यही हाल पाकिस्तान का है आजकल…भारत सेना की तरफ़ से बहुत अच्छा कदम है और इसका सबसे बडा फ़ायदा सुरेश जी आपने अपने लेख में कर दिया है कि वहां के गावों की महिलाओं को अब बहुत आसानी हो गयी है

  15. September 13, 2009 at 6:35 pm

    सुरेश जी आप ने सही लिखा है, जहां ओरत को केद कर के रखा जाता हो, वो क्या इज्जत करेगे एक नारी की, उन्हे वेश्या ओर मां मै कोई फ़र्क नई दिखता, इस लिये इन की बात करना ही बेकार है, हराम की खाने वाला हराम की ही सोच रखता है

  16. yogssg said,

    September 13, 2009 at 6:48 pm

    असल में उनके पास दुसरे कोई काम नहीं है, उन्हें देखने दो हमे हमारे देश के विकास के लिए लगातार काम करते रहना चाहिए |एक और बात सुरेश सर जी, आपने इस डेली मेल न्यूज़ पेपर का जो लिंक दिया है उसे क्लिक करते ही मेरा अवास्ट एंटीवायरस वाइरस अटैक बताने लगा और मैंने उस पेज को क्लोज़ करने में देर नहीं की | यदि दूसरे पाठकों को भी इस लिंक पर क्लिक करते ही वायरस का ऐसा अनुभव हुआ है तो जरूर बताएं | सुरेश सर से अपील है की इस लिंक को एक फिर एंटीवायरस के जरिये जांच लें, हमें ध्यान रखना चाहिए की ऐसे वायरस सूचना को चुराने के लिए भी बनाये जाते हैं |

  17. cmpershad said,

    September 13, 2009 at 7:02 pm

    पाकिस्तान या कोई और क्या सोचता है, इसकी हमें परवाह नहीं। पर सोचने वाली बात यह है कि क्या हम अपनी बहन-बेटियों को इन खूंख्वार भेडियों से लड़ने के लिए अपनी सरहद पर तैनात करके कोई बुद्धिमानी का काम कर रहे हैं? आये दिन जो वारदात महिलाओं के साथ घटित हो रही हैं, वही हमारी परेशानी के लिए काफ़ी है। यदि कोई एक भी अनुचित घटना घट जाए तो उसका हमारी देश की अस्मिता पर क्या प्रभाव पडे़गा!! यही कुछ मुद्दे गम्भीरता से सोचने के हैं।हमने महिला को राष्ट्रपति, संसद का अध्यक्ष….आदि बनाकर बहुत झंडे गाढ लिए॥

  18. September 13, 2009 at 7:15 pm

    भइया जी कितनी बार उसको औकात दिखवायेंगे? एक बार उसको औकात दिखाने में हम अपने लाल बहादुर शास्त्री जी को खो चुके हैं अब किसे खोन है? ये तो स्याले अक्ल से ही विकृत हैं, इनकी तो ……… अब मुँह न खुलवाओ।

  19. September 14, 2009 at 2:57 am

    पाकिस्तान एक अवैध देश से और क्या आशा किया जा सकता है? गंदा देश गन्दी चीजें ही सोचेगा, अच्छाई की आशा पाकिस्तान से करना मुर्खता है |वैसे अभी तक स्वच्छ (वास्तव मैं अस्वक्ष) पधारे नहीं हैं,क्या हुआ हना खो गए वो लोग ?

  20. September 14, 2009 at 4:03 am

    महिलाएं उनकी नजर में क्या है, यह बताने की आवश्यकता नहीं. दूषित दिमाग इससे ज्यादा सोच भी नहीं सकता. रपट पंजाब में तैनाद टूकड़ी को लेकर ही है या अलग से खोज-बीन(?) कर कश्मीर के बारे में छापा है?महिला सैनिको को सलाम. हमारी शुभकामनाएं उनके साथ है.

  21. psudo said,

    September 14, 2009 at 4:40 am

    They think every one are like them?

  22. September 14, 2009 at 5:20 am

    ab PATIKOT raj (Sonia Sarkar) main yahee sun ne ko bacha tha, apnee maa bahno ke vaare main. Ab to bas karo ya abhi aur sun na hai in Hizron ke raj main

  23. September 14, 2009 at 6:43 am

    जिनका कोई दीन -इमान न हो उनके बोलने या उंगली उठाने से क्या फर्क पड़ता है ? यहाँ श्री CM Preshad जी की टिपण्णी गौर करने लायक है !

  24. khursheed said,

    September 14, 2009 at 7:35 am

    सुरेश भाई को बड़ा गर्व है कि देश की महिला सीमा पर तैनात हैं और जवानों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर देश कि रक्षा करेंगी. और मेरे ख्याल से सुरेश भाई भी अपनी बहन और बेटियों को सीमा पर जवानों के साथ भेजने पर बहुत ज़यादा गर्व करेंगे. लेकिन इससे पहले सुरेश भाई और उनके विचारों के समर्थकों से मेरी एक अपील है कि वो अपनी बहन या बेटी को साथ में लेकर ट्रेन के मिलिटरी कोच में सफ़र कर के देखे तो उनको जवानों का व्यवहार पता चल जायेगा. नोट: मेरी इस टिप्पणी का मतलब यह न निकला जाये कि मै महिला विरोधी, सेना विरोधी या पाकिस्तान समर्थक हूँ.

  25. September 14, 2009 at 7:44 am

    नापाक देश सोचेगा भी तो नापाक ही।

  26. September 14, 2009 at 9:48 am

    जब कोई व्यक्ति कुत्सित मानसिकता का शिकार हो जाए तो आशा की जा सकती है कि एक दिन (शायद) वह सुधर जाए, किंतु जब एक पूरा का पूरा समाज या देश विक्षिप्तता की स्थिति में हो तो फिर कोई आशा करना ही व्यर्थ है। यही बात कठमुल्लों के देश पाकिस्तान और उसके सभी स्तंभों पर लागू होती है। हे अल्लाह, ये तो तेरे नाम पर मरने-मारने को उतारू हो जाते हैं, अब तू ही इन्हे कुछ बुद्धि-ज्ञान-तर्क की बातें बता…

  27. September 14, 2009 at 9:53 am

    खुर्शीद, महिला सैनिकों को पदस्थापित किया जाए या ना किया जाए, ये चर्चा का विषय हो सकता है, किंतु आप सिर्फ ये बताओ (जो कि इस आलेख का मुख्य कथ्य है) कि क्या सीमा पर पदस्थापित वे महिलाएं तुम्हारी नजर में भी वही हैं, जैसा पाकिस्तानी Daily Mail कह रहा है??बातों को तोड़ने-मड़ोरने की आवश्यकता नहीं है, श्रीमान्‌…

  28. khursheed said,

    September 14, 2009 at 10:20 am

    @Diwakar maniI have never said nor will say that those girls are like as pakistani newspaper described. But it is not fair. Many officer rank ladies have complained in indian army about sexual harrassment earlier.

  29. khursheed said,

    September 14, 2009 at 10:25 am

    @वरुण कुमार जायसवाल इसलाम की नज़र में स्त्रियों का क्या हाल है? मै ये भी जानता हूँ और हिन्दू धर्म में स्त्रियों का क्या अधिकार है ये भी जानता हूँ. अगर आप चाहे तो मै दोनों की तुलना करने को तैयार हूँ. बाद में न कहना कि मै हर वक्त धर्मग्रंथों कि बात करता हूँ. वैसे इस पोस्ट का इस्लाम से कोई लेना देना नहीं था. आप लगता है कि पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं.

  30. September 14, 2009 at 12:37 pm

    एक महिला और भारतीय होने के नाते यह हमारे लिए अत्यंत हर्ष और गर्व की बात है…प्रत्यक्ष रूप से देश की सीमा की रक्षा का दायित्व निभाना कोई छोटी बात नहीं…आज जब अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए आतंकवादी स्त्रियों को जरिए बना रहे हैं,सेना के सीमावर्ती इलाकों में स्त्री सुरक्षा बल का होना परम आवश्यक है…जहाँ तक बात रही पकिस्तान की…..घृणा की घुट्टी पिया हुआ मनुष्य जहर के सिवाय उगल क्या सकता है….उन्हें तो हिदायत दे दिया जाय कि सीमा पर जा जरा इन वेश्याओं को आजमाकर देखें……हमारा आपका क्षोभ अत्यंत स्वाभाविक है सुरेश भाई,पर आपसे निवेदन करुँगी कि अपनी तरफ से शब्दों को अत्यंत संयत रखें….आपका लेखन इतना प्रभावशाली है कि वह आग यूँ ही धधका देगा….

  31. September 14, 2009 at 12:45 pm

    @ खुर्शीद लगता है कि आप को मुगालता हो चला है कि आप किसी बहस में हिस्सा ले सकते हैं तथ्यों को कुतर्कों की आड़ में झुठलाने का जो प्रयास आप और आप की स्वच्छ ? बिरादरी कर रही है उसके लिए आप को सभ्य समाज में क्या स्थान मिलेगा ये एक अलग ही विषय है |स्त्रियों का शोषण हर स्थान पर होता है चाहे वो घर की रसोई ही क्यों न हो तो जनाब आप अब अपनी माताओं , बहनों , बच्चियों को रसोई में भी मत भेजियेगा , सीमा पर तो दूर की बात है | 🙂 😦 लेख का सम्बन्ध अवश्य इस्लाम से है क्योंकि बात – बात पर फतवा जारी करने वाले इस्लामिक कठमुल्ले न जाने क्यों ऐसी बातों पर मुहँ बंद कर लेते हैं , शायद इस्लाम का यही वास्तविक स्वरुप है , अतः आप पूर्वाग्रहित न हों | " सत्यमेव जयते " ||

  32. saras said,

    September 14, 2009 at 4:45 pm

    kaha ki baat kaha chali gayee…hum naahak hi ek dushman mulk ki gair-jimmedar media ki badtameezi par apna blood pressure high kar rahe hain. arey yaar, is se jyada galiya'n pakistaniyo ko to apne yaha hindi filmo me di jaati hain. pakistani media ko bhi INDIA TV ki tarah bahakne ka hak hai bhai. pakistan kaun sa bharat ka khairkhwah hai jo us se kuch achchey ki ummeed ki jaaye?aur sureshji, aap apni ek galatfahami door kar le. jis KASHIF AARIF ko aap samajhdar maan-te hain, unke comment par gaur kijiye. unhone bhartiya sena par yah kahkar ungli uthayee hai ki ab gaon ki aurate'n mehfooz ho gayee hain….jaise ki pehle nahi thi??aur ek baat. pakistan, afganistan aur irak me jame lakho amreeki aur british foujo ko jismani bhukh ko kaun mita raha hai??? vaha se jabardasti ki khabre nahi aati, to kya waha ke log khud se apni aurte in sipahiyo ke aage paros rahe hain???

  33. Common Hindu said,

    September 14, 2009 at 6:08 pm

    Hello Blogger Friend,Your excellent post has been back-linked inhttp://hinduonline.blogspot.com/– a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu- Hindu Online.

  34. September 14, 2009 at 6:55 pm

    हिन्दी हर भारतीय का गौरव है उज्जवल भविष्य के लिए प्रयास जारी रहें इसी तरह लिखते रहें मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है ?वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है !! 😉

  35. September 15, 2009 at 5:51 am

    जब कुत्ते बेकार मैं भोंकटे हैं तो गुस्सा तो बहुत आता है, पर हर भोंकने वाले कुत्ते के पीछे पत्थर ले कर भागना कहाँ की अकल्मंदी है. छोड़ो भी यारों, कुत्ते तो भोंकटे ही रहते हैं उन से दर कर हाथी कभी रास्ता नहीं बदलता है

  36. aarya said,

    September 15, 2009 at 10:07 am

    सुरेश जीसादर वन्दे !आपने जो प्रसंग दिया है वह वाकई दुःख व्यक्त करने वाला है, इन लोंगों से और क्या अपेक्षा की जा सकती है,अब सवाल इन टिपण्णी करने वाले कुछ भाइयों से है ( जो हैं वो खुद समझ लेंगे मै वेवजह नाम लेकर कोई बवाल नहीं खडा करना चाहता) जो वास्तविक बात को न समझ कर विना वजह फालतू की बातें कर रहे हैं ये जो लोग भारतीय सभ्यता में महिलाओं की स्थिति की बात कर रहें है, पहले ये बताये की ये भारत को और भारतीय सभ्यता को कितना जानते हैं, कुछ बेवकूफों की पुस्तक पढ़ लेने से ये जो अपने को विद्वान् समझ रहे हैं ये पुरी जिंदगी भी लगा दें तो भी जिस मानसिकता से ये ग्रसित हैं, उस आधार पर भारत को ये जीवनपर्यंत नहीं समझ सकते तो बहस क्या करेंगे, इसलिए ऐसे लोग चुप रहें तो बेहतर होगा क्योंकि सब आप की तरह मुर्ख नहीं हैं, इस बहस में पड़ेंगे तो मुह की खायेंगे.रत्नेश त्रिपाठी

  37. RDS said,

    September 16, 2009 at 12:00 am

    सुरेश जी, पाकिस्तान का यह घिनौना सोच है जो वहां के एक जिम्मेदार अखबार मे आलेख के रूप में परिलक्षित हुआ है । इसकी सार्वजनिक निन्दा की जानी चाहिये तथा जो व्यक्ति फेस्बुक आदि सोशल युटिलिटी साइट्स का प्रयोग करते है उन्हे अपने फोरम से इसे उठाना भी चाहिये ।

  38. sunil patel said,

    September 16, 2009 at 6:15 am

    हमारे देश की महिला सैनिकों के प्रति पकिस्तान अखबार का यह बयान वाकई शर्म की बात है। एक अफीम के खेत से चन्दन की खुशबू की उम्मीद तो नहीं की जा सकती है। सांप के मुंह से फुफकार ही निकलेगी। पाकिस्तान अच्छी तरह से जानता है कि हमारे देश में महिलाओं को पूजा जाता है फिर उनके प्रति ऐसी टिप्पणी करना शेर को ललकारने जैसा है। किन्तु पकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरा विश्व जानता है कि पाकिस्तान कोई भी जलील हरकत कर दे भारत कुछ भी करने वाली नहीं है। (भारतीय सेना नहीं क्योंकि भारतीय सेना सब कुछ कर सकती है किन्तु उसे एक कागज भी हिलाने से पहले सरकार (नेताओं) की इजाजत चाहिए होती है।) वाकई ’’मेरा भारत महान’’ देश के लिए शर्म की बात है।

  39. My said,

    September 16, 2009 at 3:03 pm

    पाकिस्तान इससे ज्यादा कुछ सोच ही नही सकता,शायद इसीलिये कहा जाता है- मुल्ला की दौड मस्जिद तक । पाकिस्तान की हर मुमकिन कोशिश रहती है कि वह भारत को बदनाम कर सके।

  40. September 16, 2009 at 5:30 pm

    जो अपनी मां, बहनों और बेटियों तक को वेश्या बनाने में नहीं झिझकते उनसे कुछ भी उम्मीद करना बेमानी है । लक्ष्मीबाई और सुभाष चंद्र बोस की दुर्गा रेजींमेंट के बारे में इन काफिरों को नहीं मालूम होगा पर क्या बेगम हजरत महल को भी भूल गये ये ।

  41. September 18, 2009 at 6:32 am

    India is democratic country but that does not mean that Christina Palmer has the right to write ghastly article against our sisters who are protecting our selves. Our Government should start a suvo moto case against Christina Palmer & Rohit Sharma.

  42. September 18, 2009 at 8:23 am

    I entirely agree with Mr. Kinsuk, for registering our strong objection towards this mindless and spineless report.वैसे हम हर पोस्ट में धर्म क्यो ढूंढते है? सुरेशजी के पोस्ट में सिर्फ़ भारत और पाकिस्तान हैं, और हम हिंदु मुस्लिम तक पहुंच रहें हैं. संबंध हो सकता है, और मानसिकता की ऊपज का मसला अलग हो सकता है.खुर्शीद जी का कहना सही है कि इस पोस्ट का मुसलमानॊं से लेना देना नहीं है, और हम सभी पूर्वाग्रहों की बातें कर रहे हैं. मगर उनका पूर्वाग्रह एकदम स्पष्ट हैं. भारतीय सेना में जवानों का महिलाओं से छेडछाड के प्रसंगों से वे क्या तर्क देना चाहतें है और अपरोक्ष से इस रिपोर्ट को क्या जस्टिफ़ाई नहीं कर रहे? क्या वे ऐसे भारतीय नहीं हैं जिनका खून नहीं खौलता ऐसी असंस्कृत और असंस्कारी बात सुन कर, महज इसलिये कि हमारे यहां भी कहीं कहीं सेना द्वारा महिलाओं की इज़्ज़त नहीं की जाती.गलत हर जगह गलत है, यहां या वहां. TWO WRONGS CAN NOT MAKE ONE RIGHT.

  43. khursheed said,

    September 19, 2009 at 6:27 am

    जिस देश में बेरोजगार नवयुवकों की एक बड़ी फौज हो और जहाँ सेना भर्ती रैली के दौरान भगदड़ में ही कई नवयुवक मारे जाते हों, उस देश में नारी उत्थान के नाम पर महिलाओं को फौज में रोज़गार देकर सीमा पर भेजना क्या उचित है? क्या ये बेरोजगार नवयुवकों के साथ अन्याय नहीं है?

  44. September 19, 2009 at 5:57 pm

    सेना में महिलाओं की भरती पर बेरोजगार युवकों का रोना मानसिक दिवालियापन ही है़. इस देश में बहुत से लोगों ने अपनी अक्ल गिरवी रख छोड़ी है. इनका कुछ नहीं कर सकते ये अपनी ऊल-जलूल बकवास के लिये ऊल-जलूल जस्टिफिकेशन लाते रहेंगे.भारतीय सेना को इस उपलब्धी के लिये बधाई और इसका विरोध करने वालों पर खुदा का कहर नाजिर हों. वो दोजख की आग में ता-कयामत झुलसें. उन्हें बद-दुआ लगी है हर उस औरत की जिसे इसके-उसके नाम पर अपने हक से वंचित किया गया.

  45. September 19, 2009 at 6:05 pm

    @ खुर्शीद तुम्हारी नजर में स्त्रियाँ बेरोजगार नहीं होती क्या ?या फिर उनकी बेरोजगारी और स्वाभिमान से तुम्हारे जैसों को कुछ लेना देना नहीं है ?लगता है कुरान में औरतों को रोजगार से जोड़ने के स्पष्ट निर्देश न होने के कारण तुम्हारी बुद्धि में ये बात समा नहीं पा रही |और इतना डर गए हो की हमारे देश की औरतो से प्रतिस्पर्धा करके रोजगार प्राप्त करने की कल्पना भी नहीं कर पा रहे |जाके कहीं मुफ्ती ही बन जाते |:) 😦 😛 😀 :$ 😉

  46. September 19, 2009 at 6:45 pm

    जनाब खुर्शीद्जी एक अच्छे निशानेबाज़ हैं, मगर गलत निशाने पर तीर मारते है.मच्छर कहीं है, डीडीटी कहीं और छिडक रहे हैं.भारतीय महिलाओं को क्या करना चाहिये या नहीं ये की अपनी राय हो सकती है.मगर बात अभी भी अनुत्तरित है , कि क्या पाकिस्तान के किसी को उन्हे वैश्या कहना सही है या गलत ?

  47. September 19, 2009 at 6:51 pm

    अलग बात अतः अलग टिप्पणी.खुर्शीदजी मानव के और पुरुष नारी के समानता में विश्वास नहीं रखते.ऐसी विचारधारा के लोग भी हैं भारत में, जिन्हे अलग से शिक्षित करने की ज़रूरत है.

  48. मनुज said,

    September 20, 2009 at 8:10 pm

    @खुर्शीद मियां भैया, इसमें मिलिटरी के कोच में बैठने की बात कहाँ से आ गयी ?ऐसा कहाँ कहा गया कि भारतीय सेना दूध की धुली है ?गजनवी से लेकर बाबर तक और अंग्रेजो से लेकर US army तक आप मुझे बताये कि ऐसा कहाँ नहीं होता है ?बात चल रही regular military की महिलाओं को वेश्या कहने की, क्या आप वेश्या का अर्थ नहीं समझते है ?और आपका कहना की आप तुलना कर सकते हैं की हिन्दू स्त्रियों और मुस्लिम स्त्रियों के अधिकारों को, तो कृपा करके अपने धर्मग्रंथों में से quote मत कीजियेगा क्यूंकि फिर ये किसी भी तरह की logical comparison नहीं रह जायेगी !तो चलिए मान भी लेते है कि आपके धर्मग्रंथों में महिलाओं को बहुत अधिकार प्रदान किये गए हैं , तो क्या वास्तविक जीवन में भी उनका पालन होता है ?? भारत का संविधान विश्व का समबसे ज्यादा descriptive संविधान है कि जिसमे लोकतंत्र के प्रत्येक अंग के कर्तव्य और शक्तियां विश्व के किसी भी संविधान से ज्यादा explanatory तरीके से बताई गयी है , तो इस हिसाब से भारत का internal working system तो perfect होना चाहिए , परन्तु ऐसा है क्या ?प्रार्थना सिर्फ इतनी है प्रभु, कि 1400 साल पुराने system तो त्यक्त कर वर्त्तमान में जिए !! सादर प्रणाम !

  49. yogssg said,

    September 23, 2009 at 1:18 pm

    इधर इरान की एक बानगी ये भी देखिये, इन दो लिंक्स को विजिट तो कीजिये ज़रा |कुंवारियों के साथ बलात्कार और फिर फांसीडमी को भी हिजाब लगाओ

  50. AMIR KAHN said,

    August 28, 2010 at 9:47 am

    very quality content..i was looking for this kind of blog…great work.http://www.cafe4fun.com/urdu/urdu-newspapers.html


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